क्रिया विशेषण की परिभाषा, भेद और उदाहरण

प्रस्तुत लेख में हम क्रिया विशेषण की परिभाषा, भेद और उदाहरण का विस्तृत रूप से अध्ययन करेंगे।

यह अवयव / अविकारी शब्दों के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है। क्रियाविशेषण को हमने सरल बनाने का भरसक प्रयत्न किया है। जिसके लिए हमने विद्यार्थियों के कठिनाई स्तर की पहचान भी की है।

इस लेख का अध्ययन आप विद्यालय, विश्वविद्यालय तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कर सकते हैं।

क्रिया विशेषण की परिभाषा

” जो शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं उन्हें क्रिया विशेषण कहते हैं। ”

  • सुरेश सुंदर गाता है।
  • मुकेश वहां रहता है।
  • राधा प्रतिदिन पढती है।
  • मैं कल स्कूल जाऊंगा।
  • तुम वहां बैठो।
  • रेलगाड़ी धीरे धीरे चल रही है।

उपर्युक्त गाढ़े काले अक्षर वाले शब्द क्रिया की विशेषता को बता रहे हैं अतः यह क्रिया विशेषण है।

क्रिया विशेषण के भेद

क्रिया विशेषण के चार भेद माने गए हैं –

  1. रीतिवाचक क्रिया विशेषण Adverb of Manner
  2. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण Adverb of Quantity
  3. कालवाचक क्रिया विशेषण Adverb of Time
  4. स्थान वाचक क्रिया विशेषण Adverb of Place

1. रीतिवाचक क्रिया विशेषण Adverb of Manner

जिन क्रिया विशेषण से क्रिया के होने की रीति या विधि का ज्ञान हो उन्हें रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। इसकी पहचान इन अवयव शब्दों से कर सकते हैं – ऐसे, वैसे, कैसे, धीरे, कदाचित, इसलिए, अवश्य, तक, सा, तो, हां, जी, यथासंभव, अचानक आदि से कर सकते हैं।

  • किसी भी कार्य को यथासंभव पूरा किया गया।
  • गाड़ी धीरे चल रही है।
  • कल वह जाने की बात कर रहा था इसलिए उसे पूछा था।
  • मैं ध्यानपूर्वक पढ़ाई करता हूं।
  • मोहन अकाउंट का काम भली-भांति जानता है।
  • सुरेश बैंक तक अवश्य चला जाएगा।

2. परिमाणवाचक क्रियाविशेषण Adverb of Quantity

जिन क्रिया विशेषण शब्दों से परिमाण या मात्रा का ज्ञान होता हो उन्हें परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं। इसकी पहचान इन अवयवों के माध्यम से किया जा सकता है – बहुत, खूब, अत्यंत, अति, बस, काफी, ठीक, यथेष्ट, कुछ, किंचित, जरा, थोड़ा, अधिक, इतना, कम, उतना, बारी-बारी, तिल-तिल, थोड़ा-थोड़ा।

  • सुरेश बहुत कार्य करता है।
  • मोहन के पास खूब सारा धन है।
  • अप्सरा अत्यंत सुंदर होती है।
  • किसी भी चीज की अति नुकसान देह होती है।
  • काफी देर हो गया बस करो।
  • अचानक काफी सारा काम आ गया।
  • ठीक मात्रा में मिलान करना अनुभवी व्यक्ति को आता है।
  • कुछ पैसे उधार मिल जाते तो काम बन जाता।
  • जरा सी बात पर लड़ाई करने को उतारू हो जाते हैं।
  • छोटी-छोटी बात पर अधिक विवाद हो जाता है।
  • इतना कमाना चाहिए जितने में घर परिवार चल सके।
  • दवाई कम मात्रा में खानी चाहिए
  • उतना खाओ जितने में तुम्हारा पेट भरे।

3. कालवाचक क्रिया विशेषण Adverb of Time

जिस क्रिया विशेषण शब्द से क्रिया के होने का काल ज्ञात होता हो उसे कालवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। इसकी पहचान प्रमुख अवयव शब्दों से की जा सकती है – आज, कल, अभी, तुरंत, रात भर, दिन भर, आजकल, नित्य, हर बार, कई बार, प्रतिदिन, रोज, बहुधा, सदैव, लगातार, अभी, कभी, सायं, प्रातः।

