How to register a company in India | Company register kaise kare

Learn How to register a company in India in Hindi. Company register karne ka poora process seekhe. भारत वैश्विक स्तर पर एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है, यहां के युवा अधिक संख्या में नौकरी के बजाय अपना स्वयं का उद्योग लगाकर उद्यमी बनने की ओर अग्रसर होते जा रहे हैं। भारत में संभावना का बाजार हमेशा गर्म रहता है। वर्तमान समय में युवा या तो कोई उद्योग लगाकर , अथवा घर बैठे ऑनलाइन काम करके भी कमाई कर रहे हैं।

आज ऐसे कई उदाहरण है जहां देखने को मिलता है की युवा अपना व्यापार/उद्योग लगाकर , वेबसाइट , यूट्यूब , टिक टॉक , ब्लॉगिंग या अन्य प्रकार के कार्यों के द्वारा ऑनलाइन कमाई कर रहे हैं यह कमाई सीमित नहीं है।  कुछ समय पहले देखने में आया कुछ युवा लड़कों ने एक ऐसा सॉफ्टवेयर निजात किया जिसकी कमाई 6 दिन में लगभग 10 करोड़ थी। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आज के युवा किस प्रकार के उद्योग को अपना रहे हैं।

जाहिर तौर पर जब आप अपने कार्य को प्रोफेशनल बनाना चाहते हैं तो आपको एक कंपनी बनाने की आवश्यकता होती है। भारत में अब डिजिटल क्रांति का आरंभ हो चुका है , ऐसे में अब सारा रिकॉर्ड सरकार पारदर्शी रूप से रखना चाहती है। इसलिए व्यक्ति को और भी आवश्यक हो जाता है कि वह अपने कार्य को सरकार के द्वारा निर्धारित किए गए मानदंडों के आधार पर ही आरम्भ करें।

 

How to register a company in India | Company register kaise kare

 

भारत में वर्तमान समय में 5 तरह की कंपनियां है। यह अलग-अलग प्रकार के कार्यों के लिए है। आपको अपने सुविधा अनुसार अर्थात पूंजी अथवा अपने बिजनेस पार्टनर के अनुसार इस कंपनी को स्वयं के लिए बना सकते हैं यह कंपनी इस प्रकार है

There are five types of companies available in India –

1 प्रोपराइटरशिप ( Proprietorship )
2  पार्टनरशिप फर्म ( Partnership )
3  प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ( Private Limited company )
4  लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (Limited Liability Partnership )
5  वन पर्सन कंपनी ( One Person company )

आज हम उपर्युक्त कंपनियों की खासियत और लाभ – हानि तथा आपके चुनाव करने में  मदद करने वाले हैं। अतः इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े –

 

1. प्रोपराइटरशिप – How to register a company in Proprietorship

 

यह कंपनी नहीं बल्कि या एक व्यक्ति द्वारा स्वतंत्र किया जाने वाला कार्य से संबंधित फर्म होता है। आपने अपने आसपास छोटे-मोटे दुकान जैसे किराना का दुकान , हार्डवेयर की दुकान , साइबर कैफे , ढाबा , आदि अनेक प्रकार के फर्म देखे होंगे। जिससे कोई एक व्यक्ति अपने सामर्थ के अनुसार उसका संचालन करता है।

यह कंपनी भारत सरकार द्वारा नियंत्रित नहीं होती , इस फर्म का स्वामित्व केवल वह व्यक्ति होता है , जो इसका संचालन करता है। जिस प्रकार रेस्टोरेंट , ढाबा , लघु कुटीर उद्योग , आदि चलाने के लिए फूड डिपार्टमेंट से लाइसेंस बनवाना होता है , ठीक उसी प्रकार प्रोपराइटरशिप के लिए आवेदन करना होता है।

 

FAQ’S On How to register a company in India in proprietorship

Below you will find questions and answers which will help you to understand How to register a company in India in Proprietorship.

Q.1 कौन-कौन इस फार्म को चला सकता है ? Who can run this firm ?

वह सभी व्यक्ति इस फर्म को चला सकते हैं जो अकेले अपने कार्य का मालिक होते हैं जैसे –  कोई दुकान , सलाहकार , ब्लॉगर , यूट्यूबर  , कुटीर उद्योग , डेयरी आदि।

Q.2 फर्म का रजिस्ट्रेशन कैसे करें ? How to register this firm ?

