Stress management techniques for students in hindi

Today we will read and learn Stress management techniques for students in hindi.

विद्यार्थी तनाव से कैसे बचें ? वर्तमान समय में तनाव की समस्या बेहद जटिल है। अगर एक बच्चा बोले कि में तनाव में हु या स्ट्रेस में हूँ तो आश्चर्य की बात नहीं होती। आज एक बच्चा भी तनाव से मुक्त नहीं है।  जहां मानव ने तकनीकी युग में अपनी सुविधाओं आदि के लिए नए – नए अविष्कार किए हैं , वही मानव तनाव ग्रस्त जीवन जीने के लिए भी इन तकनीकों के कारण मजबूर है।

घर हो या ऑफिस व्यक्ति हर जगह तनाव से ग्रसित रहता है। वह अपने पढाई , कार्य  और अपने गृहस्त आदि में तालमेल नहीं बिठा पाता , जिसके कारण उसे मानसिक रूप से परेशान होना पड़ता है।

समय प्रबंधन

विद्यार्थी के तनाव का एक सबसे बड़ा कारण समय प्रबंधन है।

विद्यार्थी समय प्रबंधन के अभाव में ही तनाव ग्रसित है। आज का समय ठीक तय समय पर कार्यों की पूर्ति मांगता है। विद्यार्थी पढ़ाई भी करता है तो उसे एक निश्चित समय में अपना पाठ्यक्रम समाप्त करना होता है , अन्यथा वह अन्य विद्यार्थीयों से पीछे रह जाता है। ठीक उसी प्रकार ऑफिस में भी किसी कार्य को समाप्त करने की समय सीमा निर्धारित होती है। उस समय सीमा पर कार्य को यदि समाप्त नहीं किया जाए तो बॉस की डांट सुननी पड़ती है , और अनेक कारण बताने पढ़ते हैं जिसके कारण व्यक्ति तनाव ग्रस्त जीवन जीता है।

इसलिए बेहतर है अपने समय का प्रबंधन ठीक प्रकार से करें। सवेरे कुछ समय अपने कार्य को समय के अनुसार बाटने में लगाए ।

 

योगा ( Yoga for stress management )

वर्तमान समय में योगा का महत्व देश ही नहीं अपितु विदेश में भी है।

लोग योगा के लिए प्रेरित हो रहे हैं , जिससे उनको तनाव और स्वास्थ्य दोनों में लाभ मिलता है।

जहां योगा तनाव को दूर करता है , वही शरीर को स्वस्थ और निरोगी रखने के लिए भी योगा का योगदान सराहनीय है।

अतः समय निकालकर योगा का अभ्यास विद्यार्थी को आवश्यक रूप से करना चाहिए।

 

 

खानपान – ( Right eating is important in stress management )

 

जिस प्रकार आज संचार माध्यम ने हर एक तबके के लोगों तक अपनी पहचान बना ली है , चाहे वह व्यक्ति मजदूर ही क्यों ना हो , मगर उसके पास भी एक स्मार्टफोन मौजूद होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। ऐसे युग में खानपान की सुविधा ऑनलाइन होने के कारण लोग और भी ज्यादा चटोरी स्वभाव के हो गए हैं , लोगों के मन में लजीज व्यंजन का ख्याल आते ही खाना ऑनलाइन बुक करा देते हैं , और बाहरी व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं। वह इस नुकसान से अनभिज्ञ होते हैं जो उन्हें अंदरूनी होती है।

यह स्वभाव विद्यार्थी के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव डालते है बाहरी,जंक फ़ूड से सावधान रहने की आवश्यकता है।

यह बाहरी खाना खाते समय अच्छा लगता है , किंतु यह शरीर के लिए उतना ही हानिकारक होता है।

बाहरी व्यंजन शरीर के अन्य रसायनों को प्रभावित करता है , जिसके कारण शरीर सुस्त होता है और अनेक बीमारियों का कारण बनता है। अतः जरूरी है कि इस परिवेश में आप हरी सब्जी और फल फ्रूट का सेवन अवश्य करें।

जिससे आपको ताजगी तंदुरुस्ती और भरपूर मात्रा में आवश्यक तत्व मिल सके।

 

स्वच्छता –

ध्यान रहे आप जहाँ भी पढाई करें वह स्थान स्वच्छ , साफ – सुथरा और भरपूर रोशनी से युक्त हो।

हो सके तो अपने आसपास हरियाली का ध्यान रखें जिससे आपको पढाई करने में रुचि बनी रहेगी और तनाव की स्थिति नहीं आएगी।

विद्यार्थी करते समय कुछ समय का ब्रेक अवश्य लें –

विद्यार्थी पढाई करते समय लंबे समय तक अपने टास्क में लगे रहते है , जिसके कारण वह निरंतर अपनी पकड़ किताब – कॉपी , कंप्यूटर , मोबाइल आदि में बनाए रखता है। यह सेहत के लिए बेहद ही खतरनाक है। लंबे समय तक पढाई करने से आपमें स्ट्रेस / तनाव की स्थिति पैदा होती है। अतः  आवश्यक है कि समय-समय पर ब्रेक लेकर अपने दोस्तों से कुछ एक बात करें।

गाना – संगीत आदि को सुने। हो सके तो घर – परिवार में बात करें जिससे आपको तनाव को रोकने में मदद मिलेगी।

 

 

खुद के लिए समय निकालें –

आज का परिवेश भागा – दौड़ी का परिवेश है। इस भाग – दौड़ भरी जिंदगी में विद्यार्थी स्वयं के लिए समय नहीं निकाल पाता।

यह सबसे बड़ा कारण है जो विद्यार्थी स्वयं के लिए समय नहीं देता उससे बड़ा गरीब कोई नहीं हो सकता। अतः आवश्यक है कि आप अपने लिए समय निकालें और स्वयं को जाने और अपने को अन्य लोगों को परिचय कराएं खूब दोस्त बनाये किन्तु सच्चे और मददगार ।

आप में आनेक योग्यता है , उसको निखारें इससे आपको अच्छा लगेगा और आपके आसपास के लोग आपसे प्रभावित होंगे।

 

खेलकूद की भूमिका

विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अपने जीवन शैली में खेल को आवश्यक रूप से शामिल करना चाहिए। खेलकूद के माध्यम से जहां शरीर स्वस्थ रहता है अनेक प्रकार के रोगों से निपटने की क्षमता उत्पन्न होती है वही मस्तिष्क अनेक प्रकार की शक्तियों को ग्रहण करता है जैसे –
१ सामाजिक भावनाओं का विकास होता है
२ सहायता करने की प्रवृत्ति जागृत होती है
३ एक साथ मिलकर कार्य करने की क्षमता का विकास होता है
४ नीति, तथा योजना बनाने की स्वभाविक रूप से आती है।

 

दो शब्द –

अंत में विद्यार्थियों से यही कहना चाहता हूं कि वह अपने जीवन को बिना किसी दबाव और बनी बनाई व्यवस्था के अनुरूप जिएं। बल्कि वह इस प्रकार अपने जीवन को समझे और बनाएं जो उन्हें तनाव मुक्त जिंदगी प्रदान करती हो।
हर बालक के भीतर एक विशेष प्रकार का गुण विद्यमान है वह समय के साथ साथ ही बाहर निकलती है जो बालक के चरित्र , के साथ-साथ उसके जीवन के सभी गुणों को निखारती है।

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रामाधार वर्मा
प्रवक्ता हिंदी

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