Motivational Ramana Maharshi quotes in Hindi

इस लेख में महर्षि रमण जी का अनमोल वचन, सुविचार, कोट्स ( Ramana Maharshi quotes in Hindi ) के रूप में कर रहे हैं। आज उनके चाहने वाले करोड़ों लोग हैं जो उनके द्वारा बताए गए अद्वैतवाद का पालन करते हुए वह स्वयं को जान पाते हैं। ईश्वर उन्हें किस रूप में मिल सकता है जीवन की वास्तविकता प्रासंगिकता आदि के रहस्यों को महर्षि रमण ने बड़ी ही बारीकी से समझाया था।

इस लेख में आप उनके विचारों से अवगत हो सकेंगे और अपने जीवन में उनके विचारों का लाभ ले सकेंगे।

महर्षि रमण के अनमोल विचार – Best Ramana Maharshi quotes in Hindi

1

व्यक्ति के बाहरी प्रसन्नता का हेतु

उसके धन-संपत्ति से होता है

अर्थात धन संपत्ति समाप्त होते ही

उसकी प्रसन्नता समाप्त हो जाती है।

2

व्यक्ति जब सुसुप्त अवस्था में होता है

तब उसे अपने धन-संपत्ति

यहां तक कि शरीर का भी ज्ञान नहीं होता

तब वह अथाह सुख को प्राप्त कर रहा होता है

अर्थात वास्तविक सुख

धन संपदा में नहीं बल्कि ब्रह्म ज्ञान में है।

3

ब्रह्मा से इकत्व का भान

व्यक्ति को ब्रह्मांड से परिचय करा देती है

जहां उसकी आत्मा के अतिरिक्त कोई नहीं होता। ।

4

आनंद मनुष्य के अंदर की वस्तु है

शुद्ध आनंद बहरी किसी

भौतिक वस्तु पर आश्रित नहीं है

परम आनंद के लिए, अपनी आत्मा से

तारतम्यता स्थापित करनी चाहिए।

5

जागृत अवस्था में व्यक्ति का शरीर स्थूल

तथा भौतिक परिवेश में होता है

वहीं सुसुप्त अवस्था में उसका सूक्ष्म शरीर

काल्पनिक तथा उसके

विविध रूपों का अनुभव करता है।

6

साधु, संत, बालक की भांति होते हैं

जिस प्रकार बालक पर किसी

घटना का प्रभाव नहीं पड़ता

उसी प्रकार साधु संत पर

मानसिक प्रभाव नहीं पड़ता

ज्ञानी व्यक्तियों के साथ भी यही स्थिति होती है।

7

मन को अपने वश में करना तथा

स्वयं से साक्षात्कार करने का

एकमात्र योग प्राणायाम है

जिसके माध्यम से हम

अपने आत्मा से साक्षात्कार कर सकते हैं।

8

तुम अपनी स्वयं की आत्मा को भुलाकर ही

बाहर की पदार्थों की अनुभूति करते हो

यदि तुम दृढ़तापूर्वक आत्मभाव में स्थिर रहोगे

तो तुम्हें बाह्य जगत भाषित नहीं होगा।

इस स्थिति में मन की व्याकुलता को त्याग कर

तुम एक परम आनंद की अनुभूति करोगे।

9

केवल मंत्र जाप करने से लाभ नहीं होता

जब तक कि तुम्हें उन मंत्रों की दीक्षा प्राप्त ना हो

अनायास मंत्र व्यर्थ ही होते हैं।

Inspirational Ramana Maharshi quotes in Hindi

10

अगर तुम्हारी दृष्टि ज्ञानमयी हो जाए

तो तुम्हें समस्त जगत ब्रह्ममयी दिखाई देगा।

ब्रह्म ज्ञान के बिना पृथ्वी की

ब्रह्ममयी स्थिति ज्ञान नहीं हो सकता

11

ज्ञानी तथा सत्पुरुष व्यक्ति का

सानिध्य पाने से मन शांत होता है

जहां व्यक्ति अपने आप से

साक्षात्कार कर सकता है

वह अपने मन को अपने

वशीभूत कर सकता है।

12

नमक की पुड़िया अगर किसी पानी में

डुबकी लगा है तो बरसाती कोट भी

