Swami Vivekananda quotes in Hindi – स्वामी विवेकानंद जी के सुविचार

Swami Vivekananda believed in Yoga and many other things which makes him powerful. We will tell you Swami Vivekananda Quotes and Thoughts in Hindi.

स्वामी विवेकानंद भारतीय युवा के प्रेरणा स्रोत है। आज प्रत्येक युवा स्वामी जी से सीखना चाहता है , उनके बताए हुए मार्गों को आत्मसात करना चाहता है।

ऐसा महान व्यक्ति भारत में आज तक नहीं हुआ जिन्होंने शिक्षा के साथ शरीर पर ध्यान देने की बात कही हो। स्वामी जी के विचारों को जितनी प्रसिद्धि वर्तमान समय में हासिल है , उतना अन्यत्र किसी और व्यक्ति का नहीं।

स्वामी जी की आध्यात्मिक , नीतिगत और चारित्रिक बातें दुर्लभ है। उन्होंने स्वयं के अनुभव से उन बातों को कहा जो आज अनमोल वचन , सुविचार के रूप में लोग अक्षर से अनुपालन करते हैं।

Best Swami Vivekananda Quotes – स्वामी विवेकानंद जी के सुविचार

1.

swami vivekananda quotes in hindi
swami vivekananda quotes in hindi

एक अच्छे चरित्र का निर्माण ,

हजारों ठोकरें खाने के बाद ही होता है। ।

2.

क्या तुम यह अनुभव नहीं करते कि

दूसरों के ऊपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नहीं है।

दृढ़ता पूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चाहिए

धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा। ।

3.

उठो और तब तक मत रुको ,

जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए। ।

4.

swami vivekananda ke suvichar
swami vivekananda ke suvichar

अपनी अंतरात्मा को छोड़कर

किसी के आगे मस्तक मत झुकाओ

ईश्वर तुम्हारे अंदर ही विद्यमान है

इसका अनुभव करो। ।

5.

जिस व्यक्ति के साथ श्रेष्ठ विचार रहते हैं ,

फिर वह व्यक्ति कभी अकेला नहीं होता। ।

Swami Vivekananda Quotes for Students

6

Motivational Swami vivekananda quotes in hindi
Motivational Swami vivekananda quotes in hindi

जैसा तुम सोचोगे , वैसे ही बन जाओगे 

खुद को निर्बल मानोगे तो निर्बल ,

सबल मानोगे तो सबल ही बन जाओगे। ।

7.

दिल और दिमाग के टकराव में

सदैव दिल की सुनो। ।

8.

कभी कमजोर मत पड़ो ,

आप अपने आपको शक्तिशाली बनाओ

आपके भीतर अनंत शक्ति है। ।

9.

अंधविश्वास मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है ,

लेकिन धर्मांधता उससे भी बुरा है। ।

Swami Vivekananda Quotes in Hindi on Success

10.

विश्व में अधिकांश लोग इसलिए असफल हो जाते हैं

क्योंकि उनमें समय पर

साहस का संचार नहीं होता , वह भयभीत हो उठते हैं। ।

11.

पवित्रता , धैर्य और दृढ़ता

यह तीनों सफलता के लिए आवश्यक है ,

और सबसे ऊपर प्यार है। ।

Swami Vivekananda Quotes on love

12.

प्यार वह चीज है

जो बचपन में मुफ्त मिलता है

जवानी ने कमाना पड़ता है

बुढ़ापे में मांगना पड़ता है। ।

13.

जीवन में सफलता के लिए

हमेशा हमें अपने लक्ष्य पर

ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। ।

14.

एक समय में एक काम करो ,

और इसे करते समय

अपनी पूरी आत्मा को इसमें

शामिल करने के लिए सभी को छोड़ दो। ।

कहा जाता है एक वक्त में एक काम को पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए। जो व्यक्ति इस नीति को अपनाता है, वह सदैव ध्यान केंद्रित कार्य करता है। जो व्यक्ति एक समय अनेकों काम पर ध्यान रखता है , वह लापरवाही का शिकार होता है। कार्य की असफलता इस पर निर्भर करती है कि , वह एक समय में कितने कार्य पर ध्यान देता है। क्या वह पूरी निष्ठा और लगन के साथ , कार्य कर रहा है यह भी महत्व रखता है।

स्वामी विवेकानंद जी के सच्चे सुविचार

15.

