Hindi vyakran

Hindi vyakran हिंदी व्याकरण की संपूर्ण जानकारी

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हिंदी व्याकरण संपूर्ण जानकारी | Hindi vyakran alankar ,ras , sangya , avyay , sandhi viched , and every other topics.

 

Sampoorna Hindi vyakran

 

हिंदी व्याकरण के सभी अंग की पूरी जानकारी दी गयी है |

अलंकार – Hindi vyakran alankar

मनुष्य सौंदर्य प्रेमी है। वह अपनी प्रत्येक वस्तु को सुसज्जित और अलंकृत देखना चाहता है। वह अपने कथन को भी शब्दों के सुंदर प्रयोग और विश्व उसकी विशिष्ट अर्थवत्ता से प्रभावी व सुंदर बनाना चाहता है। मनुष्य की यही प्रकृति काव्य में अलंकार कहलाती है।

Raed full article – Alankar in hindi सम्पूर्ण अलंकार

 

रस – Hindi vyakran ras

रस काव्य का मूल आधार ‘ प्राणतत्व ‘ अथवा ‘ आत्मा ‘ है रस का संबंध ‘ सृ ‘ धातु से माना गया है। जिसका अर्थ है जो बहता है , अर्थात जो भाव रूप में हृदय में बहता है उसे को रस कहते हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार रस शब्द ‘ रस् ‘ धातु और ‘ अच् ‘ प्रत्यय के योग से बना है। जिसका अर्थ है – जो वहे अथवा जो आश्वादित किया जा सकता है।

वस्तुतः रस क्या है ? इसका उत्तर रसवादी आचार्यों ने अपनी अपनी प्रतिभा के अनुरूप दिया है। रस शब्द अनेक संदर्भों में प्रयुक्त होता है तथा प्रत्येक संदर्व में इसका अर्थ अलग – अलग होता है। उदाहरण के लिए पदार्थ की दृष्टि से रस का प्रयोग षडरस के रूप में तो , आयुर्वेद में शस्त्र आदि धातु के अर्थ में , भक्ति में ब्रह्मानंद के लिए तथा साहित्य के क्षेत्र में काव्य स्वाद या काव्य आनंद के लिए रस का प्रयोग होता है।

Read full article – रस प्रकार ,भेद ,उदहारण ras ke bhed full notes

 

संज्ञा – Hindi vyakran sangya

संज्ञा किसी व्यक्ति ( प्राणी ) वस्तु , स्थान , अथवा भाव आदि के नाम को संज्ञा कहते है। जैसे – श्याम , दिल्ली , आम , मिठास , गाय आदि। संज्ञा के तीन भेद है – व्यक्तिवाचक , जातिवाचक , भाववाचक संज्ञा

Read full article – सम्पूर्ण संज्ञा Sampoorna sangya

 

सर्वनाम – Hindi vyakran sarvnam

सर्वनाम दो शब्दों के योग से बना है सर्व + नाम , अर्थात जो नाम सब के स्थान पर प्रयुक्त हो उसे सर्वनाम कहा जाता है। कुछ उदाहरण से समझिये –

  • मोहन 11वीं कक्षा में पढ़ता है।
  • मोहन स्कूल जा रहा है।

उपर्युक्त वाक्य में मोहन ( संज्ञा )  है इसका प्रयोग बार – बार हुआ है। बार – बार मोहन शब्द को दोहराना वाक्यों को अरुचिकरकम स्तर का बनाता है। यदि हम एक वाक्य में मोहन ( संज्ञा ) को छोड़कर अन्य सभी जगह सर्वनाम का प्रयोग करें तो वाक्य रुचिकर व आकर्षक बन जाएंगे।

Read full article – सर्वनाम और उसके भेद sarvnaam in hindi

 

अव्यय – Hindi vyakran avyay

ऐसे शब्द जिसमें लिंग , वचन , पुरुष , कारक आदि के कारण कोई विकार नहीं आता अव्यय  कहलाते हैं।
यह सदैव अपरिवर्तित , अविकारी एवं अव्यय रहते हैं। इनका मूल रूप स्थिर रहता है , वह कभी बदलता नहीं है जैसे –

