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बलाघात के प्रकार उदहारण परिभाषा आदि।बलाघात के भेद सरल रूप में।balaghat in hindi

बलाघात के उदहारण परिभाषा आदि |

 बलाघात

 

बलाघात के प्रकार

बलाघात जब कोई व्यक्ति बोलता है तो सभी ध्वनियों का उच्चारण समान रूप से नहीं होता है। कभी किसी वाक्य के एक शब्द पर अधिक बल होता है , तो कभी दूसरे शब्द पर। शब्द में भी कभी-कभी एक अक्षर पर बल अधिक होता है , तो कभी दूसरे अक्षर पर उच्चारण के इसी गुण को ‘ बलाघात ‘ कहते हैं।

 

प्रायः बलाघात का अर्थ ‘ अक्षर ‘ बालाघात से लिया जाता है। जैसे – ‘ राम ‘ और ‘ काम ‘ शब्द में ‘ रा ‘ और ‘ का ‘ के ऊपर बलाघात है। जब दो अक्षर साथ-साथ आते हैं तो , एक अक्षर पर बलाघात अधिक होता है और दूसरे पर कम।

जैसे – ‘ काला ‘ शब्द में दो अक्षर है , इसमें प्रथम अक्षर ‘ का ‘ मे ‘ ला ‘ अधिक बलाघात युक्त है।

 

और द्वितीय अक्षर ‘ ला ‘ का ‘ आ ‘ कम बलाघात युक्त है। प्रथम को ‘ मुख्य बलाघात ‘ कह सकते हैं। और द्वितीय को ‘ गुण बलाघात ‘ कहा जा सकता है।

 

हिंदी भाषा में शब्द तथा वाक्य स्तर पर बलाघात होता है। किंतु बलाघात के कारण अर्थ में कोई परिवर्तन नहीं आता। ध्वनि तथा अक्षर बलाघात का संबंध पराया अर्थ से नहीं होता। हां उच्चारण करने में कुछ अस्वभाविक सा आवश्यक प्रतीत होता है।

जैसे – ‘ बलिता ‘ शब्द में ‘ ली ‘ पर बलाघात है। परंतु कुछ लोग ‘ ली ‘ पर बल न देकर ‘ ता ‘ पर बल देते हैं। परंतु इससे अर्थ में कोई परिवर्तन नहीं आता।  किंतु सुनने में हास्यास्पद अवश्य हो जाता है। इसलिए शुद्ध उच्चारण की दृष्टि में वक्ता को ध्वनि तथा अक्षर बलाघात का अच्छा ज्ञान होना चाहिए।

 

डॉ भोलानाथ तिवारी ने कहा है –

भाषा के विभिन्न स्तरों पर बलाघात के निम्नलिखित भेद किए जा सकते हैं –

१ ध्वनि 

२ अक्षर

३ शब्द 

४ वाक्य बलाघात

 

 

ध्वनि बलाघात   

यह वह बलाघात है जो किसी ‘ ध्वनि ‘ अर्थात ‘ स्वर’  और  ‘ व्यंजन ‘ पर होता है। यदि एक शब्द का अक्षर ही दृष्टि से विश्लेषण करें तो उसमें एक ध्वनि अक्षर का शीर्ष ( मुख्य ) होगी और अन्य ध्वनियां गह्वर ( गौण )  होगी जैसे –

‘ काम ‘ में तीन ध्वनियां ‘ क ‘ + ‘ आ ‘ + ‘ म’  इसमें ‘ आ ‘ स्वर ध्वनि अक्षर में शीर्ष होगी और तथा ‘ म ‘ व्यंजन ध्वनि गौण  हो जाएगी। इन दोनों में से बलाघात ‘ अ ‘ (शीर्ष) पर सबसे अधिक होगा।

 

 

अक्षर बलाघात    

जब बलाघात अक्षर पर होता है तो उसे अक्षर बलाघात कहते हैं। दो या दो से अधिक अक्षरों का शब्द होता है , तो किसी अक्षर पर सबसे अधिक बलाघात होता है , तो किसी पर कम। हिंदी भाषा में एक शब्द है – ‘ गाया ‘ इसमें दो अक्षर है ‘ ग ‘ के ‘ आ ‘ पर सबसे अधिक बलाघात है। और ‘ य ‘  के ‘ आ ‘ पर  कम बलाघात है।  इसे क्रमशः  मुख्य बलाघात और गौण बलाघात कहते हैं।

 

 

