Hindi stories class 9 नैतिक शिक्षा की कहानियां कक्षा नौवीं

In this post you will get to read short Hindi stories for class 9 students with moral values.

उद्देश्य – कहानी संकलन का एक मात्र उद्देश्य यही है कि वर्तमान समाज में गिरते नैतिक शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाया जाए। संचार की क्रांति से समाजिक वातावरण में विकृतियां आ गयी है। बालकों में नैतिक विकास समाज , सेवा की भावना को जागृत किये बिना समाज का उत्थान नहीं हो सकता।

माता – पिता के अशिक्षित होने के कारण बालक का नैतिक विकास उतना नहीं हो पाता जितना होना चाहिए। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर कहानी का संकलन तैयार कर रहे हैं आशा करते है यह संकलन समाज का हित साधेगा।

1. कार्य के प्रति लगन ( Hindi stories for class 9 )

महाराष्ट्र के गांव में आकाशवाणी होती है आगामी कुछ महीनों में बरसात नहीं होगी। गांव के किसान परेशान हो गए सभी लोग खेती-बाड़ी छोड़कर शहर की ओर रोजगार की तलाश में पलायन कर गए।

कुछ ही समय में पूरा गांव खाली होने लगा।

रामदास खेत में हल चलाने लगता है। सारे गांव के लोग हंसते हैं। रामदास को पागल मुर्ख और अनेक शब्दों से उसका उपहास , मजाक बनाते हैं। एक वृद्ध व्यक्ति ने रामदास से पूछा भविष्यवाणी हुई है बारह महीने तक बरसात नहीं होगी तो तुम हल क्यों चला रहे हो ?

हल चलाने से क्या फायदा ? 

जब पानी ही नहीं मिलेगा तो फसल कैसे उपजेगा। प्रश्न के उत्तर में रामदास ने बड़े ही शांत स्वभाव से जवाब दिया , कि मैं इसलिए हल चला रहा हूं कहीं बारह महीने में मैं !

खेती करना ना भूल जाऊं।

यह जवाब सुनकर वृद्ध व्यक्ति वहां से चला गया। रामदास खेत में मेहनत करने में व्यस्त हो गया। रामदास की बात बादलों ने सुनी और कुछ देर बाद काली घटा घिर कर आई और बरसात शुरू हो गई।

सभी लोगों को आश्चर्य हुआ की भविष्यवाणी हुई थी बारह महीने बरसात नहीं होगी।

फिर यह अचानक बरसात कैसे ?

किसी ने बादल को रोककर पूछा भविष्यवाणी हुई थी के बारह महीने बरसात नहीं होगी फिर यह बरसात कैसे ? इस पर बादल ने जवाब दिया कि मैं रामदास के शब्दों से प्रभावित हो गया और मुझे ऐसा लगा कि रामदास अपने कार्य को नहीं छोड़ रहा है वह बारह महीने का इंतजार इसलिए नहीं कर रहा है , कहीं वह खेती करना ना भूल जाए।

इसलिए मैं भी बरस रहा हूं कहीं बारह महीने में मैं बरसना ना भूल जाऊं।

नैतिक शिक्षा

  • कार्य के प्रति लगन हो तो सभी कार्य पुरे होते हे।
  • भगवान भी उसीके साथ है जो अपने कार्य को पूरी निष्ठा से करे।
  • आकस्मिक बरसात रामदास की निष्ठा का फल था।

Moral of this short Hindi story for class 9 in English

  • We should always have the fullest devotion to our work.
  • One day your destiny will bring you success.
  • Nature will help you too if you are courageous enough to fight with problems.
  • God only those people who are willing to help themselves.
  • Never try to run away from problems.