फर्म के रजिस्ट्रेशन में कोई अधिक कागजी कार्यवाही नहीं होती। इसके लिए केवल आपको उद्योग आधार udogaadhar.gov.in     की वेबसाइट पर जाकर अपनेर पैन कार्ड और आधार कार्ड तथा मोबाइल नंबर के माध्यम से रजिस्टर्ड करवा सकते हैं।आपको आपके व्यापार का आधार नंबर मिल जायेगा यह प्रक्रिया निःशुल्क है आप स्वयं भी आसानी से घर बैठे पांच मिनट में कर सकते है। आप बिल भी मान्य रूप से दे सकेंगे।

जी.एस.टी ( GST ) रजिस्टर करवाना कोई जरुरी नहीं है जब तक आपका व्यापार बीस लाख के पार नहीं होता।

अगर आपका व्यापार बीस लाख के पार जाता है तो आप जीएसटी रजिस्टर  www.gst.gov.in यहाँ करवाकर भी आप अपना व्यापार आरम्भ कर सकते है। जिसमें आपको एक जीएसटी नंबर प्राप्त होता है। इसके लिए आपको अपना पहचान पत्र और अपना पैन नंबर देना होता है , फर्म का पता देने के बाद आपको GSTN नंबर मिल जाता है। इसके बाद आप अपनी सेवा के बदले प्रमाणिक बिल GST के साथ देने के लिए सक्षम हो जाते हैं।

Q.3 इनकम टैक्स देना होता है ?

जी हां ! किन्तु व्यक्तिक रूप से आमदनी के आधार पर। जिस प्रकार आपकी वर्तमान समय में आमदनी हो रही है और सरकार ने निर्धारित किया हुआ है उससे लैब के अनुसार अगर आपके आय में बढ़ोतरी होती है तो आपको उसका टैक्स सरकार को देना होगा। अगर स्लैब में दिए गए छूट के अंतर्गत आप आते हैं तो आपको टैक्स भरने की जरूरत नहीं होती है।
उद्धरण – मान लीजिए इनकम टैक्स में तीन लाख तक छूट का प्रावधान है। आपको ₹300000 तक टैक्स नहीं देना है। ₹300000 से ऊपर की आमदनी पर ही आपको अपने आयकर टेक्स देना होगा।( यहाँ कंपनी स्वयं व्यक्ति को माना जाता है कम्पनी की आमदनी व्यक्ति की आमदनी मानी जाएगी )

Q.4 फर्म कितने लागत से शुरू करेंगे ?

यह फर्म पूर्ण रूप से आपके ऊपर निर्भर करती है कि आप इस फर्म को कितने लागत से शुरू करते हैं। आप इसकी शुरुआत ₹0 से भी कर सकते हैं।

Q.5 नॉमिनी का क्या प्रावधान है ?

प्रोपराइटरशिप में नॉमिनी नहीं होता , यह फर्म व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही बंद हो जाती है। क्योंकि यह व्यक्तिगत व्यापार था अगर उसकी पत्नी या बच्चा कार्य को आगे बढ़ाना चाहता है , तो वह पुनः अपने नाम से जीएसटीएन GSTN नंबर लेकर इस कार्य को बिना रुके शुरू कर सकता है। फिर जो आमदनी होगी वह व्यापार को आगे बढ़ाने वाले व्यक्ति की होगी।

 

 

2. पार्टनरशिप फर्म – How to register a company in a Partnership firm

 

प्रोपराइटरशिप और पार्टनरशिप में काफी समानता है , किंतु इन दोनों में जो छोटा सा भेद है। वह यह है कि इस फर्म को एक व्यक्ति नहीं अपितु  दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर चलाते हैं। जैसे किसी दुकान को बाप – बेटे मिलकर चलाते हैं , या किसी होटल को मिलकर दस लोग चलाते  हैं।

इस कार्य में सभी लोगों की भागीदारी हो रही है , इसलिए इस फर्म में जितने लोग रजिस्टर होंगे उतने लोगों लोगों में मुनाफे को बांट दिया जाएगा।
पार्टनरशिप फर्म की सारी प्रक्रिया प्रोपराइटरशिप जैसी ही है।
इस फर्म से जो आय होगी वह सभी लोगों में सामान्य रूप से वितरित होगी , अगर इस फर्म की आमदनी 600000 है और दो व्यक्ति इस फर्म से जुड़े हुए हैं तो यह तीन ₹300000 व्यक्तिगत रूप से बट जाएगी। जिसके आधार पर व्यक्ति अपने आधार पर इनकम टैक्स भरेगा।

अगर 300000 तक सरकार इनकम टैक्स  से छूट देती है तो इनकम टैक्स भरने की आवश्यकता नहीं है , ₹300000 से ऊपर आमदनी जाती है तो व्यक्तिगत रूप से आपको टैक्स भरना पड़ेगा।

FAQ’S On How to register a company in India in a partnership firm

Below you will find questions and answers which will help you to understand how to register a company in India in Partnership firm.

