जादुई नगरी का रहस्य – Jadui kahani

जादुई नगरी का रहस्य ( दादी नानी की सुन्दर कहानियां ) – यह कहानी मेरे बचपन की कहानियों में से एक है , जिसे मैं अपनी दादी अथवा नानी से सुना करता था।

आज के समय ऐसा कोई साधन नहीं है , जो बच्चों का प्राकृतिक रूप से मानसिक विकास कर सके। पूर्व समय में जहां बच्चों को पारंपरिक शिक्षा प्रदान की जाती थी। दादा – दादी , नाना – नानी अपने पोते – पोती  अथवा नाती – पोतों की आरंभिक शिक्षा और मस्तिष्क के तीव्र करने का जिम्मेदारी संभालते थे। आज के परिस्थितियों में वह संभव नहीं रहा वह सब भूली बिसरी यादें रह गई है।

आज बुजुर्गों का स्थान मोबाइल अथवा संचार माध्यमों ने ले लिया है।

यह कहानी आपको पसंद आए ऐसी आशा करते हुए  लेख आरंभ करते हैं –

जादुई नगरी का रहस्य – Jadui kahani

सोमलपुर के राजा सूर्य प्रताप बेहद ही प्रतापी और लोकप्रिय राजा थे। उनके राज्य पाठ में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। प्रजा सुखी से अपना जीवन यापन कर रही थी। सूर्य प्रताप का एक पुत्र तेज प्रताप था जो विवाह योग्य हो गया था , किंतु वह बाल हट के कारण विवाह नहीं करना चाहता था।

विवाह के लिए जब भी पिता या कोई कहता तो उसके सामने तेज प्रताप अपनी शर्त रख दिया करता वह शर्त थी –

‘ जो भी कन्या उससे विवाह करेगी उसे सुबह-शाम एक-एक लात मारेगा। ‘

इस शर्त पर कोई भी कन्या विवाह करने को राजी नहीं होती। कोई बिरला ही होगी जो इस प्रकार की शर्त को स्वीकार करेगी । राजा इस चिंता में दिन-प्रतिदिन परेशान रहते थे। तेज प्रताप राजा का इकलौता बेटा था। अगर विवाह नहीं हुआ तो उनका राज – पाठ और वंश आगे कैसे बढ़ेगा यही चिंता राजा  को दिन – रात परेशान किए रहती थी।

राजा ने दूर से दूर राज्यों में भी अपने बेटे के लिए न्यौता भेजा।

किंतु तेज प्रताप की शर्त के सामने कोई भी विवाह के लिए राजी नहीं होता। काफी समय बीत गए थे।

एक कन्या रागिनी ने इस प्रकार की शर्त और चुनौती को स्वीकार कर विवाह करने के लिए हां भर दिया। समय और मुहूर्त देखकर दोनों का विवाह संपन्न हुआ।

सभी विधि – विधान पूर्ण कर जब दोनों कोहबर में पहुंचे , तेज प्रताप ने अपनी नवविवाहिता पत्नी रागिनी को अपनी शर्त की याद दिलाई और एक लात मारने की बात कही। रागिनी ने कहा आप मुझे लात तभी मार सकते हैं , जब आप स्वयं से कमाने योग्य हो जाएंगे। अभी पिताजी के कमाई पर आप मुझे लात नहीं मार सकते। तेज प्रताप गुस्से से तमतमाया , कोहबर से बाहर चला आया और राज्य छोड़कर कमाई के लिए निकल गया।

सवेरे जब तेज प्रताप की खोज की गई तो पता चला वह कमाई के लिए बाहर चला गया है।

किसी ने ढूंढने का प्रयत्न नहीं किया क्योंकि रागिनी ने सभी को रोक दिया था।

तेज प्रताप दो दिन का मार्ग तय करके एक राजा के राज्य सुंदरनगर पहुंचा।

वहां उसे अजीबोगरीब घटनाएं देखने को मिलती है।

पहली जादुई घटना

तेज प्रताप को चलते – चलते एकाएक दीवार के नीचे लगी चूहों की महफिल पर नजर पड़ती है। जहां से मधुर संगीत का विस्तार हो रहा था। ऐसी संगीत जो अभी तक तेज प्रताप ने कही और सुनी नहीं थी।

