Mahatma Gandhi Quotes in Hindi

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प्रस्तुत लेख में महात्मा गांधी (मोहनलाल करमचंद गांधी) जी के विचारों उनके दर्शन को कोट्स के माध्यम से लिख रहे हैं। इस लेख में आप गांधी जी के विचारों से भलीभांति प्रकट हो सकेंगे। उन्होंने अपने जीवन को किस प्रकार समाज के लिए , देश के लिए समर्पित किया था यह जान सकेंगे।

यह लेख महात्मा गांधी जी के सुविचारों को प्रकट करने में सक्षम है। इस लेख के अध्ययन उपरांत आप उनके जीवन के उद्देश्य , मानव के प्रति उनके दृष्टिकोण , समाज के प्रति लगाव आदि को भली-भांति जान पाएंगे।

महात्मा गांधी

महात्मा गांधी स्वाधीनता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभा रहे थे। वह नरम दल के मुखिया के नाम से भी प्रसिद्ध थे। एक और जहां क्रांतिकारी उग्र होकर अंग्रेजों का बहिष्कार कर रहे थे , उनके दमनकारी नीतियों को चुनौती दे रहे थे। वही महात्मा गांधी ने बिना किसी हिंसा और टकराव के अंग्रेजों का सामना किया।

उन्होंने सत्याग्रह नमक आंदोलन , पूर्ण स्वराज जैसे आंदोलनों में अपनी भूमिका निभाई उनका सफल आयोजन किया। महात्मा गांधी के व्यक्तित्व से अंग्रेजों के पसीने छूटने लगे। देश की जनता ने महात्मा गांधी को अपना नेता मानते हुए उनके नेतृत्व में अंग्रेजों का बहिष्कार किया।  उनके सामानों की होली खेली , अर्थात उनके सामानों को जलाया , बहिष्कार किया। अनेकों ऐसे आंदोलन का आरंभ हुआ जिसने अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश किया। गांधी जी के संघर्ष की अनेकों कहानियां पढ़ने को मिलती है।

महात्मा गांधी कद-काठी से बेशक छोटे और सामान्य थे , किंतु उनका नेतृत्व उनकी इच्छा शक्ति बृहद थी। उन्होंने अंग्रेजों के सामने कभी स्वयं को कमजोर नहीं आंकने दिया। सदैव उन्होंने अंग्रेजों को लुटेरे , दमनकारी तथा भारत के संसाधनों के चोर आदि ही समझ कर उनसे बात की।

गांधी जी के अनेकों आंदोलनों ने भारत में स्वाधीनता संग्राम के लिए यज्ञ में घी का कार्य किया। कितने ही बैठकों में गांधी जी ने भाग लिया , किंतु वह अंग्रेजों के झांसे में नहीं आए।

उन्होंने स्पष्ट रूप से भारत छोड़ने के लिए अंग्रेजों को विवश किया।

आज हम स्वतंत्र रूप से भ्रमण कर रहे हैं , अपने मौलिक अधिकारों का प्रयोग कर रहे हैं , स्वच्छंद वातावरण में विचरण कर रहे हैं। यह सब भारत की आजादी में भाग लेने वाले क्रांतिकारियों जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति उस यज्ञ में दे दी , उन विशाल हृदय लोगों , मतवालों के कारण ही संभव हो सका है।

हम ऐसे क्रांतिकारियों और पूर्वजों को शत शत नमन करते हैं।

 

महात्मा गांधी के सुविचार – Mahatma Gandhi Quotes in Hindi

1

तुम्हें ख़ुशी तब मिलेगी जब

अपने सोच और कथन में

सामंजस्य बैठा होगे। ।

स्वाधीनता संग्राम में लोगों की यह स्थिति थी , वह आजादी के लिए नारे तो लगाते थे , प्रोत्साहन तो देते थे किंतु ऊपरी मन से। जब उनकी भूमिका और योगदान की आवश्यकता होती थी , तब वह पीछे हट जाया करते थे। इसलिए आवश्यक है , अपने विचारों और कर्म में सामंजस्य बैठाने की।

 

2

दुनिया बदलने से पहले

स्वयं में बदलाव लाइए। ।

जो दुनिया बदलने की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं उन्हें स्वयं के भीतर झांक कर देखना चाहिए। अपने भीतर भी बदलाव की आवश्यकता है। कितने ही अवगुण हमारे भीतर विराजमान है , उस पर पहले ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

