बाल दिवस पर निबंध ( सम्पूर्ण जानकारी )

आज के लेख में हम बाल दिवस पर निबंध स्वरूप एक लेख प्रस्तुत कर रहे हैं।

देश के बच्चों को समर्पित बाल दिवस भारत देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाया जाता है। जिसमें आपको निबंध, बाल दिवस का महत्व, विद्यालय में हुए बाल दिवस कार्यक्रम की रिपोर्ट आदि की जानकारी मिलेगी। इसका अध्ययन आप अपने परीक्षा के लिए भी कर सकते हैं।

बाल दिवस पर निबंध

बच्चे कल का भविष्य होते हैं, जिस देश में युवा की तादाद ज्यादा होती है उसे युवा देश कहा जाता है। जैसा कि हम जानते हैं आज के नन्हें बालकों के कंधों पर ही कल का भविष्य टिका रहता है। देश की उन्नति प्रगति किस प्रकार हो यह बालकों पर ही निर्भर करता है, अतः बालकों के समग्र विकास के लिए उचित शिक्षा व्यवस्था, वातावरण आदि का ध्यान रखते हुए बालकों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

बाल दिवस जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन के उपलक्ष में मनाया जाता है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे, उन्हें बालकों से विशेष लगाव था। अतः उन्होंने अपने जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया। उनका मानना था एक व्यक्ति शरीर से उम्र से चाहे कितना भी बड़ा हो जाए उसके भीतर एक बालक का होना आवश्यक है। यही कारण है कि वह सदैव बालकों के बीच बालक ही बन जाया करते थे।

वह अपनी पुत्री प्रियदर्शनी (इंदिरा गांधी) से भी बेहद प्रेम करते थे।

कुछ दिनों दूर रहने पर वह अपनी पुत्री को पत्र लिखा करते थे।

उनके द्वारा लिखे गए पत्र आज वात्सल्य की निशानी के तौर पर उपलब्ध है।

बाल दिवस का इतिहास

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को बाल भवन इलाहाबाद में हुआ था। वह बचपन से ही एक बड़े वकील बनना चाहते थे और भारत के स्वतंत्रता में अपना योगदान देना चाहते थे। इसी उद्देश्य के लिए वह जीवन भर संघर्ष करते रहे।

उन्होंने काफी कम आयु में स्वाधीनता संग्राम के साथ अपना नाता जोड़ दिया था।

उन्होंने गांधीजी के आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लिया, यहां तक की कई आंदोलन में वह अग्रणी भूमिका में रहे। उन्हें बच्चों से विशेष लगाव था वह जहां भी जाते बच्चों से अवश्य मिलते, उनके लिए कुछ ना कुछ उपहार खाने की वस्तुएं ले जाया करते थे। बच्चे भी उनसे बेहद प्यार किया करते थे। जब वह अपनी पुत्री प्रियदर्शनी से दूर रहते तो उसे याद करते हुए पत्र लिखते। उस पत्र में अपना प्रेम, वातसल्य रस प्रकट करते थे।

उनके द्वारा लिखे गए पत्र आज भी बाल भवन के संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए हैं।

प्रधानमंत्री के रूप में जब नेहरू जी ने पदभार संभाला तब उन्होंने अपने जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाना स्वीकार किया। वह बच्चों से विशेष लगाव रखते थे और वह देश के उज्जवल भविष्य का रूप बच्चों में देखा करते थे।

बालकों के उत्साह वर्धन और विकास के लिए बाल दिवस के रूप में मनाया।

इस दिन जगह जगह कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, विशेषकर विद्यालय में बालकों के लिए अनेक प्रकार के प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। खेल-कूद, बौद्धिक, वाद-विवाद, चित्रकला आदि कार्यक्रम में विद्यार्थी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।

बाल दिवस क्यों मनाया जाता है

बालक किसी भी देश के भविष्य होते हैं उनके हाथों में देश की सफलता और सफलता निर्भर करती है।  उनके महत्व को जानते हुए उन्हें संरक्षण और पोषित करने तथा सर्वांगीण विकास को मध्य नजर रखते हुए बाल दिवस मनाया जाता है।