वह वहीं खड़े होकर देखता रहा।

वहां चूहों की एक टोली थी , एक चूहा सुरीली आवाज में गाना गा रहा था , दूसरा ढोलक की थाप पर महफ़िल जमाए हुए था।  कोई चूहा हारमोनियम की स्वर लहरियों को छेड़े हुए था। यही नहीं अन्य विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्र बड़े ही सुगम संगीत का संचार कर रही थी। ऐसा देखकर तेजप्रताप को यकीन नहीं हो रहा था कि यह चूहे ऐसा कार्य कर सकते हैं।

सभी चूहे अपना संगीत समाप्त कर बिल में वापस चले गए।

तेज प्रताप उस संगीत को भुला नहीं पा रहा था बैठे-बैठे काफी देर हो गई थी।

वह संगीत उसके कानों से हटने का नाम नहीं ले रही थी। तभी एकाएक उसकी एकाग्रता भंग हुई सामने महफिल समाप्त हो चुकी थी।

 

दूसरी जादुई घटना

वह उठा और कुछ दूर आगे चला , वहां नगर में एक नदी थी जिसे पार करके आगे का रास्ता पूरा करना था। तेजप्रताप उस नदी को पार करने की  तरकीब सोच ही रहा था कि उसके पास एक सियार नाव लेकर प्रस्तुत हो जाता है।

कहींए मालिक क्या आपको नदी पार करनी है?

तेज प्रताप की आंखें फटी की फटी रह जाती है।

यह क्या ! सियार नाव चला रहा है और वह आदमी को बैठाकर उस पार करेगा ? वह सोच में पड़ गया।

सियार ने पुनः आवाज लगाई

मालिक क्या आपको नदी पार करनी है?

हा… हा ,,हां ! मुझे नदी पार करनी है

आइए नाव में बैठिए !

तेजप्रताप सधे हुए कदमों से नाव पर सवार हो गया और कुछ ही देर में वह नदी के पार उतर गया।

 

तीसरी जादुई घटना

तेज प्रताप ने इससे पहले अजीबोगरीब इस प्रकार की घटनाएं कभी नहीं देखी थी। वह कुछ सोच समझ भी नहीं पा रहा था कि सामने एक तालाब नजर आता है।

उस तालाब पर एक हंस और हंसिनी का जोड़ा कपड़ों को धो रहा था।

कपड़ा धोने के बाद आसमान की ओर उछाल देता था। वह कपड़ा वापस जब जमीन पर आता तो सुखकर अपने आप तह लगा हुआ होता था। तेज प्रताप को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था। क्या इस प्रकार आसमान में कपड़ा उछालने पर सुखकर और तह लग कर आ सकता है ?

खैर अब उसे धीरे-धीरे आभास हो रहा था कि यह कोई जादुई नगरी है यहां अजीबोगरीब घटना सामान्य हो सकती है।

थकान के कारण वह वही पेड़ के नीचे बैठ गया और हंस – हंसिनी के चमत्कार को अपनी आंखों से देख रहा था।

हंस – हंसिनी अपना काम समाप्त कर वहां से उड़ गए।

तेजप्रताप वही पेड़ की छांव में बैठा रहा।

धूप कम होने पर वह आगे की ओर प्रस्थान करता है।

 

चौथी जादुई घटना

तेजप्रताप अब राज्य के मुख्य बाजार में पहुंच गया था , शाम हो चली थी, बाजार में रोनक होने लगी थी। चारों ओर एक से बढ़कर एक सामान बिक रहे थे कहीं खिलौने , तो कहीं पकवान , कहीं सुंदर और रेशमी वस्त्र। पास ही एक बुढ़िया बैठी थी उसकी टोकरी में दो हाथ की ककड़ी , और चार हाथ का बीज था । यह पहेली तेजप्रताप को समझ नहीं आई , वह फिर आश्चर्यचकित रह गया। इससे पहले उसने दो हाथ की ककड़ी और चार हाथ का बीज नहीं देखा था।

कुछ देर रुककर उस पहेली को समझने का प्रयत्न कर रहा था।

पास ही एक खंभे पर बड़ा सा पोस्टर लगा हुआ था , जिस पर शहर में हो रही अजीबोगरीब घटना को बताने और सच साबित करने पर मुंह मांगा इनाम राजा द्वारा देने की बात लिखी गई थी।

तेजप्रताप  को अपने मेहनत से कमाई करना था , ताकि वह अपने शादी की शर्तों को पूरा कर सके।

जो पत्नी को सुबह-शाम एक-एक लात मारने की थी।

वह झटपट राजा के पास पहुंच गया। झटपट अपने आंखों से देखी गई सभी चारों घटनाओं के बारे में राजा को विस्तार से बताया।

राजा – यह तुम विश्वास से कैसे कह सकते हो ?