3

मेरा मन मेरा मंदिर है ,

मैं किसी को भी अपने गंदे पांव के साथ

मेरे मन से नहीं गुजरने दूंगा। ।

गांधीजी अपने मन को मंदिर मानते थे , वह अपने मन को सदैव स्वच्छ रखने की कामना करते थे। इसलिए उन्होंने समाज में स्वार्थ सिद्धि के लिए कार्य करने वाले सहयोगियों से सदैव दूरी बना कर रखा। उन्होंने कभी ऐसे लोगों का सहारा नहीं किया जो , समाज के लिए हितकर ना हो।

 

4

तभी बोलो जब वह मौन से बेहतर हो। ।

महात्मा जी शांतिप्रिय व्यक्ति थे , वह सदैव मौन रहते थे। कितना ही कठोरता उनके साथ होने के बावजूद भी वह मौन धारण किए रहते थे। वह उचित समय आने पर ही प्रतिउत्तर किया करते थे। उनका मानना था बोलने का उचित समय आने पर ही बोलना चाहिए। अतः उस से बेहतर मौन है।

Mahatma Gandhi Quotes on education

5

ऐसे जियो जैसे कि , आपको कल मरना है

और सीखें ऐसे जैसे आपको हमेशा जीवित रहना है। ।

महात्मा जी के आदर्श को आज भी समाज अपनाता है , उनको एक आदर्श पुरुष मानता है। उनके विचारों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा लेता है। उनका मानना था सीखने के समय ऐसे सीखे जैसे उसे लंबे समय तक अपने साथ रखना हो , उसका उपयोग करना हो। किसी कार्य को समाज के लिए ऐसे करो जैसे कल ही मृत्यु आणि निश्चित है।

 

6

बालक जन्म से पूर्व सीख कर आता है

प्रकृति के साथ रहकर अभ्यस्त होता है। ।

महात्मा गांधी एक बहुत बड़े शिक्षा शास्त्री भी थे , उनका मानना था बालक अपने जन्म से पूर्व ही सीख कर आता है। वह प्रकृति में रहते हुए उन सभी शिक्षा का विस्तार करता है , या अनुभव करता है जिसे वह जन्म से पूर्व ही सीख कर आया था।

 

7

जो समय बचाते हैं वह धन बचाते हैं

बचाया हुआ धन

कमाए हुए धन के बराबर होता है। ।

समय से बढ़कर कुछ मूल्यवान नहीं है , जो समय को बचाता है , समय से पूर्व कार्यकर्ता है। वह बड़े धन के समान होता है।  बचाए हुए समय को ध्यान से देखें तो वह बचाए हुए धन के समान ही है।

 

8

जब तक गलती करने की स्वतंत्रता ना हो

तब तक स्वतंत्रता का कोई अर्थ नहीं। ।

गलती की संभावना तभी होती है , जब किसी कार्य को किया जाता है। बिना कार्य किए गलती नहीं हो सकती। अतः व्यक्ति को किसी भी कार्य करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।  व्यक्ति की गलतियों से स्पष्ट होता है कि , वह कितना स्वतंत्र है।

 

Mahatma Gandhi Quotes on Leadership

9

पहले वह आप पर ध्यान नहीं देंगे

फिर वह आप पर हसेंगे

फिर वह आप से लड़ेंगे

और तब आप जीत जाएंगे। ।

व्यक्ति अपने झूठे शानो-शौकत और मद में खोया हुआ रहता है। वह अपने से नीचे के व्यक्ति को तुच्छ मानता है , उस पर ध्यान नहीं देता है।  किंतु वह व्यक्ति जैसे-जैसे आगे बढ़ता जाता है , फिर वह उसके ऊपर हंसने लगते हैं। एक स्थिति ऐसी उत्पन्न होती है , जब वह झूठा व्यक्ति आप से लड़ने को आतुर हो जाता है। यहाँ उसकी उत्तेजना होती है , जहां आपकी विजय निश्चित होती है।

 

10

आंख के बदले आंख

पूरे विश्व को अंधा बना देगी। ।

गांधीजी नरम दल के नेता माने गए हैं , वह हिंसा में विश्वास नहीं करते। वह अहिंसा को परमो धर्म मानते हैं।  जब उनसे एक थप्पड़ के बाद दो थप्पड़ की बात कही जाती थी , तब वह इस पर विश्वास नहीं करते थे। वह हिंसा से द्वारा लिया गया प्रतिशोध को गलत ठहराते हैं। इसलिए जब वह आंख के बदले आंख निकालने की बात सुनते हैं , तब वह उससे दूरी बना लेते हैं और उसका विरोध करते हैं।

