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3 Akbar birbal stories in hindi | अकबर बीरबल की मजेदार कहानियां

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स्वागत है आपका हमारे नए ब्लॉग पोस्ट में | आज हम अकबर बीरबल की मजेदार कहानियां लिखने जा रहे हैं | ये कहानियां आपको मनोरंजन के साथ साथ नैतिक शिक्षा भी देंगी | अगर आपको हमारी यह कोशिश अच्छी लगे तो अपने साथियों के साथ शेयर जरूर करियेगा | Akbar birbal stories in hindi in short with morals,

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3 Interesting Akbar birbal stories in hindi

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Hindi stories of akbar birbal
Akbar birbal stories in hindi

बैल का दूध

( Akbar birbal moral stories in hindi )

 

राजा अकबर का दरबार सजा हुआ था। दरबारी सभा में मौजूद थे , तभी अकबर , बीरबल की प्रशंसा करते हुए कहते हैं – ” बीरबल जैसा बुद्धिमान इस दरबार में कोई नहीं है , यह हमारे लिए गर्व की बात है  इस जैसा महान व्यक्ति हमारे दरबार में है। ”

अकबर निरंतर बीरबल की बड़ाई कर रहे थे , किन्तु अकबर की बात से एक दरबारी सहमत नहीं था। वह राजा के हां में हां नहीं मिला रहा था , यह भाँपते हुए अकबर ने पूछा –

अकबर – क्यों भीमसेन जी आप बीरबल के बुद्धिमता पर संदेह करते हैं ? आप उन्हें बुद्धिमान नहीं समझते ?

भीमसेन  – महाराज इसमें कोई संदेह नहीं कि बीरबल बुद्धिमान है , किंतु इस दरबार में सबसे बुद्धिमान है यह मैं नहीं मानता।

अकबर  – तो तुम बीरबल की परीक्षा ले सकते हो।

भीमसेन – जी महाराज अगर बीरबल मेरे प्रश्न का हल ढूंढ ले , तो मैं उन्हें बुद्धिमान समझूंगा।

अकबर –  पूछो क्या प्रश्न पूछना है ?

भीमसेन  – बस महाराज यही चाहता हूं कि बीरबल बैल का दूध लेकर आए।

अकबर – भीमसेन जी यह कैसी बातें कर रहे हैं , बैल का दूध होता है क्या ? आपका यह सवाल ही गलत है।

भीमसेन –  किंतु महाराज जब तक बीरबल बैल का दूध लेकर नहीं आते तब तक मैं उन्हें बुद्धिमान नहीं मान सकता।

अकबर –  ठीक है , हम भी बीरबल का बुद्धिबल देखना चाहते हैं। क्यों बीरबल बैल का दूध ला सकते हो ?

बीरबल  – जी महाराज।

अकबर  –  ठीक है तुम्हें जितना समय चाहिए उतना समय ले लो।

बीरबल  – महाराज मुझे बैल का दूध लेन में केवल एक दिन का समय लगेगा।

अकबर  – क्या ? एक दिन , क्या तुम वास्तव में बैल का दूध ला सकते हो ?

बीरबल  – जी महाराज।

अकबर  – ठीक है।

 

सभा विसर्जन होती है , सभी दरबारी अपने – अपने घर जाते हैं।

रात का समय है , महल में अकबर विश्राम कर रहे हैं अभी नींद लगी ही थी कि , उनके महल के पीछे से जोर – जोर से आवाज आने लगती है। अकबर अपने अंग रक्षकों को उस आवाज को बंद कराने के लिए कहते हैं।  अकबर के अंगरक्षक आदेश का पालन करने के लिए निकल पड़ते हैं।  काफी समय बीतने पर भी वह आवाज बंद नहीं होती , अकबर फिर अपने अंगरक्षकों को बुलाते हैं और कारण पूछते हैं कि तुम्हें एक घंटे पूर्व आदेश दिया था आवाज को बंद किया जाए किंतु तुमने अभी तक बंद नहीं किया।

उस आदमी को पकड़ कर लाओ जो यह आवाज कर रहा है , मैं उसे अनावश्यक कार्य करने पर दंड दूंगा।

अकबर के अंगरक्षक उस आवाज की ओर निकल जाते हैं , और वहां जाकर देखते हैं। कुएं पर एक लड़की कपड़े धो रही थी , कपड़ों पर लकड़ी के डंडे से कपड़े धो रही थी , जिसके कारण यह आवाज आ रही थी।

अकबर बीरबल कहानी ( Akbar birbal ki kahani )

अंगरक्षक  – क्यों लड़की मैंने तुझे आवाज बंद करने के लिए कहा था , तुमने किया क्यों नहीं ?

