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अब हम बड़े हो गए हैं कविता। मौलिक कविता।

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Hindi kavita – ab hum bade ho gaye hain

अब हम बड़े हो गए हैं कविता – hindi kavita

 

ममता का दामन छोड़कर

पिता से मुँह मोड़कर

व्यर्थ प्रेम की मोह माया में पड़कर

रुख से अपने परे हो गए है

अब हम बड़े हो गए हैं। ।

 

अश्लीलता की सीढिया चढ़कर

बचपन की ठिठोलियां भूलकर

माता – पिता को अनदेखा कर

पांव पर अपने खड़े हो गए हैं

अब हम बड़े हो गए है। ।

 

पिता की कमाई से दिल नहीं भरता

स्वयं कमाने को जी नहीं करता

रिश्ते नाते सब तोड़कर

दिल भी पत्थर से कड़े हो गए हैं

अब हम बड़े हो गए हैं। ।

 

बचपन में पिता का पुचकारना

माता का प्रेम से लोरी सुनना

रूत जाने पर चॉकलेट देकर मनना

वो सब गीली मिटटी के घड़े हो गए हैं

अब हम बड़े हो गए हैं। ।

 

यह कविता श्याम यादव ने संगम विहार दिल्ली से भेजा है यह कक्षा 12 के विद्यार्थी है । इन्होने ईमेल के द्वारा हिंदी विभाग तक अपनी कविता पंहुचाई है ।

 

sir,

      i am shyam shyam babu from sangam vihar. last time i sent you a hindi poem “ab hum bade ho gaye hain”, by another gmail id but now that gmail has crashed. So that’s why i am sending this new poem “bachhe kaam par jaate kyo” by my new gmail id. so please sir once again try to publish this poem also on your website “Hindi vibhag” and give blessings to me.
Thanking you…
Sender:- Shyam babu (student of class 12th)
                sangam vihar new delhi-110080
mobile:-

बच्चे काम पर जाते क्यों

बच्चे काम पर जाते क्यों
नन्ही सी उम्र में कमाते क्यों,
क्या जंग लग गयी ,उन सभी किताबों को
जिन को पढ़कर बाबा साहेब ने पाया ज्ञान
और लिख दिया सम्पूर्ण भारत का संविधान,
हम करुणा नहीं दिखलाते क्यों,
बच्चे काम पर जाते क्यों?
क्या चूहों ने कुतर दी हैं,सारी रंग-बिरंगी गेंदों को
पूछे कवि श्याम, क्यों नहीं स्याही श्यामल करती
कागज़ के कोरे पन्नो को,
नन्हीं सी उम्र में कमाते क्यों,
बच्चे काम पर जाते क्यों?
पढ़ने-लिखने की अभी है उनकी उम्र
उनको क्या पता क्या गुज़र है क्या बसर,
उन्होंने न देखी दुनिया सारी
उनको क्या पता, है क्या ये दुनियादारी
चंद सिक्कों की खातिर, सम्पूर्ण जीवन गँवाते क्यों,
बच्चे काम पर जाते क्यों ?
जब भी देखता हूँ उन बच्चों को,
एक मज़दूर  भाँति, पर दिल के सच्चो को,
मेरी आत्मा भी विवश  हो जाती है
दिल की करुणा पन्नो पर उतर आती  हैं
है क्या सच और है क्या झूठ, ये नहीं बतलाते क्यों,
बच्चे काम पर जाते क्यों ?
मेरी माने तो, उनको दी जाये किताबे ढेर सारी,
उनके लिए की जाये उपयुक्त शिक्षक की तैयारी
और दूर की जाये उनकी ये बीमारी,
भले ही इसके लिए हमे करनी पड़े बेगारी।
यदि ऐसा हो जाये तो, बच्चे काम पर नहीं जायेंगे ,
और अपना भविष्य उज्जवल बनाएँगे।
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