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2. धैर्य की आवश्यकता ( Best Hindi story for class 9 with moral values)

वर्तमान समय में लोगों में धैर्य की कमी होती जा रही है , जिसके कारण उनका काम और मेहनत से अर्जित पूंजी आदि का निरंतर ह्रास होता जा रहा है।

एक समय की बात है जंगल में एक सियार भूख से परेशान घूम रहा था।

एक वृक्ष के नीचे पहुंचा ही था कि उसे मीठे – मीठे पके हुए फल की खुशबू आने लगी। सियार ने भूख को खत्म करने का उपाय सोचा। अनेकों प्रयत्न करके भी उस फल को तोड़ने का प्रयत्न करता रहा किंतु उसके सारे प्रयास विफल रहे।

सियार ने योजना बनाई और सभी सियार को बुलाकर लाया।

बस क्या था देखते ही देखते सियार का पूरा झुंड पेड़ के नीचे उपस्थित हो गया। सभी सियारों ने अपनी – अपनी बुद्धि का प्रयोग किया किसी ने उछलकर उस फल तक पहुंचने की कोशिश की , किसी ने पेड़ पर चढ़ने का प्रयत्न किया। ऐसे – ऐसे करके सभी सियार अपनी बुद्धि लगाकर थक चुके थे। तभी पीछे बैठे वृद्ध सियार ने एक युक्ति सुझाया। वह युक्ति इस प्रकार थी , जो सबसे बलिष्ठ , बलशाली सियार हो वह नीचे खड़ा हो जाए और उसके ऊपर उससे कमजोर और उसके ऊपर उससे कमजोर।

इस प्रकार खड़े होकर हम सब उस फल तक पहुंच सकते हैं।

वृद्ध सियार का यह सुझाव सभी को पसंद आया , बस क्या था इस योजना को कार्यान्वित किया गया।

योजना के अनुसार एक बलवान सियार नीचे पृष्ठभूमि पर खड़ा हो गया।

उसके ऊपर दूसरा सियार , उसके ऊपर तीसरा , सियार ऐसे करते-करते लगभग आठ – दस सियार खड़े हो गए।

किंतु इस क्रम में समय अधिक लग रहा था।

सबसे नीचे खड़ा सियार मन ही मन शंका करने लगा कि मैं , कहीं नीचे खड़ा सबका बजन उठा रहा हूं और जो सबसे ऊपर सियार हे वह कहीं फल ना खा जाए। इस शंका में पड़े – पड़े वह कुछ समय बाद सिर घुमा कर ऊपर देखना चाहता है कि , आखिर हो क्या रहा है , इसके कारण उस सियार का संतुलन बिगड़ जाता है , और सभी एक दूसरे पर गिर पड़ते हैं।

सभी सियार को चोट आती है।

किसी सियार का पूछ मुड़ गया , किसी के पैर में चोट आई , किसी के मुंह पर चोट आई , किसी के पसलियां टूट गई , किसी की हड्डियां मुड़ गई , अनेकों प्रकार के चोटों का सामना सभी सियारों ने किया।

Hindi stories for class 9
Hindi stories for class 9 students

नैतिक शिक्षा –

  • धैर्य व शांत मन के अभाव में हमारा कार्य बनते – बनते अथवा सफल होते – होते रह जाता है।
  • इसलिए आवश्यकता है कि अपने कार्य को धैर्यपूर्वक करना चाहिए।
  • कार्य की सफलता तक संयम बनाए रखना चाहिए।

Moral of this hindi story for class 9 – 

  • We should always have patience and relax mind while doing something.
  • This is what leads us to success.
  • These are some Hindi stories class 9 which will give students values,

3. बुद्धिमान बकरी ( Hindi stories for class 9 with naitik shiksha )

एक घने वन में करीना नामक एक वृद्ध बुद्धिमान बकरी रहा करती थी।

वह अपने जीवन के अंतिम क्षणों को बहुत कष्ट से व्यतीत कर पा रही थी। बकरी इतनी वृद्ध थी कि आसपास के हरे-भरे घास को भी खा पाने में असमर्थ थी।

अपने जीवन से परेशान वह इधर-उधर भटक रही थी , तभी उसको अचानक एक रास्ते पर मयंक नामक शेर ( जंगल का राजा ) के पदचिन्ह नजर आए। अब करीना ( बुद्धिमान बकरी ) ने सोचा क्यों ना महाराज के चरणों में पड़ी रहूं और भूले भटके यदि शेर महाराज आ जाएं तो उन्हीं से गुजारिश करूंगी कि मुझे वह खा जाए !

