Bhagat Singh Quotes in Hindi – शहीद भगत सिंह

Shaheed Bhagat singh Quotes and Sayings in Hindi which will motivate you for country and life. शहीद भगत सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उनकी बहादुरी और उनकी जज्बाती विचारों से , आज की युवा पीढ़ी प्रेरणा लेती है। भगत सिंह अल्प आयु में अपनी स्वतंत्रता मातृभूमि की वंदना के लिए शहीद हो गए। उन्होंने मातृभूमि पर किसी विदेशी का अधिकार स्वीकार नहीं किया। उनके संघर्ष और प्रेरणादायक विचारों को आज हम लिख रहे हैं।

 

Shaheed Bhagat Singh Quotes in Hindi

 

जा मिला वह उस मिट्टी में  , जिसका वह लाल था

उस लाल के आगे खुशियों का अंबार था

लड़ा वह अंत तक मातृभूमि की खातिर

क्योंकि मातृभूमि का सम्मान तार-तार था। । 

भगत सिंह मातृभूमि को सर्वोपरि मानते थे। माता की गुलामी और अपने देशवासियों का , अहित होता देख वह अपने जज्बातों को रोक नहीं पाए।  अंत तक उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अनवरत संघर्ष किया। इनके आगे अनेकों खुशियां खड़ी थी , किंतु उन खुशियों को त्याग कर उन्होंने मातृभूमि मातृ वंदना के लिए अपने प्राणों को दांव पर लगा दिया।

 

इस कदर वाकिफ है मेरी ,

कलम मेरे जज्बातों से ,

अगर मैं इश्क लिखना भी चाहूं ,

तो इंकलाब लिख जाता हूं। ।

भगत सिंह की देशभक्ति इतनी सर्वश्रेष्ठ थी , वह अपनी मातृभूमि को स्वयं की माता से पहले मानते हैं। उनका मानना था , पहले मातृभूमि तब मेरी माता। तब मैं अपनी माता को परतंत्र नहीं देख सकता। उनकी मातृभूमि के प्रति प्रेम , उनके विचारों को , उनके इंकलाब , उनके उग्र भाव को प्रकट करती है।

Famous Bhagat Singh Quotes in Hindi

अगर बहरों को सुनाना है

तो आवाज जोरदार होनी चाहिए। । 

लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद भगत सिंह अपनी बातों को अंग्रेजों के सामने रखना चाहते थे। जो दूसरों के हितों को सुनते समय बहरा बन जाते थे , उन्हें अपनी बात सुनाने के लिए किसी बड़े धमाके की आवश्यकता थी। वह धमाका असेंबली में बम फेंकने का था।

 

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जिंदगी तो अपने दम पर ही जी जाती है

दूसरों के कंधों पर तो , सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं। ।

जैसा सर्वविदित है भगत सिंह क्रांतिकारी दल के अग्रणी पंक्ति में थे। वह गरम दल में विश्वास करते थे , जो उन्हें आंख दिखाएं उन आंखों को निकाल लेने पर यकीन करते थे। इस कारण उनका मानना था जिंदगी को जीना है तो हौसले और शान के साथ जीए। वरना एक दिन सभी को मरना है। इसलिए कोई साथ ना हो तब भी संघर्ष करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

 

 

व्यक्तियों को कुचलकर ,

वे विचारों को नहीं मार सकते। ।

आजादी से पूर्व अंग्रेजों ने अपने विरोध में उठने वाली सभी आवाजों को कुचल देने का भरसक प्रयास किया। उन्होंने निर्दोष लोगों की भी हत्या करने से परहेज नहीं किया। जलियांवाला बाग एक उदाहरण स्वरूप है। भगत सिंह का मानना था व्यक्तियों को सजा देकर उन्हें मार कर उनके विचारों को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता।

 

राख का हर एक कण

मेरी गर्मी से गतिमान है

मैं एक ऐसा पागल हूं

जो जेल में भी आजाद है। ।

भगत सिंह ऐसे क्रांतिकारियों में थे जिनका रोम-रोम देश के प्रति समर्पित था। उनके कण-कण से देश की भावना प्रतीत होती थी। वह अंतिम दिनों में भी जब जेल के सलाखों के पीछे थे। तब भी वह इतने स्वतंत्र और गौरव महसूस कर रहे थे। जिसने देश के लिए एक संघर्ष क्रांति उत्पन्न की थी।

 

हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली

ये मुस्ते खाक है फानी रहे ,रहे न रहे। ।

आज भगत सिंह को युवा पीढ़ी उनके विचारों से प्रेरित है , उनके क्रांतिकारी संघर्ष को अपने जीवन में अपनाना चाहती है। जिसे भगत सिंह पहले ही कह चुके थे – मैं रहूं ना रहूं मेरे ख्याल और मेरे विचार सदैव इस देश में विद्यमान रहेंगे।

 

 

