7 Hindi Kahani written with moral मजेदार हिंदी कहानियां

Today you will read Hindi Kahani with morals values for kids and students. These 7 Hindi stories will improve your personality and mental skills which will help any student in his life.

हिंदी कहानियां मोरल के साथ जो आपको नैतिक शिक्षा तो देगी ही परन्तु साथ ही साथ जीवन के महत्त्वपूर्ण व मूलभूत बातें भी सिखाएंगी।

7 Majedar hindi kahani written with morals

यह कहानिया हमने सभी नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखकर लिखे हैं | These Hindi kahani have covered different moral values.

 

1. ईमानदार वीर बालक

( Hindi kahani based on honesty )

रमेश बहुत ही प्यारा बालक था। वह कक्षा दूसरी में पढ़ता। रमेश विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार मनाया जाने वाला था। रमेश  बहुत उत्साहित था इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए। रमेश को उसकी कक्षा अध्यापिका ने स्वतंत्रता दिवस की परेड में भाग लेने के लिए बोला था। उसके हर्ष का कोई ठिकाना नहीं था , वह खुशी-खुशी इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए तैयारियां करने लगा।

स्वतंत्रता दिवस की होने वाली परेड में सभी साथियों के साथ पूर्व अभ्यास निरंतर करता रहा और अत्यंत उत्साह से भरा हुआ था। परेड वाले दिन जब वह स्कूल के लिए तैयार होने लगा तो रमेश ने अपने दादा जी को खोजा। दादाजी रमेश के साथ निरंतर विद्यालय जाया करते थे उसे पहुँचाने।  किंतु दादाजी नहीं मिले  मां से पूछा तो माँ  ने बताया दादाजी गांव गए हैं। वहां दादी की तबीयत खराब है , और हॉस्पिटल में है। पिताजी भी गए हुए हैं , अब मैं तुम्हें स्कूल पहुंचा कर गांव निकलूंगी।

रमेश ने यह बात सुनी तो बहुत दुखी हुआ और वह स्वयं भी दादी के पास जाने के लिए जिद करने लगा।

इस पर उसकी मां रमेश  को अपने साथ लेकर गांव चली गई।

जब वह कुछ दिन बाद विद्यालय पहुंचा वहां , प्रधानाचार्य ने उन सभी बालकों को बुलाया जिन्होंने परेड में भाग नहीं लिया था।  इस पर रमेश का नाम नहीं पुकारा गया , बाकी सभी विद्यार्थियों को उनके अभिभावक को लाने के लिए कहा गया। रमेश ने सोचा कि मेरा नाम प्रधानाचार्य ने नहीं बोला लगता है वह भूल गए होंगे। रमेश  प्रधानाचार्य के ऑफिस में गया और उसने प्रधानाचार्य से कहा कि ‘ मैं भी उस दिन परेड में नहीं आया था। मगर आपने मेरा नाम नहीं लिया क्या मुझे भी अपने माता-पिता को बुलाकर लाना है ? ‘

रमेश के इस सरल स्वभाव को देखकर प्रधानाचार्य खुशी हुए और उन्होंने रमेश से बताया कि तुम्हारे माता-पिता ने फोन करके तुम्हारे स्कूल ना आने का कारण मुझे पहले ही बता दिया था। तुम्हारी इमानदारी से मुझे खुशी हुई।

तुम अच्छे से पढ़ाई करो और अगली बार परेड में निश्चित रूप से भाग लेना।

नैतिक शिक्षा –

सदैव सत्य बोलना चाहिए और सत्य का साथ देना चाहिए। व्यक्ति का स्वभाव ही उस व्यक्ति का परिचय है।

Moral of this hindi kahani –

Always speak truth whatever the situation is. Because it gives you the limitless power. Today people are afraid of speaking truth and that is the reason for their all problems.

Hindi kahaniya imandar veer balak ki yha samapti hui.

Motivational story in hindi

2. संगति का असर  

( Hindi kahani with shiksha )

Moral stories in hindi for kids and students.

