हिंदी व्याकरण की संपूर्ण जानकारी – Hindi Vyakaran

Are you searching for full information on Hindi vyakaran. In this post you will get every knowledge about Hindi grammar.

इस पोस्ट में आज हम आपको हिंदी व्याकरण की संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं। आप इस पोस्ट में व्याकरण के सभी भेदों को संक्षिप्त रूप से जानेंगे और उनकी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने हेतु एक विस्तार लेख भी पाएंगे।

 

हिंदी व्याकरण के सभी प्रकार – Sampoorna Hindi vyakaran

अगर आपको हिंदी व्याकरण के सभी भेद की जानकारी चाहिए तो यह पोस्ट अंत तक अवश्य पढ़ना पड़ेगा। इस पोस्ट में हमने व्याकरण के हर एक अंग को संक्षिप्त रूप से बताया है।

अगर आपको प्रत्येक अंग की संपूर्ण जानकारी चाहिए तो आप हर एक अंग के नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

1. अलंकार

मनुष्य सौंदर्य प्रेमी है। वह अपनी प्रत्येक वस्तु को सुसज्जित और अलंकृत देखना चाहता है। वह अपने कथन को भी शब्दों के सुंदर प्रयोग और विश्व उसकी विशिष्ट अर्थवत्ता से प्रभावी व सुंदर बनाना चाहता है।

मनुष्य की यही प्रकृति काव्य में अलंकार कहलाती है।

पूरी जानकारी यहाँ प्राप्त करें – अलंकार की संपूर्ण जानकारी

 

2. रस

रस काव्य का मूल आधार ‘ प्राणतत्व ‘ अथवा ‘ आत्मा ‘ है रस का संबंध ‘ सृ ‘ धातु से माना गया है। जिसका अर्थ है जो बहता है , अर्थात जो भाव रूप में हृदय में बहता है उसे को रस कहते हैं। एक अन्य मान्यता के अनुसार रस शब्द ‘ रस् ‘ धातु और ‘ अच् ‘ प्रत्यय के योग से बना है। जिसका अर्थ है – जो वहे अथवा जो आश्वादित किया जा सकता है।

वस्तुतः रस क्या है ? इसका उत्तर रसवादी आचार्यों ने अपनी अपनी प्रतिभा के अनुरूप दिया है। रस शब्द अनेक संदर्भों में प्रयुक्त होता है तथा प्रत्येक संदर्व में इसका अर्थ अलग – अलग होता है। उदाहरण के लिए पदार्थ की दृष्टि से रस का प्रयोग षडरस के रूप में तो , आयुर्वेद में शस्त्र आदि धातु के अर्थ में , भक्ति में ब्रह्मानंद के लिए तथा साहित्य के क्षेत्र में काव्य स्वाद या काव्य आनंद के लिए रस का प्रयोग होता है।

यहाँ पढ़ें – – रस प्रकार ,भेद ,उदहारण 

 

3. संज्ञा – Hindi vyakaran sangya

संज्ञा किसी व्यक्ति ( प्राणी ) वस्तु , स्थान , अथवा भाव आदि के नाम को संज्ञा कहते है। जैसे – श्याम , दिल्ली , आम , मिठास , गाय आदि।

संज्ञा के तीन भेद है – व्यक्तिवाचक , जातिवाचक , भाववाचक संज्ञा

यहाँ पढ़ें – सम्पूर्ण संज्ञा

 

4. सर्वनाम – Hindi vyakaran sarvnam

सर्वनाम दो शब्दों के योग से बना है सर्व + नाम , अर्थात जो नाम सब के स्थान पर प्रयुक्त हो उसे सर्वनाम कहा जाता है। कुछ उदाहरण से समझिये –

  • मोहन 11वीं कक्षा में पढ़ता है।
  • मोहन स्कूल जा रहा है।

उपर्युक्त वाक्य में मोहन ( संज्ञा )  है इसका प्रयोग बार – बार हुआ है। बार – बार मोहन शब्द को दोहराना वाक्यों को अरुचिकरकम स्तर का बनाता है। यदि हम एक वाक्य में मोहन ( संज्ञा ) को छोड़कर अन्य सभी जगह सर्वनाम का प्रयोग करें तो वाक्य रुचिकर व आकर्षक बन जाएंगे।

यहाँ पढ़ें – सर्वनाम पूरी जानकारी 

 