 

11

बुद्धिमान लोग काम करने से पूर्व सोचते हैं

और मूर्ख लोग काम करने के बाद। ।

किसी भी कार्य को करने से पूर्व बुद्धिमान लोग उसके अंजाम तक को जान लेते हैं। मूर्ख लोग बिना सोचे समझे किसी भी कार्य को करने के लिए उत्तेजित हो जाते हैं , उसका परिणाम तक को नहीं जान पाते।

महात्मा गाँधी के अनमोल वचन

12

क्रोध को जीतने में

मौन सबसे अधिक सहायक है। ।

गांधीजी का मानना था किसी के क्रोध और हिंसा का जवाब मौन और अहिंसा से दिया जाना चाहिए। इसलिए वह कभी भी उत्तेजित होकर कार्य नहीं करते थे।

 

13

अपनी बुराई हमेशा सुने

अपनी तारीफ कभी ना सुने। ।

जो लोग प्रतिशोध और बदला लेने की भावना रखते हैं , वह सदैव तारीफ ही करते रहते हैं , बुराई को उजागर नहीं करते। एक अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्ति को आप और उत्साहित और तारीफ करेंगे , तो अपराध के क्षेत्र में और प्रोत्साहित होगा। जबकि ऐसे व्यक्तियों को उसकी कमियां और उसके परिणाम को बताना चाहिए।

 

14

खुद को खोजने का

सबसे अच्छा तरीका है

खुद को दूसरों की सेवा में खो दो। ।

आज व्यक्ति स्वयं को ही नहीं पहचान पाता। वह यह नहीं जान पाता , उसका जीवन कितना अमूल्य है , उसके क्या कर्तव्य हैं ? अगर स्वयं को खोजना ही है तो , समाज में अपने जीवन को लगा दो। दीन-दुखियों की सेवा करो , फिर जानों अपने आपको। तुम कौन हो ? तुम्हारा जीवन का लक्ष्य क्या होना चाहिए ? तुम्हारे क्या कर्तव्य है ?

 

15

एक आदमी अपने विचारों से ही बनता है

वह जो सोचता है वही बन जाता है। ।

व्यक्ति के विषय में यह माना जाता है , वह जिस प्रकार की मानसिकता जिस बात का स्मरण करता है। वह उसी प्रकार का आचरण करने लगता है। अगर एक व्यक्ति महान बनने की सोच रखता है , तो वह निश्चित ही महान बनता है।

 

Mahatma Gandhi Quotes on real beauty

16

एक सच्चे कलाकार के लिए

सिर्फ वही चेहरा सुंदर होता है

जो बाहरी दिखावे से परे

आत्मा की सुंदरता से चमकता है। ।

जो व्यक्ति साफ ह्रदय व स्वच्छ मानसिकता का होता है , वह चेहरे की सुंदरता को नहीं देखता। वह सामने वाले व्यक्ति की भीतरी सुंदरता को देखता है। उसका हृदय उसके विचारों से मेल खाता है अथवा नहीं। बाहरी दिखावा क्षण भर के लिए होता है , जबकि भीतरी दिखावा दीर्घकालिक।

 

17

शक्ति दो प्रकार की होती है

एक दंड के डर से उत्पन्न होती है

और एक प्यार से

प्यार की शक्ति हमेशा

दंड के डर की शक्ति से

हजार गुना ज्यादा प्रभावी होती है। ।

शक्ति के दो प्रकार माने गए हैं , एक प्यार से उत्पन्न होती है , दूसरा दंड के भय से। किंतु प्यार की शक्ति दंड द्वारा उत्पन्न की गई शक्ति से अधिक प्रभावी और सशक्त होती है।

 

18

एक आदमी ही सोच को जन्म देता है

और वह क्या सोचता है वही बताता है। । 

किसी भी विचार और क्रांति को जन्म देने की क्षमता केवल मनुष्य के पास ही होती है। वह किस विचार को विकसित कर रहा है , जन्म दे रहा है।  यह समय तथा इतिहास ही बता सकता है।

 