लड़की  –  जी मुझे कपड़े धोना बहुत जरूरी है , और अभी कुआं खाली है , इसलिए मैं यहां पर घर के कपड़े धोने आ गई।

अंगरक्षक  –  चलो महाराज ने तुम्हें बुलाया है।

लड़की डरी – सहमी अंगरक्षक के साथ महल में चल देती है।

 

अंगरक्षक उस लड़की को अपने साथ महाराज के समक्ष प्रस्तुत करते हैं।

अकबर –  क्यों लड़की ! तुम इस वक्त कपड़े क्यों धो रही हो ?  क्या यह समय कपडे धोने का है ? हमारी नींद खराब क्यों कर रही हो ? यदि तुमने उचित कारण नहीं बताया तो मैं तुम्हें अवश्य ही  कठोर दंड दूंगा।

लड़की –  महाराज की जय हो ! महाराज मेरी मम्मी मायके गई है , और पिताजी को लड़का हुआ है।  इसलिए यह सारा काम मुझे करना पड़ता है , इस समय थोड़ा सा गृहस्थी से समय मिला है , इसलिए मैं कपड़े धोने आ गई थी। क्षमा करें।

अकबर  – क्या ? पुनः बोलो तुमने क्या बोला ?

लड़की  –  जी महाराज आपने जो आपने सुना वह सही सुना। मेरी मम्मी मायके गई हुई है और मेरे पिताजी को लड़का हुआ है , इसलिए मैं गृहस्ती से अभी समय निकालकर कपड़ा धोने आई हुई हूं।

अकबर  – यह कैसे संभव हो सकता है ? तुम्हारे पिताजी को लड़का कैसे हो सकता है ?

लड़की  – क्यों नहीं महाराज आपके राज्य में कुछ भी असंभव नहीं है।

अकबर  – क्या मतलब ?

लड़की  – जी महाराज आपके राज्य में सबकुछ सम्भव है। जब आपके राज्य में बैल का दूध हो सकता है , तो मेरे पिताजी को लड़का क्यों नहीं हो सकता ?

अकबर पूरी घटना को समझ चुके थे , वह जान गए थे कि यह बीरबल की कोई लीला है। वह मन ही मन खुश हुए , उन्हें उनके दरबार में पूछे गए सवाल का जवाब मिल गया था। अकबर ने अपने अंगरक्षकों को आदेश दिया कि इस लड़की को सही सलामत उसके घर पहुंचा दिया जाए और इसे भंडार घर से उपहार में खिलौने और ढेर सारी मिठाइयां दी जाए।

लड़की वहां से सही सलामत अपने घर पहुंच जाती है।

अगले दिन राजा अकबर का दरबार पुनः सजता  है अकबर , भीमसेन को वह कहते हैं –  ” भीमसेन तुम्हारे प्रश्न का जवाब मिल गया है ” , यह कहते हुए उन्होंने पूरी घटना को दरबारियों के सामने प्रस्तुत कर दिया।

इस घटना से सभी बीरबल के बुद्धि बल पर प्रसन्न हुए , अब किसी को कोई संदेह नहीं था कि बीरबल बुद्धिमान है या नहीं। उस दिन से बीरबल का मान दरबार में और बढ़ गया।

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दुनिया में कितने अंधे हैं

( Akbar birbal stories in hindi )

 

जैसा कि सभी लोगों को पता है  अकबर और बीरबल में निरंतर समस्या और समाधान का चक्कर लगा रहता था। राजा अकबर किसी भी समस्या में पड़ते थे तो उसका हल बीरबल निकाला करते थे। इस कहानी में भी इसी प्रकार का वाक्य देखने को मिलता है।

 

