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हिंदी में लघु कहानियाँ | बच्चों के लिए लघु कहानी | Short hindi stories | चतुराई की जीत

हिंदी में लघु कहानियाँ | बच्चों के लिए लघु कहानी | Short hindi

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चतुराई की जीत

 

एक गांव में चतुरी अपनी पत्नी के साथ रहता था। गांव में जो थोड़ा-बहुत मिल जाता था ,उसी  से  उस का गुजारा चल रहा था।  एक दिन उसने सोचा क्यों ना शहर जाकर कमाया जाए ,वह शहर चला गया ,वहां उसने अपनी सूझबूझ से कुछ ही दिनों में ढेर सारा पैसा कमा लिया। अब वह गांव लौटना चाहता था ,तभी उसे याद आया कि गांव के रास्ते में जो जंगल पड़ता है। वहां डाकू रहते हैं यदि उन्हें पैसे दिख गए तो वह सब ले लेंगे। उसने कुछ पैसों से एक घोड़ी  ख़रीदकर उसके पूछ में ₹50 बांध दिए अब वह गांव की और चल पड़ा। रास्ते में डाकुओं ने उसे घेर लिया ,जब उन्होंने चतुरी से पैसे मांगे तो चतुरी ने कहा मेरे पास पैसे कहां है ,जो थे उसकी घड़ी खरीद ली लेकिन इस घोड़ी  की एक खासियत है कि अगर इसकी पूंछ पर मारो तो ₹50 देती है। डाकू को विश्वास दिलाने के लिए चतुरी ने घोड़ी की पूंछ पर डंडा मार कर बताया ,घोड़ी की पूंछ से ₹50 गिर गए यह देखकर डाकुओं का सरदार बोला अब यह घोड़ी हमारी हुई। चतुरी ने कहा अगर बिना मोल दिए घोड़ी को लोगे तो पैसे नहीं देगी उसने हजार रुपए में डाकुओं को घोड़ी बेच दी।

 

घर पहुंचकर चतुरी ने सारी बात अपनी पत्नी को बताई और सतर्क रहने को कहा। अगले दिन वह एक समान दिखने वाले दो खरगोश खरीद कर लाया उसने पत्नी से कहा यदि डाकू आ जाए तो मुझे बुलाने को कहे तो खरगोश के कान में मुझे बुलाने को कहना और उसे बाहर छोड़ देना बाकी सब मैं संभाल लूंगा। उधर बार-बार डाकुओं ने घोड़े की पूंछ पर मारा लेकिन पैसे होते तो निकलते गुस्से से लाल पीले होते हुए डाकू चतुरी के घर पहुंचे ,और चतुरी की पत्नी से चतुरी को बुलाने को कहा उसकी पत्नी ने खरगोश से छतरी को बुला लाने को कहा थोड़ी देर में चतुरी हाथ में खरगोश लिए घर आया।

 

खरगोश की करामात देखकर डाकुओं का गुस्सा काफूर हो गया। उन्होंने सोचा खरगोश तो बड़े काम का है हमारी पत्नियां हमें बूलाने के लिए परेशान रहती है ,यह खरगोश उसके काम आएगा। उन्होंने हजार रुपए में खरगोश खरीद लिया घर जाकर डाकुओं ने खरगोश की समझदारी के बारे में अपनी पत्नियों को बताया एक  दिन उसकी पत्नी ने डाकू को बुला लाने के लिए खरगोश को छोड़ा तो वह लौट कर ही नहीं आया। डाकू समझ गए कि फिर चतुरी ने एक बार हमें बेवकूफ बना दिया है वह फौरन उसके घर पहुंचे और चतुरी को एक बोरी में बंद कर नदी में डूबने चल दिए थोड़ी दूर चल कर के थक गए और पास के मंदिर में खाना खाने बैठ गए वहां से एक ग्वाला अपनी गाय चराकर गुजर रहा था ,उसने बोरी  में से किसी की आवाज सुनी तो बोरी  का मुंह खोल दिया।

 

उसने चतुरी से  बोरी में बंद होने का कारण पूछा चतुरी ने कहा क्या बताऊं भाई यह लोग जबरदस्ती मेरी शादी राजकुमारी से करवाने ले जा रहे हैं ,लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता ,क्योंकि राजकुमारी कानि  है। यह सुनकर ग्वाला बोला मैं शादी करने के लिए तैयार हूं। उसने चतुरी को बोरी से बाहर निकाला और खुद बोरी में बंद हो गया। थोड़ी देर बाद डाकू आए और बुरी को उठाकर नदी में फेंक दिया लौटते समय रास्ते में उन्हें गाय के साथ चतुरी दिखाई दिया। वह हैरत  से उसे देखते रह गए चतुरी बोला तुमने मुझे नदी में फैका  इसलिए यह गाय मुझे मिली ,अगर और ज्यादा गहराई में चला जाता तो हीरे जवाहरात मिलते। हीरे-जवाहरात का नाम सुनते सरदार के मन में लालच आ गया। बोला चतुरी भाई तू हमें हीरे जवाहरात दिलवा दे चतुरी उन्हें नदी पर ले गया और बोला तुम सब एक एक भारी पत्थर गले में बांध लो ,डाकुओं ने अपने -अपने गले में पत्थर बांध लिए चतुरी ने एक-एक करके सभी डाकुओं को नदी में धक्का दे दिया उसे हमेशा के लिए डाकुओं से छुटकारा मिल गया वह गाय लेकर घर लौट आया और अपनी पत्नी के साथ खुशी खुशी रहने लगा।

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2 thoughts on “हिंदी में लघु कहानियाँ | बच्चों के लिए लघु कहानी | Short hindi stories | चतुराई की जीत”

  1. यह कहानी मुझे बचपन में मेरे बड़े पापा जी ने सुनाया था आज वो दिन बहुत याद आती है।

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