बाल दिवस 14 नवंबर को मनाया जाता है।

इस दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी का जन्म हुआ था।

उन्हें बालकों से विशेष लगाव था।

अतः उन्होंने अपने जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया।

अपने विद्यालय के बाल दिवस कार्यक्रम पर रिपोर्ट तैयार कीजिए

दिनांक – 14 नवंबर 2019

समय – प्रातः 8:00 से 12:00 तक

मुख्य अतिथि – शिक्षा निदेशक जिला स्तर

स्थान – विद्यालय का प्रांगण (राजकीय उच्चतर माध्यमिक बाल विद्यालय दिलशाद गार्डन दिल्ली)

प्रतियोगिता – 1 भाषण 2 वाद-विवाद 3 कबड्डी 4 दौड़ 5 संगीत

दिनांक 14 नवंबर 2019 को प्रातः 8:00 बजे से पूर्व सभी विद्यार्थी अपने कार्यक्रम की तैयारी में जुटे थे। उनकी तैयारियां कई दिनों पूर्व से चली आ रही थी। आज उसका सफल प्रदर्शन करना था प्रतियोगिता का मुख्य क्षेत्र – भाषण, वाद-विवाद, कबड्डी, दौड़, संगीत था।

मुख्य अतिथि के रूप में जिला स्तर के शिक्षा निदेशक को आमंत्रित किया गया था।

प्रातः 8:00 बजे विद्यालय के प्रांगण में एक-एक करके सभी कार्यक्रम आरंभ हो गए।

भाषण उसके उपरांत वाद विवाद और संगीत की प्रतियोगिता क्रम से विद्यालय के प्रांगण में लगे स्टेज पर हुआ। उसके बाद कबड्डी तथा दौड़ के लिए मैदान में सभी एकत्रित हुए सभी विद्यार्थियों ने अपने शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया।

सभी प्रतियोगिता से पांच-पांच श्रेष्ठ खिलाड़ियों का चयन किया गया।

तदुपरांत मंच पर 11:00 बजे मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा निदेशक उपस्थित हुए।

प्रधानाचार्य ने उनका परिचय कराया कुछ प्रतिभागी विद्यार्थियों ने अपने संगीत का मंचन किया, उसके बाद मुख्य अतिथि का संबोधन विद्यार्थियों को रहा। संबोधन के उपरांत सभी प्रतियोगिता से श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर उनका सम्मान किया गया। विद्यार्थियों उज्जवल भविष्य के लिए आशीर्वचन कहे गए।

कार्यक्रम के समापन के पश्चात सभी विद्यार्थियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई थी।

सभी विद्यार्थियों तथा शिक्षक आदि ने जलपान के उपरांत कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह कार्यक्रम तय समय के अनुसार 12:15 तक समाप्त हो गया। इस कार्यक्रम को कवर करने के लिए कुछ पत्रकार बंधु भी उपलब्ध थे। उन्होंने कार्यक्रम से संबंधित विभिन्न प्रकार के फोटो का संकलन भी किया और अपने पत्र-पत्रिकाओं में उसका प्रकाशन किया।

विवेक

कक्षा बारहवीं

राजकीय उच्चतर माध्यमिक बाल विद्यालय

दिलशाद गार्डन दिल्ली

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निष्कर्ष

बाल दिवस मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य बालकों के सर्वांगीण विकास और उनके महत्व को समाज में स्वीकार करने का रहा है। जिस समय इस कार्यक्रम को शुरू किया गया था।

उस समय बाल मजदूरी बाल शोषण आदि अनेक प्रकार की कुप्रथा समाज में प्रचलित थी।

लोगों में बाल विवाह जैसी कुरीतियों का भी बोलबाला था।

इन सभी से उन्मूलन के लिए बाल दिवस को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने जन्मदिन के दिन मनाना स्वीकार किया। तब से यह निरंतर 14 नवंबर को मनाया जाता है। अपने विचार तथा बाल दिवस से संबंधित प्रश्न या किसी अनुभव को आप अगर लिखना चाहते हैं, लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

ताकि आपके विचार, अनुभव आदि से अधिक से अधिक लोग परिचित हो सकें।

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