संघर्ष जितना बड़ा होगा

जीत उतनी ही शानदार। ।

16.

जीवन में जब तक जीना है

तब तक सीखना है

अनुभव ही जीवन का

सर्वोत्तम शिक्षक है। ।

17.

धन का प्रयोग अगर , अच्छाई के लिए ना हुआ

तो यह धन बुराई की जड़ बन जाता है। । 

18.

जीवन में ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नहीं

पर जो रिश्ते हैं उनमें जीवन होना जरूरी है। ।

Swami Vivekananda Quotes on education

19.

आधुनिक भौतिक विज्ञान,

उन्हीं निष्कर्षों पर पहुंचती है

जिन पर भारतीय वेदांत 

युगों पहले पहुंच चुका है। ।

स्वामी विवेकानंद भारतीय संस्कृति के प्रबल समर्थक है, इसका प्रमाण उन्होंने अमेरिका के ऐतिहासिक भाषण में दिया था। वह सदैव भारतीय वेद – वेदातों को , देश-विदेश की संस्कृति आदि से अधिक प्रमाणिक मानते हैं। वेद-वेदांत जिसको पूर्व में सिद्ध कर चुके हैं , आधुनिक विज्ञान उन्हीं की खोज कर रहा है।

20.

किसी मकसद के लिए खड़े हो तो एक पेड़ की तरह

गिरो तो एक बीज की तरह ,

ताकि दोबारा उगकर

उसी मकसद के लिए फिर से जंग कर सको। ।

स्वामी जी का स्पष्ट मानना था, जिस मकसद के लिए तुम संघर्ष कर रहे हो, उसके लिए सदैव अडिग रहो। अगर उस सफलता को प्राप्त नहीं कर सके। फिर भी उसके ज्ञान तुम्हें उस मकसद की प्राप्ति के लिए कार्य करेंगे। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया है, किसी भी मकसद की प्राप्ति के लिए संघर्ष करना आवश्यक है। हजारों असफलता के पीछे एक सफलता अवश्य मिलती है।

21.

चरित्र से बड़ा कोई धन नहीं है

इसका संचय तथा निर्माण वह व्यक्ति कर सकता है

जिसे अपने मन तथा इंद्रियों पर नियंत्रण करना आता हो।

अच्छा चरित्र उस व्यक्ति के पास होता है,

जिसने वास्तव में संघर्ष किया हो।

सच्चा संघर्ष कभी भी बुरे चरित्र को नहीं अपनाता।

22.

दूसरों के ऊपर आश्रित रहना बुद्धिमानी नहीं है

स्वयं को कमजोर मानकर किसी दूसरे पर निर्भर रहना

जीवन को धिक्कार होता है।

कार्य करने के लिए स्वयं आगे आना होता है

किसी भी कार्य की सफलता

उसके दृढ़ निश्चय होने पर निर्भर करती है।

सफलता – असफलता कार्य के दो पहलू हैं

कोई एक तो अवश्य ही प्राप्त होगा।

23.

उठो और संघर्ष करने के लिए तैयार हो

तबतक तुम विश्राम मत करो

जब तक तुम्हें लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए।

लक्ष्य की प्राप्ति करनी है,

तो समय बर्बाद करना छोड़ दो।

24.

व्यक्ति को किसी अन्य के समक्ष

अपने मस्तक को नहीं झुकाना चाहिए।

व्यक्ति स्वयं ईश्वर का अंग है,

दूसरे की पूजा करने से अच्छा स्वयं की पूजा करना है।

स्वयं को जो व्यक्ति पहचान गया

वह फिर किसी दूसरे के समक्ष मस्तक नहीं झुकाता।

25.

ज्ञानी और चरित्रवान व्यक्ति को समाज सदैव आदर से पूजता है।

ऐसे व्यक्तियों का सम्मान करते हुए, उनसे शिक्षा ग्रहण करते हैं।

दुराचारी और गलत आचरण वाला व्यक्ति कभी भी समाजिक नहीं हो सकता।

वह सदैव समाज के बाहर रह कर अपना जीवन जीता है।

ज्ञानी व्यक्ति स्वयं को कभी अकेला नहीं पाता।

26.

