5 मछली की कहानी नैतिक शिक्षा के साथ

बाल मनोरंजन पर आधारित आज का विशेष लेख हमारे नंन्हे मेहमानो को समर्पित है। आज के समय में बाल सुलभ तथा ज्ञानवर्धक कहानियां लुप्त होती जा रही है। दादी-नानी का वह संरक्षण बच्चों को नहीं मिल पा रहा हे जो पहले कभी मिला करता था। प्रस्तुत लेख में हम ढेर सारी कहानियां पढ़ेंगे जो मछलियों पर आधारित है। इसके माध्यम से हम कुछ शिक्षा और मनोरंजन प्राप्त करेंगे। आशा है हमारे नन्हे मेहमानों को यह लेख पसंद आए।

धर्मात्मा हो गए मालामाल ( मछली की कहानी )

विजय नगर के प्रसिद्ध साहूकार के यहां नौकर चाकर और व्यापारियों की हमेशा भीड़ रहती थी। छोटे छोटे व्यापारी उनसे सामान लेते और व्यापार करने के लिए देश-विदेश जाया करते थे। साहूकार के यहां मोहन नाम का एक छोटा व्यापारी था जो धार्मिक प्रवृत्ति का था। लोग उसकी धार्मिक प्रवृत्ति को देख कर उसे धर्मात्मा कहते थे। मोहन, साहूकार से पैसे और कुछ सामान लेकर व्यापार करने दूर निकल गया उसे जलमार्ग से जाना था।

जब वह यात्रा पर निकला, उसने एक जगह पड़ाव डालने का सोचा। बढ़िया सा किनारा देख अपनी नाव किनारे लगा दी और शौच क्रिया आदि से निर्वित होकर भोजन करने लगा। भोजन करते हुए उसने पाया कि नदी के भीतर काफी मात्रा में मछलियां है, शायद वह चारे का इंतजार कर रही थी। मोहन जैसा की धार्मिक प्रवृत्ति का था, उसने नाव से पैसे और सामान उतार कर बाजार में बेच दिया और उससे एक गाय खरीद लाया। गाय की सेवा करता और उससे प्राप्त दूध से मेवे तैयार करता उन मेवे को नदी में मछलियों के लिए चारा डाल दिया करता। ऐसा करते हुए उसे लगभग 15-20 दिन हो गए।

गाय की सेवा करता उससे प्राप्त दूध से वह स्वयं के लिए उपयोग करता और बचे हुए से मावा तैयार कर मछलियों के लिए चारा तैयार करता। मछलियां मोहन के व्यवहार और उसकी निष्ठा से प्रसन्न न थी। मछलियों के समूह ने बैठक कर मोहन को अपने सेवा के बदले कुछ देने की योजना तैयार की। मछलियों ने सहमति बनाकर समुद्र की गहराइयों से अनमोल रतन, हीरे-जवाहरात निकाल कर मोहन जहां ठहरा था वहां लाकर उगल दिया।

देखते ही देखते बेशकीमती रत्नों का टीला बन गया

मोहन बेहद प्रसन्नता उसे खूब सारा माल मिल गया था।

अब उसे इस बात का भय था कि वह इन बेशकीमती रत्नों को अपने घर कैसे ले जाए? विचार कर उसने युक्ति लगाई गाय के गोबर का कंडा तैयार किया और उस कंडे में उन बहुमूल्य रत्नों को छिपा दिया। ऐसा ही किया अपने नाव पर भर कर वहां से अपने नगर के लिए रवाना हो गया।

मोरल

जब आप किसी भी प्राणी का निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं, तो आप चाहे-अनचाहे पुण्य कमा रहे होते हैं। मोहन ने व्यापार पर ध्यान लगाने के बजाय मछलियों को चारा खिलाने पर ध्यान दिया, क्योंकि मछलियां भूखी थी और किसी भूखे का पेट भरना ईश्वर की सेवा होती है।

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चतुर मछली

सुंदर बगीचे के बीच एक खूबसूरत तलाब था, जिसमें कमल के ढेर सारे फूल खिले थे। यह तालाब रंग-बिरंगे कमल के फूलों से भरे थे। तालाब के आसपास खूब सारे घने वृक्ष जिन पर अनेकों किस्म के फल लगे थे। मोहसीन और शादाब अपने भेड़ को चारा खिला कर लौट रहे थे। धूप तेज थी वह तालाब के किनारे पेड़ की छांव में लेट गए। दोनों गहरी नींद में थे आंख खुली तो उन्होंने पाया तलाब में ढेर सारी मछलियां है।

दोनों की आंखों में खुशी की लहर दौड़ गई।

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उन्होंने झटपट एक प्लान तैयार कर लिया वह तालाब से मछलियों को पकड़कर बाजार में बेचेगे और खूब सारे पैसे कमाएंगे। दोनों को बात करते एक चतुर मछली रानी ने सुन लिया। उसने झटपट अपने पूरे तालाब में घूम-घूम कर मोहसीन और शादाब के योजना की पोल खोल दी। सभी मछलियां सतर्क हो गई और उस तालाब से दूर चली गई। मोहसिन और शादाब ने जब मछलियों को पकड़ने के लिए जाल फेंका किन्तु कुछ मछलियां जो रानी की बात पर यकीन नहीं कर रही थी वह जाल में फस गई और मोहसिन, शादाब के लिए व्यापार का जरिया बन गई।

