रामायण के संपूर्ण तथ्य- Facts about ramayan in hindi

Today you will read facts about Ramayan in Hindi. Importance of Ramayan in Hindi with detailed facts. The meaning of Ramayan is also written. रामायण की पूरी जानकारी तथ्यों सहित।

रामानुजाचार्य दक्षिण भारत से उत्तर भारत में भक्ति का प्रचार – प्रसार कर रहे थे। वह काशी के घाट पर स्नान कर रहे थे , तभी उन्होंने एक बुजुर्ग ब्राह्मण को देखा। वह रामायण की मोटी पुस्तक को हाथों में लिए हुए थे और आंखों से अश्रु की धारा बह रही थी। रामानुजाचार्य को आश्चर्य हुआ और उस भेद को जानने के लिए , वह ब्राह्मण के पास पहुंचे और अपना परिचय दिया।

मैं रामानुजाचार्य हूं ! आपके आंखों से जो अश्रु की धारा वह रही है , उसका कारण जानना चाहता हूं। क्या आप वाकई इस पुस्तक को इतनी गहराई से पढ़ रहे हैं ? आप इतने तल्लीन हो गए हैं कि आपको अपने अश्रुओं पर ध्यान नहीं गया।

वृद्ध ब्राह्मण ने रामानुजाचार्य के समक्ष दंडवत प्रणाम किया , और कहा हे देव ! मुझे तो संस्कृत का एक अक्षर पढ़ना नहीं आता। मैं तो इस पुस्तक का एक अक्षर नहीं जानता। किंतु इस पुस्तक को जब मैं अपने हाथों में लेता हूं , तो श्री राम का वह मर्यादित रूप मेरे आंखों के सामने आ जाता है।

मैं उस त्रेता युग में पहुंच जाता हूं , जहां रामराज्य हुआ करता था।

रामायण के प्रमुख तथ्य – Facts about ramayan in hindi

किस प्रकार मर्यादा पुरुषोत्तम राम स्वयं साक्षात सृष्टि के कर्ता-धर्ता होते हुए भी , उन्होंने सांसारिक कष्टों को भोगा।  उन्होंने एक साधारण व्यक्ति की भांति अपने सारे दुखों को झेला। माता के आदेश से चौदह वर्ष का वनवास बिना किसी संकोच के बिताया। यह सब देखकर मेरे आंखों से अनायास अश्रु की धारा बहने लगती है।

रामानुजाचार्य सब समझ चुके थे उन्होंने वृद्ध ब्राह्मण को प्रणाम किया , और कहा रामायण के सच्चे अर्थ आप ही जानते हैं। उन्होंने ब्राह्मण को हृदय से लगाया और समाज में रामायण के सच्चे अर्थ पहुंचाने के लिए उनसे आग्रह किया।

कहते हैं भक्ति के लिए भाषा की जरूरत नहीं होती है , वह तो केवल माध्यम है भक्ति तो हृदय से होती है मुक साधना होती है।

Ramayan Facts in form of questions and answers

  • रामायण के रचनाकार का नाम बताओ   –  बाल्मीकि
  • श्री राम चरित्र मानस के रचनाकार कौन है –  गोस्वामी तुलसीदास
  • रामायण के कुल कितने सर्ग हैं   –  500
  • राम चरित्र मानस में कितने कांड है –   सात
  • अयोध्या के प्रथम राजा इक्ष्वाकु के पिता का नाम –  मनु
  • राजा दशरथ के पिता का नाम क्या था  –  अज
  • राजा दशरथ किस राज्य वंश के राजा थे –   इक्ष्वाकु कुल
  • कैकई के पिता का नाम क्या था  –   राजा अश्वपति केकई नरेश
  • रामायण का दूसरा नाम क्या है   –  दशानन वध
  • राजा दशरथ के कुल गुरु का नाम –   वशिष्ठ
  • राजा दशरथ के पुरोहित कौन थे –   वामदेव
  • बाल्मीकि ने अपना प्रथम श्लोक किस घटना से व्यथित होकर कहा –   शिकारी द्वारा एक क्रौंच पक्षी की हत्या पर
  • श्री राम के पूर्वज सागर के अश्वमेध का घोड़ा कहां प्राप्त हुआ    –   कपिल मुनि के आश्रम में
  • गंगा नदी को पृथ्वी पर लाने वाले राजा भगीरथ के पिता का नाम बताइए     –   राजा दिलीप
  • घोड़े की खोज में गए सागर के साठ हजार पुत्रों का वर्णन किस प्रकार मिलता है     –  कपिल मुनि के क्रोध से सभी भस्म हो गए।
  • गंगा किसकी तपस्या से धरती पर आई   – भगीरथ
  • सगर के पुत्रों का उद्धार कैसे हुआ     –  स्वर्ग से गंगा को लाकर
  • अयोध्या नगरी का सर्वप्रथम निर्माण किसने करवाया था   –   मनु ने
  • अयोध्या किस जनपद की राजधानी है    –   कौशल
  • पुत्र्येष्टि यज्ञ के मंत्र किस वेद से लिए गए हैं   –  अथर्ववेद से