राजा अकबर को एक दिन न जाने क्या समझ आता है कि वह बीरबल से एक ऐसा आंकड़ा तैयार करने को कहते हैं ,जिसके माध्यम से उन्हें पता चल सके कि दुनिया में कितने लोग अंधे हैं। बीरबल सूचि बनाने को तैयार हो गए।

बीरबल ने अकबर से एक दिन का समय मांगा और भरोसा दिया – ”  मैं एक दिन में यह सूचि/आंकड़ा तैयार करके दरबार में प्रस्तुत करूँगा।

बीरबल अपने घर को गए और वहां कुछ युक्ति सोचा।

अगले दिन बीरबल दरबार के बाहर भेष बदलकर बैठ गए और डोरी बनाने लगे। दरबार में जाने वाले सभी दरबारी उससे पूछते – ” अरे तुम यहां क्या कर रहे हो ”

ऐसा प्रश्न एक – दो व्यक्ति ने नहीं बल्कि दरबार में जाने वाले सभी लोगों ने पूछा। सभी यही प्रश्न पूछते – ” अरे तू यहां क्या कर रहा है ”

 

अकबर दरबार में जा रहे थे तभी उन्होंने देखा दरबार के बाहर एक व्यक्ति बैठा हुआ है , और वह रस्सी बांट रहा है। राजा अकबर को गुस्सा आता है और वह उस व्यक्ति से पूछते हैं – ” अरे मुर्ख तू यहां बैठकर क्या कर रहा है ? वह व्यक्ति कुछ नहीं बोलता और वहां से उठकर चला जाता है।

कुछ समय बाद बीरबल अपने वास्तविक रूप में दरबार में उपस्थित होता है। सभी दरबारी यह जानने को उत्सुक थे कि दुनिया में कितने लोग अंधे हैं ?

बीरबल के मुख पर तेज था , उनके पास राजा के द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर था , इसलिए वह मंद – मंद मुस्कुरा रहे थे।

Akbar stories in hindi in short with morals

अकबर –  बीरबल तुमने सूची तैयार कर लिया  ? दुनिया में कितने लोग अंधे हैं ? अकबर ने पूछा
बीरबल  – जी महाराज मैंने अंधे लोगों की सूची तैयार कर ली है।
अकबर –  तो बताओ दुनिया में कितने लोग अंधे हैं ?

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बीरबल ने दरबार में सभी लोगों की ओर इशारा करते हुए बताया ,  यह सभी दरबारी अंधे हैं। राजा को आश्चर्य हुआ !
अकबर –  ने पूछा यह कैसा मजाक है ?
बीरबल ,  अकबर की ओर इशारा करते हुए भी बोले , महाराज आप भी अंधे हैं।

अब अकबर को गुस्सा आने लगा।  बीरबल अब अपने दायरे से बाहर जा रहा है , और वह महाराज को ही अंधा बता रहा है।

अकबर  – तुम अपनी बात को साबित करो। दरबार में सभी उपस्थित लोग अंधे हैं , वरना तुम्हें मृत्युदंड दिया जाएगा।

बीरबल – महाराज में दरबार के बाहर बैठकर रस्सी बांट/बना  रहा था। यह सभी लोग देख रहे थे किन्तु फिर भी दरबार में आने वाले सभी लोग मुझे देखकर  पूछ रहे थे कि मैं क्या कर रहा हूं ? और महाराज आपने भी दरबार में आते समय मुझसे यही प्रश्न पूछा। अरे मुर्ख तू यहां बैठ कर क्या कर रहा है ? जबकि महाराज आपने भी देखा कि मैं रस्सी बना रहा था।

बीरबल के जवाब से सबको संतुष्टि मिली और बीरबल की जान बच गई , सबने बीरबल के बुद्धि बल की खूब सराहना की।

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सोने का खेत

( Akbar birbal short stories )

अकबर के दरबार में एक दिन भोला से अकबर का प्रिय गुलदस्ता गिर कर टूट जाता है। भोला घबरा जाता है , वह जानता था कि यह गुलदस्ता अकबर का प्रिय गुलदस्ता है , और इसके टूटने के कारण अब अकबर मुझे दंड देंगे।

भोला घबराते – घबराते घर जाता है। वहां उसे नींद भी नहीं आती कि ना जाने राजा क्या दंड देगा।

