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विदुषी के जज्बे को सलाम MOTIVATIONAL STORY

 

बिहार के पटना जिले के पालीगंज गांव में एक बहुत ही प्यारी सी कन्या का जन्म हुआ। कन्या अत्यंत सुंदर थी , उसके माता-पिता अथवा रिश्तेदारों ने जन्म पर खुशियां मनाई , घर में उत्सव जैसा माहौल था। लेकिन कुछ रिश्तेदारों ने कन्या के जन्म की बात सुनी तो आलोचना करने लग गए कन्या का नामकरण उसके रूप व सौंदर्य के आधार पर ‘ विदुषी ‘रखा गया। विदुषी बहुत ही सुंदर और चंचल स्वभाव की थी। जो भी उसे देखता उससे आकर्षित हुए नहीं रह पाता , उसे गोद में लेकर प्यार करने लग जाता। उसके माता-पिता उसे बहुत स्नेह करते थे , अथवा उसे कलेजे से लगाए रखते थे। विदुषी अपने गांव – घर में किलकारियां मारती हुई खेलती – कूदती अथवा वात्सल्य रस लुटाती , तोतली बोली में अनेकों – अनेक गीत गुनगुनाती पलती – बढ़ती रही। समय के साथ वह बड़ी होने लगी उसके माता-पिता ने गांव के विद्यालय में ही दाखिला करवा दिया। वह पढ़ने लिखने में अव्वल थी , जो उसे कक्षा में और बच्चों से अलग करता था।

विदुषी जब केवल 8 वर्ष की हुई तभी उसके पिता जी का स्वर्गवास हो गया। फिर वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी , किंतु फिर भी वह पढ़ – लिख कर आगे बढ़ती रही उसे बचपन से ही क्रिकेट , फुटबॉल , व बॉलीबॉल आदि अनेक खेल खेलने का शौक था। वह अभ्यास करती थी उसमे लगन था जिसके कारण वह एक राष्ट्रीय खिलाड़ी भी बन गई। विदुषी एक साधारण परिवार में जन्मी थी। धन के अभाव से उसने हार नहीं मानी , उसने कॉलेज से लॉ / वकालत  की परीक्षा भी पास कर ली । विदुषी की जिंदगी में एक मोड़ ऐसा आया कि जब वह एक परीक्षा देने के लिए ट्रेन से जा रही थी। रास्ते में असामाजिक तत्वों ने ट्रेन पर हमला कर दिया। विदुषी ने जब इसका पुरजोर विरोध किया तो , डाकुओं ने उसे ट्रेन से नीचे धकेल दिया। इस कृत्य से उसका एक पैर ट्रेन की चपेट में आकर कट गया।

इसके बावजूद विदुषी ने हिम्मत नहीं हारी और निरंतर आगे बढ़ती रही।  विदुषी अपने भाग्य के भरोसे न रहकर पूरे जीवन में मेहनत करती रही , उसके नेक इरादे ने एक दिन एवरेस्ट की चोटी भी लांघ दी अपने देश भारत का झंडा एवरेस्ट की चोटी पर गर्व से लहराता हुआ , विदुषी और उसके जज्बे को सलाम कर रहा था।  तात्पर्य यह है कि जब आपने लगन व तपस्या की भावना रहती है तो आपके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं रहता। जैसा कि विदुषी के साथ हुआ एक पैर ना होने पर भी , उसने एवरेस्ट की दुर्गम में चोटी पर चढ़कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन  के आगे एवरेस्ट की चोटी भी राई के पहाड़ जैसी हो सकती है।

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