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Moral hindi stories for class 4 students in short

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आज हम कहानी लिखने जा रहे है कक्षा चौथी के बच्चों के लिए | ये कहानियां कक्षा चार व अन्य छात्रों के अनुसार उचित शब्दों में लिखी गयी है | We are writing hindi stories for class 4 students with moral values.

 

Short moral hindi stories for class 4 students

This hindi stories with moral values will surely help these students to perform more better in life.

सबसे बड़ा बल बुद्धिबल

( Hindi stories with moral values for class 4 )

एक जंगल में  भासूरक  नामक शेर रहता था। वह प्रतिदिन भोजन के लिए पशुओं को मारा करता था। एक दिन जंगल में सभी जानवरों ने मिलकर शेर से निवेदन किया कि , उसे रोज एक पशु भोजन के लिए मिल जाया करेगा , इसलिए वह अनेक पशुओं का शिकार ना करा करे।  शेर यह बात मान गया। उस दिन के बाद शेर को घर बैठे एक पशु मिलने लगा। शेर ने यह धमकी दे दी थी कि , जिस दिन उसे कोई पशु नहीं मिलेगा उस दिन वह फिर अपने शिकार पर निकल जाएगा और मनमाने पशुओं की हत्या कर देगा। इस डर से भी सब पशु बारी-बारी एक – एक पशु को शेर के पास भेजते रहते थे।

इसी क्रम में एक दिन खरगोश की बारी आ गई। खरगोश शेर की मांद की ओर चल पड़ा। मौत की घड़ियों को कुछ देर और टालने के लिए वह जंगल में इधर – उधर भटकता रहा। एक स्थान पर उसे एक कुआं दिखाई दिया। कुएं में झांक कर देखा तो उसे अपनी परछाई दिखाई दी। उसे देखकर उसके मन में एक उपाय सूझा। यह उपाय सोचता – सोचता बहादुर अब शेर के पास पहुंचा। शेर उस समय तक भूखा प्यासा होट चाटता बैठा था। खरगोश को देखकर शेर ने क्रोध से लाल – लाल आंखें करते हुए गरजकर कहा ! नीच खरगोश एक तो तू इतना छोटा सा है और फिर इतनी देर लगा कर आया ?

खरगोश ने विनय से सिर झुकाकर उत्तर दिया स्वामी ! आप व्यर्थ क्रोध करते हैं कुछ भी फैसला करने से पहले देरी का कारण तो सुन लीजिए , फिर क्या बात है ? जल्दी बता खरगोश स्वामी बात यह है कि सभी पशुओं ने आज यह सोच कर , कि मैं बहुत छोटा हूं , मेरे साथ चार अन्य खरगोश को आपके भोजन के लिए भेजा था। हम पांचों आपके पास आ रहे थे कि , मार्ग में एक दूसरा शेर अपनी गुफा से निकल कर आया और बोला अरे ! किधर जा रहे हो तुम सब। मैंने उससे कहा हम सब राजा भासूरक शेर का भोजन है। तब वह बोला भासूरक कौन होता है ? यह जंगल तो मेरा है। मैं ही तुम्हारा राजा हूं , तुम मे से चार खरगोश यहीं रह जाए। एक खरगोश भसुरक  के पास जाकर उसे बुला लाए। मैं उससे स्वयं निपट लूंगा।

इसलिए मुझे देर हो गई यह सुनकर भसुरक  क्रोध में बोला ऐसा है तो जल्दी से मुझे उस दूसरे शेर के पास ले चलो , अब तो मैं उसका रक्त पीकर ही अपनी भूख मिटा लूंगा। मेरे जंगल में कोई दूसरा राजा नहीं हो सकता। अब तो खरगोश मन ही मन खुश होकर शेर को कुएं के पास ले गया और बोला स्वामी ! आपको दूर से ही देख कर वह अपने दुर्ग में घुस गया है।भासूरक छोडूंगा नहीं मैं उसे , दुर्ग में ही घुस कर मारूंगा।

खरगोश शेर को कुएं की मेढ़ पर ले गया भासूरक ने झुककर कुएं में अपनी परछाई देखी तो समझा कि , यह शेर दूसरा है। तब वह जोर से गरजा  उसके गरजने  से कुएं में दुगनी गूंजे पैदा  हुई। उस गूंज को दुश्मन शेर की ललकार समझकर भासूरक उसी क्षण कुएं में कूद पड़ा , और वहीं पानी में डूबकर प्राण दे दिए।

खरगोश ने अपनी बुद्धि से शेर को हरा दिया।  वहां से लौटकर वह पशुओं की सभा में गया। उसकी चतुराई सुन कर और शेर की मौत का समाचार सुनकर सब जानवर खुशी से नाच उठे।

शिक्षा   – बली वही है जिसके पास बुद्धि का बल है।

We are also writing moral values after every hindi stories for class 4 students.

