हिंदी सामग्री

godan notes in hindi | गोदान की मूल समस्या। गोदान एक नज़र में | गोदान notes

‘गोदान’ ( उपन्यास ) के कुछ महत्वपूर्ण तथ्य |

 

 गोदान की मूल समस्या – गोदान एक नज़र में | गोदान notes

“धनी को अपने धन का मद रहता है , अहंकार रहता है,
परंतु गरीब की झोपड़ी में, मद और अहंकार के लिए स्थान नहीं रहता। ……………….प्रेमचंद

” मनुष्य जितना छोटा होता है उसका अहंकार उतना ही बड़ा होता है। …………………वाल्टेयर

– प्रारम्भिक युग में स्वयं प्रेमचंद आदर्शवाद तथा सुधारवाद से कितने प्रभावित थे। इसके प्रभाव उनकी ‘पंच परमेश्वर’ , ‘ बडे घर की बेटी ‘ , ‘ मंत्र ‘ जैसी कहानियों तथा ‘सेवासदन’ , ‘ प्रेमाश्रम ‘ आदि उपन्यासों में मिलते हैं।
– ‘ गबन ‘ उपन्यास से वे यथार्थवाद की ओर झुकने लगे और ‘ गोदान ‘ तक आते-आते वह पूर्ण रूप से यथार्थवादी बन गए।

– डॉ नगेन्द्र ने लिखा है -“प्रेमचंद ने अपने युग की ज्वलंत समस्याओं को अपने उपन्यास तथा कहानियों में महत्वपूर्ण स्थान दिया है”।

– प्रेमचंद ने युगीन जीवन की सभी महत्वपूर्ण समस्याओं जैसे विधवा समस्या , वेश्या समस्या , कृषक समस्या , सांप्रदायिकता की समस्या , अछूत समस्या आदि का चित्रात्मक वर्णन किया है।

– डॉ नगेंद्र ने अपने ‘ प्रेमचंद ‘ नामक लेख में यह बात अच्छी तरह स्पष्ट की है कि, प्रेमचंद के संपूर्ण साहित्य पर आर्थिक समस्याओं का प्रभुत्व है।

– प्रेमचंद का हिंदी का पहला समस्या मूलक उपन्यास है ‘ सेवासदन ‘ विद्वानों ने इसे वेश्या समस्या पर लिखा हुआ उत्कृष्ट उपन्यास माना है।

– ‘ गोदान ‘ में प्रेमचंद यथार्थ के ठोस भूमि पर खड़े हुए हैं।

– ‘ गोदान ‘ में मुख्य रूप से आर्थिक समस्या का ही चित्रण किया गया है।

– ‘ गोदान ‘ के आरंभ में ही हो रही तथा ‘ धनिया ‘ का ही चित्रण किया गया है।

– ‘ गोदान ‘ के आरंभ में ही हो रही तथा ‘ धनिया ‘ के अभाव ग्रस्त जीवन का यथार्थ चित्र प्रेमचंद ने अंकित किया है।

– पेट की चिंता के कारण धनिया 36 वर्ष की उम्र में ही बूढी बन गई है उसके तीन लड़के ठीक-ठीक दवा-दारू ना होने से मर जाते हैं।

– उपर्युक्त अवतरण से प्रेमचंद केवल ‘ होरी ‘ की ही दुर्दशा का खाका नहीं प्रस्तुत करते बल्कि वह समस्त कृषक वर्ग की आर्थिक समस्या का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करना चाहते हैं।

– भारतीय किसान की आर्थिक समस्या को उग्र बना देने वाले अनेक कारण है इन सब में प्रमुख है जमींदार।

– ‘ गोदान ‘ की आर्थिक समस्या का समाधान सूचित करने वाला पहला पात्र है धनिया।

– ‘ गोदान ‘ पढ़ते समय पाठक बार-बार यही अनुभव करता है कि होरी यदि धनिया की नीति से काम लेता तो शायद उसकी इतनी दुर्दशा ना होती।

– इस समस्या के समाधान की ओर संकेत करने वाला दूसरा पात्र है गोबर जो किसान की आने वाली पीढ़ी का प्रतीक है। वह किसान बनकर आजीवन आर्थिक विषमता से पीड़ित रहने की अपेक्षा शहर में जाकर मजदूर बनना पसंद करता है उसे होरी का जमींदार के सामने दबना तथा लाचार होना पसंद नहीं है।

– कृषकों की समस्या का उत्तर देने वाला तीसरा पात्र है रूपा का पति ‘ रामसेवक ‘ वह भी गोबर के ही समान किसानों की अगली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहा है तथा एक संगठन बनाता है।

– प्रेमचंद आर्थिक विषमता को समाज का एक सबसे बड़ा अभिशाप मानता है।

 

यह भी जरूर पढ़ें –

मुंशी प्रेमचन्द की कहानी दो बैलों की कथा।

भारत दुर्दशा की संवेदना | भारतेंदु | bhartendu harishchand | नवजागरण | भारत दुर्दशा का कारण | bharat durdasha

जयशंकर प्रसाद | राष्ट्रीय जागरण में जयशंकर प्रसाद की भूमिका।

यशोधरा | मैथलीशरण गुप्त की कालजयी रचना | उपेक्षित नारी को उचित स्थान दिलाने का प्रयत्न।

सुमित्रा नंदन पंत। प्रकृति के सुकुमार कवि।छायावाद।

suryakant tripathi nirala | सूर्यकांत त्रिपाठी निराला। निराला संस्मरण

प्रेमचंद के साहित्य पर संछिप्त परिचय। premchand short story


कृपया अपने सुझावों को लिखिए हम आपके मार्गदर्शन के अभिलाषी है | |

facebook page hindi vibhag

 

YouTUBE

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *