हिंदी सामग्री

तुलसी | नवधा भक्ति | भक्ति की परिभाषा | गोस्वामी तुलसीदास | तुलसी की भक्ति भावना

1Shares

भक्त तुलसीदास | दशरथ के राम | भक्तिकी परिभाषा | गोस्वामी तुलसी दास की भक्ति भावना | गोस्वामी तुलसी दास की भक्ति भावना

तुलसी नवधा भक्ति

 

तुलसीदास मूलतः एक भक्त हैं .उनका नाम राम बोला था .तथा उपनाम तुलसी था परंतु राम के भक्त अथवा दास होने के कारण वे तुलसीदास कहलाए .

शांडिल्य नारद – आदि भक्ति आचार्य ने भगवान के प्रति परम प्रेम को भक्ति कहा है। तुलसीदास के अनुसार भी भक्ति प्रेम से होती है राम के प्रति प्रीति ही इन की भक्ति है। ये भक्ति के मार्ग के प्रतिपादक वक्तित्व के दृष्टा और भक्ति रस के सिद्ध भक्ता थे। भक्ति के सभी पात्रों एवं भाव स्तरों का उन्होंने साक्षात्कार किया था। और भक्ति की मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति उनके काव्य में हुई है। तुलसीदास प्रतिपादक भक्ति मार्ग का सर्वाधिक मौलिक वैशिष्ट्ए की वह लोक अनुमोदित होते हुए भी सभी संबंध आधार पर प्रतिष्ठित हैं। राम की भक्ति कहने में सुगम है पर उसकी  करनी अपार है। भक्ति की इस दुर्गमता का अनुमान उसी को हो सकता है जिस पर स्वयं भक्ति हो।

भक्ति की परिभाषा

 

भक्ति शब्द भज  से कर्तन प्रत्यय का योग करने पर बनता है कीर्तन प्रत्येक के भाव में प्रयोग करने पर भजन को भक्ति कहेंगे भक्ति शब्द साथ दे या प्रेमाभक्ति का द्योतक है। 

तुलसी मूलतः भक्त हैं प्रक्रिया से अलग-अलग उनके काव्य में भक्ति और साधना का ऐसा मिश्रण है। यह कहना कठिन है कि हम भक्ति है या केवल काव्य – भक्ति भावना। जिस व्यक्तिगत ईश्वर की आवश्यकता थी इन्हो ने उसे दशरथ के राम में पा लिया था। उनके राम वही थे परंतु तुलसी ने अदम्य उत्साह से राम को विशिष्ट स्थान दिलाया। सारा मानस तुलसी के इस प्रयत्न का साक्षी है। इन्ही दाशरथि राम  से तुलसी ने अपना संबंध जोड़ा। इसी भावना से प्रभावित होकर यह सत्य – असत्य दोनों की अभय अर्चना करते दिखाई देते। इनके लिए वह आत्मसमर्पण के लिए तत्पर हैं। उन्हें भगवान की उससे अनु कथा पर विश्वास है जो भक्त  के प्रयत्न की उपेक्षा नहीं करते और नहीं वक्त के अवगुण किया दुर्गुण पर दृष्टि डालती है। ये मोक्ष नहीं चाहते ,वह भक्ति ही चाहते हैं। इस भक्ति दान की आवश्यकता है। संसार के दुख सुख के आद्यात  से बचने के लिए जिनका कारण माया जन्म भ्रम है।

 

यह भी पढ़ें – कवि नागार्जुन के गांव में | मैथिली कवि | विद्यापति के उत्तराधिकारी | नागार्जुन | kavi nagarjuna

 

तुलसी माया के भ्रमजाल के उत्पन्न करने की शक्ति जानते हैं। यह भ्रम जो अभीदा माया के कारण जन्म हुआ है। राम की प्रेरणा से ही अविद्या  का नाश हो कर विद्या संभव है। मध्य युग में कथा श्रवण और कीर्तन का विशेष महत्व था। इससे पहले किसी  साधनों पर इतना बल नहीं दिया गया।  भक्त साधकों ने जहां एक और कथा श्रवण कीर्तन और नृत्य एवं निमित्य पूजन की सामूहिक  विद्यानिकालीन  माधुरी और अतः साधना का साक्षात रुप का चाक्षुक विकास भी किया गया। मानस में भगवान श्री कृष्ण के सौंदर्य का विशेष वर्णन है।

 

विशेषता बालकांड और अयोध्याकांड में जिसमें उसके सगुण रूप का ध्यान किया गया। गुरु भक्ति को भी तुलसी ने महत्व दिया। उपासना और भक्ति और अध्यात्म – ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु के लिए भक्ति भावना सर्वत्र विद्यमान है। विशेषकर अतः साधना के लिए अनुभूति को समझने – समझाने का प्रश्न है। परंतु मध्य युग में गुरु को नारायण मान लिया गया है। इन्हो ने सत्संग को ईश्वरों उन्मुख होने का प्रधान साधन माना है। मानस में स्थान – स्थान पर सत्संग की महिमा का वर्णन है। भगवान के प्रति इन की भक्ति भावना केवल दो प्रकार से प्रकट हुई है। शांति दूसरा कृति इसी शांति और रास्ते भाव की प्रधानता उनकी रचनाओं में मिलती है।शील के कारण तुलसी और सौर्य से  स्वयं तुलसी व्यक्तित्व को प्रकाशित करते हैं। वास्तव में ज्ञान और प्रेम यह दोनों ही भगवत शक्ति का साधन है। परंतु तुलसी भक्ति को ही विशेष महत्व देते हैं। राम भक्ति साधना का कोई एक निश्चित प्रकार नहीं है। तुलसी ने अनेक साधन करे हैं जिसमें भक्ति लोग और नवधा/नवदं  भक्ति प्रधान है।

महर्षि शांडिल्य

                   “ईश्वर में प्रेम अनुराग ही भक्ति है”।

नारद

ईश्वर में अतिशय प्रेम रूपा ही भक्ति है।

तुलसी

भक्ति प्रेम से होती है भक्ति दो प्रकार की है  नवधा  , वैधी  भक्ति। 

यह भी पढ़ें –

1813 और 1833 का आज्ञा पत्र | चार्टर एक्ट बी एड नोट्स | charter act full info

 भारतीय नववर्ष। Indians real new year | अज्ञात कवि द्वारा रचित कविता।

राम काव्य परंपरा।राम काव्य की प्रवृत्तियां।भक्ति काल की पूर्व पीठिका।रीतिकाल रीतिकाव्य

सूर का दर्शन | दार्शनिक कवि | सगुण साकार रूप का वर्णन

सूर के पदों का संक्षिप्त परिचय। भ्रमरगीत। उद्धव पर गोपियों का व्यंग।

स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्को का खंडन | स्त्रियों को पढ़ाने से अनर्थ होते हैं |

महर्षि वाल्मीकि | जिन्होंने रामायण की रचना करके मानव समाज को जीवन का मूल मन्त्र दिया

1Shares

2 thoughts on “तुलसी | नवधा भक्ति | भक्ति की परिभाषा | गोस्वामी तुलसीदास | तुलसी की भक्ति भावना”

  1. बहुत जानकारी प्राप्त हुई इससे इसे हमारे तक पहुँचाने के लिए धन्यवाद!????????
    परंतु कई जगहों पर कुछ चीजें समझ नहीं आयी शायद शब्दों के बीच space नहीं था या ऐसा कुछ। कुछ कुछ पंक्तियाँ समझ नहीं आयी। बाकी पोस्ट बहुत ही लाभकारी था। धन्यवाद!????????????

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *