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बोध कथा। अपने दल को हारने नहीं दूंगा।लघु कहानी।

बोध कथा। अपने दल को हारने नहीं दूंगा।लघु कहानी।

अपने दल को हारे नहीं दूंगा

 

महाराष्ट्र का एक गाँव संध्या के समय ; कब्बड्डी का खेल हो रहा था। सामने के दल का खिलाडी नायक दूसरे पाले में जाकर कई खिलाड़ियों को मार आया था और भय था कि यह दल हार जायेगा।  एक बार जैसे ही वह खिलाड़ी नायक विरोधी पाले में गया कि उस दल का छोटा सा बालक उससे चिपट गया।  नायक ने झटके दे -दे का छूटने का प्रयत्न किया पर बालक तो ऐसे चिपक गया जैसे जौंक। 

“अरे छोड़ दे गोपू , छोड़ दे तेरा भइए है गोपू छोड़ दे।  छोटे से बालक के  एक साथी ने कहा।  बालक बोला -” भाई है तो  क्या हुआ।  मै  अपने दल को हारने नहीं दूंगा। ” अंत में छोटे भाई की दृढ़ता के आगे बड़े भाई को हार माननी पड़ी। कितना साहस था उसमे यही बड़ा होकर गोपाल कृष्ण गोखले के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 

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