Hindi story on coronavirus – कोरोना वायरस पर हिंदी कहानियां

हिंदी विभाग में आप सभी का स्वागत है। कोरोना वायरस के कारण भारत में लॉक डाउन हुआ जिसके कारण लोगों को घर में दिन व्यतीत करने पड़े। किस प्रकार के किस्से सभी के घरों में घटते होंगे। इस विषय पर हमने बहुत सारी कहानियां नीचे लिखी है। जिन्हें पढ़कर आपको अवश्य ही अच्छा लगेगा। कुछ शिक्षा वाली कहानियां भी है , जिसे सभी को पढ़ना चाहिए। यह कहानी एक-दूसरे के साथ शेयर भी कर सकते हैं। Hindi story on coronavirus

तो आइए कहानियां का अध्ययन शुरू करते हैं

1. कोरोना से जंग – Hindi story on coronavirus

रमेश अपने माता-पिता के साथ इटली से लौटा था। डॉक्टर ने जांच किया तो पता चला वह , सभी कोरोना वायरस की चपेट में आ गए हैं। इससे बचाव के लिए उन्हें अलग-अलग कमरों में रहना पड़ेगा।

ऐसा ही हुआ तीनों को अलग – अलग कमरों में कोरंटीन होना पड़ा। वो भी समाज से दूर होकर ।

रमेश क्योंकि अभी बच्चा था।

उसका मन अकेले नहीं लग रहा था।

रमेश के दोस्तों ने एक युक्ति निकाली –

सभी दोस्त अपने-अपने घरों से एक समय पर रमेश के साथ ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से बातें करते और खेल खेलते। रमेश भी इस खेल में शामिल हुआ करता था। कई बार रमेश निरीक्षक की भूमिका भी निभाता था।

वह अपने दोस्तों की बनी हुई पेंटिंग और लिखी हुई कविता की जांच करके उनको नंबर देता।

देखते ही देखते एक दिन ऐसा आया कि जब उन्होंने कोरोना जैसे महामारी को मात दे दी और सभी ठीक हो गए। रमेश ने अपने दोस्तों का धन्यवाद किया।

किंतु अभी भी वह लोग अपने अपने घरों में रहकर महामारी के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं।

निष्कर्ष –

बीमारी कितनी भी बड़ी हो , उससे घबराना नहीं चाहिए , निडर होकर लड़ना चाहिए। अंत में विजय लड़ने वाले की ही होती है।

दोस्त और सगे संबंधी अगर साथ हो तो हौसला सौ गुनी बढ़ जाती है।

 

2. नजमा ने बनाया मास्क – Hindi story on coronavirus

नजमा अभी आठ वर्ष की है। वह पांचवी कक्षा में पढ़ती है। कोरोना महामारी के कारण स्कूल काफी दिनों से बंद है। लोगों को परेशान होते वह रोज टेलीविजन पर देखती थी। अब्बू से मालूम हुआ यह बीमारी मुंह और सांस के माध्यम से शरीर के भीतर दाखिल होता है। इसको रोकने के लिए सरकार ने मास्क लगाने और हाथ धोने के लिए सलाह दी है।

बच्चों के प्रिय प्रधानमंत्री मोदी जी ने मास्क घर पर तैयार करने के लिए कहा है ।

नजमा ने अपनी मम्मी की सहायता से अपने परिवार के लिए मास्क बनाया।

यह मास्क खूबसूरत था , आसपास के लोग भी तारीफ करने लगे।

बस क्या था……….

नजमा को मास्क बनाने की प्रेरणा मिली।  घर बैठकर नजमा ने खूब सारा मास्क बनाया और जरूरतमंद लोगों को फ्री में दिया। लोगों ने मास्क देने के लिए नजमा की सराहना की , और उसे खूब सारा आशीर्वाद दिया। नजमा के खुशी का कोई ठिकाना नहीं था।

नजमा ने  खूब ढेर सारा मास्क बनाने का काम चालू किया।

अब बड़ी मात्रा में वह सफाई करने वाले योद्धा को तथा गरीब लोगों को सुबह-शाम खूब सारा मास्क बाटा करती है।

निष्कर्ष – जरूरतमंदों की मदद करने से खुशियां चार गुनी हो जाती है। आपको भी ऐसा कार्य करना चाहिए।

 

3. और बन शानदार बर्थडे

कोरोना वायरस से बचने के लिए सरकार ने देश भर में लोक डाउन किया हुआ है। डिंपी का बर्थडे अगले दिन था , मगर सभी दुकानें बंद थी। दोस्त भी अपने घर से बाहर नहीं निकल रहे थे।