 

  • रामायण में श्लोकों की कुल संख्या   –  24000

 

  • बाल्मीकि को रामायण लिखने की प्रेरणा किससे मिली   –   ब्रह्मा से
  • कौशिक ऋषि का रामायण में सामान्य नाम क्या है   –    विश्वामित्र
  • विश्वामित्र का नाम कौशिक क्यों पड़ा    –    कुश नाम के ऋषि के पुत्र होने पर
  • राजा दशरथ ने किसके परामर्श पर राम लक्ष्मण को विश्वामित्र को सौंपा  –    वशिष्ठ
  • मुनि विश्वामित्र के साथ वन जाने पर श्रीराम ने किसका वध किया   –    राक्षसी ताड़का
  • राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए कौन सा यज्ञ करवाया था   –   पुत्र्येष्टि यज्ञ
  • राजा दशरथ को किसने पुत्र वियोग मैं मरने का श्राप दिया   –   श्रवण कुमार के माता-पिता ने
  • राम लक्ष्मण ने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा कितने दिन की  –  6 दिन
  • यज्ञ की रक्षा करते समय राम ने किस राक्षस का वध किया  –   सुबाहु
  • पुत्र्येष्टि यज्ञ से प्राप्त किस पदार्थ को खाकर दशरथ की रानियां गर्भवती हुई –    खीर ( पायस )
  • किस राजा ने सदेह स्वर्ग जाने के लिए वशिष्ठ से यज्ञ कराने का अनुरोध किया   –    त्रिशंकु
  • क्या त्रिशंकु सदेह स्वर्ग जा सके ?   –    नहीं स्वर्ग और धरती के बीच लटके रहे
  • वशिष्ठ के मना करने पर त्रिशंकु ने किसके द्वारा यज्ञ करवाया   –    विश्वामित्र
  • महाराज जनक द्वारा करवाई गई यज्ञ में विश्वामित्र किन्हें अपने साथ लेकर गए    –   श्री राम और लक्ष्मण
  • मारीच की माता कौन थी  –   ताड़का राक्षसी
  • राजा जनक के भाई कुश ध्वज कहां के राजा थे   –   सांकाक्षीनगरी
  • श्रीराम ने मारीच के साथ क्या किया –   तीर से 100 योजन दूर फेंक दिया

 

  • जानवी किस नदी का नाम है  –   गंगा

 

  • जिस स्थान पर मुनि विश्वामित्र अपना यज्ञ कर रहे थे उसका नाम क्या है  –   सिद्धाश्रम बक्सर बिहार
  • परशुराम के माता पिता का नाम क्या था    –  रेणुका जमदग्नि
  • महर्षि गौतम की पत्नी का नाम क्या था     –    अहिल्या
  • राजा जनक के दरबार में याज्ञवल्क्य के साथ शास्त्रार्थ करने वाली विदुषी कौन थी    –    गार्गी
  • भरत की पत्नी का नाम    –    मांडवी
  • शत्रुघ्न की पत्नी का नाम  –    सुत्कीर्ति
  • राजा जनक के पिता का नाम क्या था –    ह्रस्वरोमा
  • राजा जनक के पुरोहित का नाम क्या था  –   शतानंद
  • सीता की जन्म दात्री का नाम          –   पृथ्वी
  • सीता का शाब्दिक अर्थ क्या है हल जोतने से उत्पन्न हुई  –    रेखा
  • भरत की पत्नी मांडवी एवं शत्रुघ्न की पत्नी सुकीर्ति किसकी पुत्री थी –    जनक के भाई कुशध्वज
  • 14 वर्ष के लिए वनवास जाते समय राम की क्या आयु थी  –   25 वर्ष
  • वनवास जाते समय सीता की आयु कितनी थी  –   18 वर्ष
  • श्री राम तथा लक्ष्मण के साथ सीता ने भी वल्कल धारण करने चाहे तो किसने उन्हें वस्त्र आभूषण सहित वन जाने को कहा      –    राजा दशरथ और गुरु वशिष्ठ
  • वनवास जाते समय राम ने प्रथम रात्रि विश्राम कहां किया  –   तमसा नदी के तट पर
  • भरत में अपने ननिहाल से अयोध्या वापस आने में कितने दिन समय लगाए  –   8 दिन
  • मुनिवर भारद्वाज का आश्रम कहां स्थित है –  प्रयाग