अकबर ने जब गुलदस्ता ढूंढा तो उसे वहां नहीं मिला। अकबर ने अपने सैनिकों से पूछा –  यहां पर किसकी ड्यूटी लगी थी , उसको बुला कर लाया जाए।

भोला को बुलाया गया भोला ने पहले झूठ बोला और बाद में स्वीकार किया की यह गुलदस्ता काम करते समय गिर कर टूट गया।
अकबर  ने उसे सच बोलने के लिए धन्यवाद कहा , किंतु झूठ बोलने पर उसे देश निकाला भी दिया।

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अकबर अगले दिन दरबार में सच प्रिय होने की बाते कर रहे थे।दरबारी भी अकबर की हां में हां मिला रहे थे।

अकबर  –  क्या मेरे दरबार में भी कोई झूठ बोलता है ?अकबर ने पूछा

दरबारी – नहीं महाराज कभी झूठ नहीं बोला ,  झूठ से वह भी नफरत करते हैं , कोई कहता ‘ झूठ ‘ वह क्या होता है ? मैं जानता भी नहीं , कोई कहता मैंने आज तक झूठ नहीं बोला।

अकबर दरबारियों के सच्चाई प्रिय होने पर गर्व कर रहे थे। किंतु बीरबल वहां बैठे थे राजा ने पूछा –

अकबर – क्यों बीरबल तुमने कभी झूठ बोला है ?/

बीरबल  – जी महारज झूठ दो प्रकार का होता है एक सचाई के लिए और बेईमानी के लिए। मैंने भी कभी न कभी झूठ अवश्य बोला होगा। बीरबल ने जवाब दिया।

 

अकबर को गुस्सा आता है वह बीरबल के बात से क्रोधित होता हैं और उन्हें नवरत्न की पदवी से हटा देते हैं। इस पर दरबारी मन ही मन खुश होते हैं।

बीरबल अपने घर जाते हैं , वहां वह अपने मित्र को बुलाकर कहते हैं – ‘ शहर में ऐसे कारीगर को ढूंढो जो सोने का गेहूं बना सके ‘ बीरबल का मित्र ऐसा ही करता है वह बाजार जाकर कुशल सुनार से सोने का गेहूं बनवा लाता है।
बीरबल सोने का गेहूं लेकर राजा अकबर के पास जाता है।

 

अकबर  – क्यों बीरबल तुम्हें दरबार में आने के लिए हम ने मना किया था फिर दरबार में क्यों आये हो ? अकबर गुस्से से पूछता है।

बीरबल –  जी अवश्य आपने अवश्य मना किया था , किंतु यहां देशहित और राज्य की बात थी इसलिए मुझे दरबार में आना पड़ा।

अकबर के पूछने पर बीरबल ने बोला  महाराज आपके राज्य में सोने की खेती की जा सकती है। अकबर को आश्चर्य हुआ दरबारी भी आश्चर्यचकित रहे इस पर बीरबल ने अकबर को कहा – कल सवेरे आप सभी मेरे साथ खेत पर चलना मैं आपको सोने का खेत दिखाऊंगा।

 

सवेरे अकबर और सभी दरबारी खेत पहुंचते हैं। बीरबल सोने का गेहूं दिखाकर अकबर से कहते हैं महाराज यह गेहूं कोई ऐसा व्यक्ति खेत में डालें जो झूठ नहीं बोलता हो तो गेहूं सोने का उगेगा।

राजा ने अपने दरबारियों की ओर देखा जो गर्व से पिछले दिन झूठ न बोलने की मिसाले दे रहे थे। किंतु कोई भी दरबारी आगे नहीं आया।  बीरबल ने अकबर से कहा महाराज आप के दरबारी तो झूठ बोलते हैं , मैं भी झूठ बोलता हूं। बचे आप , आप ही इस गेहूं के खेत में बो दीजिये।

अकबर के पसीने छूट गए , अकबर कहने लगा हां मैं भी कभी ना कभी झूठ बोलता हूं मैं कैसे गेहूं बो सकता हु । अकबर को सभी बातें समझ में आ गई थी , वह समझ गए थे कि कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो झूठ नहीं बोलता। चाहे झूठ अच्छाई के लिए हो या बुराई के लिए किंतु झूठ का प्रयोग व्यक्ति करता ही है।

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