ध्रुवस्वामिनी पात्र योजना | dhroov swamini patr yojna | jayshankar prsad ka natak |

ध्रुवस्वामिनी पात्र योजना   शकराज की मृत्यु के बाद उसकी लाश को मांगने ध्रुवस्वामिनी के पास जाती है और बड़े ही मार्मिक स्वर में कहती है ” रानी तुम भी इस्त्री हो ,क्या इस्त्री की व्यथा नहीं समझोगी ………….. सबके जीवन में एक बार प्रेम की दीपावली जलती है।  जली होगी अवश्य तुम्हारे भी जीवन में वह आलोक …

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जयशंकर प्रसाद | ध्रुवस्वामिनी | भारतेंदु के उत्तराधिकारी | jayshankar prsad in hindi | dhruvswamini |

जयशंकर प्रसाद | ध्रुवस्वामिनी | भारतेंदु के उत्तराधिकारी | jayshankar prsad in hindi | dhruvswamini |     ध्रुवस्वामिनी प्रश्न =>एक समस्या नाटक के रूप में ध्रुवस्वामिनी पर विचार करते हुए उसने स्त्री समस्या के निरूपण का उद्घाटन कीजिए। जयशंकर प्रसाद का काल 1916 से 1950 स्वीकार किया जाता है ।जयशंकर ,  भारतेंदु के उत्तराधिकारी के रुप में …

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