Atal Bihari Vajpayee Quotes in Hindi – अटल बिहारी वाजपेई सुविचार

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इस लेख में आप महान राजनीतिज्ञ देश प्रेमी श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के सुविचार , अनमोल वचन तथा मार्गदर्शन का संकलन प्राप्त कर सकेंगे।

वाजपेई जी द्वारा दिखाए गए मार्गों को अपने जीवन में अपनाकर , स्वयं का जीवन सफल बना सकते हैं। उन्होंने आजीवन शादी नहीं की थी ताकि वह देश की सेवा में अपना योगदान मजबूती से सुनिश्चित कर सकें।

अटल बिहारी वाजपेई किसी परिचय के मोहताज नहीं है , उनका राजनीतिक कद इतना बड़ा है कि विपक्षी दल भी उनका नाम आदर और सम्मान से लिया करते हैं।

वह ऐसे पहले व्यक्ति हुए थे जिन्होंने देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस के विपक्ष में अधिक समय तक अपना कार्यकाल निभाया था।

अटल बिहारी जी भारतीय जनता पार्टी से अपने राजनीति की पहचान रखते हैं। वह एक लेखक और विद्वान कवि थे , उनकी कविता और लेखनी आज भी अद्वितीय है। एक कवि मन जब सत्ता पर आरूढ़ होता है , वह देश के लिए कार्य करने को प्रतिबद्ध रहता है। जिसका कोई घर परिवार या वैवाहिक जीवन नहीं होता है उस व्यक्ति की समर्पण भावना देखते ही बनती है।

अटल बिहारी वाजपेई जी के सुविचार हिंदी में

हिंदू मात्र धर्म नहीं जीवन जीने की शैली है

हिंदुत्व परंपरा पर गर्व करता हूं और करता रहूंगा

मुझे इस परंपरा पर अटूट विश्वास और गर्व है। ।

 

छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता

टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता। ।

 

क्या हार में , क्या जीत में

किंचित नहीं भयभीत मैं

कर्तव्य पथ पर जो मिला

यह भी सही , वह भी सही

वरदान नहीं मांगूंगा

हो कुछ पर , हार नहीं मानूंगा। ।

 

(अटल जी अपने विश्वास पर अटल रहते थे , उन्होंने कभी हार मानना नहीं सीखा। हार-जीत जीवन में लगा रहता है , कर्तव्य पथ पर हार एक नई प्रेरणा प्रदान करता है ऐसा विश्वास हुआ रखते थे )

 

हिंदू हूं हिंदी की बात करूंगा

एक नहीं सौ बार करूंगा। ।

 

इंसान बनना है तो केवल

नाम से नहीं , रूप से नहीं

हृदय और बुद्धि से बनो। ।

 

Atal Bihari Vajpayee Quotes in hindi

बाधाएं आती है आए

घिरे प्रलय की घोर घटाएं

पांव के नीचे अंगारे

सिर पर बरसे यदि ज्वालाएं

निज हाथ में हंसते-हंसते

आग लगाकर जलना होगा

कदम मिलाकर चलना होगा। ।

(देश के विकास के लिए अटल जी का मानना था , सभी को मिलकर कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। किसी एक के संघर्ष से भारत कभी उन्नति का मार्ग नहीं पकड़ सकता )

 

जो कहते हैं पड़ोसियों से वार्ता कर लो

शायद उन्हें आभास नहीं

कितने ही सालों से

भारत ही वार्ता का प्रयत्न करता है। ।

 

मैं मरने से नहीं डरता बल्कि बदनामी से डरता हूं

इस कारण बेदाग छवि से दिन-रात कार्य करता हूं। ।

(अटल जी सदैव बदनामी से डरा करते थे बदनामी का दाग उनके दामन में कभी ना लगे इस प्रकार का कार्य किया करते थे )

 

 

१०

आप स्वेच्छा से मित्र बदल सकते हैं पड़ोसी नहीं। ।

(पड़ोसी राष्ट्रों के प्रति उनके विचार थे वह पड़ोसियों के साथ शांति सौहार्द बनाकर कार्य करना चाहते थे जिससे सभी का भला हो सके)

 

 

११ 

मैं यह भविष्यवाणी करने का साहस करता हूं

कि अंधेरा छटेगा ,सूरज निकलेगा , कमल खिलेगा। ।

प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देते समय संसद में इन पंक्तियों को व्यक्त किया था और अपनी पार्टी को पूर्ण बहुमत से पुनः लाने की भविष्यवाणी की थी आज वह नरेंद्र मोदी के रूप में सार्थक है।