 

  • राम के वन गमन के बाद सिंहासन पर कौन बैठा  –  श्री राम की चरण पादुका

 

  • अनुसूया किसकी पत्नी थी   –   अत्रि मुनि
  • श्रीराम द्वारा वनवास के समय भरत ने अपना निवास कहां बनाया –    नंदीग्राम
  • चित्रकूट के बाद राम किस वन में गए थे  –   दंडकारण्य
  • रामायण के अनुसार कामधेनु गाय के स्वामी कौन थे   –  वशिष्ठ मुनि
  • वैदेही किसे कहा जाता है   –   सीता
  • सीता की पालनहार माता का नाम  –   सुनैना
  • राम द्वारा सीता स्वयंवर के समय शिव धनुष तोड़ने पर कौन ऋषि नाराज हुए थे  –   परशुराम
  • सुग्रीव की पहचान के लिए राम ने क्या उपाय निकाला   –  गज पुष्पी माला का हार सुग्रीव को पहनाया
  • सुग्रीव की पत्नी का क्या नाम था   –  रूमा
  • किष्किंधा से सेना के प्रस्थान के समय श्रीराम किस के कंधे पर सवार हुए थे –   हनुमान
  • समुद्र पर सौ योजन लंबा पुल किसके द्वारा संभव हो सका – वानर नल की
  • इस पुल को क्या नाम दिया गया   –  नल सेतु
  • राम और मेघनाथ के बीच हुए प्रथम दिन के युद्ध का क्या नतीजा रहा  – मेघनाथ ने राम लक्ष्मण को नागपाश में बांध दिया
  • सीता के अतिरिक्त जनक की दूसरी पुत्री का नाम क्या था  –  उर्मिला
  • लक्ष्मण की पत्नी का नाम    – उर्मिला
  • किस मुनि ने भरत तथा उसकी सारी सेना को राजकीय सत्कार किया था     – ऋषि भारद्वाज

 

  • बाली की पत्नी का नाम क्या था   –  तारा

 

  • सुग्रीव के राज्याभिषेक के बाद राम – लक्ष्मण वर्षा ऋतु के चार माह कहां रहे   – पर्वत की कंदराओं में
  • वर्षा ऋतु समाप्त हो जाने पर सुग्रीव को सीता की खोज याद दिलाने किसको भेजना पड़ा     –  लक्ष्मण को
  • लक्ष्मण के क्रोध को शांत किसने किया     –  महारानी तारा ने
  • पूर्व दिशा ने सीता की खोज करने वाले युद्धपति का नाम    – विनत
  • दक्षिण दिशा में खोज करने वाले दल के युद्धपति का नाम  – अंगद
  • पश्चिम दिशा में भेजे गए दल का युद्धपति कौन थे       – सुषेण
  • सीता की खोज उत्तर दिशा में भेजे गए युद्धपति का नाम  – शत बली
  • हनुमान और जामवंत किस दिशा में गए थे   – दक्षिण दिशा
  • आश्रम में रक्त के छींटे देखकर मतंग मुनि ने क्या श्राप दिया  – जिसने यह रक्त के छींटे फेंके हैं उसकी आश्रम के निकट आने पर मृत्यु हो जाएगी
  • सुग्रीव और राम की प्रथम भेंट कहां हुई   –  ऋषि मुख पर्वत पर
  • राम ने पहली बार सुग्रीव और बाली की लड़ाई के समय बाली का वध क्यों नहीं किया  –  क्योंकि दोनों भाई हमशक्ल और कद काठी से एक थे
  • सुग्रीव ने सीता की खोज के लिए प्रत्येक दल को कितना समय दिया – 1 माह
  • किसने सीता के ठिकाने की बात बताई  – जटायु के भाई संपाती ने

