जीवनी

अमित शाह जीवन परिचय – amit shah bio son wife website

पूरा नाम – अमित अनिल शाह

जन्म      – 22 अक्टूबर 1964 मुंबई

माता  – कुसुमबेन

पिता   – अनिलचंद्र शाह

शिक्षा  – स्नातक बायोकेमेस्ट्री

संगठन से जुड़े   – 1980  RSS राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ , 1982 अखिल भारतीय क्षात्र संघ , 1987 भारतीय  जनता युवा मोर्चा ,  1989 भारतीय जनता पार्टी , 2014 गुजरात क्रिकेट एसोसिएसन का अध्यक्ष , 2016 सोमनाथ मंदिर का ट्रष्टि , 2016 राजयसभा सदस्य  ,आदि

पुश्तैनी घर     – मनसा कस्बा गांधीनगर ( गुजरात )

व्यवसाय  – पाइप का पुस्तैनी कारोबार , शेयर ब्रोकर , अब पूर्णकालिक राजनीति।

मोदी से मुलाकात – 1982 में , तब अमित शाह 17 साल के थे।

पत्नी    –  सोनल शाह

बेटा      –  जय शाह ( इनसे जुडी ताजा खबर )

अमित शाह की वेबसाइट – amitshah.co.in/

 

अमित शाह जीवन परिचय

अमित शाह बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने एक – एक करके भारत के अधिक राज्यों में अपनी सरकार स्थापित की। बिहार में जहां बीजेपी की गवर्नमेंट ( सरकार )  कभी नहीं बनी वहां भी उन्होंने अपने कूटनीति से सरकार बनाई।इसके लिए अमित शाह की जितनी प्रशंसा की जाए उतना काम है। बिहार की राजनीती में भारतीय जनता पार्टी की सरकार कोई साधारण कार्य नहीं था।  केरल , मिजोरम आदि जगह पर जहां स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद कांग्रेस का एकछत्र राज्य रहा। वहां भी कांग्रेस के मजबूत किले को ध्वस्त कर के बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपना परचम लहराया।

अमित शाह  सबसे सफल अध्यक्ष माने गए। उनकी रणनीति के सहारे 14 राज्यों में 67% आबादी पर राज करने वाला मुख्य पार्टी जनता पार्टी बानी जिसने शाह को अहम नेता बना दिया।

शाह का पूरा नाम कम ही लोगो का मालुम होगा , उनका पूरा नाम अमित अनिल चंद्र शाह है। शाह का जन्म 22 अक्टूबर 1964 को मुंबई के व्यापारी परिवार में हुआ। जो काफी सम्पन और समृद्ध परिवार मन जाता है।

अमित शाह संपन्न परिवार में जन्मे किंतु राजनीति में वह सबसे निचले स्तर से होकर आये थे , उनका गांव पाटन जिले गुजरात में है। उन्होंने गुजरात के मेहसाणा से अपनी शिक्षा आरंभिक शिक्षा ग्रहण की , और अहमदाबाद से उन्होंने बायोकेमेस्ट्री से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। बता दें की अहमदाबाद में ही वह रहा करते थे , जो गुजरात का महत्वपूर्ण शहर है।

अपने व्यवसायिक जीवन में उन्होंने शेयर ब्रोकर अर्थात दलाल का भी काम किया था। कुछ वक्त मनसा में रहकर उन्होंने अपने पुश्तैनी पिता के ‘ प्लास्टिक पाइप ‘ के व्यवसाय को भी संभाला था। वहीं से उन्होंने राजनीति में आने का निर्णय लिया और बीजेपी में शामिल हो गए।

अमित शाह की पत्नी सोनल शाह  है। उनका पुत्र जय शाह है। अमित शाह के पुत्र जय शाह की सगाई एवं शादी में बीजेपी के शीर्ष नेता भी उपस्थित हुए थे। यह उनके पार्टी में छवि और कद का प्रदर्शन करती है।

पति-पत्नी ( अमित – सोनल ) दोनों धर्म कार्य में विशेष रुचि लेते हैं।  यही कारण है कि अमित शाह सदैव मंदिरों में पूजा-अर्चना करते रहते हैं और गरीबों में भोजन वितरित किया करते हैं। गुजरात में सोमनाथ मंदिर में नित्य निरंतर जाया करते हैं इतना ही नहीं वह सोमनाथ ट्रस्ट के ट्रस्टी भी है।