19

आपकी अनुमति के बिना

आपको कोई दुख नहीं पहुंच सकता। ।

व्यक्ति अपने दुख का कारण स्वयं होता है। अगर वह स्वयं से ठीक आचरण करे , दूसरों के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार करे ,  तो वह कभी दुखी नहीं हो सकता।

Mahatma Gandhi Quotes on fear

20

डर शरीर का रोग नहीं है

यह आत्मा को मारता है। ।

किसी भी प्रकार का डर व्यक्ति के शरीर में रोग की भांति नहीं होता। वह डर के वशीभूत होकर , डर में विश्वास करने लगता है।  स्वयं की आत्मा से अपना विश्वास हटाने लगता है , यह स्थिति आत्मा की हत्या की होती है।

 

21

आजादी का कोई अर्थ नहीं

अगर हम एक-दूसरे पर जुल्म करते रहे। ।

आजादी का यह अर्थ कभी नहीं होता , कि स्वयं की खुशियों के लिए दूसरों की खुशियों को कुचलें।  एक-दूसरे पर जुल्म करें , अत्याचार करें तथा आपस में भेदभाव करें। इस प्रकार की आजादी व्यर्थ है , यह गुलामी की दास्तां से भी बदतर है।

 

22

एक विनम्र तरीके से आप पूरी दुनिया को

अपनी और आकर्षित कर सकते हैं। ।

गांधी जी की सदैव विचारधारा रही सत्य बोलना , और अहिंसा का आचरण करना। यही संदेश उन्होंने देश-विदेश में दिया। उन्होंने अपनी आजादी के लिए विनम्र तरीका ही चुना , जिससे पूरा विश्व उनकी ओर आकर्षित हुआ,  उनके बातों और विचारों के प्रति ध्यान देने लगा।

 

23

प्रगति को इस बात से आंका जा सकता है कि

वहां जानवरों से कैसा व्यवहार किया जाता है। ।

एक सभ्य विकसित समाज को आप उसके व्यवहार से आंक सकते हैं। अंदाजा लगा सकते हैं कि , वह समाज शिक्षित है अथवा नहीं। एक सभ्य समाज में जहां जानवरों के साथ भी प्रेम का बर्ताव किया जाता है। वही असभ्य समाज जानवरों के साथ भी क्रूरता का व्यवहार करता है।

 

Mahatma Gandhi Quotes on Hunger

24

दुनिया में ऐसे लोग हैं ,

जो इतने भूखे हैं कि भगवान

उन्हें किसी और रूप में

नहीं देख सकता सिवाय रोटी के रूप में। ।

दुनिया में अनेकों प्रकार के लोग रहते हैं , किसी के लिए एक पत्थर भगवान होता है तो किसी के लिए पैसा। एक गरीब और भूखे के लिए रोटी में ही उसका भगवान दिखता है। जहां रोटी मिल जाती है , वहां उसका भगवान मिल जाता है।

 

25

विश्वास को हमेशा तर्क से तौलना चाहिए

जब विश्वास अंधा हो जाता है तो मर जाता है। ।

विश्वास सदैव तर्कसंगत होना चाहिए , जहां विश्वास की अंधभक्ति होती है , वहां विश्वास नाम का कुछ नहीं रह जाता। इसलिए सदैव विश्वास करने से पूर्व तर्क की कसौटी पर अवश्य चलना चाहिए।  आंख मूंदकर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।

 

26

मूर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है

किंतु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है। ।

आपने अक्सर देखा होगा जो , कमजोर व्यक्ति होता है , वह अधिक क्रोध करता है। वह  आवेश में आकर कार्य करता है। वहीं शक्तिशाली और बुद्धिमान व्यक्ति सदैव शांति से अपने क्रोध पर काबू पाते हैं।  उसका शांत मन से निवारण करते हैं।

 

27

निरंतर विकास जीवन का नियम है

और जो व्यक्ति खुद को सही दिशा के लिए

हमेशा अपनी रूढ़िवादिता को

बरकरार रखने की कोशिश करता है

वह खुद को गलत स्थिति में पहुंचा देता है। ।

पृथ्वी पर विकास सदैव गतिमान रहता है , यह प्रकृति का शाश्वत सत्य है। जो व्यक्ति स्वयं को परंपरा और रूढ़िवादिता का अंध भक्त बना लेता है , वह सदैव गलत मार्ग पर पहुंच जाता है। उसकी स्थिति दयनीय हो जाती है , इसलिए विकास के क्रम में स्वयं को बदलना और रूढ़िवादिता को दूर रखते हुए कार्य करना उत्तम पुरुष का गुण है।

