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हिंदी कहानियां Hindi stories for class 8 – शिक्षाप्रद कहानियां

शिक्षाप्रद हिंदी कहानियां – Hindi stories for class 8

 

आज हम पढ़ेंगे 3 powerful short hindi stories for class 8 students with moral in hindi and english.

 

कर भला हो भला

वेदांत और प्रथम दोनों अच्छे मित्र थे वह कक्षा 6 में पढ़ते थे । मार्च का महीना था विद्यालय में परीक्षा आरंभ हो गई थी। वेदांत अपने दादा जी से

कहता है ! दादाजी आप मुझे आज स्कूल छोड़ने चलेंगे ? दादाजी ने कहा ! हां बेटा क्यों नहीं तुम तो मेरे प्यारे पोते हो। मैं तुम्हें क्यों नहीं छोड़ने चलूंगा ? वेदांत तैयार हुआ विद्यालय के लिए निकला। दादाजी ने स्कूल का थैला अपने पीठ पर लाद लिया और हाथ में की पानी की बोतल। दादाजी ऐसे चल रहे थे मानो वह स्वयं विद्यालय पढ़ने जा रहे हो। कुछ दूर आगे चलने पर वेदांत का प्रिय मित्र प्रथम मिल जाता है। वेदांत अब अपने दादाजी को कहता है , दादाजी ! अब हम दोनों मित्र विद्यालय चले जाएंगे आप घर चले जाइए। दादाजी से अपना थैला लेकर दोनों मित्र विद्यालय की ओर चल पड़ते हैं।

आज दोनों मित्रों की हिंदी विषय की परीक्षार्थी थी। दोनों मित्र आपस में परीक्षा के विषय में बातचीत करते हुए विद्यालय की ओर चले जा रहे थे। कुछ दूर चलने पर उन्हें रास्ते के किनारे एक बूढ़ी अम्मा लहूलुहान अवस्था में गिरी पड़ी मिली। शायद उन्हें किसी गाड़ी वाले ने चोट पहुंचाई थी। वेदांत , प्रथम से कहता है चलो हमें अम्मा जी की सहायता करनी चाहिए। प्रथम ने आज विद्यालय में परीक्षा होने की बात बताई। विद्यालय में देर हो जाएगी यह भी बताया। वेदांत ने कहा कि यह अम्मा जी बहुत परेशान है , हमें इनकी सहायता अवश्य करनी चाहिए। दोनों मित्रों में बात होती है। दोनों अम्मा की सहायता के लिए चले जाते हैं। दोनों मित्रों ने पार्क में खेल रहे कुछ बच्चों को बुलाया और उनकी सहायता से अम्मा जी को रिक्शे पर बिठाकर अम्मा जी के घर की ओर ले कर चले।

अम्मा जी के घरवाले कल रात से अम्मा जी को ढूंढ रहे थे। अम्माजी बाजार निकली थी और रास्ता भूल जाने के कारण घर नहीं पहुंच पाई थी। घरवाले अम्माजी को देखते ही खुश हो गए।दोनों मित्रों को शाबाशी देते हुए खूब सराहना की , दोनों मित्रों को काफी प्रसन्नता थी कि आज उन्होंने एक नेक काम किया। उन्हें इस बात का भी दुख था कि आज उनका हिंदी विषय की परीक्षा छूट गयी। वह उदास मन से विद्यालय की ओर गए , वहां बाहर खड़े मायूस भाव से अपनी परीक्षा छूट जाने पर पछता रहे थे , तभी अचानक विद्यालय का चौकीदार दौड़ता हुआ आया वेदांत और प्रथम को आवाज देकर बुलाया ! अरे दोनों इधर आओ। आज किसी कारण से परीक्षा देर से प्रारंभ हुई तुम यहां क्यों खड़े हो , जल्दी पंहुचो अपनी कक्षा मे ।