डिंपी को लगा इस बार उसका बर्थडे बिल्कुल बेकार चला जाएगा।

इस बार  मिठाई और केक भी खाने को नहीं मिलेंगा ।

यह सोचकर डिंपी उदास हो रही थी ,

अगले दिन उसका बर्थडे था।  पापा – मम्मी भी डिंपी को उदास देखकर निराश हो रहे थे। दोनों ने डिंपी के उदासी को दूर करने के लिए ठान लिया। अगले दिन मम्मी ने बिस्किट और दूध का प्रयोग करके खूबसूरत केक तैयार किया।

पापा ने अपनी लाडली बेटी के लिए गरमा – गरम जलेबी बनाने की ठानी।

देखते ही देखते खूब सारी जलेबी बन गई।

बस क्या था……

डिंपी ने पुराने कॉपी से खूबसूरत रंग – बिरंगी बर्थडे की टोपी बनाई।

अपने दोस्तों को वीडियो कॉल के माध्यम से इनवाइट किया।

सभी दोस्त अब ऑनलाइन जुड़ चुके थे , फिर डिंपी में केक काटा और सभी दोस्तों ने एक साथ हैप्पी बर्थडे टू यू का गाना गाया।

डिंपी जो कल तक उदास थी , आज उसकी खुशी का कोई अंत नहीं था।

आज से पहले उसने ऐसा बर्थडे कभी नहीं मनाया था। वह आज का बर्थडे मना कर बहुत खुश थी। डिंपी की खुशी को देखकर माता-पिता भी बेहद खुश हुए।

 

4.  टेस्टी नाश्ता – Hindi story on coronavirus

लोक डाउन के समय सभी लोग घर में बैठे-बैठे बोर हो रहे थे। स्कूल बंद हो गया था , पढ़ाई – लिखाई हल्की – फुल्की घर में ही हो रही थी। दिन भर टी.वी देखना और फिर गाना सुनना इसके अलावा और कोई काम भी नहीं था।

सभी भाई – बहन ने मिलकर तय किया –

आज घर में नाश्ता हम लोग मिलकर बनाएंगे और सभी को सरप्राइज़ देंगे।

ऐसा सोचकर मीना ने झटपट इंटरनेट से नास्ता बनाने की रेसिपी निकाली।

रितेश और सत्यम ने झटपट कार्य आरंभ किया।

मीना उनका साथ देती।

तीनों भाई-बहन ने मिलकर आधे घंटे में स्वादिष्ट पकौड़े और चटनी तैयार कर लिये ।

जब भाई – बहन ने मिलकर पकौड़ी और चटनी पूरे घर वालों को खिलाया।

सभी को पकौड़ी और चटनी इतनी पसंद आई कि झटपट पकौड़ीयां खत्म हो गई।

अब क्या था लोगों को और पकोड़ियां चाहिए थी।

मम्मी किचन में गई और कुछ ही देर में ढेर सारी पकोड़ियां और चाय की प्याली लेकर वापस आ गई।

आज का दिन वाकई बहुत अच्छा था।

भाई – बहन ने मिलकर काम किया था , इसकी उन्हें खूब प्रशंसा मिल रही थी।

आज से पहले उन्होंने ऐसा काम कभी नहीं किया था।

 

5. लो बढ़ गया काम

छुट्टी मे सभी लोगों को आराम मिल जाता है।खेलना – कूदना , खाना-पीना और आराम करना।

कोरोना वायरस के कारण लोक डाउन के कारण घर में बैठी मां – बहन और अन्य औरतों का काम पहले से अधिक बढ़ गया।

घर पर छुट्टी के कारण बैठे बच्चे और अन्य सदस्यों के कारण महिलाओं की गृहस्थी और बढ़ गई।

सुबह से लेकर शाम तक सारा समय घर के रसोई घर में ही बीतने लगा।

पहले जब बच्चे स्कूल जाया करते थे , घर के अन्य सदस्य ऑफिस या अपने कामों पर निकल जाया करते थे।

तब घर की महिलाएं कुछ समय आराम कर लिया करती थी।

टेलीविजन , सीरियल तथा कुछ समय अपने सहेलियों से या मायके में भी बातचीत किया करती थी।

अब वह नहीं हो सकता।

दिन-रात बस घर-परिवार की सेवा में ही निकलने लगा।

घर के अन्य सदस्यों को भी चाहिए जिस प्रकार उन्हें आराम चाहिए , वैसे ही घर की महिलाओं को भी कुछ आराम मिले।

इसलिए साफ-सफाई तथा रसोई घर के काम में भी हाथ बटाना चाहिए।

बच्चों को भी इस प्रकार के काम सिखाने चाहिए।

ताकि भविष्य मे वह आत्मनिर्भर बन सकें उनके चरित्र का विकास हो सके।

 

6. बैठे बैठे हो गए बोर – Hindi story on coronavirus

आज से पहले इतनी बोरियत कभी नहीं हुई थी। बोरियत और समय के महत्व का आभास अब से पहले कभी नहीं हुआ था। सरकार ने जैसे ही घर में रहने का नियम लगाया। कुछ दिन लगा , यह समय हंसते – खेलते निकल जाएगा।

2 दिन बीत गए

4 दिन बीत गए

मगर धीरे-धीरे अब यह समय बोझ लगने लगा।

जैसे – तैसे फिल्म देखकर , टेलीविजन देख कर तथा चित्रकला कर समय बितने लगा। मगर समय कितना बिता सकते हैं ?