उसकी सुरक्षा नहीं कर सकती

इसी प्रकार मृत्यु के उपरांत

शरीर की आत्मा, परमात्मा में विलय हो जाती है।

13

व्यक्ति जिस स्थिति में होता है

उसकी इंद्रियांनुभूति

वही स्थिति ग्रहण कर लेती है।

14

यह विचार कभी मत करो

कि मरने के बाद तुम्हारा क्या होगा

बल्कि यह समझने का प्रयत्न करो

तुम वर्तमान स्थिति में क्या हो।

15

तुम्हें स्वयं को जानने के लिए

मैं का त्याग करना होगा

यह तुम्हारे अहंकार से जुड़ा हुआ है

जो तुम्हें ईश्वर और तुम्हारे

बीच की दूरी को बढ़ाता है।

16

कर्मों में ही व्यक्ति के विनाश का

बीज छिपा होता है

अतः व्यक्ति को कर्म करते समय

सावधानी बरतनी चाहिए।

17

आत्मभाव से रहने वाले व्यक्ति की

इच्छाएं संशय दूर हो जाती है।

आत्मा सदैव रहती है

इसका उसे ज्ञान हो जाता है

तब संशय का कोई प्रश्न नहीं रह जाता।

18

मनुष्य का अहंकार ही

उसके कठिनाइयों तथा

बाधाओं का कारण है।

Deep meaning Ramana Maharshi quotes in Hindi

19

एक सीमित समय तक

जो सही है उसे अपना कर

बाकी सभी का त्याग कर दें।

20

व्यक्ति का स्वयं से साक्षात्कार में

गुरु कृपा अधिक उपयोगी है ,

ज्ञान धर्म उपदेश

गौंण रूप से सहायक है।

21

आत्मसाक्षात्कार में सबसे बड़ी बाधा

वासना है

जिसे दूर हटाकर

व्यक्ति आत्मसाक्षात्कार कर सकता है।

22

आत्मसाक्षात्कार में शास्त्र तथा सत्पुरुष

द्वारा दिए गए शिक्षा कारगर हैं

जिसके माध्यम से आप स्वयं को जान सकते हैं।

23

सांसारिक दुख का कारण

बाहरी परिस्थिति नहीं

बल्कि भीतर की अस्थिरता है।

24

दुनिया को प्रभावित करने की शक्ति

आपके भीतर विराजमान हैं

जिन्हें आप अपने भीतर की आत्मा के

माध्यम से जागृत कर सकते हैं।

25

आप जिसे मैं कहते हैं

वह विचारधाराओं मान्यताओं

आदि की एक गठरी है

जिसका त्याग करने पर

आप स्वयं को जान लेते हैं।

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समापन

महर्षि रमण जिन्होंने अद्वैतवाद का समर्थन किया उन्होंने स्वयं के भीतर ईश्वर को खोजने के विचार को आगे बढ़ाया। उन्होंने ब्रह्मांड की सभी शक्तियां व्यक्ति के भीतर उपस्थित होने की बात का भी समर्थन किया।

व्यक्ति जहां बाहरी दुनिया में व्यस्त रहता है, उसे ही अपना सर्वस्व मानता है, जबकि यह सब माया है।

महर्षि रमण ने इसी माया के जाल से बचने के लिए व्यक्ति को आत्म साक्षात्कार करने के लिए प्रेरित किया। आत्मज्ञान के माध्यम से व्यक्ति माया, मिथ्या और ईश्वर के बीच भेद कर पाता है। आज देश दुनिया के करोड़ों प्रशंसक महर्षि के बताए हुए मार्ग पर चलते हैं और उनके महत्वपूर्ण विचारों को आत्मसात करते हैं। निश्चित ही उनकी भावनाएं तथा विचार मनुष्य को एक श्रेष्ठ जीवन देने का कार्य करती हैं।

2 thoughts on “Motivational Ramana Maharshi quotes in Hindi”

    • तारीफ के लिए धन्यवाद, इसी प्रकार आप हमारे वेबसाइट पर आते रहिएगा

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