अमित शाह की एंट्री राजनीति में नरेंद्र मोदी  , मनोहर पर्रिकर , नितिन गडकरी की भांति ही राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ ( RSS ) से  हुई।  आर एस एस की विचारधारा ने 1980 में अमित शाह को इतना प्रभावित किया कि वह 14 साल की उम्र में ही वह RSS  से से जुड़ गए और तरुण स्वयंसेवक के रूप में कार्य करने लगे। वह कॉलेज की पढ़ाई के साथ-साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद जो बीजेपी का छात्र संघ है , उसमें वह सक्रिय भूमिका निभाते रहे। 18 साल में वह अखिल भारतीय छात्र परिषद के पदाधिकारी बन गए।

 

अमित शाह interesting facts

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पुरुषोत्तम रुपाला नेता गुजरात बीजेपी  के अनुसार  –

” अमित शाह  युवा मोर्चा में जिस प्रकार संगठन के रचना में शामिल हुए थे , जब नरेंद्र भाई मोदी महामंत्री थे और उनके नेतृत्व में ही इन्होंने युवा कार्यकर्ता के नाते ही कार्यभार संभाला था। ”

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अमित साहब यद्यपि साधारण कार्यकर्ता के रूप में शामिल हुए थे और वहां से उन्होंने संघर्ष करके बीजेपी में अध्यक्ष का पद भी संभाला। इसके लिए उन्होंने बेहद कठिन परिश्रम किया अखिल भारतीय छात्र संघ से जुड़कर 1986 में बीजेपी के सदस्य बन गए थे , तथा उसके बाद उन्हें बीजेपी युवा मोर्चा में शामिल किया गया था। साधारण कार्यकर्ता से वह  वार्ड सचिव , ताल्लुक सचिव , राज्य सचिव , उपाध्यक्ष और महासचिव भी बने बीजेपी के राजनीति में उन्होंने अपने 22 साल परिश्रम के उपरांत पहली बार उन्हें लाल बत्ती युक्त वोटर गाड़ी और सुरक्षा व्यवस्था उन्हें प्राप्त हुई।

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1989 मैं अमित शाह अहमदाबाद में शहर के सचिव रहते हुए लालकृष्ण आडवाणी के मुख्य सपोर्टर के रूप में वह कार्य कर रहे थे। लाल लालकृष्ण आडवाणी जो देश के बहुत बड़े नेता के रूप में स्थापित हो चुके थे। तब आडवाणी गुजरात के गांधीनगर सीट पर सांसद का चुनाव लड़ते थे , और नरेंद्र मोदी ,  लालकृष्ण आडवाणी के साथ बैठक करते थे। उस समय अमित शाह उन दोनों के पीछे रहा करते थे।  उन्ही बैठकों से अमित शाह को , लालकृष्ण आडवाणी को गुजरात में जीतवाने  की कमान सौंपी गई। इसके लिए उन्हें चीफ कंट्रोलर व प्रचार प्रसार का मुख्य आयोजक अमित शाह  हुआ करते थे।

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जानकार के मुताबिक –

“आडवाणी जी गांधीनगर सीट पर लड़ रहे थे तो उस वक्त अमित शाह ने आडवाणी जी की पूरी इलेक्शन ( चुनाव ) की कैंपेन मैनेजर , स्ट्रेटजी सभी पूरी कमान स्वयं संभाली , इस वजह से वह लालकृष्ण आडवाणी के काफी नजदीक आ गए और आडवाणी जी के विश्वासपात्र बन गए। ”

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राजनीति में अमित शाह का एक ऐसा मुकाम भी आया जब 1997 में उसे चुनावी टिकट मिला उन्होंने पहली बार सरखेज विधानसभा क्षेत्र का टिकट मिला और 24000 वोटों के अंतर से वह विजई हुए। यह उनकी पहली विशाल विजय थी। उसके उपरांत अमित शाह निरंतर एक के बाद एक चुनाव लड़ते रहे , जहां भी उन्हें टिकट मिलता गया वह वहां जीत दर्ज करते गए।   2012 में सरखेज सीट छोड़कर नारायण पुरा सीट से उन्होंने चुनाव लड़ा और यहां भी उन्होंने सफलता दर्ज करें।