Atal Bihari Vajpayee Suvichar in Hindi

 

१२

हार जीत जीवन का हिस्सा है इसे

शुद्ध भाव से स्वीकार किया जाना चाहिए। ।

जीवन में हार जीत सुख दुख आता जाता रहता है इन सभी को अपने जीवन में अपनाने की क्षमता अटलजी में थी।

 

 

१३

हार नहीं मानूंगा

रार नहीं ठानूंगा

काल के कपाल पर

लिखता मिटाता हूं

गीत नया गाता हूं

गीत नया गाता हूं। ।

इस पंक्ति में अटल जी के नए विचारों की झलक मिलती है वह रूढ़ीवादी विचारों को तोड़कर नए विचारों को ग्रहण करना चाहते हैं

 

 

१४ 

सहायता बेहद ही महंगी वस्तु है

प्रत्येक से उम्मीद करना व्यर्थ है। ।

राजनीति में रहते हुए वह दूसरे दलों से सहायता मांगने के बजाय स्वयं के सामर्थ्य से कार्य करना उचित समझते थे।

 

 

१५ 

प्यार इतना पराया से मुझको मिला

न अपनों से बाकी है कोई गिला

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए

आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए। । 

अटल ने इन पंक्तियों को जीवन के अंतिम क्षण में लिखा। जिससे उनके मजबूत व्यक्तित्व का पता चलता है। लोगों के द्वारा अपार प्यार उन्हें मिला था।  जिसके कारण उन्होंने चुनौतियों से कभी पीछे नहीं हटे , उन्होंने वह कार्य किए जो अन्य लोगों के लिए दुर्लभ थे।

Atal Bihari Vajpayee Anmol vachan

१६ 

यह राष्ट्र एक मंदिर है और हम यहां के पुजारी

राष्ट्रदेव की सेवा में,  हो जीवन की तैयारी । ।

 

१७ 

मेरी बात को गांठ बांध लें

आज हमारे कम सदस्य होने पर

आप हंस रहे हैं लेकिन वह दिन आएगा

जब पूरे भारत में हमारी सरकार होगी

उस दिन देश आप पर हंसेगा। ।

यह पंक्तियां अटल जी ने कांग्रेस सरकार के लिए कहा था जी ने अपने सत्ता का मद हो गया था। उनके यह वचन आज सार्थक हुए हैं।

 

१८

सूर्य एक सत्य है

जिसे झूठ लाया नहीं जा सकता

मगर ओस भी तो एक सच्चाई है

यह बात अलग है कि ओस क्षणिक है

क्यों ना मैं क्षण क्षण को जियूं

कण कण में बिखरे सौंदर्य को पीऊं। ।

अटल जी का व्यक्तित्व ऐसा था कि वह प्रत्येक क्षण को जीना चाहते थे। प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना चाहते थे , इसलिए वह सदैव देश के हित में ही सोचने का कार्य किया करते थे।

 

 

१९ 

भारत के प्रति अनन्य निष्ठा रखने वाले

सभी भारतीय एक हैं ,

फिर उनका मजहब , भाषा तथा

प्रदेश कोई भी क्यों ना हो। ।

अटल जी सभी भारतीय को एक समान रूप से देखा करते थे। प्रत्येक व्यक्ति के प्रति उनका दृष्टिकोण एक जैसा था। ऊंच-नीच , भेदभाव भाषा जाति आदि से वह ऊपर उठकर विचार करते थे।

 

 

२०

कुछ कांटों से सज्जित जीवन

प्रखर प्यार से वंचित यौवन

नीरवता से मुखरित मधुबन

परहित अर्पित अपना तन-मन

जीवन को शत-शत आहुति में

जलना होगा , गलना होगा

कदम मिलाकर चलना होगा। ।

इन पंक्तियों से उनके संपूर्ण जीवन की एक झलक मिल जाती है। देश हित में उन्होंने कभी स्वयं के विषय में नहीं सोचा , अपने यौवन को देश पर न्योछावर कर दिया। तन-मन देश को अर्पित कर दिया और जीवन की आहुति देश हित में कर दी।  स्वहित को स्वाहा कर देश के साथ कदम मिलाकर चलने की इच्छाशक्ति रखते थे।

 

 