व्यक्ति जैसा सोचता है वह वैसा ही बन जाता है

एक बलशाली इसलिए बलशाली नहीं होता,

कि उसकी शारीरिक शक्ति मजबूत है।

बल्कि वह इसलिए बलशाली होता है,

क्योंकि वह मन से कमजोर नहीं होता।

स्वयं को निर्बल समझने वाले निर्बल, बन जाते हैं

और सक्षम मानने वाले स्वयं सक्षम हो जाते हैं।

27.

दिमाग मन का प्रतिनिधित्व करता है

मन जैसा कहता है दिमाग वैसा ही आचरण करता है

दिल का संबंध सच्चे विचारों से होता है

ईश्वर का वास इसी दिल में वास होता है

दिल की आवाज ईश्वर की आवाज मानी जाती है।

जब कभी दिल और दिमाग के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो

सदैव दिल की बातों को सुननी चाहिए।

28.

व्यक्ति के भीतर संसार की समस्त शक्तियां विद्यमान होती है

व्यक्ति समय के साथ-साथ अपनी शक्तियों को पहचानता है

इसलिए व्यक्ति को कभी भी कमजोर नहीं पडना चाहिए

अपने भीतर निहित शक्तियों से समस्या से निदान ढूंढना चाहिए।

29.

अंधविश्वास व्यक्ति को पतन के मार्ग पर ले जाता है

जहां व्यक्ति अंधविश्वास का मार्ग अपनाता है

वहां स्वयं का विवेक खो बैठता है।

30.

वह व्यक्ति समाज का सबसे बड़ा शत्रु है

जो व्यक्ति धर्म के प्रति लापरवाह रहता है।

Swami Vivekananda Quotes in Hindi for Youth

31.

असफलता का विश्व भर में एक ही कारण है

लोग समय पर निर्णय नहीं ले पाते।

जो व्यक्ति समय पर निर्णय नहीं ले पाता

वह सदैव असफल रहता है।

ऐसे व्यक्तियों में सच बोलने

और व्यक्त करने का साहस नहीं होता।

32.

सफलता मेहनत और लग्न से प्राप्त होती है

सफलता उसी व्यक्ति को प्राप्त होगी

जो स्वयं – मन की पवित्रता, धैर्य और दृढ़ निश्चयी हो।

सफलता की प्राप्ति प्रत्येक व्यक्ति के लिए सुलभ नहीं होती

इसके पीछे प्यार का अहम योगदान होता है

यह प्रेम कार्य के प्रति हो या आपके प्रति।

33.

प्यार संसार का बहुमूल्य चीज होता है

बचपन में जो मुफ्त में मिलता है।

उस प्यार को पाने के लिए

जवानी में मेहनत करना पड़ता है।

बुढ़ापे की स्थिति में यही प्यार मांगना पड़ता है।

वह लोग बेहद खुशनसीब होते हैं

जिन्हें बुढ़ापे में प्यार नसीब होता है।

34.

जीवन में जिस व्यक्ति को सफलता प्राप्त करना है

उसे अपने लक्ष्य पर ही ध्यान रखना चाहिए।

ध्यान केंद्रित लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त होते हैं

उससे लापरवाही करने वाले सदैव पछताते हैं।

35.

किसी जीत को हासिल करने के लिए

उसके पीछे लगा संघर्ष जितना बड़ा होगा

जीत भी उतनी बड़ी होगी।

छोटे से छोटे लक्ष्य को हासिल

करने के लिए संघर्ष बड़ा करना चाहिए।

36.

कहा जाता है अनुभव शिक्षा का सर्वोत्तम शिक्षक है

व्यक्ति जो स्वयं के अनुभव से सीख जाता है

वह दूसरों के सिखाएं कहां सीखता

जीवन में अपने अनुभवों को स्वयं का शिक्षक मान

उससे ज्ञान अर्जन करना चाहिए।

37.

धन को धर्म के लिए व्यय करना चाहिए

संचित धन तथा समाज के लिए

जो काम ना आ सके ऐसा धन सदैव व्यर्थ है

धर्मार्थ हेतु किया गया व्यय धन का सदुपयोग होता है

अन्यथा बुराइयां जड़ जमा लेती है।

धन को एकत्र करने से बचना चाहिए यह लोभ को जन्म देता है।

38.

