अलाई दरवाजा कुतुब परिसर। दिल्ली भ्रमण। मुगल वास्तुकला। अलाउद्दीन खिलजी।

इस लेख को पढ़ने के उपरांत आप दिल्ली की सल्तनत के विषय में जानकारी हासिल करेंगे। अलाई दरवाजा जो कुतुब परिसर में स्थित है उससे संबंधित जानकारी हासिल करेंगे इस्लामिक भवन निर्माण शैली आदि से परिचित हो सकेंगे। यह लेख विभिन्न पुख्ता स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। यह लेख विद्यार्थी तथा इतिहास की जानकारी रखने वाले के लिए कारगर है।

अलाई दरवाजा कुतुब परिसर

अलाई दरवाजा – यह सन 1305 के आसपास निर्मित हुआ था तथा यह अफगान तुर्क फिरोजशाह के खानदान के तीसरे वंशज, खिलजी गांव के रहने वाले अलाउद्दीन खिलजी ने भवनों की योजना बनाई थी , उसके अंतर्गत निर्मित हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी सन 1296 में दिल्ली के शाही तख्त पर बैठा था।

लाल पत्थरों और संगमरमर के सुंदर मिश्रण से बनाया दरवाजा कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद के दक्षिण की तरफ से प्रवेश करने के लिए बनवाया गया था। योजना में यह दरवाजा चौकोर है जिसकी लंबाई और चौड़ाई अंदर से 35 फिट है और बाहर से 55 फीट है। दीवारों की जमीन से छत की ऊंचाई 47 फीट और मोटाई 11 फीट है।

सदियों पुरानी इस मस्जिद का यह शाही दरवाजा पिछले 6 शताब्दियों के दौरान थोड़ा सा क्षतिग्रस्त हुआ है। इस प्रवेश द्वार का एक केंद्रीय कक्ष भी है जो लगभग 16.75  मीटर लंबा है तथा इसका गुबंद 18.8 मीटर ऊंचा है। इसकी इस दिशा के मध्य में एक प्रवेश द्वार है जिसके दोनों तरफ जालीदार पत्थरों की खिड़कीयां  या झरोखा है। इस प्रकार का हर प्रवेशद्वार इसी अंदरूनी कमरे में खुलता है , तथा उसकी छत गुबंदाकार है।लाल पत्थर के यह दरवाजे स्वयं अपने प्रकार के ऐसे पहले निर्माण है जिनमें इस्लामी बनावट एवं सजावट का उपयोग किया गया है।

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निष्कर्ष

उपरोक्त जानकारी से भवन निर्माण शैली तथा दिल्ली की सल्तनत आदि के विषय में संक्षिप्त जानकारी अवश्य हासिल हुई होगी। आपको यह आलेख कैसा लगा अपने सुझाव तथा विचार कमेंट बॉक्स में लिखें।

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