इधर , किंतु , क्यों , जब , तक , इसलिए , आदि।

अव्यय के भेद-

अव्यय के चार भेद माने जाते हैं।

  • क्रिया विशेषण
  • संबंधबोधक
  • समुच्चयबोधक
  • विस्मयादिबोधक
  • निपात ( Optional according to syllabus )

Read full article – अव्यय के भेद परिभाषा उदहारण Avyay in hindi

 

संधि विछेद – Hindi vyakran sandhi viched

निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से उत्पन्न परिवर्तन को संधि कहते हैं। वर्णों में संधि करने पर स्वर , व्यंजन अथवा विसर्ग में परिवर्तन आता है। अतः संधि तीन प्रकार की होती है १ स्वर संधि   २ व्यंजन संधि  ३ विसर्ग संधि। 

उदाहरण –

  • देव + आलय  = देवालय
  • मनः + योग    = मनोयोग
  • जगत + नाथ  =जगन्नाथ

Read full article – संधि विच्छेद sandhi viched in hindi grammar

 

Hindi vyakran pad parichay

वाक्य में प्रयुक्त शब्द को पद कहा जाता है वाक्य में प्रयुक्त शब्दों में संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण , क्रिया विशेषण , संबंधबोधक आदि अनेक शब्द होते हैं। पद परिचय में यह बताना होता है कि इस वाक्य में व्याकरण की दृष्टि से क्या-क्या प्रयोग हुआ है।

पद परिचय के आवश्यक संकेत

१ संज्ञा    – संज्ञा के भेद (जातिवाचक व्यक्तिवाचक भाववाचक) ,

२ लिंग ( पुल्लिंग स्त्रीलिंग)

Read full article – पद परिचय। Pad parichay in hindi

 

 

हिंदी वर्णमाला – Hindi varnmala

मानव द्वारा प्रकट की गई सार्थक ध्वनियों को भाषा कहा जाता है। भाषा का मूल रूप मनुष्य के मस्तिक में बोधन और अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास करता है। भाषा विज्ञान के अनुसार मनुष्य के द्वारा प्रकट की गई ध्वनियों को शब्द चिन्ह के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है जिन्हें ‘ वर्ण ‘ कहा जाता है।

हिंदी में उच्चारण के आधार पर 45 वर्ण होते हैं। इनमें 10 स्वर और 35 व्यंजन होते हैं। लेखन के आधार पर 52 वर्ण होते हैं इसमें 13 स्वर , 35 व्यंजन तथा 4 संयुक्त व्यंजन होते हैं।

Read full article – Hindi varnamala swar aur vyanjan हिंदी वर्णमाला

 

हिंदी व्याकरण काव्य गद्य रस

हिंदी काव्य का सृजन गद्य और पद्य के आधार पर ही अधिक प्रचलित है। गद्य लेखन की दृष्टि से भारतेंदु युग के उपरांत हिंदी साहित्य के एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। आज हिंदी गद्य साहित्य पारंपरिक विधाओं से लेकर पाश्चात्य साहित्य अनुकरण से आयातित कितनी नवीनतम विधाओं में विपुल मात्रा में लिखा जा रहा है। गद्य  लेखन की सभी विधाएं , विषय योजना , उद्देश्य और भाषाई परिपक्वता के साथ पूर्णतः  सार्थक और रुचिकर शैली के हिंदी साहित्य के कोष  को सुख समृद्धि कर रही है।

Read full article – हिंदी काव्य ,रस ,गद्य और पद्य साहित्य का परिचय।

 

हिंदी व्याकरण शब्द शक्ति

शब्द शक्ति – साहित्य में दूसरा स्थान शब्द की शक्तियों का है। क्योंकि ध्वनियों के समूह से शब्द का निर्माण होता है और उससे  ध्वनित वाला  बोध हमें शब्द के तात्पर्य से अवगत कराता है। अतः शब्द बोधक है और अर्थ बोध्य है। लेकिन भाषा में यह साहित्य में शब्द के अंदर अनेक अर्थ सन्निहित रहते हैं।

