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स्टोरी इन हिंदी बच्चों की कहानियां | Child story in hindi with morals

स्टोरी इन हिंदी – बच्चों की कहानियां – Child story in hindi with morals | हमारे बहुत सारे पाठकों ने हमसे निवेदन किया है की हम स्टोरी इन हिंदी लिखें | प्रस्तुत है बच्चों के लिए कहानियां नैतिक शिक्षा के साथ |

आत्मविश्वास दृढ़ निश्चय

आत्मविश्वास दृढ़ निश्चय की स्टोरी इन हिंदी

एक समय की बात है , सीमा पर युद्ध की तैयारियां चल रही थी। सभी सेनाएं अपने अपने पोस्ट बंकर पर यथाशीघ्र पहुंच रही थी। एक जनरल जो बहादुर और परम वीर थे। उन्हें वीरता के लिए ढेरों पुरस्कार प्राप्त था। अपनी सैन्य टुकड़ी को लेकर सीमा की ओर कूच ( जा )कर रहे थे।

उन्होंने महसूस किया कि उनकी सेना का मनोबल कम है। जनरल ने अपनी सैन्य टुकड़ी से क्या कारण है ? पूछा। किंतु जवानों ने मना कर दिया और कारण नहीं बताया। कुछ समय बाद जनरल एक स्थान पर रुकने का आदेश देते है। वहां छावनी बनाई जाती है पड़ाव डाला जाता है। कुछ समय विश्राम के पश्चात जनरल ने फिर सभी सैनिकों से पूछा कि क्या कारण है ? आप में आत्म बल की मनोबल की कमी दिख रही है ?

कुछ सैनिकों ने दबे स्वर में कहा कि हम संख्या में बहुत कम है , और हमारे दुश्मन हम से अधिक। इस पर जनरल कुछ बोले नहीं। सभी को जल्दी से तैयार व विश्राम करने को कहा।

कुछ समय विश्राम के पश्चात जब चलने की तैयारी हुई तो , जनरल ने अपने जवानों को संबोधित किया कि , मेरे ! बहादुर जवान सिपाहियों आप उस देश के सैनिक हो जहां का एक – एक योद्धा दुश्मन के सवा लाख सैनिकों पर भारी पड़ता है। मुझे गर्व है कि हम सब उस मां के वीर सपूत हैं। मुझे विश्वास ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि विजय आपकी ही होगी। ऐसा कहते हुए जनरल ने भारत माता की जय के नारे लगाए।

जनरल ने कुछ दूर स्थित पहाड़ी से नीचे झांककर देखा , और अपने सैनिक को बताया कि हमारी सहायता के लिए और कई सारी टुकड़ियां हमारी ओर आ रही है। इतना सुनते ही सभी सैनिकों का मनोबल बढ़ गया। उनकी ताकत दस गुना अधिक हो गई , उनमें आत्मविश्वास का बल आ गया। सभी जवान जोशीले स्वर में जयघोष लगाते हुए सीमा की ओर बढ़ चले।

सैनिकों के चेहरे पर जो सिकन या पीलापन आ गया था। वह सिकन अब दूर हो गई थी। उनका चेहरा तेज और लालिमा की तरह चमक रहा था , युद्ध में सैनिकों ने बहादुरी से आत्मविश्वास और धैर्य से दुश्मनों को नाकों चने चबवा दिए। उनकी ईट से ईट बजा डाली। दुश्मन देखते ही देखते वहां से पीठ दिखा कर भाग गए।

सैनिकों ने उन्हें अपने देश में तो घुसने नहीं दिया बल्कि उनके देश में अभी आगे जाकर कितने ही दूर तक खदेड़ आए। इससे दुश्मन देश में भय और आतंक का माहौल छा गया।

जनरल के वीर सैनिक युद्ध की जय – जयकार करते हुए वापस अपने देश लौट आए। युद्ध जीतने के बाद जनरल ने अपने सैन्य टुकड़ी की बहुत सराहना की और उनके ताकत का उन्हें विश्वास दिलाया। सैनिकों में आत्मबल और दृढ़ निश्चय होने और उसके द्वारा उन्हें मिली सफलता की बात बताई। यह भी बताया जीत उसी की होती है जो दृढ़ निश्चय और आत्मबल से जीतने का पूरा प्रयास करता है।

आत्मबल और दृढ़ निश्चय विजय की पहली सीढ़ी है , इस पर चढ़कर ही कोई भी व्यक्ति सफलता पा सकता है। देश की सरकार ने वीर सैनिकों को सम्मान दिया। जनरल को नेतृत्व करने के लिए सम्मानित किया गया। देशवासियों का जवानों को खूब सारा प्यार मिला।

नैतिक शिक्षा ( आत्मविश्वास दृढ़ निश्चय की स्टोरी इन हिंदी )

कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोना चाहिए आत्मबल को मजबूत रखकर कार्य करना चाहिए। सफलता उसी को मिलती है जो कार्य करते है और सफल कार्य वही करते है जिनमे आत्मबल और दृढ निश्चय का बल होता है।

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ( स्टोरी इन हिंदी )

रोशन बहुत ही होनहार छात्र था। वह पढ़ाई में अव्वल आया करता था। यह कहें कि रोशन मेधावी छात्र था। वह पढ़ने में अधिक समय देता था। जिसके कारण वह विद्यालय ही नहीं अपितु अपने क्षेत्र और यहां तक कि राज्य स्तर पर प्रतिस्पर्धा करता था।

रोशन पढ़ाई करने के बाद इंजीनियरिंग करना चाहता था।रोशन की इच्छा विदेश में नौकरी करने की थी। उसकी यह हार्दिक इच्छा थी कि वह विदेश नौकरी करे और वही पूरा जीवन गुजारे। रोशन ने अपनी शिक्षा पूरी की और वह अपने लक्ष्य में कामयाब हुआ।

रोशन एक कामयाब इंजीनियर बना और विदेश में उसको एक बड़ी कंपनी में नौकरी मिल गई। रोशन को कम्पनी ने एक बड़ा सा बांग्ला भी दिया जहाँ वह अकेला रहता था। रोशन झट-पट विदेश जाने की तैयारियां करके नौकरी के लिए विदेश चला गया।

यहाँ विदेश में बड़ी-बड़ी इमारतें , सुंदर सड़कें , गोरे – गोरे लोग , परियों जैसे स्त्रियां , बड़ी-बड़ी गाड़ियां यह सब चकाचौंध देखकर रोशन बहुत प्रसन्न हुआ।रोशन की मनोकामना पूरी हो गयी थी अब वह खूब प्रसन्न था। कुछ ही समय हुआ होगा कि धीरे-धीरे उसका मन ऊबने लगा। वहां रोशन का कोई हमजोली नहीं था , कोई उसके सुख दुख का साथी नहीं था। कोई उसका हालचाल पूछने वाला उसके दुख को बांटने वाला नहीं था। एक निराशा भाव ने उसके मन में घर कर लिया।

एक दिन की बात है रोशन की तबीयत अचानक खराब हो गई। उसकी सेवा के लिए वहां कोई नहीं था। भारत में जब वह बीमार होता था तो वहां हालचाल पूछने के लिए , सेवा करने के लिए पूरा परिवार उपस्थित रहता था। वैसा व्यवहार विदेश में नहीं मिला।रोशन हॉस्पिटल में भर्ती हो गया , किंतु कोई हालचाल पूछने भी नही आया।

रोशन का स्वास्थ्य जब ठीक हुआ तो उसने झटपट अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और वापस अपने देश भारत आ गया। यहां रोशन के स्वागत में उनका पूरा परिवार वह गांव घर के मित्र लोग आए थे। रोशन हवाई जहाज से उतरकर मातृभूमि को चुमा और धन्यवाद किया। अपनी मातृभूमि पहुँच कर रोशन अपने घर में सुख पूर्वक रहने लगा।