राम – श्याम दो भाई थे , दोनों एक ही विद्यालय में पढ़ा करते थे और यहां तक कि एक ही कक्षा में। किंतु राम पढ़ने में होनहार था | वही उसका भाई श्याम पढ़ने से बचता था , और ना पढ़ने के ढेरों बहाने ढूंढता था।  राम के दोस्त पढ़ने वाले थे और श्याम के दोस्त ना पढ़ने वाले और काम चोरी करने वाले  थे। राम अपने भाई श्याम को उन दोस्तों से बचने के लिए कहा करता , मगर श्याम उसे डांट लगा देता और कहता अपने काम से काम रखा करो। श्याम के दोस्त घर से स्कूल जाने के लिए निकलते और रास्ते में कहीं और चले जाते। कभी पार्क में बैठते , कभी जाकर कहीं खाना-पीना करते , और कभी फिल्म देखा करते थे। श्याम भी उनकी संगति में आ गया और वह भी धीरे-धीरे स्कूल जाने से बचता रहता।

श्याम भी उन दोस्तों के साथ बाहर में खाना – पीना और घूमना करता।

राम उसके इस प्रकार की धोखाधड़ी से बहुत चिंतित था। श्याम से  परीक्षा में फेल होने की बात भी कही मगर श्याम ने  नहीं माना। एक दिन की बात है श्याम स्कूल जा रहा था ,  उसके दोस्त मिल गए और उन्होंने कहा आज स्कूल नहीं जाना है। हम सभी अपने दोस्त हरि का जन्म दिवस मनाएंगे और बाहर खाना – पीना करेंगे और खूब मजे करेंगे। पहले तो श्याम ने मना किया किंतु दोस्तों के बार-बार बोलने पर वह उनके साथ चला गया।  श्याम और उसके मित्रों ने खूब पार्टी करी और उस दिन स्कूल नहीं गये।  इस प्रकार का काम वह और उसके दोस्त निरंतर करते रहते।

परीक्षा हुई जिसमें श्याम और उसके दोस्त सफल नहीं हो पाए वह फेल हो गए।  राम ने इस बार भी और बार की तरह प्रथम स्थान प्राप्त किया। श्याम अपने घर मार्कशीट लेकर गया जिस पर उसके माता-पिता ने देखा और बहुत उदास हुए। उन्हें उदासी हुई कि एक मेरा बेटा इतना अच्छा पढ़ने में है और दूसरा इतना नालायक। श्याम किसी भी विषय में  पास नहीं हो पाया।श्याम के माता -पिता को  बहुत दुखी हुई उन्होंने किसी से कुछ नहीं कहा मगर अंदर ही अंदर वह बहुत दुखी होते रहे।

उन्होंने सोचा कि अब मैं दूसरे लोगों को क्या बताऊंगा कि मेरा बेटा एक भी विषय में पास नहीं हो पाया। इस प्रकार माँ – पिताजी को  श्याम ने  बहुत चिंतित वह दुखी देखा जिस पर उसे भी दुख हुआ। श्याम ने अपने मां-बाप को भरोसा दिलाया कि मैं अगली परीक्षा में सफल होकर दिखायेगा। श्याम ने अपने उन सब दोस्तों को छोड़ दिया जिन्होंने उसकी सफलता में उसका मार्ग रोका था। उन सभी छल और कपट करने वाले दोस्तों को छोड़कर अपनी पढ़ाई में ध्यान लगाया। नतीजा यह हुआ कि साल भर की मेहनत से वह परीक्षा में सफल ही नहीं अपितु विद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। इस पर उसके माता – पिता को बहुत खुशी हुई है और अपने पुत्र श्याम को गले से लगाया उन्हें शाबाशी दी।

श्याम को पता चल गया था कि जैसी संगति मिलेगी वैसा ही परिणा मिलेगा।

इस कहानी में नैतिक शिक्षा –

जैसी संगति में रहते उससे वैसा ही गुण  आता है।

अर्थात अच्छी संगति का संगत करना चाहिए।

Moral of this hindi kahani –

You should choose your company wisely. Because whatever nature your friends have, it will affect your personality in the same manner. Try to live with intelligent people who have lots of good values in them.

 

3. पश्चात्ताप का भाव

( Netik shiksha wali hindi kahani )

 

मदन उड़ीसा के एक छोटे से गांव में पला-बढ़ा। पढ़ लिखकर वह एक अच्छी सी नौकरी करने लगा। नौकरी में लगातार हुए प्रमोशन से उसे खूब तरक्की और शोहरत की प्राप्ति हुई। वह अब शहर में रहने लगा , वहां मदन को ग्यारहवीं  मंजिल पर एक आलीशान फ्लैट कंपनी के द्वारा मिला। मदन अपनी पत्नी को एक बच्चे के साथ खूब ऐसो आराम से रहने लगा। कुछ समय बाद मदन के पिताजी उनसे मिलने शहर आए। उस के पिताजी बेहद ही वृद्ध और सरल , निश्चल स्वभाव के व्यक्ति थे। उन पर समय का प्रभाव स्पष्ट देखा जा सकता था।  हाथ पैर काबू से बाहर हो गए थे , अर्थात ना चाहते हुए भी हाथ पैर हिलना , धुंधला दिखना आदि।