Q.1 पार्टनरशिप फर्म में कितनी संख्या हो सकती है ?

इस फर्म में दो व्यक्ति से बीस व्यक्ति तक हो सकते हैं , जबकि प्रोपराइटरशिप में केवल एक व्यक्ति ही उस फर्म को चला सकता था , इसमें सालाना ऑडिट की जरूरत नहीं होती है।

Q.2 फर्म की शुरुआत कितने लागत से होगी ?

फर्म की शुरुआत कितनी लागत से करना है यह आपका व्यक्तिगत और सामूहिक निर्णय होगा, इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। अगर आपको दुकान खोलना है या किसी कार्य को आरंभ करना है तो अपने पार्टनर के साथ बैठकर आपसी सहमति से अपनी पूंजी निवेश कर सकते हैं।

Q.3 पार्टनरशिप फर्म किनके लिए उपयोगी है ?

पार्टनरशिप फर्म कोई भी दो या दो से अधिक व्यक्ति आरम्भ कर सकता है। दुकान , ढाबा , सामूहिक रूप से होने वाले सभी व्यापर ( वीडियो , संगीत बना ,सलाह देना ,घरेलू उद्योग आदि ) । इस फर्म से हुई आमदनी को सामान्य रूप से इससे जुड़े सभी पार्टनर व्यक्तियों में बांट दिया जाता है। जैसे एक ही परिवार के दो व्यक्ति भाई – भाई या बाप – बेटे मिलकर किसी व्यापार को चला रहे हैं तो उसमें प्राप्त मुनाफा दो लोगों की आय मानी जाएगी और टैक्स भी उसी के अनुसार लगेगा।

Q.4 पैन नंबर किस प्रकार का होगा ?

प्रोपराइटरशिप में जहाँ व्यक्ति अकेला काम कर रहा था इसलिए उसका पैन नंबर कंपनी का पैन नंबर माना जा रहा था। पार्टनरशिप में अधिक व्यक्ति होने के कारण पैन नंबर भी अलग होगा इसलिए आपको मिलकर एक पैन बनवाना होगा।

Q.5 GSTN नंबर लेने की आवश्यकता होती है ?

छोटे उद्योग अथवा व्यापार में जीएसटी नंबर लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। अगर आपका व्यापार 20 लाख से ऊपर जाता है तो आपको जीएसटी रजिस्टर्ड करवाना होगा , यह बेहद ही आसान प्रक्रिया है। प्रोपराइटरशिप में बताए गए विधि का पालन करके आप स्वयं घर बैठे जीएसटी नंबर प्राप्त कर सकते हैं।

Q.6 बिल दे सकते हैं ?

जी हाँ , बिल्कुल आप अपने फर्म का रजिस्ट्रेशन कराकर बिल कानूनी रूप से दे सकने में सक्षम होंगे।

Q.7 वार्षिक ऑडिट की जरूरत पड़ती है ?

अगर आपका व्यापार छोटा है और आप सरकार द्वारा निर्धारित किए गए टैक्स की सीमा से नीचे हैं तो , आपको टैक्स देने की जरूरत नहीं है। जिस प्रकार व्यक्तिगत रूप से टैक्स भरा जाता है वही प्रक्रिया इसमें लागू होगी। वार्षिक ऑडिट की तब तक आवश्यकता नहीं है , जब तक आपकी आय टैक्स के दायरे में नहीं आती।

 

3. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी – How to register a Private Limited Company

 

यह कंपनी पूर्ण रूप से सरकार के नियंत्रण में होती है वाणिज्य विभाग सदैव इस प्रकार की कंपनी पर नजर बनाये रहती है । इस कंपनी के संचालन के लिए दो या दो से अधिक व्यक्तियों की आवश्यकता होती है। कंपनी का यही फायदा होता है कि कंपनी का घाटा व्यक्ति का घाटा नहीं होता।