कभी लूडो , शतरंज भी खेल लेते मगर इतना समय नहीं बितता ,  जितना बिताना चाहिए ।

धीरे – धीरे टाइम टेबल भी बन कर सामने तैयार हो गया।

सुबह उठना , नाश्ता – पानी कर कुछ समय योगाभ्यास करना , अखबार , न्यूज़ पेपर , समाचार देखना और पढ़ना। दोस्तों से बातचीत करना , कुछ किताबों का अध्ययन करना। घर में साफ – सफाई करना , कुछ रसोई घर में काम देखना , ऐसे करते-करते समय धीरे-धीरे कटने लगा।

कुछ दोस्तों से बात हुई , वह घर के कामों में अपने आप को नहीं लगा पा रहे थे।

इसलिए  वह बैठे-बैठे बोर हो गए। ऐसे लोगों का कहना नालायक पेट भी नहीं मानता , इसने अपना दायरा बढ़ाना चालू किया।अब उनको तोंदू कहा जा सकता है।

वाकई अब बैठे बैठे बोर होने लगे।

7. खरगोश हुए पागल – Hindi story on coronavirus

घर बैठकर समय काटना मुश्किल हो जाता है , ऐसे समय में जब काफी दिनों तक घर के भीतर ही रहना पड़े। बच्चों के स्कूल बंद हो गए , बड़ों के ऑफिस बंद हो गए , सभी घर के भीतर बंद हो गए।

अनंत का जन्मदिन था , पिताजी अनंत की खुशी को ध्यान में रखकर , एक खरगोश घर ले आए। अनंत को खरगोश काफी प्यारा लगा  वह उसके साथ दिन भर खेलता।

खाना खिलाता यहां तक कि बाहर निकलकर हरी – हरी घास काट कर लाता।

यह सब देख छोटे भाई विनायक ने भी जिद पकड़ ली । अब उसे भी एक खरगोश चाहिए था।

पिताजी ने विनायक के लिए भी एक खरगोश लाकर दिया।

अब क्या था घर में दो – दो खरगोश हो गए। दोनों अपने-अपने खरगोश का दिन भर ध्यान रखते।

भूख लगे तो खाना खिलाते , ना लगे तब भी खिलाते

दिन भर खुद जागे रहते और खरगोश को भी सोने नहीं देते।

ऐसा करते-करते खरगोश दोनों भाइयों के प्यार से परेशान हो गए।

दोनों खरगोशों में न जाने आपस में क्या बात किया –

अगले दिन से दोनों का नया कारनामा चालू हो गया।

दोनों भाई उठकर जब खरगोश के पास आते , उन्हें बाहर निकाल देते।

उनके लिए हरी – हरी घास लाकर देते।

खरगोश अपनी योजना के अनुसार घास लेते झट कभी सोफे के नीचे , तो कभी पलंग के निचे।

दिन भर भाई उन्हें पकडने के लिए ढूंढते। इतना परेशान हो गए कि , उन्होंने खरगोश को परेशान करना छोड़ दिया।

अंत में थक – हार कर अनंत और विनायक में कहा खरगोश पागल हो गए , अपने घर में नहीं रहते दिन भर छुपे रहते।

 

8. लौट आए पुराने दिन Hindi story on coronavirus

शांति सदन में मोहन और सुनंदा अरसे से दोनों अकेले रह रहे थे। उनके दो बेटे उत्तम और सुंदर थे।  एक बेटी जिसका नाम श्यामा था । सभी शादीशुदा हो गए।

उत्तम कनाडा की एक लेबोरेटरी में काम करता है। सुंदर प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पोस्ट पर है। श्यामा अपने ससुराल में रहती है। सभी अपनी-अपनी निजी जिंदगी में व्यस्त हैं। एक-दूसरे से बात तो होती है पर फोन और कंप्यूटर के माध्यम से।

17 मार्च 2020 को मोहन और सुनंदा के शादी की 45 वी सालगिरह थी। उत्तम , सुंदर और श्यामा ने मिलकर अपने मम्मा-पापा को सरप्राइज़ देने। साथ ही मिलकर सालगिरह सेलिब्रेट करने की योजना बनाई।

