तुलसीदास की समन्वय भावना, दोहे, रचनाये, पद और कविता। 

तुलसीदास निश्चित रूप से समन्वयवादी थे, उन्होंने राम को ईश्वर माना और उनकी आजीवन आराधना की। उनके धार्मिक गतिशीलता का कारण जीवन की वास्तविकता को समझना तथा अपने धर्म की रक्षा के लिए तत्पर रहना था। तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियां आक्रांता ओं से प्रभावित थी। यह जबरन अपना धर्म भारतीय जनमानस पर धोप रही थी जिसके …

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तुलसी | नवधा भक्ति | भक्ति की परिभाषा | गोस्वामी तुलसीदास | तुलसी की भक्ति भावना

तुलसीदास भक्ति कालीन संत कवि थे। इन्होंने धर्म की रक्षा के लिए अपने साहित्य का सहारा लिया। जब भारत पर क्रूर आक्रमणकारी अपने धर्म को यहां की सामान्य जनमानस पर थोप रहे थे बलात धर्म परिवर्तन करा रहे थे। तब भक्ति कालीन कवियों ने जनसामान्य तक उनके पूर्वजों उनके ईश्वर आदि के महत्व को बताया …

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कवि नागार्जुन के गांव में | मैथिली कवि | विद्यापति के उत्तराधिकारी | नागार्जुन | kavi nagarjuna

विश्वनाथ त्रिपाठी विख्यात आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी नागार्जुन के जन्म  शताब्दी समारोह में भाग लेने नागार्जुन के गांव तरौनी गए हुए थे । यहां वह इस यात्रा के बहाने नागार्जुन को याद कर रहे हैं। कवि नागार्जुन के गांव में | मैथिली कवि कवि नागार्जुन के गांव में लगभग 2 महीने पूर्व जब मुझे प्रगतिशील लेखक …

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उपन्यास की संपूर्ण जानकारी | उपन्यास full details in hindi

उपन्यास की संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए यह पोस्ट पूरा पढ़ें | हिंदी विभाग आपको हर विषय पर नोट्स उपलब्ध करने का प्रयास करेगा | नाटक ,कथा ,उपन्यास  आदि गद्य की विधाऐं  हैं। साहित्य जगत में गद्य का विशिष्ट महत्व रहा है। गद्य क्षेत्र के पाठक का दायरा विस्तृत है ,मुद्रण के माध्यम से गद्य विधा की …

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