माता संतोषी की आरती लिखी हुई Sukrwar ki Aarti Lyrics

माता संतोषी की आरती परम सुखदाई है इनके नाम से ही स्पष्ट होता है कि इनमें कितना संतोष का भाव है। इन्हें गुड़ और चना का भोग प्रिय है। जो भक्त इनकी पूजा विधि-विधान के साथ करता है और गौ माता की सेवा करता है उन्हें भोग लगाता है उस पर माता अपनी कृपा अवश्य बरसाती हैं। यह गणेश जी की पुत्री होने के कारण भी देवताओं में पूजनीय हैं। प्रस्तुत लेख में आप माता संतोषी की आरती पढ़ेंगे।

माता संतोषी की आरती Sukrwar ki Aarti

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन की सुख सम्पति दाता ।।
जय संतोषी माता….

सुन्दर चीर सुनहरी मां धारण कीन्हो।
हीरा पन्ना दमके तन श्रृंगार लीन्हो ।।
जय संतोषी माता….

गेरू लाल छटा छबि बदन कमल सोहे।
मंद हंसत करुणामयी त्रिभुवन जन मोहे ।।
जय संतोषी माता….

स्वर्ण सिंहासन बैठी चंवर दुरे प्यारे।
धूप, दीप, मधु, मेवा, भोज धरे न्यारे।।
जय संतोषी माता….

गुड़ अरु चना परम प्रिय ता में संतोष कियो।
संतोषी कहलाई भक्तन वैभव दियो।।
जय संतोषी माता….

शुक्रवार प्रिय मानत आज दिवस सोही।
भक्त मंडली छाई कथा सुनत मोही।।
जय संतोषी माता….

मंदिर जग मग ज्योति मंगल ध्वनि छाई।
बिनय करें हम सेवक चरनन सिर नाई।।
जय संतोषी माता….

भक्ति भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।
जो मन बसे हमारे इच्छित फल दीजै।।
जय संतोषी माता….

दुखी दारिद्री रोगी संकट मुक्त किए।
बहु धन धान्य भरे घर सुख सौभाग्य दिए।।
जय संतोषी माता….

ध्यान धरे जो तेरा वांछित फल पायो।
पूजा कथा श्रवण कर घर आनन्द आयो।।
जय संतोषी माता….

चरण गहे की लज्जा रखियो जगदम्बे।
संकट तू ही निवारे दयामयी अम्बे।।
जय संतोषी माता….

संतोषी माता की आरती जो कोई जन गावे।
रिद्धि सिद्धि सुख सम्पति जी भर के पावे।।
जय संतोषी माता….

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समापन

जिस व्यक्ति में संतोष का भाव होता है उससे महान कोई नहीं हो सकता। कहा जाता है जो व्यक्ति विद्वान होता है, उसमें संतोष का भाव आ जाता है। माता संतोषी में यह सभी गुण है जिनके कारण वह संतोषी कहलाई। यह देवताओं में सर्वप्रथम जिनकी पूजा की जाती है उन गणेश जी की पुत्री हैं यह गुड़ और चना का भोग स्वीकार करती हैं और गौ माता की सेवा से अति प्रसन्न होती है। जो भक्त गौ माता की सेवा करता है उनको भोग लगाता है माता उस पर अपनी कृपा बरसाती है। जिस घर में माता संतोषी की कृपा बरसती है, वह घर धन-वैभव, विद्या, स्वास्थ्य आदि से परिपूर्ण होता है। उस घर का सदस्य कभी किसी विघ्न बाधा में नहीं पड़ता। माता अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखती हैं। उपरोक्त लेख आपको कैसा लगा सुझाव कमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

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