सभी योजना के अनुसार 16 मार्च को शांति सदन में एक-एक करके उपस्थित होने लगे ।

एक गाड़ी शांति सदन के बाहर आकर रुकी। उस गाड़ी से उत्तम अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ उतरा। मोहन और सुनंदा की धुंधली आंखों ने उत्तम को पहचान लिया। दौड़ते हुए द्वार के बाहर दोनों आ खड़े हुए। पहले गले लगाने की दौड में मोहन की चप्पल पीछे ही छूट गयी और सुनंदा जीत गयी ।

उत्तम से अभी मिलना हो ही रहा था ,

एक गाड़ी द्वार पर और आ खड़ी हुई। इस गाड़ी से सुंदर और उसकी पत्नी साथ में एक बेटी उतरी। मोहन और सुनंदा के आंख भर आए। जिन बेटों के लिए यह आंखें तरसती थी , आज वह दोनों बेटे आँखों के सामने थे।

सभी एक – एक कर सामान उठाने लगे।

एक गाड़ी की होरन और बजी , सबने थैला वापस जमीन पर रख दिया।

यह गाड़ी श्यामा के पति की लग रही थी।

वास्तव में उस गाड़ी से श्यामा उसके पति और एक नन्ही सी परी गोद में।  एक नटखट गोपाल नाना-नानी कहते हुए उतरा । आज शांति सदन में वाकई खुशहाली थी।

सभी खुशी-खुशी मिलने लगे।

कल विशेष दिन था , इसकी तैयारी में सभी लग गए।

कोरोना महामारी का संकट पूरे विश्व पर छाया हुआ था। सरकार ने इसके खतरों से बचाव के लिए , देशभर में लोक डाउन , घर में रहने की घोषणा की। सभी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दिया। बाजार सड़कें सब बंद हो गई।

सभी के सामने अब वापस अपने-अपने घर जाने की समस्या आन खड़ी हुई।

उत्तम , सुंदर और श्यामा तीनों एक जगह बैठे।  पुरानी बातों को याद करने लगे –  ‘ कैसे बचपन में हम लड़ा करते थे ,  घर में किस प्रकार खुशी का जीवन जीते थे। आज वह सब घर-गृहस्ती में नसीब नहीं होता। ‘

काफी देर बाद यह निर्णय लिया गया – अब हम लोक डाउन के समय अपने उन पुराने समय को फिर से जिएंगे। अपने बच्चों को भी इसमें शामिल करेंगे।सभी नंन्हे भाई-बहन भी ठीक से मिल लेंगे। न जाने फिर कब समय मिले !

बस क्या था , घर के सभी लोग इस निर्णय में शामिल हुए।  शांति सदन में खुशहाली आ गई। वर्षों से वीरान पड़े मोहन और सुनंदा का हृदय भी जगमगा रहा था।

 

9. बन गए पकोड़े

लोक डाउन का समय था। सभी घर में रहकर अपना दिन काट रहे थे। बच्चों की छुट्टी हो गई थी। ऑफिस , बाजार , दुकाने सब बंद थे।

सिम्मी , जितेन दोनों भाई-बहन है। सिम्मी कक्षा पांचवी में पढ़ती है , जितेन कक्षा तीसरी में।

स्कूल से लोक डाउन के कारण छुट्टी मिल गई थी। लॉक डाउन के लगभग बिस दिन बीत गए थे। सभी घर में बोर हो रहे थे।

एक दिन की बात है , सभी लोग सो रहे थे। तभी सिम्मी और जितेन ने मिलकर एक प्रोग्राम बनाया।

यह प्रोग्राम था – सभी को सरप्राइज़ देने का।

सिम्मी अपनी माँ के साथ ज्यादा रहती थी। उसे माँ के द्वारा बनाए गए , पकोड़े की रेसिपी अच्छे से याद थी।

फटाफट सिम्मी ने बेसन घोला।

जितेन चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ाता है और तेल को गर्म करता है।

सिम्मी ने भाई के साथ मिलकर झटपट पकोड़े तैयार कर लिया।

जितेन ने फ्रिज में रखे टमाटर की चटनी के साथ प्लेट त्यार किया।

सभी को सरप्राइज़ देने के लिए टेबल सज गया था।

पकोड़े देखकर सभी बहुत खुश हुए

आज उनके चेहरों पर खुशी थी , जो लोक डाउन के कारण गायब हो चुकी थी।

 

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2 thoughts on “Hindi story on coronavirus – कोरोना वायरस पर हिंदी कहानियां”

  1. बहुत ही अच्छी कहानियों का संग्रह यहां पर आपने उपलब्ध कराया है जो मुझे पढ़कर बहुत अच्छा लगा और साथ ही साथ मेरा अच्छा समय व्यतीत हुआ.

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