5. अव्यय – Hindi vyakaran avyay

ऐसे शब्द जिसमें लिंग , वचन , पुरुष , कारक आदि के कारण कोई विकार नहीं आता अव्यय  कहलाते हैं।
यह सदैव अपरिवर्तित , अविकारी एवं अव्यय रहते हैं। इनका मूल रूप स्थिर रहता है , वह कभी बदलता नहीं है जैसे –

इधर , किंतु , क्यों , जब , तक , इसलिए , आदि।

अव्यय के भेद-

अव्यय के चार भेद माने जाते हैं।

  • क्रिया विशेषण
  • संबंधबोधक
  • समुच्चयबोधक
  • विस्मयादिबोधक
  • निपात ( Optional according to syllabus )

Read full article – अव्यय के भेद परिभाषा उदहारण Avyay in hindi

 

6. संधि विछेद – Hindi vyakaran sandhi viched

निकटवर्ती वर्णों के परस्पर मेल से उत्पन्न परिवर्तन को संधि कहते हैं। वर्णों में संधि करने पर स्वर , व्यंजन अथवा विसर्ग में परिवर्तन आता है। अतः संधि तीन प्रकार की होती है १ स्वर संधि   २ व्यंजन संधि  ३ विसर्ग संधि। 

उदाहरण –

  • देव + आलय  = देवालय
  • मनः + योग    = मनोयोग
  • जगत + नाथ  =जगन्नाथ

Read full article – संधि विच्छेद sandhi viched in hindi grammar

Hindi vyakaran for class 1 to 10
Hindi vyakaran for class 1 to 10

7. पद परिचय

वाक्य में प्रयुक्त शब्द को पद कहा जाता है वाक्य में प्रयुक्त शब्दों में संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण , क्रिया विशेषण , संबंधबोधक आदि अनेक शब्द होते हैं। पद परिचय में यह बताना होता है कि इस वाक्य में व्याकरण की दृष्टि से क्या-क्या प्रयोग हुआ है।

पद परिचय के आवश्यक संकेत

१ संज्ञा    – संज्ञा के भेद (जातिवाचक व्यक्तिवाचक भाववाचक) ,

२ लिंग ( पुल्लिंग स्त्रीलिंग)

Read full article – पद परिचय। Pad parichay in hindi

 

 

8. हिंदी वर्णमाला – Hindi varnmala

मानव द्वारा प्रकट की गई सार्थक ध्वनियों को भाषा कहा जाता है। भाषा का मूल रूप मनुष्य के मस्तिक में बोधन और अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास करता है। भाषा विज्ञान के अनुसार मनुष्य के द्वारा प्रकट की गई ध्वनियों को शब्द चिन्ह के द्वारा अभिव्यक्त किया जाता है जिन्हें ‘ वर्ण ‘ कहा जाता है।

हिंदी में उच्चारण के आधार पर 45 वर्ण होते हैं। इनमें 10 स्वर और 35 व्यंजन होते हैं। लेखन के आधार पर 52 वर्ण होते हैं इसमें 13 स्वर , 35 व्यंजन तथा 4 संयुक्त व्यंजन होते हैं।

Read full article – Hindi varnamala swar aur vyanjan हिंदी वर्णमाला

 

9. Hindi vyakaran – काव्य गद्य रस

हिंदी काव्य का सृजन गद्य और पद्य के आधार पर ही अधिक प्रचलित है। गद्य लेखन की दृष्टि से भारतेंदु युग के उपरांत हिंदी साहित्य के एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। आज हिंदी गद्य साहित्य पारंपरिक विधाओं से लेकर पाश्चात्य साहित्य अनुकरण से आयातित कितनी नवीनतम विधाओं में विपुल मात्रा में लिखा जा रहा है। गद्य  लेखन की सभी विधाएं , विषय योजना , उद्देश्य और भाषाई परिपक्वता के साथ पूर्णतः  सार्थक और रुचिकर शैली के हिंदी साहित्य के कोष  को सुख समृद्धि कर रही है।

Read full article – हिंदी काव्य ,रस ,गद्य और पद्य साहित्य का परिचय।

 