तेजप्रताप – जी हुजूर ! मैंने अपनी आंखों से देखा है।

राजा – क्या तुम वह सब मुझे दिखा सकते हो ?

तेजप्रताप – हां अवश्य आप मेरे साथ चलें !

राजा – अगर तुमने नहीं दिखाया तो तुम्हें आजीवन बंदी बना लिया जाएगा।

तेजप्रताप – जी हुजूर किंतु एक बार चल कर देख ले।

तेजप्रताप – अगर मैं आपको सच दिखा दूंगा तो आप मुझे आधा राज्य दे देंगे।

राजा – अवश्य हम वचन के पक्के हैं।

तेजप्रताप – तो महाराज जल्दी करें , मैं आपको सभी घटनाओं को दिखा सकता हूं।

 

चारों जादुई घटनाओं का प्रमाण क्या तेजप्रताप दे पायेगा ? जानते है

राजा अपने मंत्री और कुछ दरबारियों के साथ तेज प्रताप के पीछे – पीछे चलते हैं।  तेज प्रताप एक-एक करके सभी जगह जाता है।

पहले वह बुढ़िया के पास पहुंचता है।  बुढ़िया दूर से सेना आती देख घबरा कर वहां से भाग जाती है। तेजप्रताप को वहां बुढ़िया नजर नहीं आती।

महाराज यहीं बैठकर बुढ़िया खीरा और बीज बेच रही थी , न जाने कहां चली गई।

यह घटना तुम्हारी गलत साबित हुई।

ठीक है महाराज अली घटना दिखाना चाहता हूं

राजा – चलो !

वह सभी को लेकर उस तालाब के पास पहुंचा जहां हंस -हंसिनी कपड़े धो रहे थे।  हंस – हंसिनी  इतने दूर से राजा और उसकी सेना को आते देख अपनी गठरी बांधी और आसमान में उड़ गए।

तेज प्रताप राजा को लेकर जब तालाब पर पहुंचे तो वहां कोई नहीं था।

राजा – यह घटना भी झूठी साबित हुई

तेज प्रताप सभी को लेकर उस नदी के पास पहुंचा , जहां सियार नाव चला रहा था। सियार इतनी बड़ी सेना आती देख घबरा गया।सोचने लगा –

मैं अकेला जीव इतनी बड़ी सेना को कैसे पार करा सकूंगा ?

विचार कर वह नाव छोड़कर भाग खड़ा हुआ।

तेज प्रताप की यह बात भी राजा के सामने झूठ साबित हुई।

तेजप्रताप तुम्हारी यह सभी घटनाएं गलत साबित हो रही है।  तुम्हें हमारे साथ मजाक नहीं करना चाहिए था।

नहीं महाराज मैं मजाक नहीं कर रहा हूं , अपनी आंखों देखी बातें आपको बता रहा हूं। बस अगली घटना को देख लीजिए जहां चूहे मधुर संगीत बजा रहे थे।

सभी एक-एक करके नदी पार कर गए।

तेजप्रताप उन सभी को लेकर उसी दीवार के नीचे पहुंच गया जहां चूहों की मंडली जमी हुई थी और चूहे नाच – गाना कर रहे थे।

किंतु चूहों ने भी दूर से ढेर सारे लोगों को आता देख अपना सारा सामान लेकर बिल में छुप गए थे।

तेज प्रताप चारों घटनाओं को साबित नहीं कर पाया था।  अतः उसे बिना देरी के बंदी बना लिया गया , वह अपनी बातों पर डटा रहा किंतु राजा ने एक बात नहीं सुनी और कठोर सजा देने का ऐलान कर दिया।

 

तेजप्रताप की खोज आरम्भ

काफी दिन बीत गए थे , इधर तेज प्रताप की नवविवाहिता पत्नी रागिनी चिंतित होने लगी थी। अगर वह कमाई के लिए गया था और कमाने लगता तो लात मारने की लालसा में तुरंत लौटकर आता। किंतु लगता है उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो गई है।

अब तेज प्रताप की खोज करनी चाहिए।

रागिनी ने सुंदर युवक का वेश धारण किया और तेज प्रताप की खोज में निकल गई।

ढेरों राज्य में तलाश की किंतु तेजप्रताप का कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था।