एक समय की बात है , विदेश में साथ में काम करने वाले सहयोगी मार्श भारत आए। किंतु उनका सामान किसी दूसरे जहाज से दूसरे देश चला गया , इस संकट में मार्श ने रोशन से संपर्क किया। रोशन और उनका परिवार उन विदेशी मेहमान को अपने घर ले आए। उनकी पूरी सेवा की , मार्श को भारत भ्रमण कराया , उनकी सेवा इस प्रकार कि जैसे कोई अपने घर का अतिथि हो।

विदेशी मेहमान मार्श को घर – परिवार का आचरण बहुत अच्छा लगा। उनकी सेवा ने मार्श का मन गदगद कर दिया ऐसा प्यार उन्हें अपने देश में भी नहीं मिला था। आस-पड़ोस व परिवार की सेवा से मार्श बहुत प्रसन्न हुए , किन्तु उनमे आत्म ग्लानि का भाव भी था। मार्श सोच रहे थे रोशन विदेश आया तो हमने इस प्रकार की सेवा नहीं की , और यहां के लोग पूरी निष्ठा से अतिथि सत्कार कर रहे हैं।

मार्श आत्मग्लानि की अनुभूति कर रहे थे। जब वह अपने देश जाने के लिए तैयार हुए तो उनकी आत्मा ने इस सेवा – सत्कार के आगे अपने देश जाने का मन बदल दिया। मार्श यह कहते हुए रुक गए कि काश मैं यहीं पैदा हुआ होता। अब मैं यहीं रहूँगा , यही हमारा देश है। मार्श ने लगन से हिंदी भाषा सीखी और भारत में शरण ली।

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नैतिक शिक्षा { सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा ( स्टोरी इन हिंदी ) }

जो व्यक्ति अपने घर परिवार , देश से दूर रहता है। वह कभी सुखी नहीं रह पाता । रोशन अपनी महत्वकांक्षा लिए विदेश में जाता है किंतु वहां उसे अपने लोगों की कमी खलती है , और वह बड़ी नौकरी को त्याग कर भी वापस अपने देश अपने घर-परिवार में लौट आता है।

ज्ञान चेतना सेवा की शक्ति

ज्ञान चेतना सेवा की शक्ति ( स्टोरी इन हिंदी )

आमिर बांग्लादेश के एक छोटे से गांव में रहता था। आमिर बेहद ही गरीब परिवार में पला-बढ़ा उसके माता – पिता की मृत्यु बचपन में ही हो गई थी। आमिर की परवरिश उसके दादा दादी ने की थी। मां – बाप के ना होने से आमिर में एक हीनता का भाव आ गया था। वह गरीबी के कारण कोई त्यौहार नहीं मना पाता था , यहां तक की ईद भी।

आमिर छोटी-छोटी बातों पर खीझ जाता , तुरंत चिढ़ जाता और मारपीट करने लगता। यह सब आमिर की आदतों में शामिल हो गया था। वह बचपन से ही गरीबी से संघर्ष कर रहा था। थोड़ा बड़ा हुआ तो मेहनत मजदूरी का काम करने लगा। किंतु काम छोटा था उसपर भी मजदूरी का काम था।

मालिक अपना गुस्सा आमिर पर पिटाई करके निकालता था। छोटी-छोटी बातों पर आमिर की पिटाई हो जाया करती थी। इस प्रकार की मजदूरी से आमिर तंग आ गया था और भागकर भारत के शहर में आ गया। यहां उसे कोई जानने वाला नहीं था , उसका रहने का कोई ठिकाना नहीं था और ना ही खाने का ठिकाना।

आमिर इधर – उधर भटक रहा था कि एक नवयुवक उसके पास आता है और नौकरी दिलाने का भरोसा देता है। नवयुवक की बातों में आकर आमिर राजी होकर उसके साथ चल देता है। आमिर के पास कोई दूसरा उपाय नहीं था आमिर को यह पता नहीं था कि यह व्यक्ति कौन है ? कहां रहता है ? क्या करता है ? धीरे – धीरे उसे पता चला कि वह जिसको खुदा का फरिश्ता समझता था , वह शैतान है।

