ध्रुवस्वामिनी पात्र योजना | dhroov swamini patr yojna | jayshankar prsad ka natak |

ध्रुवस्वामिनी पात्र योजना   शकराज की मृत्यु के बाद उसकी लाश को मांगने ध्रुवस्वामिनी के पास जाती है और बड़े ही मार्मिक स्वर में कहती है ” रानी तुम भी इस्त्री हो ,क्या इस्त्री की व्यथा नहीं समझोगी ………….. सबके जीवन में एक बार प्रेम की दीपावली जलती है।  जली होगी अवश्य तुम्हारे भी जीवन में वह आलोक …

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