रागिनी ढूंढते – ढूंढते उसी राज्य में पहुंची जहां तेजप्रताप को कैद किया गया था।

रागिनी ने भी वह सभी चारों घटनाओं को बारी-बारी देखा और खंबे पर लगा उस इनाम के बारे में भी पढ़ा, जो राजा के द्वारा घटना को सच साबित करने के बाद दिया जाना था। रागिनी को विश्वास हुआ कि हो ना हो तेज प्रताप को इसी राजा ने बंदी बनाया हुआ है।

यह राजा की कोई चाल है जिसे कोई व्यक्ति सच साबित नहीं कर पाता।

 

तेजप्रताप को कैद से छुड़ाने की रणनीति

रागिनी ने बिना कुछ देरी किए वापस अपने राज्य लौट आई।

अपने राज्य आकर रागिनी ने एकसेना त्यार किया जिसमे दर्जन बिल्ली ,  दो कुत्ते  ,  दो चील और एक शेर का बच्चा पाला। दोनों को भरपूर ट्रेनिंग/प्रशिक्षण  दिया गया।

एक महीने बीत गए रागिनी ने दिन-रात एक करके इन सभी को इतना अभ्यस्त कर दिया था , कि रागिनी के बताए अनुसार कोई भी कार्य कर सकते थे। जब सभी रागिनी के आदेशों के अनुसार अभ्यस्त हो गए तो रागिनी उन सभी को लेकर उस राज्य की ओर राजकुमार के भेष में रवाना हुई।

रास्ते में कोई उससे पूछता अरे भैया क्या तुम करतब दिखाने वाले हो ?

राजकुमार सभी को ना करते  हुए यह सभी पालतू है ऐसा कहकर आगे बढ़ता गया।

सफर पूरा कर राजकुमार सुंदरनगर पहुंच गया।

 

रागिनी की सेना का लाज़वाब मोर्चाबंदी

राजकुमार ने चूहों के पास बिल्लियों की फौज तैनात कर दी और उन्हें उसी प्रकार संगीत बजाने के लिए कह कर आगे बढ़ गया । आगे सियार मिला उसके पास दोनो कुत्तों को तैनात करके आगे तालाब जहां हंस – हंसिनी कपड़े धोया करते थे , वहां दोनों चील को तैनात कर आगे बढ़ जाता  है।

शहर पहुंचकर बुढ़िया के पास शेर के बच्चे को तैनात करके राजा के पास दरबार में राजकुमार हाजिर हो जाता है।

आंखोदेखी  पूरी घटना को साबित करने की बात कहकर राजा को अपने साथ चलने का आग्रह करता है। राजा अपनी शर्तों को राजकुमार से बताता है ताकि बाद में कहना – सुनना ना रहे।

राजकुमार पूरी तैयारी के साथ आया था , वह राजा को अपने साथ लेकर चला।

राजा और उसके मंत्री को बुढ़िया ने दूर से आता देख भागने की कोशिश की , किंतु शेर का बच्चा पूरी मुस्तैदी से तैयार था।

उसने बुढ़िया को भागने नहीं दिया।

राजा ने बुढ़िया को देख लिया पीछे खड़े शेर के बच्चे को भी देखा और कुछ – कुछ समझ लिया। आज  राजकुमार तैयारी के साथ आया है , किंतु अपनी बात से पीछे नहीं हट सकता था।

इसलिए उसे अगले घटना को देखने के लिए आगे बढ़ना पड़ा।

आगे तालाब के पास हंस-हंसिन को भी राजकुमार ने दिखाया जो कपड़े धो कर आसमान की ओर उछाल कर फेंकते थे। वह कपड़ा सुखकर और तह होकर वापस जमीन पर आ गिरते थे।

राजा ने वह करतब भी अपनी आंखों से देख लिया।

राजकुमार पुनः राजा को लेकर नदी के पास पहुंचा।

वहां सियार नाव चला रहा था , सियार ने राजा और उसके मंत्रियों को बारी-बारी नदी पार करवाई।

सभी नदी के उस पार थे।

राजकुमार ने दोनों कुत्तों को उसकी चौकसी में लगे रहने का आदेश देकर आगे बढ़ गया।

अगली घटना चूहे की थी इतनी बड़ी सेना आती देख चूहे भागने की सोच रहे थे। किंतु एक दर्जन बिल्लियों का पहरा था , बिल्लियों ने उन्हें कड़ी चेतावनी और जान से मारने की धमकी भी सुनाई।

चूहों की हालत टाइट हो गई , वह संगीत बजाते रहे।

राजा ने आकर चूहों के महफिल को भी देख ली ।

 