दोनों मित्रों के उत्साह की कोई सीमा न थी। दोनों ही खुशी से उछल पड़े और कक्षा की ओर चले गए। उन्हें गुरुजी की बात याद आई जो वह प्रार्थना के समय बताते थे ” प्यारे बच्चों जो दूसरों की सहायता करते हैं , उनकी ईश्वर स्वयं सहायता करते हैं। ”

नैतिक शिक्षा –

इस कहानी के माध्यम से हमें शिक्षा मिलती है कि जो दूसरों की सहायता करते हैं उनकी सहायता स्वयं भगवान करते हैं , इसलिए सबकी भलाई करते जाइए आपकी भलाई भगवान करेगा।

Moral of this short story – God helps those who helps themselves. The moral of these hindi stories for class 8 students will inspire them in their lives. With this story the students will get value of helping others.

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कीमती पत्थर / कीमत के जानकार

पराग को लिखने और रचना करने का शौक था। वह बहुत ही सुन्दर और आकर्षक कविता , कहानी और ग़ज़ल लिखा करता था। लेकिन उसके इस गुण का कोई मूल्य नहीं समझता था।लोग उसका उपहास उड़ाते थे क्युकी वह कुछ तोतली भाषा बोला करता था। घरवाले भी उसे ताना मारते रहते कि , तुम किसी काम के नहीं, बस कागज काले करते रहते हो।

पराग बड़ा ही स्वाभिमानी और संस्कारी लड़का था वह किसी की सहायता अवश्य करता था , किन्तु दूसरों की सहायता नहीं लेता था।घर वाले जब पराग को ताना मारने लगे वह तो यह ताना उसके दिल में घर कर गया। उसके अन्दर हीन-भावना घर कर गयी|

पराग एक जौहरी मित्र से मिला और अपनी सारी व्यथा बतायी | जौहरी मित्र ने उसे एक पत्थर देते हुए कहा – जरा मेरा एक काम कर दो। यह एक कीमती पत्थर है। बाजार में इसका मूल्य क्या है यह पता लगाओ तो बड़ी कृपा होगी। बस इसे बेचना मत।पराग दूसरों का कार्य बिना विलम्भ के कर दिया करता था। वह पत्थर लेकर बाजार की और चला। वह पहले एक कबाड़ी वाले के पास गया। कबाड़ी से मो भाव हुआ वाला बोला – पांच रुपये में मुझे ये पत्थर दे दो।

पराग सब्जी वाले के पास गया , सब्जी वाले ने उसका मूल्य एक किलो आलू लगाया। युवक मूर्तिकार के पास गया , मूर्तिकार ने कहा – इस पत्थर से मै मूर्ति बना सकता हूँ , मूर्तिकार ने एक हजार मूल्य लगाया। आख़िरकार युवक वह पत्थर लेकर रत्नों के विशेषज्ञ/जानकार के पास गया। विशेषज्ञ ने पत्थर को परखकर बताया – यह पत्थर बेशकीमती हीरा है जिसे तराशा नहीं गया। करोड़ो रुपये भी इसके लिए कम होंगे।

पराग जब तक अपने जौहरी मित्र के पास आया , तब तक उसके अन्दर से हीन भावना गायब हो चुकी थी।पराग को वास्तविकता का पता चल चूका था । लोग अपने विवेक के अनुसार ही दूसरे लोगो को जांचते है।

नैतिक शिक्षा –

हरेक व्यक्ति में कुछ खासियत होती है बस पहचान करने वाले पारखी की जरुरत होती है। जीवन में जब परेशान हो तो सच्चे मित्र से मिलिए वह आपके समस्या का हल निकालने में आपकी सहायता करेगा।

Moral of this short story – This short story for class 8 students teaches us value that we should respect our identity and also love ourselves. This is very important that we should give values by hindi stories for class 8 stundents.