जीवन में रिश्ते रखना काफी अहम होता है

किंतु ऐसे रिश्ते हो जो जीवंत हो

ढेर सारे और मौकापरस्त रिश्ते रखने से क्या लाभ ?

इससे बढ़िया रिश्तो का ना होना है।

रिश्ते रखिए किंतु वह

जो आपको समझते हैं जिनको आप समझते हैं।

39.

किसी भी दान का उद्देश्य

परोपकार की भावना से हो

तभी दान की सार्थकता है।

40.

जीवन तुम्हारा है पसंद भी तुम्हारा है

अब यह तुम पर निर्भर करता है

तुम अपने जीवन को

किस प्रकार से जीना चाहते हो।

41.

सफल वही व्यक्ति होता है

जिसमें विनम्रता का भाव 

कूट-कूट कर भरा होता है।

42.

सफल जीवन वही है

जो स्वयं से पहले

दूसरों के विषय में सोचता है

उसके दुख में शामिल होता है

अपनी खुशी को बांटता है।

स्वामी विवेकानंद जी के अनमोल वचन

43.

तुम्हारा लक्ष्य तुम से अधिक दूरी पर नहीं है

आशावादी बनो और निरंतर संघर्ष करो

थोड़ी सी शिथिलता भी

तुम्हारे लक्ष्य से मुख मोड़ सकती है।

44.

निस्वार्थ भाव से की गई सेवा

ईश्वर की सच्ची सेवा होती है।

45.

आत्म विश्लेषण में वह शक्ति है

जो रातों-रात सफलता दिला सकती है।

46.

जो व्यक्ति स्वयं का सम्मान करता है

स्वयं को प्यार करता है

वही दुनिया के अन्य अर्थों को जान पाता है

जिससे अन्य लोग अनभिज्ञ रह जाते हैं।

47.

सफलता का अर्थ धनवान हो ना नहीं

अपितु खुशहाल होना है

जब आपका जीवन

आनंदमय और उल्लास पूर्ण हो

तभी आपकी सफलता सार्थक है।

48.

आपकी वाणी आपके चरित्र को प्रकट करती है

इसलिए बोलने से पहले

अपने शब्दों को तर्क की कसौटी पर अवश्य तौलें।

49.

आज की युवा पीढ़ी

अर्थहीन तथा लक्ष्यहीन दिशा में कार्य कर रही है

जिसका जीवन की सफलता से कोई लेना-देना नहीं

हमें अपनी आदत को बदलते हुए

जीवन के महत्व को समझना होगा।

50.

धैर्य रखें, सभी कार्य

अपने समय से संपन्न होते हैं

आप की उत्सुकता कार्य की सफलता में

बाधा उत्पन्न कर सकती है।

51. 

जिन्हें जीवन में सफलता या

निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करना होता है

वह आशा का दामन पकड़

कर्म की कुदाली चलाते हैं।

स्वामी विवेकानंद के बहुमूल्य सुविचार

52.

बुराइयां सभी जगह होती है

बुराइयों के प्रकार भी विभिन्न हैं

सभी बुराइयों से परेशान है

यह उस वात रोग की तरह है जो

पैर से हटाने पर सिर पर चला जाता है

सिर से हटाने पर दूसरे अंग में

इसलिए बुराइयों की ओर ध्यान देना व्यर्थ है।

53.

हमारे दर्शन शास्त्रों में भी लिखा है

अच्छे और बुरे का आपसी संबंध होता है

यह एक ही चीज के दो पहलू हैं

जहां समुद्र में लहर उठेगी

वहीं दूसरी ओर गड्ढा भी होगा।

54.

जीवन ही दुखमय है इसका सिद्धांत ही

एक दूसरे पर आधारित है

बिना किसी का भोजन छीने हम

खुद एक कौर नहीं खा सकते

बिना किसी को मारे हम सांस नहीं ले सकते

यही प्रकृति का नियम है यही दार्शनिक सिद्धांत है।

55.