 

  • समुद्र लांघते समय हनुमान की परछाई को किसने पकड़ा   –  सिंहिका राक्षसी

 

  • रावण ने सीता को हरण कर लंका में किस स्थान पर रखा – अशोक वाटिका
  • लंका से वापस लौटते समय हनुमान ने किस पर्वत पर छलांग लगाई – अरिष्ट पर्वत
  • हनुमान जी द्वारा सीता की खोज के बाद वापस किष्किंधा लौटते वानरों ने किस उपवन को तहस-नहस किया – मधुबन
  • सुग्रीव के मधुबन की रक्षा कौन करता था – सुग्रीव के मामा दधीमुख
  • हनुमान को समुद्र पार करने के लिए किसने उनका बल को याद दिलाया  – जामवंत
  • लक्ष्मण को किष्किंधा से सेना के प्रस्थान के समय कौन अपने कंधे पर उठाकर लाया – अंगद
  • लवणासुर का वध किसने किया  –  शत्रुघ्न ने
  • नागपाश में बंधे राम लक्ष्मण के बीच भूमि पर पड़े हुए सीता को दिखाने के लिए कौन युद्ध भूमि में लाया – राक्षसी पुष्पक विमान में लेकर आई
  • यह सेतु कितने दिनों में तैयार हुआ  –  5 दिनों में
  • लंका पुरी के कितने मुख्य द्वार थे  – चार
  • रावण के नाना का नाम क्या था   – मालयवान
  • किस राक्षसी ने सीता को राम लक्ष्मण के जीवित होने का विश्वास दिलाया   – त्रिजटा
  • नागपाश से राम लक्ष्मण को किसने मुक्त कराया   – गरुड़ ने
  • लंका पहुंचकर हनुमान जी ने सर्वप्रथम किस से भेंट की –  लंकिनी
  • समुद्र लगने के समय किस पर्वत ने हनुमान जी को विश्राम करने के लिए कहा  – मैनाक पर्वत
  • हनुमान जी के समुंद्र लांघने के समय उनके बल की परीक्षा लेने कौन आया  –  सुरसा
  • इंद्रजीत का वध किसने किया – लक्ष्मण

 

  • रामायण में श्री राम की सेना ने पुल पार कर जहां डेरा डाला वहां कौन सा पर्वत था – सुवेल पर्वत

 

  • रावण की लंका किस पर्वत पर स्थित थी  – त्रिकूट पर्वत
  • कुंभकरण को किसने मारा   –  श्री राम ने
  • राम रावण युद्ध के समय राम को पैदल युद्ध करते देख किसने अपना रथ भेजा  – इंद्र ने
  • इंद्र द्वारा भेजे गए रथ का सारथी कौन था  – मातली
  • लंका कि वह महान पतिव्रता कौन थी जिसे सती कहा गया – सुलोचना
  • राम ने ब्रह्म हत्या का प्रायश्चित किस स्थान पर किया   – रामेश्वरम
  • सीता की खोज में गए हनुमान जी ने अशोक वाटिका में किसका वध किया  – रावण के पुत्र अक्षय कुमार
  • अशोक वाटिका से हनुमान जी को किसने बंदी बनाया  –  रावण के पुत्र मेघनाथ इंद्रजीत
  • हनुमान ने सीता से अपनी पहचान के लिए क्या दिखाई – मुद्रिका जो राम के द्वारा दी गई थी
  • सीता ने हनुमान को अपनी पहचान के लिए क्या भेंट की   – चूड़ामणि
  • वनवास से लौटकर राम ने प्रथम प्रणाम किसको किया  – कैकई को
  • लव कुश का जन्म कहां हुआ – महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में
  • राम के राज्याभिषेक के समय उन्होंने किसे युवराज पद देना चाहा   – लक्ष्मण को

 

  • लक्ष्मण द्वारा अस्वीकार करने पर युवराज पद किसे मिला      – भरत को

 