उस व्यक्ति ने आमिर को अपने साथ लूटपाट , चोरी आदि अनेक अनैतिक धंधों में शामिल कर लिया। आमिर को ना चाहते हुए भी यह सब कार्य करना पड़ा क्योंकि वह भाग कर दूसरे देश में आया था। इस तरह आमिर लूटपाट और चोरी के कई वारदात को अंजाम दे चुका था। लूटपाट के दौरान कोई व्यक्ति यदि उससे जोर जबरदस्ती या उसे पकड़ने की कोशिश करता तो उसकी हत्या तक कर देता था। इस क्रम में वह कितने ही हत्या कर चुका था।

एक समय की बात है एक बड़े व्यापारी के यहां आमिर ने पूरे योजनाबद्ध तरीके से डाका डाला। अपने साथियों को यहां तक कह दिया था इस डाके के दौरान कोई यदि खलल डाला तो उसकी हत्या भी कर देना , रुकना नहीं। योजना के अनुसार आमिर और उसके साथी व्यापारी के घर घुस गए।

समय की बात है कुदरत ने अपना कहर उस शहर पर बरपाया। देखते ही देखते सारे घर धराशाही हो गए , जिसमें कई लोग मारे गए , कितने लोग मलबे में दब गए। जब बचावकर्मी सबको निकालने लगे उनमें से आमिर को भी बचाया गया। वह एक बड़े से चट्टान के नीचे दबा हुआ था।

आमिर को अस्पताल में भर्ती कराया गया वहां उसका इलाज किया गया। किंतु खून की कमी के कारण उसको बचा पाने में बहुत ही मुश्किल हो गयी। आमिर को खून की आवश्यकता थी जिसके नही मिलने पर उसकी मृत्यु संभव थी।

एक नवयुवक राहुल जो सेठ जी का लड़का था। डॉक्टर के सामने आया और उसने कहा कि मेरा खून इसे चढ़ा दीजिए। डॉक्टर ने कहा आमिर का ब्लड ग्रुप ‘ओ पॉजिटिव’ है। इस पर राहुल ने कहा मैंने जांच करवा लिया है मेरा ब्लड ग्रुप भी ‘ओ पॉजिटिव’ है। राहुल का खून आमिर को चढ़ाया गया।

दो दिन बाद आमिर को चेतना आयी। उसने देखा कि उसके दो साथी जो चोरी करने के उद्देश्य से सेठ जी के यहां घुसे थे वह भी अस्पताल में भर्ती हैं। सेठ जी का परिवार भी अस्पताल में है , साथ ही गांव मोहल्ले के लोग भी वहां भर्ती हैं। मगर आमिर को ऐसा नहीं लगा कि वह किसी अन्य परिवार का है। उसे पता चला कि जिसके यहाँ हम चोरी करने गए थे , उस व्यापारी के बेटे ने खून देकर मेरी जान बचाई और सेवा भी की। इस पर आमिर को आत्मग्लानि हुई उसकी आंखें भर आई। वह यह सोच रहा था छोटे-छोटे लालच में मैंने कितने लोगों की हत्या कर दी है .यदि कुदरत का कहर न होता तो लालच में सेठ जी के परिवार की भी हत्या कर देता।

वह रोने लगा और अपने इस नीच और असमाजिक कार्यो को त्याग दिया। उसकी ज्ञान चेतना जाग गई थी। उसने इरादा कर लिया कि अब गलत काम नहीं करेगा। अब समाज सेवा करके अपने पापों का प्रायश्चित करेगा। वह सारी बुराइयों के रास्तों को छोड़ चुका था अब उसे नए सवेरे की और आगे बढ़ना था।

नैतिक शिक्षा {ज्ञान चेतना सेवा की शक्ति ( स्टोरी इन हिंदी ) } –

स्वार्थ नहीं करना चाहिए स्वार्थ में आदमी अँधा हो जाता है उसे सही गलत का भी मालूम नहीं होता। बाद में सजा भुगतनी पड़ती है या कठोर प्रायश्चित करना पड़ता है।

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4 thoughts on “स्टोरी इन हिंदी बच्चों की कहानियां | Child story in hindi with morals”

    1. thanks ankur rathi , we have written more stories on our website . You can also read them and show your love.

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