सूर का दर्शन | दार्शनिक कवि | सगुण साकार रूप का वर्णन | जीव | जगत और संसार | सूरदास जी की सृष्टि | माया | मोक्ष

सूर का दर्शन   साहित्य और दर्शन शास्वत सत्य है | दोनों का ही मुलतः  सृष्टि के रहस्यों का उद्घाटन करना होता है । साहित्य इन दायित्वों की त्रुटि अनुभूति के रुप में करता है और दर्शन एक विचार के रूप में बुद्धि प्रधान आत्यरेषण   दर्शन को जन्म देता है | जो तार्किकता और विश्लेषण में भाव … Read more सूर का दर्शन | दार्शनिक कवि | सगुण साकार रूप का वर्णन | जीव | जगत और संसार | सूरदास जी की सृष्टि | माया | मोक्ष

समाज एवं शिक्षा | समाजशास्त्र | समाज की परिभाषा | समाज और एक समाज में अंतर | Hindi full notes

समाज एवं शिक्षा | समाजशास्त्र  | समाज और एक समाज में अंतर | समाज एवं शिक्षा में संबंध ( Relation between society and Education ) समाज एवं शिक्षा   सामान्य रूप से दो या दो से अधिक व्यक्तियों के समूह को समाज कहते हैं। व्यक्तियों इन समूहों का अध्ययन सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है। मानव … Read more समाज एवं शिक्षा | समाजशास्त्र | समाज की परिभाषा | समाज और एक समाज में अंतर | Hindi full notes

जयशंकर प्रसाद | जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएं | पारिवारिक विपत्तियां | प्रसाद जी की रचनाओं का संक्षिप्त परिचय | छायावाद की स्थापना |

jayshankar prsad ki mukhy rachana पारिवारिक विपत्तियां | प्रसाद जी की रचनाओं का संक्षिप्त परिचय | छायावाद की स्थापना | पूरा नाम                महाकवि जयशंकर प्रसाद जन्म                     30 जनवरी 1889 ईस्वी जन्म भूमि               वाराणसी उत्तर … Read more जयशंकर प्रसाद | जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएं | पारिवारिक विपत्तियां | प्रसाद जी की रचनाओं का संक्षिप्त परिचय | छायावाद की स्थापना |

शिवाजी।शिवाजी का राज्याभिषेक।आनंदनाम संवत्। प्रखर हिंदू सम्राट।शिवा राज्यारोहण उत्सव।हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव।राजा जयसिंह

शिवाजी का राज्याभिषेक सन् 1674 में ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी को शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ था, जिसे आनंदनाम संवत् का नाम दिया गया। महाराष्ट्र में पांच हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित रायगढ़ किले में एक भव्य समारोह हुआ था। इसके पश्चात् शिवाजी पूर्णरूप से छत्रपति अर्थात् एक प्रखर हिंदू सम्राट के रूप में स्थापित हुए।   महाराष्ट्र में यह दिन “शिवा राज्यारोहण … Read more शिवाजी।शिवाजी का राज्याभिषेक।आनंदनाम संवत्। प्रखर हिंदू सम्राट।शिवा राज्यारोहण उत्सव।हिंदू साम्राज्य दिनोत्सव।राजा जयसिंह

हिंदू साम्राज्य दिवस | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ | हिंदू साम्राज्य दिवस क्या है?

हिन्दू साम्राज्य दिवस की पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए यह पोस्ट पूरा जरूर पढ़े | अंत में हमने आरएसएस के सभी गीतों की लिस्ट दी है जिससे आप सभी गीत आराम से पढ़ सकते हैं | हिंदू साम्राज्य दिवस चलिए प्रारम्भ करते हैं – हिंदू साम्राज्य दिवस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ परिवार वर्ष में एक … Read more हिंदू साम्राज्य दिवस | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ | हिंदू साम्राज्य दिवस क्या है?

संघ की प्रार्थना। नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे।प्रार्थना का हिन्दी में अर्थ।हिन्दी काव्यानुवाद। आरएसएस। RSS IN HINDI

संघ की प्रार्थना – नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे आरएसएस गाने का बोल लिखा हुआ । Rss prayer namaste sada vatsale maatrabhumi lyrics |    संघ की प्रार्थना Rss prayer – Namaste sada vatsale   नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोहम्। महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥ १॥ प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता इमे सादरं त्वां … Read more संघ की प्रार्थना। नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे।प्रार्थना का हिन्दी में अर्थ।हिन्दी काव्यानुवाद। आरएसएस। RSS IN HINDI

आत्मकथ्य कविता sanchipt parichay jaishankar prasad

आत्मकथ्य का संछिप्त परिचय जानने के लिए ये पोस्ट पूरा पढ़ें | आत्मकथ्य कविता का संक्षिप्त परिचय   प्रेमचंद के संपादन में हंस पत्रिका का एक आत्मकथा विशेषांक  निकलना तय हुआ। प्रसाद जी के मित्रों ने आग्रह किया कि वह भी आत्मकथा लिखें। प्रसाद जी इससे सहमत नहीं थे। इसी असहमति के तर्क से पैदा … Read more आत्मकथ्य कविता sanchipt parichay jaishankar prasad

तुलसीदास की समन्वय भावना | TULSIDAS | निर्गुण और सगुण | विद्या और अविद्या माया |

TULSIDAS | निर्गुण और सगुण | विद्या और अविद्या माया | तुलसीदास की समन्वय भावना तुलसीदास की समन्वय भावना समन्वय शब्द सामान्यतः दो अर्थों में मैं लिया जाता है। अपने विस्तृत और व्यापक अर्थ में वह संयोग अथवा पारस्परिक संबंध के निर्वाह का द्योतक है। जब हम सांख्य और वेदांत अथवा निर्गुण और सगुण के समन्वय … Read more तुलसीदास की समन्वय भावना | TULSIDAS | निर्गुण और सगुण | विद्या और अविद्या माया |

तुलसी | नवधा भक्ति | भक्ति की परिभाषा | गोस्वामी तुलसीदास | तुलसी की भक्ति भावना

भक्त तुलसीदास | दशरथ के राम | भक्तिकी परिभाषा | गोस्वामी तुलसी दास की भक्ति भावना | गोस्वामी तुलसी दास की भक्ति भावना तुलसी नवधा भक्ति   तुलसीदास मूलतः एक भक्त हैं .उनका नाम राम बोला था .तथा उपनाम तुलसी था परंतु राम के भक्त अथवा दास होने के कारण वे तुलसीदास कहलाए . शांडिल्य नारद – आदि … Read more तुलसी | नवधा भक्ति | भक्ति की परिभाषा | गोस्वामी तुलसीदास | तुलसी की भक्ति भावना

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