२१ 

मेरी कविता जंग का ऐलान है

पराजय की प्रस्तावना नहीं।

वह हारे हुए सिपाही का नैराश्य-निनाद नहीं

जुझते योद्धा का जय संकल्प है

वह निराशा का स्वर नहीं

आत्मविश्वास का जयघोष है। ।

एक कवि मन के रूप में वह अपनी कविता को एक नया जय घोष मानते थे। एक नई प्रस्तावना मानते थे , जिस पर कार्य करते हुए जिस पर चलते हुए एक सिपाही आत्मविश्वास के साथ विजय को प्राप्त करता है।

 

२२ 

निरक्षरता का और निर्धनता का गहरा संबंध है। ।

 

२३ 

रामचरित्र मानस मेरी प्रेरणा का स्रोत रहा है

आज की आवश्यकता है विश्व साहित्य में

इसका संकलन किया जाए

इसके आदर्शों को जीवन में अपनाया जाए। ।

 

 

२४ 

आओ फिर से दिया जलाएं

भरी दुपहरी में अंधियारा

सूरज परछाई से हारा

अंतर्मन का नेह निचोड़े

बुझी हुई बाती सुलगाय

आओ फिर से दिया जलाएं। ।

भारतीय परंपरा में दिया जलाना अर्थात उत्साह प्रकट करना होता है। बुझी हुई भारतीय जनता की इच्छा शक्ति को पुनः जागृत और विश्व को सर्वश्रेष्ठ मुकाम पर पहुंचाने के लिए मन के भीतर दिए को जलाने की बात कही गई है।

 

२५ 

त्याग तेज तपोबल से रक्षित

यह स्वतंत्रता दुखी मनुष्यता के हित

अर्पित यह स्वतंत्रता। 

इसे मिटाने की साजिश करने वालों

से कह दो चिंगारी का खेल बुरा होता है

औरों के घर आग लगाने का

जो सपना वह अपने ही घर में सदा खरा होता है। ।

जो लोग दूसरों के घर में आग लगाने का सदैव मन में विचार करते हैं , वह स्वयं अपना ही घर जलाते हैं। यह स्वतंत्रता तेज , त्याग और तप से प्राप्त हुई है। इसको प्राप्त करने के लिए बलिदानों ने सर्वस्व अर्पित किया है। यह संपूर्ण विश्व को समझ लेना चाहिए भारत अब अपने उज्जवल भविष्य के लिए कदम बढ़ा चुका है।

 

 

२६ 

आग्नेय परीक्षा की इस घड़ी में

आइए अर्जुन की तरह उद्घोष करें

“न दैन्यं न पलायनम्”। ।

अग्नि रूपी इस परीक्षा में अर्जुन की भांति डटकर खड़े होना चाहिए।  डटकर मुकाबला करना चाहिए ना कि मैदान छोड़कर भाग खड़ा होना । ।

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कुछ शब्द

अटल बिहारी वाजपेई एक ऐसे शख्सियत थे जिन्हें स्वयं की पार्टी से से जितना सम्मान प्राप्त होता था उतना ही विपक्ष की पार्टी से भी। शायद वह पहले ऐसे प्रधानमंत्री थे जो कांग्रेस जैसी मजबूत पार्टी के समक्ष सशक्त नेतृत्व की क्षमता रखते थे। उन्होंने गैर कांग्रेसी होते हुए प्रधानमंत्री पद पर सबसे अधिक स्थापित रहे।

राजनीतिक तथा निजी जीवन में उन्हें अनेक बड़े-बड़े कठिनाइयों का सामना करना पड़ा , किंतु वह किंचित ना घबराते हुए प्रत्येक परिस्थिति से दो-दो हाथ किया। उनकी जिजीविषा और इच्छाशक्ति को मौत से ठन गई कविता में देखा जा सकता है। जीवन के अंतिम दिनों में भी वह किस प्रकार का अदम्य साहस रखते थे उनकी यह कविता मिसाल देती है।

वाजपेई जी ने अपने निजी जीवन को देशहित में समर्पित किया था , इसलिए उन्होंने अपना वैवाहिक जीवन स्थापित नहीं किया। वह आजीवन कुंवारे रहे अपना तन ,मन , धन सब सर्वस्व देश हित में न्योछावर कर दिया था।  वह भारत को बुलंदियों पर देखना चाहते थे , विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना चाहते थे जिसके लिए आजीवन संघर्षरत रहे।

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