शब्द का अर्थ देशकाल परिस्थिति के साथ-साथ वक्ता की प्रस्तुति श्रोता की स्थिति और संदर्भों वह प्रसंगों की अवधारणा से भी संबंधित रहती है काव्यशास्त्रीय ने शब्द शक्तियों का निम्न प्रकार निरूपण किया है।

Read full article – शब्द शक्ति , हिंदी व्याकरण । Shabd shakti

 

हिंदी व्याकरण छंद बिम्ब और प्रतीक

छंद कविता की स्वाभाविक गति के नियमबद्ध  रूप है। छंद कविता के लिए  प्रभाव और संगीतात्मक उत्पन्न कहते हैं। छंदों  का निर्धारण मात्राओं का वर्णन की गणना के आधार पर किया जाता है। इन्ही के आधार पर कविता में यति  विराम और उसकी पाठ गति का निर्धारण भी होता है। छन्द  से कविता के शिल्प वास्तव में चमत्कारिकता आती है , और पाठक या श्रोता में वह अभीरुचि पैदा करती है। छंद  दो प्रकार के होते हैं 1 मात्रिक छंद और 2 वर्णिक छंद  दोनों ही प्रकार के छंदों की सैद्धांतिक समीक्षा पुस्तक के अंदर छंद विधान निरूपण के अंतर्गत की गई है यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आधुनिक समय की हिंदी कविता अधिकांशतः छंदमुक्त कविता है।

बिम्ब  किसी पदार्थ का मानचित्र या मानसी चित्र होता है। पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय में बिंब को कविता का अनिवार्य अंग माना है। बिंब शब्दों द्वारा चित्रित किए जाने वाला वह न्यूनाधिक संविदात्मक चित्र है जो अंश का रुप आत्मक होता है , और अपने संदर्भ में मानवीय संवेदनाओ से संबंध रखता है। किंतु वह कविता की भावना या उसके आगे को पाठक तक पहुंचाता है। चित्रमयता  वर्तमान कविता की अनिवार्यता है , क्योंकि चित्रात्मक स्थितियों का पाठक चाक्षुष अनुभव कर पाता है।

काव्य में चिंतन का बड़ा महत्व है ।प्रतीक का संबंध भी मनुष्य की चिंतन प्रणाली से है । प्रतीक का शाब्दिक अर्थ अवयव या चिह्न होता है । कविता में प्रतीक हमारी भाव सत्ता को प्रकट अथवा गोपन करने का माध्यम है। प्रत्येक भाव व्यंजना की विशिष्ट प्रणाली है। इससे सूक्ष्म अर्थ व्यंजित होता है । डॉक्टर भगीरथ मिश्र कहते हैं कि ” सादृश्य के अभेदत्व का घनीभूत रूप ही प्रतीक है”। उनके मंतव्य में प्रतीक की सृष्टि अप्रस्तुत बिंब द्वारा ही संभव है ।

Read full article – हिंदी व्याकरण , छंद ,बिम्ब ,प्रतीक।

 

हिंदी व्याकरण स्वर और व्यंजन

स्वर में ध्वनियों का वर्ण है जिसके उच्चारण से मुख विवर सदा कम या अधिक खुलता है , स्वर के उच्चारण के समय बाहर निकलती हुई श्वास वायु मुख विवर से कहीं भी रुके बिना बाहर निकल जाती है .

स्वर की विशेषता –

  • स्वर तंत्रियों में अधिक कंपन होता है।
  • उच्चारण में मुख विवर थोड़ा-बहुत अवश्य खुलता है।
  • जिह्वा और ओष्ट परस्पर स्पर्श नहीं करते।
  • बिना व्यंजनों के स्वर का उच्चारण कर सकते हैं।
  • स्वराघात की क्षमता केवल स्वरूप को होती है |

व्यंजनों के उच्चारण में स्वर यंत्र से बाहर निकलती श्वास वायु मुख – नासिका के संधि स्थूल या मुख – विवर में कहीं न कहीं अवरुद्ध होकर मुख या नासिका से निकलती है।

व्यंजनों की विशेषता

  • व्यंजन को ‘ स्पर्श ध्वनि ‘  भी कहते हैं।
  • उच्चारण में कहीं ना कहीं मुख विवर अवरुद्ध होती है।
  • व्यंजनों का उच्चारण देर तक नहीं किया जा सकता।
  • व्यंजन स्वराघात नहीं वहन कर सकते।