जैसे मान लीजिए – कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी किसी प्रोडक्ट को बना रही है , और किसी कारण वह कंपनी घाटे में या दिवालिया हो गई , तो सरकार इसके डायरेक्टर का व्यक्तिगत नुकसान , अहित नहीं कर सकती है। अर्थात नहीं उसे गिरफ्तार कर सकती है और ना ही उसकी अचल संपत्ति या पूंजी को जप्त कर सकती है। कंपनी का घाटा कंपनी को बेचकर या उसकी नीलामी करके पूर्ति की जा सकती है उसके अलावा व्यक्तिगत रूप से किसी पर कोई आंच नहीं आती है।

FAQ’S On How to register a company in India in a Private Limited Company

Below you will find questions and answers which will help you to understand How to register a company in India in Private Limited.

Q.1 कंपनी रजिस्ट्रेशन के लिए कितने व्यक्ति की आवश्यकता होती है ?

कंपनी को रजिस्टर्ड करवाने के लिए 2  से 15 डायरेक्टर अर्थात मालिक की आवश्यकता होती है। इसमें 200 सदस्य हो सकते हैं।

Q.2 कंपनी रजिस्ट्रेशन में कितना पैसा लगता है ?

इस कंपनी के रजिस्ट्रेशन करने की प्रक्रिया में लगभग ₹15000 का खर्च आता है।

Q.3 कंपनी की शुरुआत कितने लागत से की जाएगी ?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शुरुआत कम से कम ₹100000 से करनी होगी। अर्थात कंपनी को आरंभ करने में आपको कम से कम ₹100000 की पूंजी को निर्वाह करना होगा लगाना होगा।

Q.4 सालाना ऑडिट की आवश्यकता होती है ?

जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी यह सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करती है। अर्थात इसको कम से कम ₹100000 का आय-व्यय सरकार को दिखाना होगा और इसका सालाना ऑडिट करवाना होगा। अर्थात टैक्स भरना पड़ेगा।

Q.5 नॉमिनी की क्या स्थिति है ?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मैं आपको किसी एक व्यक्ति को नॉमिनी नियुक्त करना होगा। वह व्यक्ति अगर आपका नॉमिनी बनता है तो उसे किसी और कंपनी में नॉमिनी नहीं बनना होगा । वह किसी और कंपनी में नॉमिनी नहीं बन सकता है।  डायरेक्टर की मृत्यु के बाद डायरेक्टर द्वारा निर्धारित किए गए नॉमिनी उसका मालिक अर्थात डायरेक्टर बन सकता है और उस स्वामित्व को अपने हाथ में ले सकता है। यह नॉमिनी के विवेक पर निर्भर करता है उसे क्या करना है।

Q.6 कंपनी में डायरेक्टर कौन हो सकते हैं ?

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में डायरेक्टर परिवार का कोई सदस्य हो सकता है , जिसकी संख्या दो या दो से अधिक किंतु पंद्रह तक हो सकती है।

Q.7 कंपनी का रजिस्ट्रेशन कैसे करें ?

कंपनी का रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए सबसे पूर्व एम.सी.ए ( Ministry of corporate Affair ) गवर्नमेंट से डी.एस.सी. सर्टिफिकेट ( DSC ) Digital signature cirtificate लेना पड़ेगा। उसके उपरांत अपने कंपनी को रजिस्टर करवाने के लिए आर ओ सी ROC ( Registarar of company ) से अपने कंपनी का नाम रजिस्टर करवाना होगा। जिसके उपरांत पूरी प्रक्रिया आरंभ होगी  और 3 महीने के भीतर आपकी कंपनी-

  • पैन नंबर
  • डायरेक्टर का डिटेल ,
  • डायरेक्टर का डिजिटल सिग्नेचर और पूरे
  • व्यापार का मसौदा सहित कंपनी का
  • एड्रेस उसका
  • मालिकाना हक पूरे ब्यौरे के साथ कंपनी को
  • आप स्वयं या किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से रजिस्टर करवा सकते हैं।

 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के फायदे क्या है ?