मदन के पिताजी और  वह उसकी पत्नी के कार्य स्थल पर जाने के बाद अपने पोते के साथ फ्लैट में दिनभर रहते और दोनों खूब बातें करते। अपने पोते को बढ़िया-बढ़िया कहानी रामायण , महाभारत और बुद्धिवर्धक कहानियां सुनाते। पोता खूब मन लगाकर उन कहानियों को सुनता। उस नन्हे से पोते का नाम श्याम था। घर में महंगे महंगे चीनी – मिट्टी और अन्य क्रोकरी के समान थे। एक  दिन की बात है दादा जी को क्रोकरी के बर्तन में खाने को मिला। उनका हाथ काबू में ना रहने के कारण हाथ  हिलकर क्रोकरी गिरकर टूट गई। इस पर मदन की पत्नी ने बाजार से एक लकड़ी का बर्तन सेट ले आई , जिसमें थाली-कटोरी आदि शामिल था।

अब दादाजी को नित्य – प्रतिदिन दादाजी को उन बर्तनों में खाना मिलने लगा। दादाजी को इन बातों का बुरा तो लगा किंतु उन्होंने किसी से कहा नहीं। एक दिन श्याम खेल-खेल में लकड़ी से कुछ बर्तन बना रहा था , इस पर मदन और उनकी पत्नी यानी कि श्याम के मम्मी – पापा ने डांट लगाई और कारण पूछा कि यह क्या कर रहे हो ? श्याम ने  बालोचित उत्तर दिया। मैं लकड़ी के कटोरे और बर्तन बना रहा हूं। इस पर शाम के मम्मी – पापा ने पूछा कि इसकी क्या आवश्यकता है ? इसे क्यों बना रहे हो।

श्याम ने जवाब दिया कि जब आप बूढ़े होंगे तो आपको इस बर्तन की जरुरत पड़ेगी इसलिए बना रहा हु। अब मदन और उनकी पत्नी को अपनी गलती पर पछतावा हुआ। दोनों पति – पत्नी ने पिताजी से पैर छूकर क्षमा याचना की। बड़े लोग स्वभाव के सरल होते हैं अतः उनसे माफी मिलने में देरी नहीं होती।

नैतिक शिक्षा –

जैसा कर्म करते हैं फल भी वैसा ही मिलता है अतः अपने कर्म अच्छे करने चाहिए।

Moral of this hindi kahani  –

The type of work you will do, the same type you will get as a payback from destiny. So always do good works with good intentions.And always try to help others who are in problems and in need of you. This hindi kahani with morals for everyone to improve your personality.

 

Kahaniya in hindi with moral values
Kahaniya in hindi with moral values

 

4. बुद्धि का प्रयोग बुद्धिबल 

 

मनोरम नामक वन में एक बहुत ही सुंदर बड़ा सा तालाब था। तालाब चारों ओर से सुंदर – सुंदर वृक्षों वह फूल – पौधों से घिरा हुआ था। तालाब के भीतर मखाने वह सिंघाड़े के पौधे लगे हुए थे। तलाब में सदैव पानी की मात्रा बनी रहती थी , क्योंकि उसके निकट से एक स्वच्छ कल – कल धारा वाली नदी प्रवाहित होती थी। एक समय की बात है दो मछुआरे मनोरम वन में विश्राम कर रहे थे , तभी उन्होंने देखा उस तालाब में खूब सारी मछलियां उपलब्ध है।

दोनों मछुआरे आश्चर्यचकित होकर  विचार – विमर्श करते हुए कहते हैं !  हमें आज तक इस तालाब का  पता क्यों नहीं चला।  काफी समय हो गया था संध्या हो चुकी थी इसलिए दोनों आपस में बात करते हुए वहां से लौट गए कि कल आकर यहां पर जाल बिछाया जाएगा। यह बाततालाब में बैठी तीन दोस्त मछलियो  सुन ली। उन्होंने आपस में मंत्रणा की कि यह बात पक्की हो गई कि अगले दिन मछुआरा आकर यहां जाल बिछाएगा और हम सभी को पकड़ लेगा। क्यों ना हम लोग तालाब से निकलकर नदी में चलें ? उन मछलियों में से एक मछली दोस्त आलसी थी। उसने बात को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जब मछुआरे आएंगे तब हम कहीं छुप जाएंगे।

