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गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा। तुगलकाबाद का इतिहास। Tuglakaabad

गयासुद्दीन तुगलक का मकबरा

 

गयासुद्दीन तुगलक साह एक शाही तुर्क था तथा सन 1321 में उसने खिलजी वंश के बाद राज गद्दी संभाली थी। वह कुशल वास्तुकार भी था , उसने दिल्ली में अपनी नई राजधानी बसाई थी। ऊंची बुर्जा तथा 13 दरवाजों वाला यह किलेबंद नगर तुगलकाबाद ‘ दिल्ली का तीसरा ‘ शहर था। एक तरफ से यह किला ग्यासुद्दीन की रचनात्मक प्रतिभा का प्रतीक था।

 

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इस अष्टकोणीय किले के दक्षिणी प्रवेश द्वार के उस पार लाल पत्थर से बना ग्यासुद्दीन मकबरा है। उसने इस मकबरे को स्वयं बनवाया था। इस का अत्यंत ध्यानाकर्षक हिस्सा इसकी बाहरी दीवारों का ढालुवापन है जो कि 75 डिग्री के कोण से झुकी हुई है। इस कारण ये पिरामिड की आकृति का आभास देती है। इसकी चौकोर धरातल 61 फीट चौड़ी है तथा भवन की संपूर्ण ऊंचाई गुबंद सहित 80 फीट से ज्यादा है। इसकी दीवारों पर यहां – वहां संगमरमर का इस्तेमाल इस किलेनुमा मकबरे को विशिष्ट बना देता है।

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मूलतः यह मकबरा वर्षा के पानी के एक कृत्रिम विशाल तालाब के बीच बनाया गया था तथा एक फूल के जरिए तुगलकाबाद से जोड़ा गया था। आज उस पुल के बीच से कुतुब – बदरपुर सड़क जाती है।

 

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