शब्द बलाघात   

शब्द बलाघात उसे कहते हैं जहां पर शब्द के किसी स्वर या अक्षर पर विशेष बल दिया जाता है। ऐसे स्वर अक्षर को बलाघात युक्त कहा जाता है और शेष ध्वनियों को बलाघात हीन। जब वाक्य के सभी शब्दों पर सामान्य बलाघात होता है , तो वह वाक्य सामान्य बलाघात है। जब किसी रूप , शब्द पर अधिक बालाघात डाला जाता है , तो उस वाक्य के अर्थ में परिवर्तन अवश्य होता है और ऐसे वाक्य को विशेष वाक्य कहते हैं। जैसे –

‘ श्याम खाना खा रहा है ‘

इस वाक्य में ‘ श्याम ‘ शब्द पर बल देने का अर्थ है कि श्याम ही खाना खा रहा है अन्य कोई दूसरा नहीं।

 

 

वाक्य बलाघात  – 

प्रायः बोलने में सभी वाक्यों पर समान रूप से बल पड़ता है , किंतु आश्चर्य , भावावेश , आज्ञा , प्रश्न से संबंधित कुछ वाक्य अपने आस-पास के वाक्य से अधिक जोर देकर बोले जाते हैं। जैसे –

श्याम – पिताजी मैं दोस्तों के साथ सिनेमा देखने जाऊं ?

पिताजी – नहीं , नहीं तुम अपनी पढ़ाई करो।

श्याम – मैं जरूर सिनेमा जाऊंगा।

पिताजी – तुम मेरा कहना नहीं मानते तो चले जाओ मेरे सामने से।

यहा  वाक्य ‘ चले जाओ ‘ पर अधिक जोर है जबकि अन्य पर बलाघात कम पाया जाता है। वाक्य बलाघात छोटे वाक्य बड़े वाक्य दोनों पर होता है।

 

 बलाघात के उदहारण संक्षेप में

 

बलाघात बोलते समय वाक्य , शब्द , अक्षर के एक अंश पर अधिक बल देने से अर्थ परिवर्तन हो जाता है। इसे ही बलाघात कहा जाता है।

‘ राम ‘ में ‘ आ ‘ बलाघात है। क्योंकि’  आ ‘ शब्द पर अधिक जोर दिया गया है ,  इसलिए यह ध्वनि बलाघात है।  हिंदी भाषा में शब्द बलाघात ही स्वनिमिक है –

  • उसे ‘ एक ‘ खिड़की वाला कमरा चाहिए।
  • उसे एक ‘ खिड़की वाला ‘ कमरा चाहिए।

पद बलाघात होने पर अर्थ होगा – ऐसा कमरा जिसमें केवल एक खिड़की हो।

दूसरे वाक्य में उसका अर्थ है ऐसा कमरा जिसमें प्रकाश और वायु आते हो।

  • इसी प्रकार ‘ पकड़ो ‘ मत जाने दो।
  • ‘ पकड़ो मत ‘ जाने दो।

पहले वाक्य में किसी व्यक्ति को पकड़े रहने तथा दूसरे वाक्य में नहीं पकड़ने से है।

 

 

 

बलाघात के प्रभाव

 

शब्दों और वाक्य बलाघात के आधार पर बलाघात के प्रभावित निम्नलिखित हैं –

१ बलाघात युक्त ध्वनियां अधिक प्रबल होती है। अतः अधिक सुदृढ़ होती है।

२ बलाघात युक्त ध्वनियों में परिवर्तन बहुत कम होता है।

३ बलाघातहीन ध्वनियाँ निर्बल होती है और उनमें परिवर्तन अधिक होता है।

४ बलाघात युक्त ध्वनियां मांसपेशियों की दृढ़ता के कारण दृढ़ और बलाघातहीन ध्वनियाँ शिथिल कही जाती है।

५ इस में वायुवेग की प्रबलता होती है। अतः अल्पप्राण ध्वनि , महाप्राण के समान सुनाई पड़ती है।

६ बलाघातहिन ध्वनि वायु प्रवाह की कमी के कारण महापराण होने पर भी अल्पप्राण जैसी सुनाई पड़ती है।

७ बलाघात युक्त ध्वनि अधिक शक्तिशाली मुखर और श्रवणीय होती है , इसके अतिरिक्त बलाघातहीन ध्वनि कमजोर व स्पष्ट होती है।

 

यह भी जरूर पढ़ें –

 बलाघात क्या है।

 

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