 

शिव का धनुष किसने तोड़ा  ( Hindi stories for class 8 )

एक समय की बात है कक्षा 6 के विद्यार्थी शरारत कर रहे थे। अचानक विद्यालय में शिक्षा अधिकारी के आगमन की सूचना मिली। सभी शिक्षक अपनी अपनी कक्षाओं में जा पहुंचे। विद्यार्थी शांत और होनहार विद्यार्थी की भांति पुस्तक पढ़ने लगे।

शिक्षा अधिकारी का आगमन जब कक्षा 6 B में हुआ सभी विद्यार्थी पढ़ने में मग्न थे , अध्यापक सभी विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। शिक्षा अधिकारी के आगमन पर पूरी कक्षा शांत भाव से खड़ी हो गई। अधिकारी के आदेश पर सभी विद्यार्थी यथास्थान बैठ गए। शिक्षा अधिकारी ने देखा विद्यार्थी इतने होनहार हैं , विद्ययार्थियों से कुछ प्रश्न किया जाए। उन्होंने एक प्रश्न किया बच्चों शिव का धनुष किसने तोड़ा था ?

पूरी कक्षा में ऐसा सन्नाटा पसरा जैसे अमावस की रात को घने वन में सन्नाटा पसरा हुआ होता है। शिक्षा अधिकारी ने एक बालक को खड़ा किया और उनसे आग्रह किया कि वह उत्तर दें। बालक अभी शरारत करके ही बैठे थे , इसलिए वह बालक समझा कि हमारी शरारत पकड़ी गई। किसी विद्यार्थी ने धनुष तोड़ दिया होगा। इस पर वह बालक बालोचित रोते हुए बोला सर यह धनुष मैंने नहीं तोड़ी कहकर तीव्र / जोर से रोने लगा।

शिक्षा अधिकारी ने चुप करा कर उसे बिठाया कोई बात नहीं आप बैठ जाओ फिर उन्होंने दूसरे तीसरे कई विद्यार्थियों को खड़ा करके प्रश्न का उत्तर मांगा , किंतु सभी विद्यार्थी वही प्रक्रिया दोहराते रहे जो पहले विद्यार्थी ने दोहराई थी। इस पर शिक्षा अधिकारी अचंभित हो गए , कि इतना छोटा सा जवाब किसी विद्यार्थी को नहीं पता ?

उन्होंने कक्षा में उपस्थित शिक्षक महोदय से ही वह प्रश्न पूछ लिया। अब शिक्षक महोदय भी अभी-अभी कक्षा में ही पधारे थे , उन्होंने भी जवाब दिया श्रीमान किसी बच्चे ने तोड़ दिया होगा। प्रिंसिपल साहब से मिल लीजिए वह ठीक कर देंगे। अब शिक्षा अधिकारी और चक्कर खा गए और शिक्षा व्यवस्था का हाल जान गए।

कुछ समय के उपरांत शिक्षा अधिकारी , प्रधानाचार्य कार्यालय में गए। कक्षा में पूछे गए प्रश्न – शिव का धनुष किसने तोड़ा ? प्रधानाचार्य जी से पूछा। इस प्रश्न के जवाब में प्रधानाचार्य ने उत्तर दिया श्रीमान किसी विद्यार्थी ने खेलते-खेलते तोड़ दिया होगा। कोई बात नहीं नया धनुष मंगवा देंगे।

अंततः शिक्षा अधिकारी को एक छोटे से प्रश्न का जवाब भी ना मिल सका। विद्यालय में मिलने वाली शिक्षा की गुणवत्ता को वह जान चुके थे , वास्तविकता को पहचान चुके थे। इस पर शिक्षा अधिकारी नाराज होते हुए शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा के गुणवत्ता को सुधारने के लिए प्रधानाचार्य को आदेश देकर गए और निरंतर औचक निरीक्षण की बात भी कह गए।

Moral of this short hindi story – There are many lags in our education system. And that is what students are learning which is not good. By this hindi stories for class 8 students will get value of learning things themselves.

Purpose of this hindi stories for class 8 students is only that students should learn, and know the basic values. Which they should must have in their character.

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