  • राम ने शत्रुघ्न को कहां का राजा बनाया      – मधुपुरी मथुरा का
  • राजा दशरथ के किस रानी के 2 पुत्र थे     – सुमित्रा
  • लक्ष्मण को राम के साथ वन गमन के लिए किसने कहा माता  – सुमित्रा ने
  • कुश को  कहां का राज्य दिया गया  – दक्षिण कौशल का
  • राजा दशरथ के दो पुत्र सहोदर कौन थे  – लक्ष्मण और शत्रुघ्न
  • रामायण में श्री राम , लक्ष्मण , भरत , शत्रुघ्न में कौन सर्वप्रथम स्वर्गवासी हुए   – लक्ष्मण
  • सीता जी का देहावसान कैसे हुआ     – पृथ्वी के फटने पर उसमें समा गई
  • कैकई किसके बहकावे में आकर वनवास की मांग की थी  –  दासी मंथरा
  • सौमित्र के नाम से किसे बुलाया जाता है  –  लक्ष्मण
  • रावण के माता पिता कौन थे    – कैकसी विश्वश्रवा
  • भरत के बाण से हनुमान घायल किस कांड में हुए    –  लंका कांड
  • राम का राज्याभिषेक किस कांड में निहित है     –  उत्तरकांड में
  • सीता हरण का कांड किस कांड में आता है –  अरण्यकांड
  • वानर राज बाली कहां के शासक थे   –  किष्किंधा
  • लव को कहां का राज्य दिया गया  – उत्तर कौशल
  • भरत के मामा कौन थे  – युधाजित
  • राम लक्ष्मण ने दंडक वन में किसका वध किया  – खर तथा दूषण
  • भारद्वाज का आश्रम कहां स्थित था    –  प्रयाग
  • मुनिवर भारद्वाज ने राम को कहाँ निवास बनाने का मार्ग बताया –  चित्रकूट पर्वत
  • श्रीराम अन्य भाई तथा पूर वासी किस प्रकार स्वर्गवासी हुए समाधि ली  – सभी ने सरयू में जल
  • रामचरितमानस में सुंदरकांड किसके कार्य पर आधारित है  – हनुमान
  • सीता हरण के समय रावण के साथ किसकी लड़ाई हुई  – जटायु
  • चित्रकूट पर्वत पर भरत और अयोध्या वासियों से मिलकर राम कहां चले गए –  अत्रि मुनि के आश्रम
  • विश्वामित्र ने श्री राम को कौन सी दूर दुर्लभ विद्याओं की शिक्षा दी –  बला अतिबला

 

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रामायण की पूरी जानकारी – Ramayan full details in hindi

रामायण हिंदू सनातन धर्म का एक पवित्र जीवन शैली परख धार्मिक ग्रंथ है। इस ग्रंथ में अयोध्या नगरी कि राजा दशरथ और उनके पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम राम का महाकाव्य है। सूर्यवंशी महाराज दशरथ अनेकों – अनेक युद्ध विजय करते। उनका नाम दशरथ पड़ गया।

दशरथ अर्थात दसों दिशाओं में जिसने विजय प्राप्त कर रखी हो। दशरथ सभी प्रकार से सुखी – संपन्न वह सम्राट थे। किंतु उन्हें एक ही बात का दुख था कि उनका कोई पुत्र नहीं हुआ। जब वह युद्ध से लौट कर आते तो उन्हें चिंता खाए रह जाती , वह चिंतित होते एक भी युद्ध में मेरी मृत्यु हो जाए तो अयोध्या का उत्तराधिकारी कौन होगा।  यह भी सोचते कि उन्हें कोई पिताश्री कहने वाला होता तो कितना अच्छा होता मैं। युद्ध से लौट कर आता तो मेरा पुत्र मुझे पिता श्री , पिता श्री कहकर पुकारता मेरा हालचाल लेता तो मेरे सारे घाव भर जाते।

दशरथ के चिंता का कारण जान महर्षि वशिष्ठ ने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने की सलाह दी।

उसके लिए दशरथ पुत्रेष्टि यज्ञ करवाने में सिद्ध ऋषि अथर्ववेद के ज्ञाता ऋषि श्रृंग मुनि को मनाने के लिए नंगे पांव उनके पास जाते हैं।

