सूर्यकांत त्रिपाठी निराला। निराला संस्मरण suryakant tripathi nirala |

यह नोट्स विद्यार्थी को ध्यान में रखकर बनाया गया है। जो विद्यार्थी परीक्षा व किसी प्रतियोगिता के लिए तैयारी करते हैं उनके पास ऐसा साधन नहीं होता कि 1 घंटे या 1 दिन में पूरा कहानी या पूरा उपन्यास पढ़ सकें। ऐसी परिस्थिति में हम आपको कहानी, नाटक व उपन्यास का सार बहुत ही संक्षिप्त और रोचक पूर्ण तथ्यों के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसके पढ़ने के बाद आप आसानी से बिना कहानी पढे भी उस कहानी का निचोड़ या कहें सार समझ जाएंगे। इससे आपका समय बचेगा यह सोच कर इस नोट्स को तैयार किया गया है।

निराला ( संस्मरण ) लेखिका महादेवी वर्मा

जीवन  बड़ी उबड़ -खाबड़ अव्यवस्थित रही शुरू से अंत तक जीवन अभावग्रस्त रहा। महाप्राण निराला, कर्ण के समान महादानी निराला आदि अनेक नामों से प्रख्यात हुए। बसंत पंचमी के दिन जन्म लेने पर भी उनके जीवन में बसंत का सौरभ (भवरा )और मधुऋतु कभी नहीं आई उनका जीवन पतझड़ ही बना रहा।

‘दुःख ही जीवन की कथा रही

क्या कहु आज ,जो नहीं कही।

महादेवी लिखती है – उनके जीवन के चारों और परिवार का वह लोहा सा घेरा नहीं था जो व्यक्तिगत विशेषताओं पर भी चोट करता है, और बाहर की चोटों के लिए ढाल भी बन जाता है। निराला ने स्वयं भले ही पारिवारिक स्नेह न पाय परन्तु उनके ह्रदय में पुत्र-पुत्री तथा अन्य जनों के प्रति अगाध प्यार था।
महादेवी द्वारा श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर कलाई में राखी बांधे जाने पर उन्होंने जीवन भर उन्हें बहन का स्नेह दिया। तो जाड़े में ठिठुरती एक बुढ़िया द्वारा बेटा कहे जाने पर उसे रजाई दे दी और स्वयं ठंड में सिकुड़ते रहे।

महादेवी के पूछने पर क्या कभी किसीने कलाई पर राखी नहीं बाँधी ?

का जवाब दिया – कौन  बहिन हम ऐसे अक्खर को भाई बनाएगा।

समाचार -पत्र ने सुमित्रानंदन की झूठी खबर पढ़कर उनके मन को हार्दिक क्लेश हुआ इसकी सच्ची खबर बिना पाए वह घर में नहीं घुसे वह पूरी रात ठंड में घास पर बैठे रहे। एक बार कहीं से 300 रूपये पाए , पर किसी का परीक्षा शुल्क जमा कराने के लिए किसी साहित्यिक मित्र को 60 रुपय दिए ,  तांगे वाले की मां को 40 रूपये  का मनी ऑर्डर करना दिवंगत मित्र की भतीजी के विवाह के लिए सो रुपए देने में सारा रुपया समाप्त हो गया।

नित्य व्यवहार में आने वाली वस्तुएं – कोर्ट, रजाई आदि भी पराया किसी का कष्ट दूर करने के लिए अंतर्ध्यान हो जाती थी।

अपनी काव्य कृति अपरा पर 2100 रूपये का पुरस्कार मिला तो उन्होंने तुरंत स्वर्गीय मुंशी नवजाविक लाल की विधवा को 50 रूपये प्रतिमाह भेजने का प्रबंध कर दिया।

महादेवी के पूछने पर कि वह धन का प्रयोग अपने लिए क्यों नहीं करते तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा “वह तो संकल्पित अर्थ है अपने लिए उसका प्रयोग करना अनुचित होगा” निराला अपने अतिथि सत्कार के लिए भी प्रसिद्ध है वह अतिथि को देवता मानते थे।

एक बार श्रद्धेय मैथिलीशरण गुप्त के आने से उन्होंने उसका पूरा सत्कार किया अपने वैष्णव अतिथि की सुविधा का विचार कर नया घड़ा खरीदकर गंगाजल ले आए और दो तीन चादर जो कुछ घर में मिल सका सब तखत पर बिछा दिया।

भारतीय संस्कृति के अनन्य उपासक थे तथा दूसरी और क्रांतिकारी चिंतक तथा आचार-व्यवहार तथा विचारों में क्रांतिकारी, परम विद्रोही।

डॉक्टर रामविलास शर्मा ने उनका नाम राग-विराग रखा। उन्होंने रूढ़ियों पर कसकर प्रहार किया।

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निष्कर्ष –

निराला संस्मरण महादेवी वर्मा द्वारा लिखा गया है इसका अध्ययन एनसीईआरटी के माध्यम से किया जाता है। महादेवी वर्मा को सूर्यकांत त्रिपाठी निराला अपनी बहन माना करते थे और उनके इसी प्रेम और उनसे जुड़ी यादों का संकलन उन्होंने इस लेख में प्रस्तुत किया है। जिसमें उन्होंने छोटी-छोटी बातों को भी एक घटना का रूप देकर जीवंत कर दिया है।

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