Read full article – स्वर और व्यंजन की परिभाषा swar aur vyanjan

 

हिंदी व्याकरण – शब्द और पद में अंतर

साधारण बोलचाल की भाषा में ‘ शब्द ‘ और ‘ पद ‘ में अंतर नहीं माना जाता , परंतु ‘ व्याकरण ‘ तथा ‘ भाषाविज्ञान ‘ की दृष्टि से दोनों में अंतर माना जाता है। सार्थक ध्वनि समूह को ‘ शब्द ‘ कहा जाता है। शब्द को जब वाक्य में प्रयोग करते हैं , तब उसे ‘ पद ‘ कहा जाता है। जब  शब्द वाक्य की आवश्यकता के अनुसार अपने रूप में वाक्य में प्रयुक्त होता है तो उसे ‘ पद ‘ या ‘ रूप ‘ कहते हैं।

Read full article – शब्द और पद में अंतर।उपवाक्य। उपवाक्य की परिभाषा। शब्द पद में अंतर स्पस्ट करें।

अक्षर की पूरी जानकारी

भाषा के दो रूप हैं १ लिखित और २ मौखिक। मौखिक रूप का ध्वनि से संबंध होता है , अक्षर का संबंध ध्वनि के उच्चारण पक्ष से है। ‘ अक्षर ‘ शब्द संस्कृत के ‘ क्षर ‘ धातु के ‘ अ ‘ उपसर्ग लगाकर बना है। जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘ अनश्वर ‘ या ‘ अटल ‘ हिंदी भाषा में अक्षर शब्द का प्रयोग चार अर्थों में किया जाता है |

Read full article – अक्षर। अक्षर की विशेषता । अक्षर का स्वरूप।

 

हिंदी व्याकरण बलाघात की पूरी जानकारी

बलाघात जब कोई व्यक्ति बोलता है तो सभी ध्वनियों का उच्चारण समान रूप से नहीं होता है। कभी किसी वाक्य के एक शब्द पर अधिक बल होता है , तो कभी दूसरे शब्द पर। शब्द में भी कभी-कभी एक अक्षर पर बल अधिक होता है , तो कभी दूसरे अक्षर पर उच्चारण के इसी गुण को ‘ बलाघात ‘ कहते हैं।

Read full article – बलाघात के प्रकार उदहारण परिभाषा आदि balaghat in hindi

 

हिंदी व्याकरण स्वनिम

स्वनिम शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘  फोनिक ‘  का नवीनतम हिंदी अनुवाद है।  इसके लिए अब तक ‘ ध्वनि – ग्राम ‘ का प्रयोग होता रहा है , किंतु भारत सरकार के पारिभाषिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग में ‘ फोनिक ‘ का हिंदी अनुवाद स्वनिम कर दिया गया है।

‘ स्वन ‘ विज्ञान या ‘ ध्वनि ग्राम ‘ वह विज्ञान है , जिसमें किसी भाषा विशेष के नियमों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। ‘ स्वनिम ‘ शब्द संस्कृत भाषा की ‘ स्वन ‘ धातु से बना है , जिसका अर्थ होता है ‘ ध्वनि ‘ या ‘ आवाज करना ‘।  यह भाषा की लघुतम अखंड इकाई है , जैसे – काम , कशक ,  रोकना आदि शब्दों में ‘ क ‘ ध्वनि ( स्वन ) लघुतम एवं अखंड इकाई है।

Read full article – स्वनिम की परिभाषा | स्वनिम के संक्षेप उदहारण अथवा नोट्स

 

विलोम शब्द

अदोष – सदोष

अग्रज – अनुज

अनाप -शनाप

अल्पायु – दीर्घायु

अनुरक्ति – विरक्ति

अल्पज्ञ – बहुज्ञ

अस्वस्थ – स्वस्थ

अगला – पिछला

Read full article – विलोम शब्द Vilom shabd hindi grammar

 

Read this too – छन्द विवेचन – गीत ,यति ,तुक ,मात्रा ,दोहा ,सोरठा ,चौपाई ,कुंडलियां ,छप्पय ,सवैया ,आदि

 

 

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