मोरल :-

अपने विवेक से कार्य करना चाहिए, किसी के द्वारा कही गई बातों पर गौर करना चाहिए और अपने समूह का साथ देना चाहिए।

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जादुई मछली की कहानी

प्राचीन शिव मंदिर के ठीक सामने एक साफ-सुथरा तलाब था, जिसमें अनेकों किस्म की मछलियां रहती थी। श्रद्धालु मंदिर में पूजा कर मछलियों को दाना खिलाते और अपने जीवन के लिए दान पुण्य कर मन्नत मांगते। यहां मछलियों की तादात काफी थी जिसके कारण मछुआरे गैर कानूनी तरीके से मछलियों का शिकार कर उनका व्यापार करते।

काफी समय से मछुआरे परेशान थे उन्हें कोई मछली तलाब से नहीं मिलती, श्रद्धालु जब दाना खिलाते तो मछलियां उन दाने को खाकर छुप जाती।मगर मछुआरों के जाल में नहीं फंसती। मछुआरों ने तरह-तरह के तरकीब लगाकर देख लिया मगर मछलियां उनके जाल में कभी ना फसती।

मछुआरों ने एक युक्ति निकाली –

उन्होंने गौर किया कि जब दाना फेंका जाता है तो वह दाना खाने के लिए एकत्रित हो जाती है, इसी अवसर का फायदा उठाकर जाल फेंका जाए। मछुआरों ने तालाब में दाना फैंकना चालू किया जिससे मछलियां एक जगह इकट्ठी हो गई और दाना खाने लगी। मछुआरों ने जैसे ही जाल फेंका सारी मछलियां जाल में कैद हो गई।

उस तालाब में एक समझदार रानी नाम की मछली थी उसके इशारों पर सभी मछलियां काम किया करती थी। जब रानी ने चालाकी से गायब होने के लिए इशारा किया तो सभी मछलियां मछुआरों के जाल से देखते ही देखते गायब हो गई। मछुआरे जब जाल को ऊपर लेकर आए उनका जाल बिल्कुल खाली था। मछुआरों ने अपना सिर पकड़ लिया उनकी सारी युक्ति और मेहनत व्यर्थ हो गई। रानी ने अपने सहेलियों को बचा लिया था उसका जादू काम कर गया।

सुनहरी मछली की कहानी

उत्तराखंड के जंगलों में देवदार वृक्ष से घिरा हुआ एक सुंदर सा तालाब जो स्वर्ग के उपवन जैसा लगता है। इस तालाब में ढेर सारी सुनहरी और रंग बिरंगी मछलियां है तुम मछलियों का आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींच लाता है। इस तालाब के किनारे बैठकर लोग अपने जीवन के सभी बातों को भूल जाते हैं और मछलियों का करतब देखते हैं।

इस तालाब में विशेष आकर्षण का केंद्र सुनहरी मछली है यह मछली अपना झुंड बनाकर चलती है आगे बुजुर्ग उसके पीछे नौजवान और बच्चे जहां भी जाते एक साथ जाते यह लोगों को अपने से बड़ों का आदर करना और परिवार को एक साथ लेकर चलने का सीख देती है। किसी भी आपदा या परिस्थिति में यह मछलियां एक साथ निर्णय लेकर कार्य करती है इसलिए यहां पर्यटकों का मन अधिक रहता है वह प्रकृति से शिक्षा लेते हैं जो शायद कहीं और आसानी से ना मिल सके।

Machhali ke maa ki Kahani

सुनंदा अपने बच्चे और परिवार के साथ खेत के बीच बने पोखरे में रहती थी। कुछ दिन पहले गांव के लोगों ने जाल फेंक कर उसके सदस्य को पकड़ लिया था जिसमें उसके दादा और पापा भी थे। सुनंदा अपने बच्चों को बहुत प्यार करती थी और अपने पास ही रखती थी।

एक दिन  बच्चे खेलते खेलते दूर निकल गए। सुनंदा अपने बच्चों का इंतजार करते रहे मगर उसके बच्चे लौटकर नहीं आए।

बच्चों के लौट आने के इंतजार में वह जागी रही, पूरी रात उसे नींद भी नहीं आई।

अगले दिन बच्चे जब लौट कर वापस घर आए तो सुनंदा ने अपने बच्चों को गले लगा लिया। ईश्वर को धन्यवाद करती रही कि उसके बच्चे सही सलामत लौट आये। मां की ममता हमेशा अपने बच्चों के लिए बनी रहती है, चाहे वह मां किसी भी रूप में क्यों ना हो।

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निष्कर्ष

उपरोक्त कहानियों का संकलन हमने बाल मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए तैयार किया है इस कहानी के माध्यम से बच्चे नैतिक शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। आशा है उपरोक्त लेख आपको पसंद हो अपने सुझाव तथा विचार कमेंट बॉक्स में लिखें।

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