10. Hindi vyakaran – शब्द शक्ति

शब्द शक्ति – साहित्य में दूसरा स्थान शब्द की शक्तियों का है। क्योंकि ध्वनियों के समूह से शब्द का निर्माण होता है और उससे  ध्वनित वाला  बोध हमें शब्द के तात्पर्य से अवगत कराता है। अतः शब्द बोधक है और अर्थ बोध्य है। लेकिन भाषा में यह साहित्य में शब्द के अंदर अनेक अर्थ सन्निहित रहते हैं।

शब्द का अर्थ देशकाल परिस्थिति के साथ-साथ वक्ता की प्रस्तुति श्रोता की स्थिति और संदर्भों वह प्रसंगों की अवधारणा से भी संबंधित रहती है काव्यशास्त्रीय ने शब्द शक्तियों का निम्न प्रकार निरूपण किया है।

Read full article – शब्द शक्ति , हिंदी व्याकरण । Shabd shakti

 

11. छंद बिम्ब और प्रतीक

छंद कविता की स्वाभाविक गति के नियमबद्ध  रूप है। छंद कविता के लिए  प्रभाव और संगीतात्मक उत्पन्न कहते हैं। छंदों  का निर्धारण मात्राओं का वर्णन की गणना के आधार पर किया जाता है। इन्ही के आधार पर कविता में यति  विराम और उसकी पाठ गति का निर्धारण भी होता है। छन्द  से कविता के शिल्प वास्तव में चमत्कारिकता आती है , और पाठक या श्रोता में वह अभीरुचि पैदा करती है। छंद  दो प्रकार के होते हैं 1 मात्रिक छंद और 2 वर्णिक छंद  दोनों ही प्रकार के छंदों की सैद्धांतिक समीक्षा पुस्तक के अंदर छंद विधान निरूपण के अंतर्गत की गई है यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि आधुनिक समय की हिंदी कविता अधिकांशतः छंदमुक्त कविता है।

बिम्ब  किसी पदार्थ का मानचित्र या मानसी चित्र होता है। पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय में बिंब को कविता का अनिवार्य अंग माना है। बिंब शब्दों द्वारा चित्रित किए जाने वाला वह न्यूनाधिक संविदात्मक चित्र है जो अंश का रुप आत्मक होता है , और अपने संदर्भ में मानवीय संवेदनाओ से संबंध रखता है। किंतु वह कविता की भावना या उसके आगे को पाठक तक पहुंचाता है। चित्रमयता  वर्तमान कविता की अनिवार्यता है , क्योंकि चित्रात्मक स्थितियों का पाठक चाक्षुष अनुभव कर पाता है।

काव्य में चिंतन का बड़ा महत्व है ।प्रतीक का संबंध भी मनुष्य की चिंतन प्रणाली से है । प्रतीक का शाब्दिक अर्थ अवयव या चिह्न होता है । कविता में प्रतीक हमारी भाव सत्ता को प्रकट अथवा गोपन करने का माध्यम है। प्रत्येक भाव व्यंजना की विशिष्ट प्रणाली है। इससे सूक्ष्म अर्थ व्यंजित होता है । डॉक्टर भगीरथ मिश्र कहते हैं कि ” सादृश्य के अभेदत्व का घनीभूत रूप ही प्रतीक है”। उनके मंतव्य में प्रतीक की सृष्टि अप्रस्तुत बिंब द्वारा ही संभव है ।

Read full article – हिंदी व्याकरण , छंद ,बिम्ब ,प्रतीक।

 

12. हिंदी व्याकरण स्वर और व्यंजन

स्वर में ध्वनियों का वर्ण है जिसके उच्चारण से मुख विवर सदा कम या अधिक खुलता है।

इस के उच्चारण के समय बाहर निकलती हुई श्वास वायु मुख विवर से कहीं भी रुके बिना बाहर निकल जाती है .