अगले दिन जैसे ही मछुआरा आया एक मछली दोस्त छलांग लगाकर नदी में भाग गई। आलसी मछली और एक और मित्र भी उन सभी मछलियों के साथ जाल में पकड़ी गई। किंतु जैसे ही मछुआरा जाल समेटने के लिए आगे बढ़ा तो समझदार मछली ने मरे हुए होने का झूठा स्वांग , नाटक किया। मछुआरे ने मरा हुआ समझकर उस मछली को निकालकर फेंक दिया। वह मछली अपनी समझदारी का प्रयोग करते हुए उछलकर नदी में भाग गई , किंतु जो आलसी मछली थी वह जाल में पड़ी रही।  मछुआरों ने उसे ले जाकर बाजार में बेच दिया इस प्रकार उसके प्राण निकल गए। अतः बुद्धि का प्रयोग अवश्य करना चाहिए बुद्धि का प्रयोग करके ही हम विकट परिस्थितियों में बच सकते हैं।

नैतिक शिक्षा –

बुद्धि का प्रयोग समय पर करना चाहिए इससे भविष्य की रचना होती है अन्यथा मृत्यु।

Moral of this hindi kahani  –

Always use your brains in tricky situations in life. Otherwise, you will have to pay a priceless thing called life. Without using your intelligence you cannot survive in this cruel world.

 

5. बकरी दो गांव खा गई

( Best hindi kahani for students )

 

सूरजपुर राज्य के राजा वीर सिंघ एक दिन आखेट(शिकार)  पर निकले।  शिकार करते – करते वह काफी थक गए थे , उन्होंने विश्राम के लिए एक जगह पड़ाव डाला। जंगल घना था हिंसक पशु – पक्षी चारों ओर गर्जना कर रहे थे , किंतु राजा सतर्क पेड़ की छांव में बैठ गए।थकान के कारण राजा को नींद आ गई , तभी एक शेर ने राजा पर आक्रमण किया। अकस्मात वहां एक भील जाति का शिकारी आ गया और उसने शेर पर हमला करके उसे मार भगाया। राजा की नींद खुल जाती है अपने ऊपर हुए हमले को जानकर वह बहुत भयभीत हो जाते हैं , किंतु दूसरे क्षण वह भील व्यक्ति पर प्रसन्न होकर उन्हें दो गांव देने का वायदा करते हैं।

इसके लिए वह पेड़ के वृक्ष से दो पत्ते तोड़कर गांव देने का वायदा लिख देते हैं। और आश्वासन देते हैं कि आपको राज दरबार में यह पत्ता दिखाने पर दो गांव मिल जाएगा। वह व्यक्ति अपने घर गया और उसने उस पत्ते को एक जगह टांग दिया। उस व्यक्ति के यहां तीन बकरियां थी जिन्होंने उस पत्ते को चर लिया अर्थात खा गए। जब उस व्यक्ति को मालूम हुआ कि वह पत्ता बकरी खा गई , उसकी समझ में कुछ नहीं आया।

वह अब सोच में पद गया कि क्या करें ?

इस पर उसने काफी सोच विचार कर एक उक्ति लगाई , और राजा के दरबार में आवाज लगाते पहुंच गया ! बकरियां मेरा दो गांव खा गई , बकरियां मेरा दो गांव खा गई। यह बात राजा तक पहुंचाई गई राजा मुस्कुराए वह बात को समझ गए , उन्होंने उस भील व्यक्ति को जो वायदा किया था उसे पूरा किया।

अब उस व्यक्ति के पास दो गांव हैं और पचास से अधिक बकरियां भी।

नैतिक शिक्षा

व्यक्ति को कभी हताश नहीं होना चाहिए परिस्थितिया विपरीत क्यों न हो उसको अपने अनुकूल बनाना चाहिए।

Moral of this hindi kahani

We should never give up in hard situation. We should try to fight till last.

 

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वह भी अलग अलग नैतिक मूल्यों पर आधारित जो पढ़ने वाले व्यक्ति को जरूर ही कुछ न कुछ फायदा पहुचाएंगे | हमारी कामना बस यही है की हम अपने वेबसाइट द्वारा लोगो को सही मार्ग दिखाएं व उन्हें उनके जीवन में सही मंजिल तक पहुचाएं |

और यह तभी संभव है जब उनके पास नैतिक मूल्य हों |

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