स्वामी विवेकानंद जी की कहानियां – Swami vivekananda stories in hindi

Swami Vivekananda is one of the finest men ever born in India. He is admired by all. Today we will read best Swami Vivekananda stories in Hindi with moral values written.

युवा प्रेरणा स्रोत , जिज्ञासा , संकल्प शक्ति आदि से परिपूर्ण श्रद्धेय स्वामी विवेकानंद जी के जीवन काल की कुछ महत्वपूर्ण कहानियां इस लेख के माध्यम से प्रस्तुत कर रहे हैं।

कुछ कहानियां उनके जीवन की घटनाओं पर आधारित है , तो कुछ जन श्रुति के आधार पर।

यह लेख स्वामी विवेकानंद जी के ज्ञान , व्यक्तित्व और चरित्र तथा उनके कुशाग्र बुद्धिमता का परिचय कराने वाला है। युवा सदैव स्वामी जी को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं। इस कहानी को व्यक्तिगत प्रेरणा लेते हुए अपने जीवन मे अहम बदलाव ला सकते हैं।

स्वामी जी सदैव पावर हाउस के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

उनकी संकल्प शक्ति और जिज्ञासा तथा खोज की प्रवृत्ति आज भी मानव को प्रेरित करती है। उनका अटल विश्वास था जब तक अपने कार्य को प्राप्त न कर लो तब तक आराम करना व्यर्थ है।

 

1. शिक्षा से समाज सेवा

( Swami vivekananda stories in hindi on Education )

एक समय की बात है स्वामी विवेकानंद अपने आश्रम में वेदों का पाठ कर रहे थे , तभी उनके पास चार ब्राह्मण आए वह बड़े व्याकुल थे।  ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह किसी प्रश्न का हल ढूंढने के लिए परिश्रम कर रहे हैं।

चारों ब्राह्मण ने स्वामी जी को प्रणाम किया और कहा – स्वामी जी ! हम बड़ी दुविधा में हैं , आपसे अपने समस्या का हल जानना चाहते हैं। हमारी जिज्ञासाओं को शांत करें।

स्वामी जी ने आश्वासन दिया और जानना चाहा

कैसी जिज्ञासा ? कैसा प्रश्न है आपका ?
ब्राह्मण बोले महात्मा हम चारों ने वेद – वेदांतों की शिक्षा ग्रहण की है। हम सभी समाज में अलग-अलग दिशाओं में घूम कर समाज को अपने ज्ञान से सुखी , संपन्न और समृद्ध देखना चाहते हैं।

इसके लिए हमारा मार्गदर्शन करें !

स्वामी जी के मुख पर हल्की सी मुस्कान आई और उन्होंने ब्राह्मण देवताओं को कहा –

है ब्राह्मण ! आप सभी यह सब लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं , इसके लिए आपको मिलकर समाज में शिक्षा का प्रचार प्रसार करना होगा।

ब्राह्मण देवता शिक्षा से हमारा लक्ष्य कैसे प्राप्त हो सकता है ?
स्वामी जी जिस प्रकार बगीचे में पौधे को लगाकर बाग को सुंदर बनाया जाता है , ठीक उसी प्रकार शिक्षा के द्वारा समाज का उत्थान संभव है।

शिक्षा व्यक्ति में समझ पैदा करती है , उन्हें जीवन के लिए समृद्ध बनाती है। साधनों से संपन्न होने में शिक्षा मदद करती है , सभी अभाव को दूर करने का मार्ग शिक्षा दिखाती है।  यह सभी प्राप्त होने पर व्यक्ति स्वयं समृद्ध हो जाता है।

ब्राह्मण देवता को अब स्वामी विवेकानंद जी का विचार बड़े ही अच्छे ढंग से समझ आ चुका था।

अब उन्होंने मिलकर प्रण लिया वह अपने शिक्षा का प्रचार – प्रसार समाज में करेंगे यही उनकी समाज सेवा होगी।

 

फ्रांसीसी विद्वान का घमंड चूर

( Swami vivekananda stories in hindi on arrogance )

यह उन दिनों की बात है जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका के शिकागो शहर में अपना ऐतिहासिक भाषण देने गए हुए थे। अपने भाषण को सफलतापूर्वक पूरे विश्व के पटल पर रख कर , अन्य देशों का भ्रमण करने निकले।

इसी क्रम में वह फ्रांसीसी प्रसिद्ध विद्वान के घर अतिथि हुए।

स्वामी विवेकानंद ने उस विद्वान का आतिथ्य स्वीकार किया और उनके घर पहुंचे।

स्वामी जी का स्वागत घर में सम्मानजनक हुआ। स्वामी जी के रुचि अनुसार भोजन की व्यवस्था थी। विदेश में इस प्रकार का भोजन मिलना सौभाग्य की बात थी।

भोजन के उपरांत वेद-वेदांत और धर्म की बड़ी-बड़ी रचनाओं पर शास्त्रार्थ आरंभ हुआ।

शास्त्रार्थ जिस कमरे में हो रहा था , वहां एक मेज पर लगभग डेढ़ हजार पृष्ठ की एक धार्मिक पुस्तक रखी हुई थी।

स्वामी जी ने उस पुस्तक को देखते हुए कहा –  यह क्या है ?