स्वर की विशेषता –

  • स्वर तंत्रियों में अधिक कंपन होता है।
  • उच्चारण में मुख विवर थोड़ा-बहुत अवश्य खुलता है।
  • जिह्वा और ओष्ट परस्पर स्पर्श नहीं करते।
  • बिना व्यंजनों के स्वर का उच्चारण कर सकते हैं।
  • स्वराघात की क्षमता केवल स्वरूप को होती है |

व्यंजनों के उच्चारण में स्वर यंत्र से बाहर निकलती श्वास वायु मुख – नासिका के संधि स्थूल या मुख – विवर में कहीं न कहीं अवरुद्ध होकर मुख या नासिका से निकलती है।

व्यंजनों की विशेषता

  • व्यंजन को ‘ स्पर्श ध्वनि ‘  भी कहते हैं।
  • उच्चारण में कहीं ना कहीं मुख विवर अवरुद्ध होती है।
  • व्यंजनों का उच्चारण देर तक नहीं किया जा सकता।
  • व्यंजन स्वराघात नहीं वहन कर सकते।

Read full article – स्वर और व्यंजन की परिभाषा swar aur vyanjan

 

13. शब्द और पद में अंतर

साधारण बोलचाल की भाषा में ‘ शब्द ‘ और ‘ पद ‘ में अंतर नहीं माना जाता , परंतु ‘ व्याकरण ‘ तथा ‘ भाषाविज्ञान ‘ की दृष्टि से दोनों में अंतर माना जाता है। सार्थक ध्वनि समूह को ‘ शब्द ‘ कहा जाता है। शब्द को जब वाक्य में प्रयोग करते हैं , तब उसे ‘ पद ‘ कहा जाता है। जब  शब्द वाक्य की आवश्यकता के अनुसार अपने रूप में वाक्य में प्रयुक्त होता है तो उसे ‘ पद ‘ या ‘ रूप ‘ कहते हैं।

Read full article – शब्द और पद में अंतर।उपवाक्य। उपवाक्य की परिभाषा। शब्द पद में अंतर स्पस्ट करें।

14. अक्षर की पूरी जानकारी

भाषा के दो रूप हैं १ लिखित और २ मौखिक। मौखिक रूप का ध्वनि से संबंध होता है , अक्षर का संबंध ध्वनि के उच्चारण पक्ष से है। ‘ अक्षर ‘ शब्द संस्कृत के ‘ क्षर ‘ धातु के ‘ अ ‘ उपसर्ग लगाकर बना है। जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘ अनश्वर ‘ या ‘ अटल ‘ हिंदी भाषा में अक्षर शब्द का प्रयोग चार अर्थों में किया जाता है |

Read full article – अक्षर। अक्षर की विशेषता । अक्षर का स्वरूप।

 

15. हिंदी व्याकरण बलाघात

बलाघात जब कोई व्यक्ति बोलता है तो सभी ध्वनियों का उच्चारण समान रूप से नहीं होता है। कभी किसी वाक्य के एक शब्द पर अधिक बल होता है , तो कभी दूसरे शब्द पर। शब्द में भी कभी-कभी एक अक्षर पर बल अधिक होता है , तो कभी दूसरे अक्षर पर उच्चारण के इसी गुण को ‘ बलाघात ‘ कहते हैं।

Read full article – बलाघात के प्रकार उदहारण परिभाषा आदि balaghat in hindi

 

16. हिंदी व्याकरण स्वनिम

स्वनिम शब्द अंग्रेजी भाषा के ‘  फोनिक ‘  का नवीनतम हिंदी अनुवाद है।  इसके लिए अब तक ‘ ध्वनि – ग्राम ‘ का प्रयोग होता रहा है , किंतु भारत सरकार के पारिभाषिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग में ‘ फोनिक ‘ का हिंदी अनुवाद स्वनिम कर दिया गया है।

‘ स्वन ‘ विज्ञान या ‘ ध्वनि ग्राम ‘ वह विज्ञान है , जिसमें किसी भाषा विशेष के नियमों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। ‘ स्वनिम ‘ शब्द संस्कृत भाषा की ‘ स्वन ‘ धातु से बना है , जिसका अर्थ होता है ‘ ध्वनि ‘ या ‘ आवाज करना ‘।  यह भाषा की लघुतम अखंड इकाई है , जैसे – काम , कशक ,  रोकना आदि शब्दों में ‘ क ‘ ध्वनि ( स्वन ) लघुतम एवं अखंड इकाई है।

यहाँ पढ़ें – स्वनिम की परिभाषा | स्वनिम के संक्षेप उदहारण अथवा नोट्स

 

17. विलोम शब्द

अदोष – सदोष

अग्रज – अनुज

अनाप -शनाप

अल्पायु – दीर्घायु

अनुरक्ति – विरक्ति

अल्पज्ञ – बहुज्ञ

अस्वस्थ – स्वस्थ

अगला – पिछला

ऐसे ही लगभग हजार से भी ज्यादा शब्दों के विलोम का संग्रह आपको नीचे दिए गए पोस्ट में पढ़ने को मिलेगा। उस पोस्ट में हम निरंतर अपडेट करते रहते हैं और 9 शब्दों का भंडार व्यवस्थित करते हैं।

