मीरा बाई के पद और दोहे व्याख्या सहित ( Meera bai ke pad aur dohe )

Meera bai ke jeevani, pad aur dohe

मीरा बाई भक्ति कालीन सगुण मार्गी कृष्ण शाखा की अग्रणी कवित्री तथा उपासक थी। मीराबाई कृष्ण को अपना पति मानती थी और उनकी उपासना किया करती थी। कृष्ण को पति के रूप में पाने की लालसा में उन्होंने जोगन बनना स्वीकार किया। लोक मर्यादा को छोड़कर साधु – संतों का साथ लिया। समाज उन्हें कई …

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