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अमित शाह ने आज तक सांसद का चुनाव नहीं लड़ा। नरेंद्र मोदी और अमित शाह की दोस्ती करीब 35 साल पुरानी है इसी लिए उन्हें पार्टी में सक्रियता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष के रूप में दायित्व दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी ने अपने एक वक्तव्य में कहा –

”  मैं उन्हें ( अमित शाह ) 35 साल से जानता भी हूं , और उनसे भलीभांति परिचित भी हूं , वह इस दायित्व का निर्वाह बेहद ही सुलझे हुए तरीके से करेंगे। ”

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अमित शाह और नरेंद्र मोदी की पहली मुलाकात 1942 में मानी जाती है , जब वह कॉलेज में पढ़ते थे , और नरेंद्र मोदी आरएसएस के प्रचारक हुआ करते थे। बीजेपी के लिए कार्य करना अमित ने वही से आरंभ किया था।

नरेंद्र मोदी और अमित शाह की दोस्ती इतनी प्रगाढ़ थी कि वह जहां भी नरेंद्र मोदी गए अमित शाह ने वहां कमान संभाली।  2012 में नरेंद्र मोदी गुजरात के सी.एम ( मुख्य मंत्री ) रहते हुए , अमित शाह को मंत्री बना कर गृह मंत्री का दायित्व सौंपा।  जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री ( 2014 ) बने तब उन्होंने बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया।

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अमित शाह जब शुरुआती दौर में मोदी से मिला करते थे ,  रेस्टोरेंट में बातें किया करते थे , उसी दौरान उन्होंने एक रेस्टोरेंट की टेबल पर मोदी से कहा था कि –

” मोदी भाई अब आप देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार रहिए ”

किंतु उस घटना के 10 साल बाद वह मुख्यमंत्री बने और 20 साल बाद देश के प्रधानमंत्री बन सके। अमित शाह की यह  भविष्यवाणी सत्य साबित हुई।

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2014 का लोकसभा  चुनाव नरेंद्र मोदी के नाम से बीजेपी ने लड़ा। मुख्य रूप से चेहरा नरेंद्र मोदी का ही था , किंतु जीत का नायक अमित शाह को माना गया। उनका ही इस चुनाव कैंपेन , रणनीति और संवाद , और पटकथा  आदि में अहम भूमिका मानी जाती है। माना जाता है कि नरेंद्र मोदी के जीत के पीछे अमित शाह की पूरी रणनीति कार्य कर रही थी। नरेंद्र मोदी ने भी माना कि –

” मैच हम राजनाथ सिंह के कप्तानी में खेल रहे थे , किंतु मैन ऑफ द मैच का काम अमित शाह ने किया था। ”

यदि अमित शाह राष्ट्रीय टीम में नहीं आते और उन्हें उत्तर प्रदेश का कार्यभार ना मिला होता तो , शायद यह विजय प्राप्त नहीं हुई होती। उस समय अमित शाह यूपी से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष थे। उत्तर प्रदेश की  80 सीट उन्हें जीतने का दायित्व सौंपा गया था , नतीजों में 80 में से 73 सीटें सीटें प्राप्त हुई। उससे पूर्व 80 में से मात्र 15 सीटें ही बीजेपी के पास थी।

इस प्रकार से अमित शाह ने अपने को पार्टी के समक्ष प्रस्तुत किया , उनकी ख्याति देश ही नहीं अपितु  विदेश में भी हो गई।  मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह – ने भी  जीत का पूरा श्रेय अमित शाह को दिया।

वरिष्ठ सांसद एवं सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने भी माना कि पार्टी ने यह जीत अमित शाह के नेतृत्व में ही दर्ज की है , उन्होंने दो कारण माने एक नरेंद्र मोदी की ख्याति , दूसरा अमित शाह का परिश्रम।

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अमित शाह ने अभी तक कुल 42 छोटे-बड़े चुनाव लड़े और उसमें सभी 42 चुनावों में उन्होंने जीत दर्ज की। वह एक जगह भी कहीं पराजित नहीं हुए।

अमित शाह बीजेपी के सबसे सफल अध्यक्ष माने जाते हैं , उनके  कारण ही बीजेपी 10 राज्यों में अकेले शासन कर रही है। चार राज्यों में बीजेपी सहयोगियों  के साथ सरकार में है , इस तरह से देश के 67% आबादी पर वह शासन कर रहे हैं। बिहार में नीतीश के साथ गठबंधन में बीजेपी का होना अमित शाह के लिए एक गौरव की बात है। मणिपुर और कर्नाटक की राजनीती में भी आज जो वर्चस्व भारतीय जनता पार्टी का है यह अमित शाह के  कामयाबी का ही एक अंश है।