महात्मा गाँधी के सच्चे सुविचार

28

गुलाब को उपदेश देने की आवश्यकता नहीं होती

वह तो केवल अपनी खुशबू बिखेरता है

उसकी खुशबू ही उसका संदेश है। ।

एक सुंदर पुष्प को अपना परिचय बताने की आवश्यकता नहीं होती , उसकी खुशबू आकर्षण ही उसका परिचय होता है। ठीक इसी प्रकार योगी पुरुष को अपना परिचय और ज्ञान बताने की आवश्यकता नहीं होती , उसके कर्म उसकी श्रेष्ठता को बताते हैं।

 

29

जिस दिन प्रेम की शक्ति

शक्ति के प्रति प्रेम पर

हावी हो जाएगी

दुनिया में अमन आ जाएगा। ।

महात्मा गांधी जी का मानना था जिस दिन प्रेम एक शक्ति के रूप में विद्यमान होगा।  शक्ति के प्रति अर्थात शासन के प्रति जनता जब प्रेम करने लगे। तब समझना देश में अमन आ गया है। यह अमन अब दुनिया को एक नया पैगाम देगा।

 

30

पाप से घृणा करो पापी से नहीं। । 

गांधीजी सदैव अपने स्वयंसेवकों को यही संदेश दिया करते थे , कि पापी से घृणा करने से बेहतर है पाप से घृणा करना। अगर पाप के प्रति घृणा की भावना सभी व्यक्ति में विद्यमान होगा , तो पापी कोई होगा ही नहीं।

 

31

बदले की भावना किसी के लिए हितकारी नहीं है। । 

बदले की भावना किसी के लिए हितकारी नहीं होती। वह सर्वत्र तहस-नहस काही संदेश देती है। बदले की भावना में व्यक्ति इतना अंधा हो जाता है , उसे स्वयं के लाभ-हानि का भी विचार नहीं रहता यह विनाशक है।

 

32

कमजोर लोग कभी माफी नहीं दे सकते

क्षमा तो ताकतवर लोगों की विशेषता होती है। ।

कमजोर लोग अपना प्रतिशोध लिए बिना नहीं मानते , जबकि ताकतवर लोग अथवा बुद्धिमान लोग क्षमा पर विश्वास करते हैं। क्षमा देना किसी ताकतवर व्यक्ति के ही वश में है , चाहे वह मानसिक रूप से ताकतवर हो अथवा शारीरिक रूप से।

महात्मा गाँधी के प्रचलित सुविचार

33

अपने प्रयोजन में दृढ़ विश्वास रखने वाला

एक सूक्ष्म शरीर

इतिहास के रुख को बदल सकता है। ।

इतिहास गवाह है बड़े-बड़े कार्यों को करने वाले कुछ ऐसे लोग हुए हैं , जिससे अपेक्षा नहीं थी। ऐसे लोगों के कार्य आज इतिहास बन गए हैं। आचार्य चाणक्य ने जिस चंद्रगुप्त को भारत का भविष्य बदलने के लिए तैयार किया वह इसका मिसाल है।

 

34

हजारों लोग द्वारा कुछ सैकड़ों की हत्या करना

बहादुरी नहीं है यह कायरता से भी बदतर है

यह किसी भी राष्ट्रवाद और धर्म के विरुद्ध है। ।

गांधी जी सदैव सत्य और अहिंसा को अपने जीवन में अपनाते रहे। उन्होंने देशवासियों को यही संदेश दिया , अंग्रेजों द्वारा कितने भी जुल्म होने पर उनको हिंसा से जवाब नहीं देना। यह कोई बहादुरी का कार्य नहीं है , बल्कि बहादुरी इसमें है उनके द्वारा हिंसा को अपने शांत मन और अहिंसा से जवाब देना।  हिंसा किसी भी राष्ट्र और धर्म के लिए ठीक नहीं है।

 