Moral of this story – The one who uses their brains will always be more powerful in any circumstances. So always try to solve any problem in any situation through your wit.

Hindi stories for class 4
Hindi stories for class 4

 

सत्य के प्रति दृढ़ता कहानी

( Short Moral value hindi stories for class 4 )

परीक्षाफल सुनाने प्रचार्य खड़े हुए। सभी विद्यार्थीयों के नाम पढ़े जाने के बाद एक शिक्षार्थी खड़ा हुआ और बोला ‘ मेरा नाम नहीं बोला गया’। अनुशासनप्रिय प्रचार्य ने कहा – ‘तुम अनुत्तरिर्ण होंगे।’ उस वर्ष वह बालक बहुत लम्बे समय तक मलेरिया ज्वर से पीड़ित रहा था। किन्तु अपनी सफलता पर उसे इतना विश्वास था की वह बोल पड़ा – ‘नहीं ऐसा नहीं हो सकता। ‘ ऐसा  ही है प्रचार्य ने दृढ़तापूर्वक कहा।’

‘नहीं ऐसा नहीं हो सकता। ‘

‘मै कहता हु बैठ जाओ और कुछ भी बोले तो जुर्माना होगा। ‘

‘मै उत्तीर्ण हु इसमें संदेह नहीं। ‘ बालक बोला।

‘ पांच रूपये जुर्माना। ‘

‘कुछ भी हो में उत्तीर्ण हु। ‘

‘ दस रूपये। ‘

बालक बोलत रहा और प्रचार्य ५-५ रूपये बढ़ते गए।  नीलामी की बोली जैसा दंड बढ़ता हुआ 50 रूपया के लगभग हो गया।  गुरु शिष्य के अनुसासन और आत्मविश्वास दोनों में होड़ लगी थी।

तभी लिपिक दौड़ता हुआ प्रचार्य के पास आया और बालक को संकेत संकेत से समझा दिया।  बालक बैठ गया। बाद में पता चला कि बालक ने सर्वोच्च अंक पाए थे।  यह बालक था राजेंद्र जो आगे चलकर भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।

Moral of this story – Be honest and humble in whatever situation comes in your life. Be strong and be courageous while you choose this path, one day you will get glory for sure.

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समाज सेवा

( Hindi stories for class 4 students )

ठाकुरदास अपनी पत्नी और इकलौते बच्चे को छोड़ कर इस संसार से चल बसा। पत्नी के कंधे पर, सारे परिवार का दायित्त्व आ गया।  इसी प्रकार दिन कटते रहे ,और वर्ष बीतते गए। एक दिन बेटा रात के समय बैठा , माँ के पैर दबा रहा था , और बातें भी कर रहा था -“माँ बड़ा होकर , में पढ़ -लिखकर , विद्वान बनूँगा ,और तुम्हार बहुत सेवा करूँगा। ”

” कैसी सेवा करेगा तू मेरी ?” माँ ने पूछा।

” बड़े कष्ट सहन कर तुम मुझे पढ़ा रही हो  माँ , में कमाने लगूंगा न जब , तब तुम्हे अच्छा – अच्छा खाना खिलाऊंगा , और हाँ  तुम्हारे लिए गहने भी लाऊंगा। ”

” हाँ बेटा ,तू अवश्य सेवा करेगा मेरी। ‘ माँ बोली ” पर गहने मेरी पसंद के ही बनवाना। ”

” कौन से गहने माँ “?

” बेटा ,सुन मुझे तीन गहनों की चाह है।  में चाहती हु – गांव  में अच्छा विद्यालय हो ,चिकित्सालय हो, और  निर्धन – असहाय बालकों को खाने -पिने तथा पहनने की सुविधा हो। ”

बालक ने जब यह सुना तो वह भाव – विभोर हो उठा।  धन्य है यह माँ जिसके इतने अचे विचार है। उस दिन से अपनी माँ के लिए , इन तीन गहनों को बनवाने की धुन में ,उसने अथक  परिश्रम किया। पढाई समाप्त कर वह उच्च पद पर आसीन हुआ। माँ को दिए वचन को उसने निभाया।  वह बराबर विद्यालय ,औषधालय , तथा सहायता केंद्र खोलता चला गया।  अपने पुत्र द्वारा दिए गए तीन आभूषणों से , माँ गौरवान्वित हो गयी। यह महामानव और कोई नहीं , ईश्वर चंद विद्यासागर थे।

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