राजा को हुई कैद

शर्त के अनुसार राजा का पूरा राज्य राजकुमार का था। राजा के नौकर – चाकर , महल और सैनिक भी। राजकुमार ने तुरंत सैनिकों को आदेश दिया इस राजा को बंदी बना लो। आज से मैं तुम्हारा राजा हुआ।

शर्त के अनुसार राजा अपने आपको तथा पूरे राज्य को हार गए थे। सिपाहियों ने फ़ौरन राजा को बंदी बना लिया।

पूरे राज्य में नए महाराज की चर्चा फैल गई थी , सभी नए महाराज से मिलना चाह रहे थे।

राजकुमार ने सभी बंदियों को रिहा करने का आदेश दिया।

किंतु उससे पहले वह सब से मिलना चाहते थे । सभी बंदियों को उनके रिहाई का आदेश सुनाया गया , सभी खुशी के मारे नाचने – गाने लगे। उन्होंने आज़ाद होने की उम्मीद ही छोड़ दी थी।

सभी बंदियों को रिहाई के लिए तैयार किया गया और राजा के सामने एक – एक करके पेश किया गया।

तेज प्रताप को रागिनी जो अभी पुरुष भेष में राजा बनकर बैठी थी पहचान गई। तत्काल  आदेश दिया –

” इस व्यक्ति को अलग एक तरफ रोक कर रखा जाए “।

ऐसा ही हुआ तेज प्रताप की समझ में नहीं आ रहा था। सभी बंदियों की रिहाई हो गई , किंतु मुझे क्यों रोका गया ? क्या मैंने कोई गलती की ,  जिसकी सजा मिल रही है?

तेज प्रताप के प्राण सूख रहे थे , तभी राजा ने आदेश  दिया –

” इस व्यक्ति को अतिथि गृह में ठहरने की व्यवस्था की जाए”।

राजा के आदेश का फ़ौरन पालन हुआ। तेजप्रताप को अतिथिगृह में रोका गया।

 

रागिनी के राजा रूप का भेद खुल गया

राजा जब अपने दरबार से फुर्सत पाए तो अकेले में अतिथि गृह तेजप्रताप से मिलने पहुंच गए। राजा को देखकर तेज प्रताप ने उनसे माफी मांगना आरंभ किया। किंतु राजा की मुख पर एक मुस्कान थी।

राजा पुरुष वेश त्याग कर अपने वास्तविक स्त्री रूप में आ जाता है। तेज प्रताप इस स्त्री रूप को जानता था , क्योंकि वह उसकी पत्नी रागिनी थी।

तेज प्रताप के आंखों में पश्चाताप का भाव था , वह अपनी पत्नी को लात मारने की शर्त पर ब्याह कर लाया था।

आज उसके जीवन की रक्षा उसी पत्नी के द्वारा संभव हो सकी।

तेजप्रताप  ग्लानि के भाव में अपनी पत्नी के चरणों में ज्यों ही  गिरकर चरण पकड़ना चाहा ,

रागिनी पीछे हट गई और कहा –

” आप मुझे पाप का भागी ना बनाएं , यह तो मेरा पत्नी धर्म था , आपकी रक्षा करना मेरा अधिकार ही नहीं धर्म बन जाता है और आप के ऊपर कोई विपदा आए तो मैं कैसे बर्दाश्त कर सकती थी।”

रागिनी ने पुनः अपना पुरुष रूप धारण कर राज्य में यह ऐलान करवा दिया कि वह स्वेच्छा से अपना राजपाट तेज प्रताप को सौंप कर अपने राज्य लौट जाएगा। ऐसा ही हुआ अगले दिन पूरे विधि – विधान से राजकीय सम्मान के साथ तेज प्रताप का राज्याभिषेक हुआ।

राजा को सुंदरनगर का राज पाठ सौंपा गया।

इधर राजकुमार नाटकीय ढंग से उस राज्य से गायब हो गया।

कुछ दिनों बाद राजा तेज प्रताप अपनी पत्नी को राजकीय ठाट – बाट के साथ लेने अपने पिता के राज्य जाता है।

रागिनी जो पूरी घटना की नायिका थी वह , तेज प्रताप के साथ अपने नए राज्य में खुशी-खुशी चली जाती है। बस क्या था रागिनी और तेजप्रताप अपने वैवाहिक जीवन को सुंदरनगर में जीने लगे।

 

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Final words

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