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अमित शाह राष्ट्रीय बीजेपी ( भारतीय जनता पार्टी ) कार्यकारिणी के अध्यक्ष होते हुए वह देशभर में घूम – घूम कर अपने कार्यकर्ताओं से मिलते रहते हैं। औसतन अमित शाह  रोजाना 541 किलोमीटर की यात्रा करते हैं। वह एकमात्र ऐसे अध्यक्ष है जो पूरे भारत के राज्य में घूम चुके हैं , उनके ही कार्यकाल में बीजेपी ने 11 करोड़ कार्यकर्ता का लक्ष्य हासिल किया है जो जनता पार्टी की उपलब्धि है ।

अमित शाह और 49 साल की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। वह सबसे पहले कम उम्र के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल कर चुके हैं। देश की  पार्टी बनने के लिए बीजेपी निरंतर संघर्ष कर रही है , क्षेत्रीय पंचायत से लेकर संसद तक कि बीजेपी सरकार हो , ऐसा प्रयास किया जा रहा है।  इसके लिए अमित शाह निरंतर प्रयास कर रहे हैं , जिसके लिए वह रात – रात भर देश भर में बैठक कर रहे है।

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शाह की लोकप्रियता का एक और कारण माना जाता है कि अमित शाह अपने कार्यकर्ताओं के साथ किसी न किसी रूप में जुड़े रहते हैं। वह अचानक ही अपने किसी भी कार्यकर्ता को फोन करके उनसे हालचाल परिवारिक और राजनीतिक स्थिति की जानकारी लिया करते है  जो एक सफल नायक की भूमिका में उन्हें में सहयोग करती है।  कोई भी कार्यकर्ता उनको फोन करें तो वह किसी भी कार्यकर्ता का फोन मिस नहीं करते बल्कि उनको रिस्पांस करते हैं , यदि किसी कार्यकर्ता का फोन वह उठा नहीं पाते तो उन्हे पुनः कॉल करके क्षमा मांगते हुए उनकी बातें सुना करते है।  कार्यकर्त्ता बताते है कि उनके पास शाह का वह नंबर भी जिसे खुद शाह ही उठाते है। यही गुण शाह को अन्य नेता से अलग करता है।

जिस प्रकार नरेंद्र मोदी को पूरे विश्व में काम करने के प्रति विख्यात है,  उसी प्रकार की ख्याति शाह को भी हे ,वह भी अपने कार्य को अधिक समय देकर किया करते है , करते हैं वह देर रात  तक अपने कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग करने से परहेज नहीं करते , और फिर भी उसमें से समय निकालकर वह नित्य निरंतर डायरी लिखते हैं , जिसमें वह पूरे दिन की घटना , अपने विचार आदि समाहित करते हैं ।

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अमित शाह चर्चित सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर के मामले में गिरफ्तार हुए थे , और उन्हें जेल भी जाना पड़ा। जिस पर उन्होंने अपने वेबसाइट में खुलासा करते हुए कांग्रेस के जालसाजी का पर्दाफाश किया। कांग्रेस शाह  के बढ़ते कदम और कद  से परेशान होकर इस साजिश के तहत अमित शाह को फंसा कर उनका राजनीतिक कैरियर बर्बाद करना चाहती थी। अमित शाह के गुजरात में  केंद्रीय  मंत्री रहते हुए। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर को फर्जी एनकाउंटर बताते हुए कांग्रेस ने शाह  पर निशाना साधा , जिसमें इनकी गिरफ्तारी भी हुई थी 90 दिन बाद वह जमानत पर छूट पाए , और 2 साल तक वह अपने गुजरात राज्य में नहीं जा सके।  कोर्ट ने उनकी गुजरात आने पर पाबंदी लगा रखी थी।

2015 में सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने अमित शाह को सभी आरोपों से मुक्त कर उन्हें निर्दोष बताते हुए क्षमा मांगी विवादों से मुक्त होकर अमित शाह ने अपने राजनीति में सुनहरा भविष्य बनाया।

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एक बड़े अखबार इंडियन एक्सप्रेस ( Indian express ) के अनुसार –

