राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ( RSS )

आरएसएस क्या है | संघ को और अधिक जाने | संघ एक नज़र में |

आरएसएस क्या है | संघ को और अधिक जाने | संघ एक नज़र में |

 

 

आरएसएस क्या है ?

पर वास्तव में आरएसएस को समझना है तो इस पोस्ट को आत्मसाझ करें, सब समझ जाएंगे.

क्या है आरएसएस ?

60 हजार शाखाएं

60 लाख स्वयंसेवक

30 हजार विद्यामंदिर

3 लाख आचार्य

50 लाख विद्यार्थी

90 लाख BMS के सदस्य

50लाख ABVP के कार्यकर्ता

10 करोड़ बीजेपी सदस्य

500 प्रकाशन समूह

4 हजार पूर्णकालिक एवं

एक लाख पूर्व सैनिक परिषद

70 लाख विश्व हिन्दू परिषद् सदस्य (पूरे विश्व में)

3 लाख बजरंग दल के हिन्दुत्व सेवक

16 राज्यों में सरकारें

283 सांसद

1460 विधायक

13 मुख्यमंत्री

1 प्रधानमंत्री

1 राष्ट्रपति

1 उपराष्ट्रपति

【 एक आप और एक मैं】

आरएसएस RSS

1925 में बोया गया एक बीज , सुखा, आंधी तूफ़ान , खरपतवार ,बाढ़ से जूझता हुआ ,संघर्ष करता हुआ आज केवल भारत में ही नही अपितु सम्पूर्ण विश्व को अपनी शीतल छाँव व अपने मीठे फलों से आनन्दित कर रहा है ।

जिस विचारधारा को 1925 में इस बीज के रूप में बोई गई थी ,आज सम्पूर्ण विश्व उस विचारधारा की धारा में बहता हुआ दिखाई देता है।आज विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र , भारत के महामहिम राष्ट्रपति के रूप में सरल,सहज और वैचारिक रूप से सक्षम व्यक्तित्व मा. रामनाथ जी कोविन्द का चुना जाना ,उस विचारधारा की बड़ी जीत है।

दो बार ऐसा समय भी आया जब इसी संसद में इस विचारधारा को कुचलने का कुत्सित प्रयास भी हुआ। पहली बार1948 में गांधी जी की हत्या के आरोप में प्रतिबन्ध लगाकर और दूसरी बार 1975 में आपातकाल लगाकर ।लेकिन हर बार ,हर परीक्षा में कुंदन की तरह और अधिक तेज के साथ विचारधारा प्रचारित हुई।

देश के तीन सबसे महत्वपूर्ण दायित्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति ( कुछ ही दिनों बाद) एक साथ उस विचारधारा के व्यक्तियो का होना ,यह बहुत बड़ी विजय है।

इसका अर्थ साफ़ है , देश ने उस विचारधारा को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया है।

1925 में बोये गए बीज का नाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है और विचारधारा राष्ट्रीयत्व है।

बधाई।

देशवासियों को ,जिन्होंने राष्ट्रवाद को चुना।

बधाई।

डॉ केशव बलीराम हेडगेवार को जिन्होंने बीज को रोपा।

बधाई।

उन असंख्य अनाम व्यक्तित्वों को जिन्होंने स्वयं को तिल तिल गलाकर इस राष्ट्रवाद के पौधे को सींचा ।

बधाई।

श्री रामनाथ जी कोविन्दको ,जो इस राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रतिनिधित्व के रूप में वहाँ तक पहुँचे।…राष्ट्र के निर्माण मे अपना सर्वश्रेष्ठ देते रहेगे..जय हिन्द ,जय भारत।

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