ऋषि की सेवा करके उन्हें प्रसन्न कर लेते हैं , इस पर वह ऋषि यज्ञ करने के लिए तैयार हो जाते हैं। यज्ञ का आयोजन भव्य रुप से अयोध्या में किया जाता है। यज्ञ की पूर्णाहुति पर अग्निदेव एक स्वर्ण पात्र में खीर लेकर प्रकट होते हैं।  खीर का पात्र दशरथ के हाथों में सौंप कर कहते हैं यह खीर अपने तीनों रानियों – कौशल्या , सुमित्रा , कैकई में बराबर बांट कर खिला देना , उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी।

दशरथ खीर का पात्र लेकर कौशल्या को दे देते हैं।

कौशल्या उस पात्र में से एक हिस्सा निकाल लेती है और एक हिस्सा सुमित्रा और एक हिस्सा कैकई निकाल लेती है। किंतु बड़े होने के कारण कौशल्या और कैकई ने उसे के किस्से में से आधा – आधा हिस्सा सुमित्रा को खिला देती है , परिणाम स्वरुप कौशल्या के गर्भ से विष्णु रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्म होता है। कैकई से धर्मात्मा भरत का जन्म होता है और सुमित्रा जिन्हें खीर का दो कौर प्राप्त हुआ। उनके गर्व से शेषनाग के अवतार लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म होता है।

 

श्री राम का जन्म – Birth of ram

ऋषि श्रृंग मुनी द्वारा किए गए पुत्र कामेष्ठि यज्ञ द्वारा राम , भरत , लक्ष्मण और शत्रुघ्न के रूप में अयोध्या नगरी को चार राजकुमार की प्राप्ति होती है। चारों राजकुमार प्राप्त कर राजा दशरथ , कौशल्या , कैकई व सुमित्रा के हर्ष का कोई ठिकाना नहीं रहता। पूरे अयोध्या में हर्षोत्सव मनाया जाता है।

अयोध्यावासी खुश थे कि उन्हें उनका युवराज मिल गया है। दोनों भाई समय के साथ – साथ बड़े होते रहे। आपस में एक – दूसरे के साथ मिलकर खेलना , बाग – वाटिका आदि का भ्रमण सभी भाई मिलकर किया करते थे। खेलकूद में राम के पक्ष में लक्ष्मण रहा करते थे और भरत जी के पक्ष में शत्रुघन। किंतु चारों भाई में फिर भी अगाध प्रेम था।

राम सभी भाइयों को समान प्रेम किया करते थे।

राज महल के सुख में वह पल बढ़ रहे थे , दशरथ जी को राजकुमारों के शिक्षा का विचार आया।   उन्होंने गुरु वशिष्ट जी से शिक्षा के लिए आग्रह किया जो अयोध्या के राजगुरु भी थे। गुरु वशिष्ट ने चारों राजकुमार को बसंत पंचमी के दिन यज्ञोपवीत संस्कार से चारों राजकुमारों को शिष्य रूप में स्वीकार किया और अपने साथ गुरुकुल में विधिवत शिक्षा देने के लिए ले गए।

प्राचीन काल में शिक्षा गुरुकुल में ही हुआ करती थी।

अतः चारों राजकुमार को शिक्षा पूर्ण करने तक राज महल वैभव सब त्याग कर सामान्य शिक्षार्थी की भांति गुरुकुल में रहना पड़ा।

वहां के नियम के अनुसार जमीन पर सोना , खाने के लिए भिक्षा मांगना , आश्रम की देखरेख करना , पशुओं की सेवा करना आदि कार्य के साथ-साथ वहां शिक्षा ग्रहण करते। अस्त्र-शस्त्र योग राजनीति संगीत आदि के शिक्षा के साथ – साथ जीवन की कठिन परिस्थितियों में निडरता के साथ सामना करना तथा उसका निवारण करना , यह सभी शिक्षा उन्होंने गुरुकुल में रहकर प्राप्त की।

अयोध्या के चारों राजकुमार के गुरुकुल प्रस्थान के बाद पूरी अयोध्या निर्जीव बेजान सी हो गई। राज महल में अब वह किलकारियां नहीं गूंजती अयोध्या की गलियों में अब वह चार दिव्य राजकुमार नजर नहीं आते , जिसके कारण अयोध्या अब  नीरस नजर आने लगी। माता -पिता भी अब मायूस रहने लगे उनका सारा हर्ष उनके चारों राजू कुमार के साथ चला गया था ।

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