कम से कम महाराज के तो कुछ काम आ जाऊंगा ।

यह सोचकर

वह शेर के पदचिन्ह पर बैठ गई। कुछ देर में शुभम नामक एक चीता आया वह बड़ा ही खूंखार और मोटा तगड़ा था।

भयंकर आवाज में गरजकर बोला ए करीना ( बुद्धिमान बकरी ) !

तू यहां क्यों बैठी है ?

तुझे डर नहीं लगता मुझसे ?

करीना ने बड़े निर्भीक भाव से बोला ! देखते नहीं यह मयंक महाराज का पदचिन्ह है , उन्होंने ही बिठाकर यहां रखा है , और कहा है जब तक मैं वापस ना लौट आऊं तब तक तुम यहीं बैठे रहना। जंगल का कोई भी जानवर कुछ बोले तो यह पदचिन्ह उसे दिखा देना।

यह महाराज का पदचिन्ह है।

अब चीता वहां से दबे पांव नौ दो ग्यारह हो जाता है।

बुद्धिमान बकरी वहीं बैठी रहती है , काफी समय गुजर जाने के बाद घूमता – फिरता एक सियार भोजन की तलाश में वहां आ जाता है , ललचाई हुई दृष्टियों से उस बकरी की ओर देखता है और आक्रमण करने से पहले वह उससे पूछता है कि तुम यहां क्यों बैठी हो ?

तुम्हें डर नहीं लगता ?

फिर उसने ( बुद्धिमान बकरी ) निर्भीक आवाज में वही जवाब दिया जो चीते ( शुभम चीता ) को दिया था।

अब सियार सिंह महाराज का नाम सुनते ही रफूचक्कर हो गया।

इस प्रकार

जंगल के अनेक प्रकार के हिंसक जानवर आए और बकरी से वार्तालाप करके अंतर्ध्यान हो गए।

बड़े सौभाग्य की बात यह होती है कि शेर (सिंह महाराज) उसी रास्ते वापस आता है और बकरी को गरजकर पूछता है कि , बकरी तो यहां क्यों बैठी हुई है ?

बकरी ने बड़े ही शालीनता से सहज भाव से महाराज को प्रणाम किया और कहा !

महाराज मैं अभी तक तो आपके ही आश्रय में बैठी हुई थी। मेरे वृद्धावस्था के कारण घूमना – फिरना भोजन आदि जीवन में अनेकों परेशानियां हो गई है।

मैं इस जीवन से मुक्ति पाना चाहती हूं।

आप मुझे मार कर खा जाइए या फिर आप मेरे प्राणों की रक्षा करें।

मैं अभी तक आपके नाम से अपने प्राणों की रक्षा करती रही। इस चिन्ह को आपका प्रतीक बनाकर यहां बैठी थी और अपने प्राणों की रक्षा कर रही थी।

बलवान व्यक्ति सदा दयालु प्रवृत्ति का होता है शेर को दया आई।

जंगल में तुरंत एक सभा का आयोजन किया गया ,

उसमें सभी जीव – जंतु , जानवर , विभिन्न प्रजातियों के सभी वहां सम्मिलित हुए।

महाराज का आदेश हुआ के जो हिस्ट- पुष्ट , बलवान और लंबे – चौड़े जितने भी हाथी हैं।

वह निश्चित कर ले एक – एक दिन और इस बकरी को अपनी पीठ पर बिठाकर पूरे जंगल में घूम आएंगे और जहां भी कोमल – कोमल पत्ते हरे – हरे नजर आएं इस बकरी को जो पत्ता खाने का मन करे उस वृक्ष के नीचे खड़े हो जाए।

यह बकरी उस पत्ते को खा लेगी।

पत्ते तक यदि पहुंच ना बने तो डाली झुकाकर अथवा इसके सहूलियत अनुसार भोजन की व्यवस्था कर दी जाए।

अब महाराज का आदेश कौन न माने ?