” यदि अमित शाह जेल नहीं जाते तो , कांग्रेस के खात्मे की पटकथा अमित शाह नहीं लिख पाते। आज कांग्रेस के भारत से सफाई होने का कारण अमित शाह का जेल जाना ही था। जेल में रहते हुए अमित शाह कैदियों को भगवत गीता सुनाया करते  थे , और वहीं पर रहते हुए उन्होंने कांग्रेस के खात्मे की प्रतिज्ञा ली थी।”

अमित शाह ने  उस प्रतिज्ञा को बखूबी निभाया हुआ वह जहां-जहां चुनाव लड़े या नेतृत्व किया , वहां – वहां उन्होंने विजय प्राप्त की। उन्होंने कुल छोटे बड़े 42 चुनाव लड़े जिसमें वह एक भी बार असफल नहीं हुए , सभी 42 चुनावों में उन्होंने विजय प्राप्त की और कांग्रेस वहां – वहां हार का धूल चटाया वह ऐतिहासिक पार्टी  अमित शाह के आगे नतमस्तक खड़ी है।

 

 

अमित शाह के विचार ( कोट्स )

 

हम समाज को तोड़ने में नहीं , जोड़ने में यकीन करते हैं और हमारे नेता एवं देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का नारा है ‘ सबका साथ , सबका विकास ‘ जबकि कांग्रेस की हमेशा से तुष्टीकरण की नीति रही है। ”

 

” कांग्रेस पार्टी आज भी आपातकाल के अपने संस्कारों और प्रवृत्ति को भूल ही नहीं है। ”

 

” जब तक देश के युवा देश को आगे नहीं बढ़ाते , देश तरक्की के पथ पर अग्रसर नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के न्यू इंडिया के स्वप्न को देश के युवा ही साकार कर सकते हैं। ” (कर्नाटक 20 फरवरी 2018)

” प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने , देश के सर्वांगीण विकास के विजन परदेश में परिवर्तन लाने का बीड़ा उठाया है , उन्होंने देश के सोचने के इस खेल को ऊपर उठाने का काम किया है , रिफॉर्म्स की जगह ट्रांसफॉरमेशन की शुरुआत की है। ” (कर्नाटक 20 फरवरी 2018)

” प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सरकार चलाने के लिए कुछ मूलभूत सिद्धांत तय किए हैं – पहला यह कि भाजपा सत्ता में केवल सरकार चलाने के लिए नहीं बल्कि देश को बदलने के लिए है। दूसरा यह कि भाजपा सरकार लोगों को अच्छे लगने वाले फैसले लेने की जगह ऐसे फैसले लेगी जो कि लोगों के लिए अच्छे हो। और तीसरा यह कि हम सबका साथ सबका विकास की अवधारणा पर आगे बढ़ेंगे। ”

 

” प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भाजपा सरकार पिछले साढे 3 सालों से अंत्योदय के सिद्धांत पर चल रही है , इसका अर्थ है विकास की पंक्ति में अंतिम खड़े हुए व्यक्ति को विकास की पंक्ति में खड़े प्रथम व्यक्ति के बराबर लाना और सब को एक समान विकास मिले इस प्रकार से आगे बढ़ना।” ( 5 फरवरी 2018)

” जनभागीदारी से स्वच्छता का संस्कार और समाज के अंदर इसे आंदोलन के रूप में स्थापित करने का काम मोदी सरकार ने किया है और मेरा मानना है कि पीढ़ियों तक स्वच्छता का संस्कार देश को स्वच्छ रखेगा। ”

 

गरीबी हटाओ के नारे के बल पर तो बहुत लोग सत्ता में आए , लेकिन गरीबी हटाने और गरीबों के जीवन स्तर को ऊपर उठाने का काम भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार ने किया। ”

 

जब सरकारें 25 से 30 साल चलती है तब 2-3 कार्य ऐसे होते हैं जो ऐतिहासिक होते हैं , जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने साढे 3 सालों में ही 50 से अधिक काम ऐसे किए जो ऐतिहासिक है। ”

 

भारतीय जनता पार्टी जाति अथवा धर्म के आधार पर चलने वाली पार्टी नहीं है , बल्कि विचारधारा और कार्यकर्ताओं के आधार पर चलने वाली पार्टी है। ”  (20 जनवरी 2018)

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