बुराइयों को खत्म करने के लिए

बाहरी उपाय ढूंढने के बजाय

हमें भीतरी उपायों की ओर कार्य करना होगा

प्रत्यक्ष से नहीं अप्रत्यक्ष उपायों से ही

इसका सम्मान किया जा सकता है

और यह सभी शिक्षा से ही संभव है।

56.

किसी महान कार्य को करते समय

अपने मन को शांत करना होगा

और अपने खून से जोश दूर करना होगा

अति उत्साह मैं व्यक्ति अपने

स्वयं के कार्य बिगाड़ देता है।

57.

उत्तेजना में किए गए कार्य

कभी सफल नहीं होते

इतिहास इसका गवाह है।

58.

स्वयं को सभ्य बताकर

सनातन धर्म की भयानक बुराइयां करने वाले लोग

कौन सी विद्वता का परिचय देते हैं।

59.

बुराइयां सभी में होती है

किंतु सच्चा हितैषी ही

उन बुराइयों को दूर करने के लिए

हर संभव उपाय करता है।

60.

बिना सहायता किए, मार्गदर्शन दिखाएं

उपदेश देना व्यर्थ है

कष्टों में रहते हुए उपदेश पाना कोई नहीं चाहता।

61.

जो साहित्य समाज को तोड़ने का कार्य करती है

जाति भाषा क्षेत्र पर भेदभाव करती है

वह साहित्य समाज के लिए कलंक है।

62.

क्या तुमने इस तथ्य पर विचार किया है

भारत में सभी संस्कारों की कमी थी?

क्या तुमने अपने इतिहास को ध्यान पूर्वक पढ़ा है?

तुम्हारा इतिहास सदैव गौरवशाली था, जिसे धूमिल किया गया।

63.

भारत के सभी विद्वानों ने

समाज को जोड़ने का प्रयत्न किया

इस कार्य में उन्होंने अपना

सर्वस्व न्योछावर कर जीवन समर्पित किया।

64.

विद्वानों का कर्तव्य होना चाहिए

कोई भी उनके शरण में आए

उसे बताना चाहिए कि तुम पहले अच्छे थे

और अब तुम और अच्छे हो सकते हो।

65. 

अच्छाई बुराई सभी का अपना महत्व है

जो अच्छाई उनके लिए अमृत का कार्य करेगी

वही हमारे लिए जहर का कार्य भी कर सकती है

इसलिए व्यक्ति को अच्छाई और बुराई में

फर्क करने के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है।

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समापन

धर्म, संस्कृति के पुरजोर समर्थन स्वामी विवेकानंद युवा हृदय के प्रेरणा स्रोत थे। उन्होंने ज्ञान तथा सिद्धि का जो समन्वय स्थापित किया वह अद्वितीय था। उन्होंने शारीरिक मजबूती के साथ-साथ मानसिक मजबूती को भी सुनिश्चित किया था। साथ ही उन्होंने अध्यात्म के क्षेत्र में भी अपना प्रबल विश्वास दिखाया था।

वह सदैव ऊर्जावान रहते, तथा नवीन कार्य करने को उत्सुक रहते वह कार्य जो समाज का निर्माण करे एक आदर्श वातावरण स्थापित करें इसके लिए उन्होंने आजीवन प्रयत्न किया।

आशा है उपरोक्त लेख आपको पसंद आया हो अपने सुझाव तथा विचार कमेंट बॉक्स में लिखें।

4 thoughts on “Swami Vivekananda quotes in Hindi – स्वामी विवेकानंद जी के सुविचार”

  1. Bahut hi badhiya jankari aapne hum sabhi ke sath share kiya hai. aise hi useful informations ke bare me likhte rahiye. thanks share krne ke liye

    Reply
  2. बहुत बढ़िया पोस्ट है पढ़कर बहुत अच्छा लगा और सभी के सभी सुविचार बहुत ही प्रेरणादायक और नई उर्जा प्रदान करने वाले हैं

    Reply
  3. Swami Vivekanand Ji ke vichar kisi bhi vyakti ke jivan me adbhut parivartan la sakte hai. Swami Vivekanand ji ke vicharo par chalkar koi bhi vyakti apne sapno ko pura kar sakta hai aur duniya me jo chahe vo hasil kar sakta hai

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