Read full article – विलोम शब्द Vilom shabd hindi grammar

 

18. पत्र लेखन

पत्र लेखन किस प्रकार लिखा जाता है और इसको विद्यार्थियों द्वारा किस कारण लिखवाया जाता है यह सभी बात आपको जानने को मिलेगी। लगभग सभी समस्याओं पर हमने पत्र लिखे हैं जैसे की बिगड़ती कानून व्यवस्था, बिजली की समस्या, संपादक को पत्र और अवकाश के लिए किस प्रकार पत्र लिखा जाता है सब आपको जानने को मिलेगा।

 

19. फीचर लेखन

फीचर लेखन क्या होता है और इसका महत्व क्या होता है सभी प्रकार की जानकारी उदाहरण सहित आपको नीचे दिए गए पोस्ट में मिलेगी। कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए फीचर लेखन का निर्माण किस प्रकार किया जाता है और किस प्रकार आप अच्छे अंक अर्जित कर सकते हैं यह सभी जानकारी आपको इस पोस्ट में मिलेगी।

यहाँ पढ़ें – फीचर लेखन क्या है Feature lekhan for class 11 and 12

 

20. विज्ञापन लेखन

विज्ञापन लेखन भी एक महत्वपूर्ण टॉपिक है जिसमें विद्यार्थियों को कठिनाई आती है।

परंतु हमारा यह पोस्ट पढ़ने के बाद आपकी सारी मुश्किलें दूर हो जाएंगी और आपको यह टॉपिक अच्छे से समझ में आने लगेगा। विज्ञापन लेखन किस प्रकार किया जाता है उसका क्या महत्व होता है उदाहरण सहित आपको समझाया गया है।

यहाँ पढ़ें – विज्ञापन लेखन कैसे लिखें ‘दंत चमक’ टूथपेस्ट का – vigyapan lekhan

 

21. मीडिया लेखन

मीडिया लेखन एक बहुत ही मुश्किल टॉपिक है जिसे अच्छे विद्यार्थियों को भी समझने में कठिनाई होती है। हमने इस पोस्ट का निर्माण किस प्रकार किया है कि आपको मीडिया लेखन से जुड़ी किसी भी समस्या का समाधान मिल पाए और आप अपने परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करें। उदाहरण सहित आपको मीडिया लेखन पूरा समझाया गया है जो कि आप नीचे दिए गए पोस्ट मैं पढ़ सकते हैं।

यहाँ पढ़ें –

मीडिया लेखन संचार माध्यमों के लिए Media lekhan in hindi

 

कुछ शब्द

आशा है आपको यह पोस्ट अच्छी लगी होगी और आपके लिए यह मददगार साबित होगी। यहां पर आपको संक्षिप्त जानकारी इसलिए दी गई है ताकि यह पोस्ट लंबा ना हो जाए और आप पढ़ते पढ़ते बीच में भटक ना जाए। सभी अंगो की पूरी जानकारी आपको हर एक अंग के नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करके मिलेगी। जब आप इस लिंक को क्लिक करेंगे तब आप एक नए पेज पर पहुंचेंगे जहां पर आपको उस भेद की संपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी।

अगर अभी आपके मन में किसी प्रकार का संशय या सवाल है तो आप नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हम आप तक जल्दी पहुंचेंगे और आपको हर एक समस्या का समाधान अवश्य मिलेगा।

 

कृपया अपने सुझावों को लिखिए | हम आपके मार्गदर्शन के अभिलाषी है 

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4 thoughts on “हिंदी व्याकरण की संपूर्ण जानकारी – Hindi Vyakaran”

  1. हिंदी व्याकरण की संपूर्ण जानकारी देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने लगभग व्याकरण के सभी अंगों को लिखा है परंतु इसमें कुछ रह गए हैं।

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  2. हिंदी व्याकरण की संपूर्ण जानकारी एक ही जगह पर देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. मैं एक ही जगह से सभी चीजें पढ़ सकता हूं यह बात मुझे बहुत अच्छी लगी.

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