इस प्रकार बकरी के भोजन का प्रबंध हो गया अब कुछ ही महीने हुए के बकरी हृष्ट – पुष्ट और नवयुवती के समान हो गई। कहां प्रौढ़ावस्था और कहा यह युवावस्था कुल मिलाकर बकरी का भाग्य बदल गया। वह जीवन के कुछ कठिनाई भरे क्षणों में परेशान हो गई थी , किंतु उसके विवेक बुद्धि ने उसका जीवन बदल दिया।

वह अब आनंदमय जीवन को जीने लगी।

नैतिक शिक्षा –

  • व्यक्ति के पास स्वच्छ मन और निष्ठा व चातुर्य बुद्धि हो तो जीवन में असफल कार्य को भी सफल कर सकता है।
  • इसलिए कठिन समय में परेशान होने की जगह बुद्धि का प्रयोग कर उस कठिनाई को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए ।

Moral of this short hindi story for class 9 – 

  • If you have calm and relax mind then you can achieve anything in this world.
  • You have to first think before you make any decision.
  • Don’t panic in a problematic situation.
  • Try to deal with any problem with a relaxed mind.
  • Use your brain wisely before taking any decision.

4. सुषमा की बुद्धि

सुषमा तीसरी कक्षा में पढ़ती है। वह पढ़ – लिख कर सेना में भर्ती होना चाहती है। भारत की सेना उसे सबसे ज्यादा अच्छी लगती है। सुषमा ने भारत की सेना को तब देखा था , जब उसके गांव में भयंकर बाढ़ आई थी।

भारत की सेना ने सभी गांव वालों को सुरक्षित निकाल लिया था। तब से वह भारत की सेना के बारे में कहानियां सुनती और उस सेना में शामिल होना चाहती।

विद्यालय से सुषमा की कक्षा को शैक्षणिक भ्रमण के लिए निशांत बाग ले जाया गया। निशांत बाग मुगल काल का प्रमुख बाग़ है , जिसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।

शाम हो चली थी सभी बच्चे खेलने में लगे थे।

सुषमा भी उन बच्चों के साथ खेल रही थी। तभी अचानक उनकी गेंद पास के तालाब में चली गई। समीर गेंद को लेने गया , किंतु हाथ गेंद तक नहीं पहुंच रहा था। उसने पास रखी हुई लकड़ी से गेंद को अपनी ओर खींचना चाहा किंतु वह गेंद और दूर हो गई।

वह काफी देर प्रयास करता रहा ,

अचानक उसका पैर फिसल गया और वह तालाब में गिर गया।

पानी किनारे पर भी गहरा था। वह डूब रहा था तभी सुषमा दौड़ती हुई आई उसने अपनी चुन्नी का एक सिरा समीर की ओर फेंका।

समीर उस चुन्नी को पकड़ लेता है और सुषमा उसे खींचकर ऊपर ले आती है।

सुषमा की सूझबूझ से आज समीर की जान बच गई थी।

ऐसा इसलिए भी संभव हो सका क्योंकि सुषमा भारतीय सेना के वीरता को जानती थी और भारतीय सैनिक कभी हार नहीं मानते थे।

इसलिए सुषमा ने भी हार नहीं मानी और तुरंत कार्यवाही की और समीर की जान बचा ली।

 

मोरल

  • कठिन समय में घबराना नहीं चाहिए धैर्यपूर्वक उसका सामना करना चाहिए।
  • सुषमा अगर घबरा जाती तो शायद समीर को नहीं बचा पाती।
  • बच्चों को वीरता की कहानी अवश्य सुनानी चाहिए , यह उनके बुद्धि विवेक के लिए भी अच्छा होता है।

यह भी पढ़ें

नीचे दी गई पंचतंत्र की कहानियां भी अवश्य पढ़ें अगर आपको नैतिक शिक्षा वाली कहानियां पढ़ने का शौक है तो। यह सभी कहानियां आपको बहुत पसंद आएंगी। नैतिक शिक्षा के साथ-साथ मनोरंजन में भी कोई कमी हमारे लेखकों ने नहीं छोड़ी है इसलिए आपको एक बार यह सभी कहानियां पढ़नी चाहिए।

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कुछ बातें

यह सभी कहानियां कक्षा 9वी के बच्चों के अनुसार लिखे गए हैं और आशा है कि आपको यह लेख अवश्य पसंद आया होगा. अन्य नैतिक शिक्षा वाली कहानियां भी हमारी वेबसाइट पर पहले से ही लिखी है जिन्हें आप जाकर पढ़ सकते हैं ऊपर दिए गए लिंक के माध्यम से.

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