मैं इसका अध्ययन करना चाहता हूं। फ्रांसीसी विद्वान आश्चर्यचकित हो गया।

उसने कहा स्वामी जी कहा यह दूसरे भाषा की पुस्तक है , आप तो भाषा को जानते भी नहीं है।

आप इतने पृष्ठों का अध्ययन कैसे कर सकेंगे?

मैं इसका अध्ययन स्वयं एक महीने से कर रहा हूं !

स्वामी जी – यह आप मुझ पर छोड़ दीजिए एक घंटे के भीतर में आपको अध्ययन करके लौटा दूंगा।

फ्रांसीसी विद्वान को अब क्रोध आने लगा , स्वामी जी इस प्रकार का मजाक मेरे साथ क्यों कर रहे हैं ?

किंतु स्वामी जी ने विश्वास दिलाया , इस पर फ्रांसीसी विद्वान ने मनमाने ढंग से वह पुःतक स्वामी जी को सौंप दिया।

स्वामी जी उस पुस्तक को अपने दोनों हाथों में रखकर एक घंटे के लिए योग साधना में बैठ गए। जैसे ही एक घंटा बीता होगा , फ्रांसीसी विद्वान उस कमरे में आ गया।

स्वामी जी क्या आपने पुस्तक का अध्ययन कर लिया

हां अवश्य !

आप कैसा मजाक कर रहे हैं ?

मैं इस पुस्तक को एक महीने से अध्ययन कर रहा हूं।

अभी आधा भी अध्ययन नहीं कर पाया हूं , और आप कहते हैं आपने अध्ययन कर लिया।

हां अवश्य !

स्वामी जी आप मजाक कर रहे हैं !

नहीं तुम किसी भी पृष्ठ को खोल कर मुझसे जानकारी ले सकते हो !

उस विद्वान ने ऐसा ही किया।

पृष्ठ संख्या बत्तीस बोलने पर स्वामी जी ने उस पृष्ठ पर लिखा प्रत्येक शब्द अक्षरसः कह सुनाया।

फ्रांसीसी विद्वान के आश्चर्य की कोई सीमा नहीं थी।

वह स्वामी जी के चरणों में गिर गया। उस विद्वान ने स्वामी जैसा व्यक्ति आज से पूर्व नहीं देखा था।

उसे यकीन हो गया था , यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है।

 

सन्यासी जीवन

( Swami vivekananda stories in hindi with moral values )

स्वामी विवेकानंद ने अल्प आयु में सन्यास धारण कर लिया था। उन्होंने गृहस्ती छोड़कर नर सेवा से नारायण सेवा का संकल्प लिया था। समाज कल्याण और उनके उत्थान के लिए सदैव प्रयत्नशील रहते थे। वेद-वेदांत, धर्म आदि के महत्व को जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए वह संघर्षरत थे।

एक समय की बात है स्वामी जी को अपने आश्रम लौटना था। वह तांगे से उतरकर वृक्ष की छांव में बैठ गए। वृक्ष के नीचे बैठे-बैठे काफी समय हो गया। कुछ समय बाद वहां से सभी लोग चले गए , फिर भी स्वामी जी वहां यथास्थिति बैठे रहे।

एक सज्जन स्वामी जी को काफी देर से देख रहा था। उसके मन में जिज्ञासा हुई , चलकर हाल पूछा जाए। स्वामी जी के पास पहुंच कर शिष्टाचार से प्रणाम कर , उनका हालचाल जाना। स्वामी जी ने बात बात में सज्जन व्यक्ति को बताया उनके पास आगे की यात्रा करने की राशि नहीं है , इसलिए वह यहां विश्राम करने को रुक गए।

सज्जन व्यक्ति के पूछने पर स्वामी जी ने बताया उन्होंने कल से कुछ खाया पिया भी नहीं है । वह व्यक्ति स्वामी जी को अपने घर ले गया , घर में उनका खूब आदर-सत्कार हुआ।

सज्जन व्यक्ति के पूछने पर कि उनके थैले में क्या है ?

स्वामी जी ने बताया एक गीता की पुस्तक और एक बाइबल है।

व्यक्ति को आश्चर्य हुआ।  दो धर्म की पुस्तकें उनके थैले में एक साथ कैसे ?

स्वामी जी ने बताया अपने धर्म में संप्रदाय-पंथ आदि का कोई दुराग्रह नहीं है। हमें किसी भी माध्यम से ईश्वर की प्राप्ति हो , वह मार्ग कोई भी हो सकता है।

व्यक्ति ने प्रश्न किया सन्यास जीवन में किसकी आवश्यकता अधिक होती है। इस पर स्वामी जी ने कहा सन्यास जीवन में स्वयं की होती है ,उसके अतिरिक्त किसी और की नहीं।

जो सदाचरण करता है , उससे बढ़कर कोई और सन्यासी नहीं हो सकता।

 

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Final Words

I hope Swami Vivekananda stories in Hindi with moral values must be like by you. Please comment below your thoughts about it in the comment section.

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