  • मोहन को आज ही घर जाना पड़ा।
  • बाकी सभी कार्य कल कर लूंगा।
  • यह कार्य बहुत आवश्यक है अभी कर लेना चाहिए।
  • घर से फोन आते ही मोहन तुरंत चला गया।
  • बारिश रात भर होती रही।
  • दिनभर सुरेश का इंतजार करता रहा किंतु वह नहीं आया।
  • आज कल में मोटरसाइकिल खरीदने वाला हूं।
  • मोहन को नित्य समझाता रहता हूं।
  • कई दिनों से इंजन बनाने की कोशिश कर रहा हूं मगर हर बार विफल हो जाता हूं।
  • अब से कर्मचारियों का हिसाब प्रतिदिन रखना पड़ेगा।
  • कार्यालय में अब रोज आधा घंटा अधिक विश्राम का मिलेगा
  • कुछ कर्मचारी कार्यालय सदैव लेट आते हैं
  • मोहन लगातार पुकारता रह गया किंतु वह सुना तक नहीं
  • बिजली कल रात से गई हुई थी अभी आई है
  • आज का कार्य कभी फुर्सत में करना पड़ेगा।
  • इंदौर से मेरी माता जी सायं में आने वाली है।
  • प्रातः मुझे कार्यालय जल्दी जाना होगा।

4. स्थान वाचक क्रिया विशेषण Adverb of Place

जिन क्रिया विशेषण शब्दों से स्थान या स्थिति का ज्ञान होता है, उसे हम स्थान वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। इसकी पहचान के लिए मुख्य अवयव शब्द है – यहां, वहां, बाहर, भीतर, इधर, उधर, दाएं, बाएं, सर्वत्र, पास, दूर, नीचे, ऊपर, चारों ओर आदि।

  • महात्मा बुद्ध ने यहां बैठकर तपस्या की थी।

इस उदाहरण में आप देख सकते हैं कि यहां शब्द का प्रयोग हुआ है जिसके कारण यह स्थान वाचक बन गया है। आइए स्थान वाचक के अन्य उदाहरण पढ़ते हैं।

  • वहां के वातावरण में ऐसी शुद्धता है कि मन भाव विभोर हो जाता है।
  • घर से बाहर निकल कर देखा तो बेहद कड़ी धूप थी।
  • समुद्र के भीतर अपार खनिज संपदा भरी पड़ी है।
  • इधर कोई आया था किंतु मैं देख नहीं पाया।
  • उधर कचहरी है जहां दूर-दूर से लोग आते हैं।
  • हॉस्पिटल की दाएं और मेरा विद्यालय है।
  • कक्षा में सुरेश के बाई और मैं बैठता हूं।
  • ईश्वर का वास सर्वत्र है।
  • विचार विमर्श के लिए महात्माओं के पास जाना चाहिए।
  • दूर रहकर प्रेम की गहराई का पता चलता है।
  • जहाज के नीचे खास प्रकार के पंखे लगे होते हैं जो जहाज को आगे धकेलने का कार्य करते हैं।
  • कुछ पनडुब्बी ऐसी है जो कई महीनों के बाद जल के ऊपर दिखती है।
  • चारों और हरियाली फैली हुई है।

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निष्कर्ष

उपरोक्त अध्ययन से स्पष्ट होता है कि जो शब्द क्रिया की विशेषता को बताते हैं उसे हम क्रिया विशेषण कहते हैं। इसके प्रमुख चार भेद रीतिवाचक, परिमाणवाचक, कालवाचक, स्थान वाचक क्रिया विशेषण है। जिसका विस्तृत रूप से अध्ययन हमने ऊपर किया है।

संबंधित विषय से प्रश्न पूछने के लिए कमेंट बॉक्स में लिखें हम आपके प्रश्नों के उत्तर तत्काल देने का प्रयत्न करेंगे।

 

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