सीने पर जो जख्म है , वह सब फूलों के गुच्छे हैं

हमें पागल ही रहने दो , हम पागल ही अच्छे हैं। ।

स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए भगत सिंह के भीतर एक पागलपन एक उग्र क्रांतिकारी का रूप देखने को मिलता था। जिन्हें लोग चोट और जख्म बताते थे , उन सभी को वह फूल के रूप में स्वीकार करते थे।  स्वयं को देश के प्रति दीवाना ही रहने देने की बात करते थे।

 

 

किसी भी कानून की पवित्रता  , तब तक बनी रहती है

जब तक वह लोगों के  , अधिकारों का हनन न करे। ।

क्रांतिकारियों का स्पष्ट मानना था कोई भी कानून की पवित्रता तब तक संभव है , जब तक वह कानून किसी के अधिकारों का हनन न करे।  कानून अधिकारों की रक्षा के लिए होते हैं , नाही उनके हनन के लिए। तत्काल समय में कानून व्यवस्था निष्पक्ष कार्य नहीं कर रही थी। यह व्यवस्था अंग्रेजों के अनुसार थी।

 

सरफरोशी की तमन्ना , अब हमारे दिल में है

देखना है जोर कितना , बाजु-ए-कातिल में है। । 

अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करते हुए जब राजगुरु , सुखदेव , भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई तब भी वह मदमस्त होकर यही गा रहे थे।  वतन के खिलाफ कुछ कर गुजरने की तमन्ना हमारे दिल में है। अब शत्रुओं के बाजुओं में कितनी शक्ति है वह अब देख लेंगे। इस प्रकार के अद्वितीय क्रांति को जगाते हुए , इन महान आत्माओं ने अपने प्राणों की आहुति राष्ट्रहित में दे दी।

 

 

सेवा ही करनी है तो निस्वार्थ भाव से करो

 क्या कोई अपनी माता से मूल्य मांगता है। ।

भगत सिंह राष्ट्र को अपनी माता मानते थे , एक पुत्र की भांति अपने भारत माता की सच्ची सेवा करने के लिए तत्पर थे। वह अन्य क्रांतिकारियों और युवा को यही बताते थे , सेवा करनी है तो उसका मूल्य , लाभ-हानि ना सोचे। क्या अपनी माता की सेवा करते हुए लाभ-हानि के विषय में सोचा जाता है ?

 

 

पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही गुलामी की

मानसिकता को मैं और नहीं सह सकता

इस निष्क्रियता की भावना को त्याग कर

में क्रांति की भावना में बदल बदल दूंगा । ।

भारतीय जन सामान्य में सहिष्णु और शांत प्रवृत्ति की प्रगाढ़ता के कारण अन्याय को भी सहने की भावना जागृत हो रही थी। यही कारण है गुलामी को भी उन्होंने स्वीकार कर लिया, किंतु अपना उग्र स्वभाव नहीं दिखाया। इस गुलामी को युवा पीढ़ी ने स्वीकार नहीं किया। उनके निष्क्रियता और कायरता को भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों ने जोश , उत्साह और संघर्ष के लिए प्रेरित किया।

 

 

वादे जो किए थे जो तुमने क्या उसे निभाते हो

फिर बोलो किस मुंह से मेरा जन्मदिन मनाते हो। ।

सामान्य लोगों में यही भावना होती है , वह वचन देते हैं , कसमें खाते हैं किंतु निभाते नहीं है। भगत सिंह के फांसी होने पर यहां की जनता ने अनेको-अनेक कसम खाई थी , वचन लिया था किंतु उन सभी को भूल चुके हैं। फिर भी उनके जन्मदिन के लिए उत्साह दिखाते हैं। इस जन्मदिन से बढ़कर मातृभूमि की सेवा है।

 

 

स्वतंत्रता प्रत्येक मानव का अधिकार है  

हम इसे छीन कर लेंगे यही मेरा प्रण है। ।

स्वतंत्रता सभी को पसंद है , चाहे वह पशु पक्षी ही क्यों ना हो। मनुष्य तो फिर भी श्रेष्ठ माना जाता है। यह परतंत्रता कैसे स्वीकार कर ले , स्वतंत्रता के लिए भगत सिंह ने संघर्ष करके भी प्राप्त करने का प्रण लिया था।

 

 

क्रांति मानव जाति का एक अपरिहार्य अधिकार है

स्वतंत्रता सभी का एक

कभी ना खत्म होने वाला जन्मसिद्ध अधिकार है

श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है। ।

स्वतंत्रता मानव जाति के लिए परम आवश्यक है। मानव जाति का उद्धार स्वतंत्रता से ही संभव है। क्रांति को उत्पन्न करना किसी भी कार्य की पूर्ति करना मानव पर निर्भर है। मेहनत और सच्ची लगन से , किसी भी क्रांति को सफल बनाया जा सकता है।

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