Famous Mahatma Gandhi Quotes in Hindi

35

मैं राष्ट्रीय पोशाक पहनता हूं

क्योंकि यह सबसे स्वाभाविक है

और सबसे अधिक भारतीय बनने के लिए जरूरी है। ।

जो लोग विदेशी परंपरा के अंधानुकरण कर रहे थे , उन सभी को गांधीजी जवाब देते हुए कहते हैं।  मैं भारतीय पोशाक पहनता हूं , क्योंकि इसमें मेरा स्वाभिमान है , और मुझे यह भारतीय होने का गर्व कराता है। मैं प्रत्येक भारतवासी से यही आशा करता हूं ,  वह भारतीय पोशाक को ही पहने यह उनके स्वाभाविक ता को प्रकट करता है।

 

36

व्यक्ति अपने विचारों से निमित एक प्राणी है

वह जो सोचता है वही बन जाता है। । 

मनुष्य एक ऐसा प्राणी है जो अपने मन में जैसा भाव लाता है वह वैसा ही आचरण करने लगता है। अगर एक व्यक्ति महान और श्रेष्ठ बनना चाहता है , तो वह निश्चित ही महान और श्रेष्ठ बनता है। अगर वह दुराचारी भाव अपने मन में रखता है , तो वह उसी पथ पर आगे बढ़ जाता है।  यह मानव के विचार पर निर्भर करता है।

Mahatma Gandhi Quotes in Hindi on discipline

37

अनुशासन केवल सैनिक के लिए नहीं होता

बल्कि जीवन के हर क्षेत्र के लिए होता है। ।

गांधीजी का मानना था जिस व्यक्ति के जीवन में अनुशासन नहीं है , वह कभी सफल नहीं हो सकता। अनुशासन मात्र सैनिक के लिए नहीं है बल्कि प्रत्येक मानव के लिए अनुशासन का होना आवश्यक है। वह बिना अनुशासन के अपने जीवन में कुछ बड़ा कार्य नहीं कर सकता।

 

38

अध भूखे राष्ट्र के पास

ना कोई धर्म , ना कोई कला

और ना ही कोई संगठन हो सकता है। ।

गांधीजी किसानों को भरोसा और उनके जोश को और ऊंचा करना चाहते थे। उनका मानना था बिना किसान के देश की प्रगति नहीं हो सकती।  भूखे पेट कोई कार्य संभव नहीं हो सकता। व्यक्ति अगर भूखा है तो उसके लिए कोई धर्म कोई कला और कोई संगठन मायने नहीं करता।

 

39

क्रूरता का उत्तर क्रूरता से देने का अर्थ

अपने नैतिक व बौद्धिक पतन को स्वीकार करना है। ।

गांधी जी सत्य इस बात को कहते रहे क्रूरता का उत्तर कभी भी क्रूरता से दिया जाना न्याय संगत नहीं है। यह हमारे बौद्धिक पतन और नैतिक पतन को प्रदर्शित करता है।  कोई अनपढ़ अशिक्षित व्यक्ति अगर क्रूरता का भाव आपके प्रति रखता है तो , आप उसे अपने नैतिक और बौद्धिक शक्ति से उस पर हावी हो सकते हैं।

Best Hindi Quotes of Mahatma Gandhi

40

निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी

परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ है। ।

गांधीजी का मानना था अहिंसा से बढ़कर कोई शस्त्र नहीं है। अहिंसा बड़े से बड़े व्यक्ति को आपके समक्ष झुकने पर विवश कर देता है। कैसी  भी परिस्थितियां क्यों ना हो अहिंसा , शस्त्र से बड़ा ही रहता है।

 

41

सत्य एक विशाल वृक्ष है

उसकी ज्यों-ज्यों सेवा की जाती है

त्यों-त्यों उसमें अनेक फूल आते है

उनका अंत नहीं होता। ।

गांधी जी सत्य को एक विशाल वृक्ष की भांति मानते हैं। जिस प्रकार वृक्ष की ठीक प्रकार से देखरेख की जाती है , उसमें खूबसूरत फूल उसी प्रकार आते हैं। इसी प्रकार अगर अपने जीवन में सत्य को एक निष्ठ होकर अपनाया जाए , उसे अपने आचरण में लाया जाए तो यह विशाल वृक्ष वैसे वैसे ही बड़ा होता जाता है। इस वृक्ष का कभी कोई अंत नहीं है।

 

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आशा है आप को महात्मा गांधी के यह सभी सुविचार पसंद आए होंगे। अगर आप अपनी तरफ से कोई सुविचार जुड़ना चाहते हैं तो नीचे कमेंट कर सकते हैं।

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