  • कंपनी का नुकसान होने पर व्यक्ति का नुकसान नहीं होता। अर्थात सरकार व्यक्ति के संपत्ति और पूंजी पर हाथ नहीं लगाती। जो भी भरपाई होगी वह कंपनी के माध्यम से होगी।
  • फंड जमा करने में सहूलियत होती है।
  • लोन मिलने में सुविधा होती है।  लोन कंपनी को आसानी से मिल जाता है।
  • अधिक संख्या में लोग काम कर सकते हैं।
  • कंपनी का विस्तार अथवा आय बढ़ने पर किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आती है।
  • कंपनी के मेंटेनेंस और सामग्री खरीदने में जो खर्च आता है वह सब कंपनी के आय से घटा दिया जाता है। अर्थात कंप्यूटर , पेपर , पेन , पेंसिल , स्टेशनरी आदि जितने भी सामान ऑफिस में जरूरत के लिए होते हैं यह सभी आय से घटाकर जोड़ा जाता है।

 

यह कंपनी किस क्षेत्र के लिए फायदेमंद है ?

यह कंपनी सभी क्षेत्रों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है , क्योंकि इसके बहुत सारे सरकारी लाभ प्राप्त होते हैं। किंतु फिर भी यह उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो अपना व्यवसाय बड़े स्तर पर ले जाना चाहते हैं। अन्य बड़ी संख्या में लोगों को अपने व्यापार में जोड़ना चाहते हैं तथा पूंजी जुटाना चाहते हैं। यह उन सभी लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

 

 

4. Register Limited Liability Partnership Company (LLP) एल.एल.पी. कंपनी

 

यह कंपनी प्राइवेट लिमिटेड private ltd.company  की भांति ही कार्य करती है। किंतु इसमें कुछ थोड़े से बदलाव किए गए हैं जहां इसमें डायरेक्टर एक परिवार का सदस्य हुआ करता था। इसमें परिवार का सदस्य नहीं अपितु इसके डायरेक्टर कोई भी व्यक्ति हो सकता है। अर्थात इसके शेयर को कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है और यह प्राइवेट लिमिटेड की भांति ही कार्य कर सकता है। इस कंपनी को एक लाख रूपये की लगत से व्यापार का आरंभ होता है। दो  या उससे अधिक संख्या में डायरेक्टर हो सकते हैं। इसका सालाना ऑडिट किया जाना चाहिए। इसमें नॉमिनी भी निर्धारित होता है , और इसका रजिस्ट्रेशन फीस लगभग 15000 ही।  है।

 

5. ओ.पी.सी. एक व्यक्ति की कंपनी – How to register a company for One person

OPC कंपनी विदेशों में बहुत प्रचलित है , किंतु भारत में यह नवीन है। इस कंपनी के माध्यम से व्यक्ति स्वयं कंपनी का मालिक होता है। जिस प्रकार प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में अनेक डायरेक्टर होते हैं ठीक उसी प्रकार इस कंपनी का डायरेक्टर केवल वही व्यक्ति होगा जो इसका संचालन करता है।

FAQ’S On How to register a company in India in One Person Company

Below you will find questions and answers which will help you to understand How to register a company in India in One Person Company.

Q.1 कंपनी को रजिस्टर कौन करवा सकता है ?

कोई एक व्यक्ति जो इस कंपनी को चलाना चाहता है , वह ₹100000 रूपये  से कम लागत से इस कंपनी का आरंभ कर सकता है।

Q.2 कंपनी रजिस्ट्रेशन करवाने में कितना लागत आता है ?

कंपनी के रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रक्रिया में लगभग ₹10000 का खर्च आता है। इसे व्यक्ति स्वयं घर से अथवा किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से रजिस्टर करवा सकता है।

Q.3 कंपनी के डायरेक्टर होंगे ?

कंपनी में केवल एक ही व्यक्ति डायरेक्टर होगा जो इसका पूरा मालिकाना हक रखता है। यह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की भांति ही जोखिम कवर करता है। अर्थात कंपनी के डूब जाने पर व्यक्ति के संपत्ति और पूंजी में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। सरकार अगर चाहे तो इस कंपनी को बेच कर घाटे को कवर कर सकती है।

Q.4 वार्षिक ऑडिट जरूरत है ?

जी हां ! यह सरकार के नियंत्रण में कंपनी कार्य करती है। अर्थात इसका ऑडिट वार्षिक होना चाहिए। इसमें कम से कम ₹100000
का ऑडिट दिखाया जाना चाहिए।

Q.5 नॉमिनी भी होता है ?

इस कंपनी में भी व्यक्ति एक नॉमिनी बना सकता है। वह नॉमिनी किसी और कंपनी में नॉमिनी नहीं होना चाहिए। यह नॉमिनी कंपनी को चलाने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद उस कंपनी को संभालने अथवा उसको बंद करने किसी भी प्रकार का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हो जाता है।

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